पहले अंग्रेजों और सभी वामपंथियों ने भारत की संस्कृति को पूरी तरीके से बर्बाद करने की कोशिश की थी।
इसी क्रम में एक झूठा इतिहास आजादी के बाद से हमें लगातार बताया गया।
सोमनाथ मंदिर के संदर्भ में, लगातार हमारे मन में ये डालने की कोशिश की गई कि जब महमूद गजनवी 1025-26 ईस्वी में सोमनाथ मंदिर को लूटने आया था, तो मंदिर के पुजारी मंदिर के बाहर बैठकर केवल भजन-कीर्तन और जाप कर रहे थे और स्वयं भगवान सोमनाथ के आने का इंतजार कर रहे थे। जो उन्हें आक्रमणकारियों से बचा सके।
लेकिन ये बातें विशुद्ध झूठ है। अगर ऐसा होता तो महमूद गजनबी के आक्रमण के समय मंदिर को बचाते हुए 50,000 से अधिक लोगों की जान नहीं गई होती। जिसमें क्षत्रिय, ब्राह्मण वैश्य एवं शूद्र सभी वर्णों के लोग शामिल थे।
इस घटना का जिक्र स्वयं महमूद गजनवी के समकालीन एवं दरबारी इतिहासकार अल-उत्बी ने "तारीख़-ए-यामिनी" में एवं इब्न अल-अथीर ने "अल-कामिल फ़ि अल-तारीख़" में किया है। इसके अलावे मुहम्मद क़ासिम हिंदू शाह अस्तराबादी, जिन्हें फ़रिश्ता कहा जाता है, ने "तारीख़-ए-फरिश्ता" में इसका वर्णन किया है। जो 16वीं-17वीं शताब्दी का इतिहासकार था।
महमूद गजनवी के दरबारी इतिहासकार अल-उत्बी ने महमूद गजनवी द्वारा सोमनाथ में किए गए भयानक नरसंहार को बताया है। जिसमें पुजारियों के अलावे आम लोगों के नरसंहार की भी बात की गई है।
इब्न अल-अथीर के द्वारा "अल-कामिल फ़ि अल-तारीख़" में मंदिर के पुजारियों का महमूद गजनवी के साथ साफ-साफ युद्ध का वर्णन है। वर्णन के अनुसार, "पुजारी/रक्षक दीवारों पर थे। जब गजनवी सेना ने हमला किया तो उसने दीवारों पर सीढ़ियाँ लगाकर ऊपर चढ़ने की कोशिश की। कुछ समय के लिए गजनवी के सैनिकों ने किलेबंदी पर कब्जा कर लिया।
इसके बाद हिंदू रक्षक मंदिर की ओर पीछे हटे और वहाँ से फिर प्रतिरोध किया।
अगले चरण में लड़ाई मंदिर के आसपास पहुँच गई और मंदिर के द्वार के पास भीषण संघर्ष हुआ। जिसमें गजनी के सैनिकों ने भयानक नरसंहार किया"
फ़रिश्ता द्वारा "तारीख़-ए-फरिश्ता" में जो वर्णन किया गया है उसके अनुसार, "महमूद गजनवी की सेनाओं के साथ मंदिर के पुजारियों भीषण संघर्ष हुआ।"
फ़रिश्ता बताते हैं कि, "मंदिर और उसकी मूर्तियों को बचाने के लिए पुजारियों ने पहले भगवान के सामने प्रार्थना की उसके बाद युद्ध में शामिल हुए।"
ये झूठ अंग्रेजों ने इसलिए फैलाया क्योंकि 1842 ईस्वी में अफगानिस्तान के युद्ध में अंग्रेजों की बुरी तरह हार हुई थी।
पूरी कहानी...... अगले भाग में
भिमाअम्बेडकर शतकम
(अम्बेडकर का महिमामंडन करते हुए लिखे गए श्लोक)
-ये पढ़ाया जा रहा है संस्कृत 1st yr (BA कोर्स) में, कर्नाटक संस्कृत यूनिवर्सिटी में
बताओ,
अब अम्बेडकर जी पर ना सिर्फ श्लोक लिखे जा रहे हैं बल्कि उनको बाकायदा पढ़ाया भी जा रहा है, वो भी संस्कृत यूनिवर्सिटी में?😂
IIT Bombay केस में साहिल वाकोडे की गर्लफ्रेंड ने जांच में बताया है कि साहिल ने फोन पर नकल करते पकड़े जाने की बात कही थी। लेकिन विश्वास रखें दलित अत्याचार का झूठ दोहराया जाता रहेगा। देखें: https://t.co/ybN8Y7DgwA
URGENT SUPPORT NEEDED.
I may be silenced forever in the next few days.
It means there won't be anyone to expose foreign toolkits for regime change.
An American citizen, Dinesh Thakur, has filed a case against me for exposing the truth about the CJP protest.
Please speak out against those who want to silence the patriot voices.
Use #ISupportVijayPatel and show your support.
I expect at least this from you guys🙏
Jai Hind.
@ajeetbharti@NijiSachiv@Shubham_fd@Shubhamshuklampएक बार ये वीडियो आपलोग अवश्य देखें।
ये 11TH, 12TH की NCERT है, नई वाली।
इसमें ब्राह्मणों के खिलाफ काफी खतरनाक खतरनाक चीजें लिखी हुई है।
कृपया आपलोग एक बार अवश्य पढ़ें।
चित्र 1- पुस्तक भारतीय इतिहास के कुछ विषय (11th,12th की NCERT)
अध्याय 2, पेज नंबर - 56
इसमें कहा गया है कि पितृवंशिता के प्रति झुकाव शासक परिवारों के लिए कोई अनूठी बात नहीं थी।
यह संभव है कि धनी वर्ग के पुरूष और ब्राह्मण भी ऐसा ही दृष्टिकोण रखते थे।
बताइए कितनी बड़ी साजिश है ये?
चित्र 2- पुस्तक भारतीय इतिहास के कुछ विषय (11th,12th की NCERT)
अध्याय 2, पेज नंबर - 58
इसमें कहा गया है कि जिन्होंने ये पुस्तक लिखी है वो किस तरह के सोच रखते थे?
@ajeetbharti
8वीं क्लास की NCERT किताब में ये लिखा है:
-ब्राह्मण आर्य थे, बाहर से आये थे
-उन्होंने मूलनिवासियों पर आक्रमण किया, उनको दबाया
-भारत मूलनिवासियों का है
-ब्राह्मणों ने धर्म की तलवार से लोगों की संपन्नता का गला काट दिया
-200 साल पहले महिलाओं को कोई अधिकार नहीं थे, हिंदू और मुसलमान, दोनों कई पत्नियां रखते थे, स्त्रियों को पतियों की चिता के साथ जला देते थे
-बहुत जातिवाद था-ब्राह्मण क्षत्रिय खुद को ऊंचा मानते थे, दलितों के साथ बड़ा अत्याचार हुआ
-अम्बेडकर ने बहुत जातिवाद सहा
-फुले नीची जाति के थे, उनकी गुलामगिरी में जाति व्यवस्था की आलोचना की, बड़ी अच्छी अच्छी बातें लिखीं
और भी बहुत कुछ👇👏👏
उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण को लेकर कार्य चल रहे थे।
इस चौड़ीकरण में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव का भी पुश्तैनी घर आ रहा था। जिसे स्वयं मोहन यादव ने हथौड़ा चलाकर गिराने की शुरुआत की।
मगर मुस्लिमों के मस्जिद गिराने की बारी आई तो ये मुसलमान पत्थरबाजी करने लगे।
इतना ही नहीं इसने बुर्काधारी महिलाओं और बच्चों को आगे कर दिया।
उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण को लेकर कार्य चल रहे थे।
इस चौड़ीकरण में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव का भी पुश्तैनी घर आ रहा था। जिसे स्वयं मोहन यादव ने हथौड़ा चलाकर गिराने की शुरुआत की।
मगर मुस्लिमों के मस्जिद गिराने की बारी आई तो ये मुसलमान पत्थरबाजी करने लगे।
इतना ही नहीं इसने बुर्काधारी महिलाओं और बच्चों को आगे कर दिया।
तुम एक नंबर के विशुद्ध चूतिया आदमी हो।
तुम्हारे अंदर एक पार्टी की चाटने के अलावा कोई दूसरा गुण नहीं है। पार्टी भक्ति में इतने लीन हो कि तुम्हारे अंदर गलत को गलत कहने की क्षमता भी नहीं है।
अजीत भारती हो या कन्हैया कुमार उनकी व्यक्तिगत सोच और कार्यप्रणाली के आधार पर पूरे समाज को गाली देना तुम्हारी मानसिकता और चरित्र बता रहा है।
और हाँ मेरी जाति को लेकर गलतफहमी में मत रहना, मैं भी उसी जाति से आता हूँ जिससे तुम आते हो।
माफ करना लेकिन अनफॉलो कर रहा हूँ आज।
BIG EXPOSE 🔥
सोशल मीडिया पर एक तस्वीर वायरल हो रही है जिसमें बताया गया है कि कांग्रेस पार्टी ने इंडियन एक्सप्रेस को बंगाल चुनाव के दौरान 81 लाख 45 हजार 780 रूपए दिए थे।
इस कदर वाकिफ है
मेरी✍️कलम~मेरे जज्बातो से
अगर मै इश्क~लिखना भी चाहूँ
तो इंकलाब👊लिख जाता है।
वीरता,पराक्रम,त्याग,बलिदान और
देशभक्ति के अद्वितीय प्रतीक~
अमर शहीद #भगत_सिंह जी को उनकी "जयंती" पर क्रांतिपुर्ण नमन❣️🙏
#BhagatSingh
A fiery💥Young man
The fire which is still alive~🔥