देखिए कैसे बिहार में छात्र प्रदर्शनकारियों पर पुलिसकर्मी AK-47 से गोली चला रहा है? संपूर्ण देश में किसी भी छात्र प्रदर्शन में Police Manual का उल्लंघन कर AK-47 से गोली चलाने का यह प्रथम मामला है।
लोकतंत्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है। अगर यही परिपाटी बनी तो आगे से प्रदर्शन करने वाले वकीलों पर, डॉक्टर्स पर, शिक्षकों पर, जजों पर, हक-अधिकार के लिए लड़ रहे छात्रों-युवाओं, महिलाओं और किसानों पर भी क्या बीजेपी सरकारें AK-47 से गोलियां चलवायेंगी?
कल को कोई भी पुलिसकर्मी किसी भी नेता, मंत्री, मुख्यमंत्री पर भी कभी भी कहीं भी अकारण गोली चला सकता है? क्या ऐसे मामलों में सिर्फ गोली चलाने वाला ही दोषी होगा? उस जिले के SP और उच्च अधिकारियों को अविलंब सस्पेंड करना चाहिए? गृहमंत्री की जवाबदेही तय होनी चाहिए अन्यथा प्रदेश में अराजक स्थिति उत्पन्न हो जाएगी। अपराधी प्रवृति के व्यक्ति को जनता ने बिहार का मुख्यमंत्री नहीं चुना था। यह Elected नहीं Selected CM है।
छात्रों द्वारा आंदोलन वापस होते ही अब भाजपा ने अपना खेल फिर से चालू कर दिया
भाजपा नेता ने छात्र आंदोलन से लौट रहे युवाओं को पकड़कर पीटा
सोचिए जरा कि ये भाजपाई किस तरह का माहौल देश में बना रहे हैं
दरअसल भाजपा नेतृत्व ने अपने गुंडा एलिमेंट्स को ऐसा करने का आदेश दिया है और जल्द ही युवाओं का एक आंदोलन भाजपाई गुंडागर्दी के खिलाफ भी शुरू होगा
अखिलेश जी, आपकी शुभकामनाओं के लिए हार्दिक धन्यवाद।
संविधान, सामाजिक न्याय और PDA के हक़ की रक्षा का हमारा ‘एक लक्ष्य’ पूरी मजबूती से जारी रहेगा, और उत्तर प्रदेश के हर नागरिक तक इसका लाभ पहुँचे - यही हमारा प्रयास रहेगा।
विश्वविद्यालयों में जातिवाद समाप्त नहीं हुआ है; वह केवल अपने पुराने रूप बदलकर नए और अधिक सूक्ष्म तरीक़ों में सामने आ रहा है।
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