कितनी शर्मनाक बात है कि प्रधानमंत्री आज अपने लीक-प्रधान को जन्मदिन की बधाई दे रहे हैं और पेपर-लीक के चलते अपनी जान गँवाने वाले विद्यार्थियों के लिए उनके मुँह से संवेदना के एक शब्द तक नहीं फूटे।
“बेशर्मों की सरकार है-इसलिए पेपर-लीक हर बार है”
हमने तो पहले ही कहा था कि CCTV का नाम ‘चढ़ावा-चोरी TV’ साबित होगा। जिन लोगों ने ‘सत्रह’ बार लूटा वो सैंकड़ों साल से इतिहास में बदनाम हैं, जिन्होंने केवल 40 दिन में ‘सत्तर’ बार लूटा वो तो इतिहास में इस महापाप के लिए ‘सात’ जन्मों के लिए काले अक्षरों में दर्ज़ हो जाएंगे। ये सोचा जाए जिन्होंने सात हफ़्ते में इतनी चोरी कर ली है, उन्होंने पिछले इतने सालों में कितना चुराया होगा, कितना आपस में बाँटा होगा, कितना चुपके से छुपाया-दबाया होगा और कितना अपने मुखिया तक पहुँचाया होगा।
अखंड निंदनीय!
घर उजड़ने की तकलीफ़ - बेचैनी - असहाय होना. किससे न्याय माँगे, कहाँ जाये?
राजस्थान के बाड़मेर में भील आदिवासी परिवारों के घर तहस नहस कर दिए गए
आदिवासियों के जंगल ज़मीन धन्ना सेठों को देकर शहर में उनके सिर के ऊपर की छत उजाड़ देंगे - यह कैसा देश बना रहे हैं मोदी जी?