Birthday wishes to Union Minister Shri Dharmendra Pradhan Ji. He is making commendable efforts towards the implementation of the National Education Policy, which seeks to make India a hub for knowledge, learning and innovation. Praying for his long and healthy life.
@dpradhanbjp
आपकी शालीनता के किस्से हर सरल और शालीन इंसान को प्रेरित करेंगे।
एक प्रकार के चश्मे को उतारकर ही आपको पूरी तरह से समझा जा सकता है।
आम आदमी को सबल बनाने के रास्ते की जो नींव आपके नेतृत्व में डाली गयी, समय के साथ वो और अधिक मजबूत होती जायेगी
नमन!
80 गांव को खत्म कर एक नया शहर बसाने को अखबार एक अच्छी खबर बता रहा है। हमारी अच्छाई के मायने देखिए।गाँव को नष्ट कर शहर बसाने को अच्छी खबर बता रहे हैं। हमें शहर केन्द्रित विकास चाहिए? हमें कंक्रीट के जंगल बनाकर विकास चाहिए,अन्न और खाद्यान्न पैदा करने के लिए खेत-खलिहान नहीं चाहिए।
RIP @RNTata2000 .
I still remember one statement of you given in some interview on amassing capital in the market
"I am an industrialist not a businessman,purpose is nation building not amassing capital"
It makes you stalwart.
Om shanti!
जिसे पथ माना जा रहा है वस्तुतः वह मृगमरीचिका है पर आज यही सबकी प्राथमिकता है । परिणामतः आने वाली नस्लों को अपने पूर्वजों की मूर्खता को गरियाने का प्रचुर अवसर मिलेगा।
भौतिक प्रगति और सुख-भोग की अतिशय लालसा ने मनुष्य को जीवन के वास्तविक पथ से विपथ कर दिया है। आज हमारी शिक्षा-दीक्षा, ज्ञान और ध्यान केवल भौतिक संसाधनों पर है। मनुष्य अपने वास्तविक स्वरूप को भूलकर उल्टी दिशा में चल पड़ा है; जिसे वह समाधान मान कर चल रहा है वे सब समस्याओं के मूल हैं।
जब जनता संविधान के महत्व को समझने लगती है तो नेतागण स्वयं उसके आगे नतमस्तक हो जाते हैं।
इस चुनाव से पहले ऐसा कभी नहीं हुआ की एक ने चुनाव से पहले इसका सहारा लिया और दूसरे ने जीतने के बाद इस पर मत्था टेका।
बात साफ है इस संविधान के साथ नाटक नही होना चाहिए नहीं तो...
जय हिंद।
@Sudanshutrivedi 'कुछ हिंदुओं 'वाला वक्तव्य ही पतन की जड़ है। अपने घर में किसी हिंदू को ही गिलास में पानी नहीं पिला सकते ,बैठने को कुर्सी नहीं दे सकते और बात हिंदू की करते हैं। अभी भी सोच बदलो सुधांसु जी! सारा आकाश हमारा था कहाँ संभाल पाए हम।बाँटने से नहीं जोड़ने से माला बनती है.लच्छेदार भाषा?
@parvezahmadj Aap batao unko karna kya chahiye. Aap usi samaz se hain aap jyada behtar samajhte hai. Behtar rasta batakar logon ko samjhao taki sahi nirnay kar saken. Ya fir aap aisi baaten karte hain taki aapki prasangikta bani rahe.
सारे तर्क मूर्खता की तरफ ले जाते हैं। हम सब इन टुच्ची बातों को सही भी मानने लगेंगे और समर्थन भी करेंगे पर सच ये है की राजनीति व्यापार है और व्यापारी सबसे बड़ा राजनीतिज्ञ।
Home Minister Amit Shah on Electoral Bonds. BJP, with 303 MPs, got 6,000 crore through EBs, whereas Opposition with 242 MPs got 14,000 crore. How is the allegation that BJP got most funds true? When details emerge, those who are speaking against EBs, won’t know where to hide.
आपकी दूरदर्शिता और सहजता हमेशा एक मिशाल रहेगी। एक बार जब माननीय मोदी जी ने आपके लिए कुछ ऐसे शब्दों का प्रयोग किया था जो आपको चुभे थे तो आपने मीडिया में कुछ भी ना कहकर सीधे मोदी जी से मिलकर अपनी बात कही थी। इस मीटिंग के बाद वाणी पर विराम लगा था। आपका व्यक्तित्व वंदनीय है।
एक ट्रिलियन, याने एक लाख करोड़..
1 ट्रिलियन डॉलर, याने 83 लाख करोड़। हम तीन ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी है, तो इसका मतलब हुआ लगभग 250 लाख करोड़...
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भारत मे जितनी भी वस्तु और सेवा पैदा होती है, उसकी कीमत ढाई सौ लाख करोड़ है। इस तरह हम अमेरिका चीन जापान और जर्मनी के बाद पांचवे नँबर पर हैं।
हम ब्रिटेन, फ्रांस और रशिया से बड़ी इकॉनमी है। आगे निकल गए है हम,
हुर्ररे!!!
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जितने नाम लिए, सारे देश की आबादी 10-15 करोड़ से कम है। हमारी डेढ़ सौ करोड़ की आबादी है।
एक एक आदमी 1-1 रुपये भी गुल्लक में डाले, तो डेढ़ सौ करोड़ हो जाता है।
क्या डेढ़ सौ करोड़ लोग, डेढ़ सौ करोड़ का कोष बना लें, तो वह किसी 100 करोड़ वाले रईस से ज्यादा रईस कहे जाएंगे???
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लेकिन अनोखापन यह कि हर आदमी के पास बस 1 ही रुपया है, और वो 100 किरोड़ी आदमी से अधिक अमीर होने का ऑरगेज्म प्राप्त कर रहा है।
इसे कहते है पगलियाना।
पगला जाना। झक्की जैसी बात करना।
लेकिन पगलों जैसी बात करना हमारा नेशनल पैशन है, राष्ट्रभक्ति की प्रथम शर्त है। इसकी शुरुआत शीर्ष पर बैठे, झूठ के बकासुर से होती है।
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8 टोटल इनकमटैक्स पेयर्स हैं भारत मे। यानी इनकी आय 7 लाख से ज्यादा है। मात्र 8 करोड़, बाकी 142 करोड़ - जय श्रीराम हैं।
इनमे बच्चे बूढ़े हटा दीजिए। तो 80 करोड़ देश मे रजिस्टर्ड भिखारी है, जिन्हें खाने के लिए सरकार राशन देती है।
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जन धन खाते खुले, आधार आया, इसका फायदा हुआ कि डिजिटल पेमेंट शुरू हो गए। भीख के कटोरे, कालातीत हो गए।
एक भिखारी गर्व के साथ कटोरा त्याग कर, QR कोड से भीख मांग सकता है।उच्चतकनीकसमृद्ध भिखारी सड़कों पर दिख रहे है।
देश मे 10 लाख भी भिखारी हों, और महीने का 3000 भी भीख जमा कर लेते है , तो तीन सौ करोड़ का टर्नओवर होता है।
यहां इसे शुरू कीजिए, और महीने का 5, 10, 20 या 35 हजार की भीख (वेतन) कमाने वालो को जोड़ते चले जाइये। आपकी तीन ट्रिलियन की इकॉनमी बन जाती है।
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इसे पढ़ने वाले मैक्सिमम लोग इसी ( बिलो 50 हजार) भीख कमाने वालो में आते है।
आपको ऐसा इसे बनाने में इस सरकार का कितना योगदान है?? सोचिये।
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बस, उतना ही योगदान, उसका, देश को 3 ट्रिलियन की इकॉनमी बनाने में है।
Of course Nehru ji was misquoted in this reference. But a person of the level of prime minister now should have avoided to explain it out of proportion .In denigrating others one gets denigrated himself by failing to understand the vision of a person who could see better.
भारतीय चेतना के अभिभावक पंडित नेहरू क्या भारतीयों को आलसी मानते थे?
कल लोकतंत्र के मंदिर संसद में प्रधानमंत्री मोदी जी ने ठीक यही आरोप पं नेहरू पर लगाया।
क्या इसमें जरा सी भी सच्चाई है?
कुछ भी सोचने से पहले पं नेहरू का वह भाषण पढ़ और सुन लीजिए। यहीं से मोदी जी कोट कर रहे हैं।
15 अगस्त, 1959 को उन्होंने कहा-
"जब तक हिंदुस्तान के लाखों गांव नहीं जागते, आगे नहीं बढ़ते तो सिर्फ बड़े शहर हिंदुस्तान को नहीं आगे ले जाएंगे। वे बढ़ेंगे अपनी कोशिश से, अपनी हिम्मत से, अपने ऊपर भरोसा करके। हमारे लोग अपने ऊपर भरोसा करना भूलकर समझते हैं कि और लोग मदद करें। मैं चाहता हूं कि लोग बागडोर अपने हाथों में लें।... तरक्की नापने का एक ही गज है कि कैसे हिंदुस्तान के 40 करोड़ आगे बढ़ते हैं... कौम अपनी मेहनत से बढ़ती है। जो मुल्क खुशहाल हैं वे अपनी मेहनत और अक्ल से आगे बढ़े हैं।... हमारे हिंदुस्तान में काफी मेहनत करने की आदत आमतौर से नहीं हुई है... हम भी मेहनत और अक्ल से बढ़ सकते हैं।... इंसान की मेहनत से सारी दुनिया की दौलत पैदा होती है। जमीन पर किसान काम करता है, या कारखाने में कारीगर, उनसे काम चलता है। कुछ बड़े अफसर दफ्तर में बैठकर दौलत पैदा नहीं करते। दौलत मेहनतकश लोगों की मेहनत से पैदा होती है। तो हमें अपनी मेहनत को बढ़ाना है।"
आजादी के बाद हमारे करोड़ों लोगों के सामने पेट भरने की चुनौती थी। अंग्रेजों की गुलामी, लूट और शोषण ने देश को खोखला कर दिया था। अकाल और भुखमरी से लाखों मौतें होती थीं। ऐसे मुल्क का प्रधानमंत्री अपनी जनता से कहे कि हमें अपने पैरों पर खड़ा होना है, जीतोड़ मेहनत करनी है, विकसित मुल्कों का मुकाबला करना है। क्या यह गुनाह है? नये-नये आजाद हुए मुल्क का प्रधानमंत्री अपनी जनता को आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करे तो क्या यह जनता का अपमान है?
देश के पहले प्रधानमंत्री के भाषण की कुछ पंक्तियां लेकर गलत तरीके से पेश करना शर्मनाक तो है ही, इससे ये भी पता चलता है कि हमारे स्वतंत्रता आंदोलन और राष्ट्र निर्माण के ऐतिहासिक संघर्षों के प्रति प्रधानमंत्री मोदी जी, भाजपा और आरएसएस के मन में कितनी कटुता भरी है।
बात सिर्फ इतनी नहीं है कि वो किसी एक लाइन/वक्तव्य/कार्यक्रम/निर्णय को विकृत करके पेश करेंगे और हम उसकी सफाई देंगे। बात ये है कि सत्ता और देश की मीडिया के शीर्ष पर बैठे मोदी जी जब ऐसी हरकत करते हैं - क्या यह उनको, उनके पद की गरिमा को शोभा देता है? या उनसे ये उम्मीद करना बेमानी है?
It's saddening and alarming but Nature is in its fury to send signals to us. Let's set limits to our ambitions. Hills don't tolerate heavy pucca multi storeyed houses but...