2.और अब माननीया राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा ’संविधान दिवस’ पर कल देश के कर्ताधर्ता व नीति निर्धारकों के सामने इस राष्ट्रीय मुद्दे पर चिन्ता व्यक्त करना उचित एवं विचारणीय। देश विकास की ओर, ऐसे में और जेलों की क्या जरूरत? उनके इस मूलभूत प्रश्न पर समुचित विचार व कार्रवाई जरूरी।
1. देश की जेलों में गरीब, अशिक्षित एवं कमजोर वर्ग के मामूली अपराधों वाले विचाराधीन कैदियों की भरमार है जिनकी हालत अधिकतर दयनीय व अमानवीय है जो अपने लोकतांत्रिक देश के लिए दुःख व चिन्ता की बात है। इसके निदान हेतु मानवीय दृष्टिकोण व कानून के राज की सही प्रक्रिया व कार्रवाई जरूरी।
3. भारत जैसे विशाल आबादी वाले देश में यहाँ वर्षों से व्याप्त विचलित करने वाली गरीबी, बेरोजगारी, महंगाई आदि अब असली राजनीतिक एवं चुनावी चिन्ता नहीं रही है, तब भी सभी सरकारों को इनके प्रति उदासीन बने रहकर देश की प्रगति व जनता की उन्नति में रोढ़ा बने रहना अनुचित व दुःखद। (3/3)
2. लेकिन अब आटा का दाम भी एक साल में काफी महंगा होकर लगभग 37 रुपए प्रति किलो तक पहुँच जाने से लोगों में बेचैनी, हताशा व निराशा है, तो ऐसे में सरकार को अपनी निश्चिन्तता व लापरवाही आदि त्यागकर, इसके समाधान के गंभीर उपाय में जी-जान से जुट जाना ही समय की सबसे बड़ी माँग। (2/3)
1. देश में व्याप्त गरीबी व पिछड़ेपन के लाचार जीवन में महंगाई की मार तथा बेरोजगारी से त्रस्त मेहनतकश लोग हर दिन आटा, दाल-चावल व नमक-तेल आदि के महंगे दाम को लेकर सरकार को कोसते रहते हैं, किन्तु वह इसका जवाब देने व उपाय ढूंढने के बजाय ज्यादातर खामोश बनी रहती है, ऐसा क्यों? (1/3)
3. यूपी की समग्र प्रगति, विकास व लोगों की रोजी-रोटी के साथ ही उनकी सुरक्षा व आत्म-सम्मान के लिए बीएसपी की हुकूमत मे जो कुछ खास काम किया वह अपने बलबूते पर किया गया। यमुना के साथ गंगा एक्सप्रेसवे व जेवर एयरपोर्ट भी तब बन जाता अगर केन्द्र की कांग्रेस सरकार ने थोड़ा सहयोग किया होता।
2. यूपी में देशी व विदेशी पूंजीनिवेश के लिए सरकार का अनवरत प्रयास जरूरी, किन्तु यह केवल खेती भूमि के अधिग्रहण तथा राजनीतिक एवं चुनावी स्वार्थ तक ही सीमित नहीं होना चाहिए। यूपी जैसे अति-गरीबों के पिछड़े प्रदेश में डबल इंजन की सरकार में वैसी ही तेज प्रगति भी लोगों को दिखनी चाहिए।
1. यूपी में बीएसपी सरकार में लोगों को रोजगार तथा बुनियादी सुविधाओं से युक्त नए पक्के मकान व भूमि आदि भी फ्री में लाखों परिवारों को आवंटित करके यहाँ गरीबों का जीवन धन्य होते हुए सभी ने देखा, किन्तु पहले सपा व अब भाजपा सरकार में भी वैसी खास प्रगति क्यों नहीं?
सैंया भए कोतवाल अब डर काहे का।
ये हैं ईमानदार दिल्ली सरकार के ईमानदार मंत्री।
सिर्फ आरोप लगा कर इस्तीफा मांगने वाले केजरीवाल जी आपके ये मंत्री 5 महीने से जेल में हैं। मतलब, केजरीवाल जी इनका इस्तीफा लेने के बजाए आपने तो इनके लिए जेल में ही मसाज पार्लर खुलवा दिया।
3. जबकि बीएसपी की यूपी में चार बार रही सरकार में सर्वसमाज के हित-कल्याण व सुरक्षा-सम्मान के साथ-साथ हमेशा उपेक्षित रहे दलित, पिछड़ा एवं अक्लियत समाज के लोगों के जान-माल-मजहब आदि की सुरक्षा तथा न्याय की गारण्टी यहाँ पहली बार कानून द्वारा कानून का राज स्थापित करके सुनिश्चित की गई।
2. भाजपा की मुस्लिम समाज के प्रति निगेटिव सोच का परिणाम है कि इनकी सरकार में भी वे लगभग उतने ही गरीब, पिछड़े, त्रस्त एवं जान-माल-मजहब के मामलों में असुरक्षित हैं जितने वे कांग्रेसी राज में थे। मुस्लिम समाज का, दलितों की तरह पसमान्दा व उपेक्षित बने रहना अति-दुःखद व दुर्भाग्यपूर्ण।
1. अपने केवल संकीर्ण राजनीतिक स्वार्थ की खातिर ’पसमान्दा मुस्लिम समाज’ का राग भाजपा व आरएसएस का अब नया शिगुफा, जबकि मुस्लिम समाज पहले मुसलमान हैं तथा उनके प्रति इनकी सोच, नीयत, नीति एवं उनका ट्रैक रिकार्ड क्या व कैसा है यह किसी से भी छिपा नहीं।