इतना हाईटेक तकनीक से पहली बार किसी को राहत सामग्री बाटते देख रहा हूँ। ख़ान सर बिहार सरकार से बहुत आगे निकल चुके हैं। विजय की तरह यह बिहार का अगला मुख्यमंत्री बन जाए तो हैरान होने वाली नहीं होगी।
"सरकार के पास दिया जलाने के लिए पैसा है - हमारे हॉस्टल के लिए क्यों नहीं?"
यह सवाल कल इंदौर में एक छात्रा ने मुझसे पूछा।
गाँव से पढ़ने शहर आई। हॉस्टल है नहीं, तो PG में रहना पड़ता है। सिर्फ़ सुरक्षित रहने में लाखों ख़र्च हो जाते हैं। हर महीने किराए की चिंता, और बेघर होने का डर - इसी में पढ़ाई करनी पड़ती है।
कई लड़कियाँ इसी वजह से पढ़ाई छोड़ देती हैं। सिर्फ़ इसलिए कि रहने की जगह नहीं है।
और आवास भत्ता? महंगाई के साथ बढ़ता नहीं, ऊपर से भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाता है।
@narendramodi जी - उस बच्ची के सवाल का कोई जवाब है आपके पास?
8 साल के लंबे इंतज़ार के बाद शिक्षक भर्ती आई, लेकिन युवाओं के हाथ फिर निराशा लगी। करीब 60 हजार पदों की भर्ती की मांग को लेकर अभ्यर्थी धरने पर बैठे हैं, जबकि सरकार की ओर से महज 11,508 पदों का अधियाचन भेजा गया है।
सवाल उन परिवारों के न्याय के लिए है जिनके बच्चे सालों से इस भर्ती का इंतजार कर रहे है जब स्कूलों में हजारों पद खाली हैं और योग्य युवा वर्षों से तैयारी कर रहे हैं, तो भर्ती को इतने कम पदों तक सीमित क्यों रखा गया?#60k_शिक्षक_भर्ती
शिक्षक भर्ती के इंतज़ार में युवाओं की उम्र निकल रही है और सरकार स्कूलों के विलय में जुटी है!
2018 में 69,000 प्राथमिक शिक्षक भर्ती का विज्ञापन आया था। आखिर नई भर्ती के लिए युवा कितने साल दरवाज़े खटखटाएँ? पद खाली हैं, बच्चों को शिक्षक चाहिए, फिर भर्ती रोककर किसका भला हो रहा है?
हज़ारों स्कूलों का विलय करके शिक्षा सुधारने का दावा है। वाह सरकार! स्कूल समेट दो, भर्ती टाल दो और पोस्टरों पर ‘शिक्षित उत्तर प्रदेश’ लिखवा दो!
प्रचार से कक्षाएँ नहीं चलतीं। 60,000 प्राथमिक शिक्षक भर्ती की माँग पर फैसला करो, युवाओं और बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ बंद करो!
मोदी सरकार ने चुपचाप UPI पर फ़ीस लगाने का रास्ता खोल दिया है।
अब ₹2,000 से ऊपर के merchant UPI लेन-देन पर MDR लगाया जा सकता है। इन ट्रांजैक्शंस की संख्या भले ही सिर्फ़ 5% हो, लेकिन UPI के कुल transaction value का करीब 65% इन्हीं में है।
सरकार कहती है कि ग्राहक से कोई फ़ीस नहीं ली जाएगी। लेकिन दुकानदार पर लगने वाली फ़ीस आखिर आएगी कहां से? कीमतों में जुड़कर ग्राहक की जेब से।
अमेरिकी payment कंपनियां लंबे समय से भारत की zero-MDR नीति का विरोध करती रही हैं। अब मोदी सरकार ने ठीक उसी दिशा में नीति बदलने का रास्ता खोल दिया है।
US Trade Deal की तरह ही, Compromised PM मोदी एक बार फिर अमेरिकी दबाव के सामने surrender कर रहे हैं।
नरेंद्र मोदी जनता से वसूली का नया प्लान लाए हैं। अब ₹2,000 से ऊपर के UPI पेमेंट पर सरकार वसूली करेगी।
प्लान है कि ₹2,000 से ऊपर के हर UPI पेमेंट पर 0.5% चार्ज वसूला जाए, मतलब -
• अगर आपने ₹5,000 की खरीदारी की तो ₹25 का चार्ज लगेगा
• अगर ₹10,000 की खरीदारी की तो ₹50 वसूला जाएगा
पहले UPI पेमेंट पूरी तरह फ्री था, लेकिन नरेंद्र मोदी से ये देखा नहीं गया और यहां भी वसूली का खेल शुरू कर दिया।
मोदी का फंडा साफ है - जितना हो सके जनता को लूट लो और अपने मित्र की तिजोरी भरो।
ये सरकार जनता की सरकार नहीं है, ये चंद उद्योगपतियों की सरकार है और नरेंद्र मोदी उनके एजेंट।
उत्तर प्रदेश में पिछले 8 वर्षों से शिक्षक भर्ती नहीं आई है,
युवा डीएलएड व बीएड करके साथ ही टेट पास करके इंतजार कर रहे हैं,
फिर भी युवा विरोधी सरकार युवाओं को नौकरी व रोजगार नहीं दे रही है,
आखिर कब तक युवाओं के सपनों को रौंदा जाएगा?
उत्तर प्रदेश के बेरोजगार युवाओं के साथ भी एक बैठक कर लेते मंत्री जी,
पर आपकी सरकार को युवाओं की भविष्य से चिंता ही कहा है,
शिक्षक भर्ती के लिए दर दर ठोकरे खा रहे हैं।
प्रभात खबर रांची की टीम पहुँची सदर अस्पताल सहरसा।
डॉ का एटीट्यूड देखिए यही है डॉ आजाद।कोई ग़म नहीं सीनियर पत्रकारों ने मौका दिया आप अपने कृत के लिए माफी मांगे मगर जवाब नो नो नो।
"यूपी सरकार में प्राथमिक शिक्षकों की एक भी भर्ती नहीं आई", उत्तर प्रदेश में 60 हजार शिक्षकों की भर्ती पर बवाल, गुस्साए अभ्यर्थियों ने सरकार से क्या कहा?
Full Report: https://t.co/DVxyZa5Lvv
@iamneeraj111
[Prayagraj, TGT-PGT Protest]
नियुक्ति की प्रक्रिया इतनी साफ सुथरी है कि पेपर लीक हो जाता है, हर एक पेपर में धांधली अनियमिताएं और गड़बड़ियों देखने को मिलती है।
नियुक्ति की प्रक्रिया इतनी साफ सुथरी है कि युवाओं को पहले विज्ञापन जारी करने के लिए धरना देना पड़ता है फिर Result, DV/PST, Skill Test, Typing Test, Scorecard के लिए धरना देना पड़ता है।
नियुक्ति की प्रक्रिया इतनी साफ सुथरी है कि एक एग्जाम होने के बाद तीन से लेकर 5 साल तक रिजल्ट आने में लग जाते हैं।
नियुक्ति की प्रक्रिया इतनी साफ सुथरी है कि सम्मानजनक भर्ती के लिए शिक्षक अभ्यर्थियों को आमरण अनशन पर बैठना पड़ता है।
नियुक्ति की प्रक्रिया इतनी साफ सुथरी है कि सम्मानजनक वेतन के लिए पंचायत सहायक साथियों को हफ्ते भर से इको गार्डन में प्रदर्शन करना पड़ रहा है, सरकार और अधिकारियों के सामने उनके दर्द आंसू बनकर छलक रहे हैं।
नियुक्ति की प्रक्रिया इतनी साफ सुथरी की बहनों को महिलाओं को अपने मासूम छोटे बच्चों को लेकर धरना प्रदर्शन में आना पड़ता है।
दिव्यांग युवा साथियों तक को धरने में शामिल होना पड़ता है सिर्फ अपनी जायज मांग अधिकार और सम्मानजनक वेतन और भर्ती के लिए।
अगर अच्छे लोग चयन किए होते तो ऐसा क्यों होता।
बहुत बहुत धन्यवाद @TheLallantop
उत्तर प्रदेश में 8 साल से शिक्षक भर्ती नहीं आई और उस मुद्दे को प्रयागराज में प्रमुखता से बच्चों के पास जाकर उठाया गया और बच्चों की बातों को सरकार तक लोगों तक पहुंचाने का कार्य किया गया ✅
छात्रों ने अपना पीड़ा दर्द सब बयां किया 👇
#शिक्षक_भर्ती
1.43 लाख से ज्यादा शिक्षक पद खाली… फिर भी भर्ती का इंतजार क्यों?
उत्तर प्रदेश में लाखों शिक्षक अभ्यर्थी सालों से एक सवाल पूछ रहे हैं—भर्ती का विज्ञापन आखिर कब आएगा?
प्रयागराज की सड़कों पर आंदोलन कर रहे अभ्यर्थी कोई भीख नहीं मांग रहे। वे अपनी योग्यता, वर्षों की मेहनत और रोजगार के अधिकार की मांग कर रहे हैं।
B.Ed, BTC/D.El.Ed, TET और CTET जैसी योग्यताएं हासिल करने के बाद भी अगर भर्ती नहीं आती, तो इन युवाओं का भविष्य आखिर किसके भरोसे है?
एक तरफ स्कूलों में शिक्षकों की कमी की खबरें हैं, दूसरी तरफ लाखों योग्य युवा नौकरी के इंतजार में हैं।
पद खाली हैं… अभ्यर्थी तैयार हैं… फिर भर्ती क्यों नहीं?
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