सुप्रीम कोर्ट का यह क्लिप धारा 370 पर सुनवाई के दौरान का है
आर्टिकल 370 पर सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ वकील राकेश ���्विवेदी ने इतिहास का वो पन्ना पलट दिया कि सभी जज चुपचाप सुनते रह गए,
उन्होंने नेहरू का नाम तो नहीं लिया लेकिन नेहरू के नीच��ा और नेहरू की गद्दारी की पूरी कहानी सुप्रीम कोर्ट के खंडपीठ के सामने बयां कर दी वह भी तथ्यों के साथ
फिर भी कांग्रेसी चमचे कहेंगे नेहरू तो आधुनिक भारत के निर्माता थे
सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील राकेश द्विवेदी अपनी दलील में कहते हैं, 'हम सच्चाई के बारे में बात नहीं करना चाहते हैं। सशस्त्र बलों के सर्वोच्च कमांडर कौन था, औचिनलेक। भारत के तीनों जनरल ब्रिटिश थे। पाकिस्तान के तीनों जनरल ब्रिट���श थे। यह युद्ध (कश्मीर पर पाकिस्तान की तरफ से हमला) क्या था? चर्चिल ने ही तय किया था कि भारत का विभाजन होगा। यह जियो-पॉलिटिक्स का खेल था सब। यह युद्ध एक ब्रिटिश युद्ध था। उन्होंने दोनों तरफ से इसकी तैयारी की थी। हमलावर कहां से आए थे? उत्तर पश्चिम सीमांत प्रांत (NWFP) से। दो कार्यकालों के बाद मिस्टर कनिं��म, जो उत्तर पश्चिम सीमांत प्रांत के गवर्नर रह चुके थे, उन्हें जुलाई में वापस बुलाया गया। चुनाव से ठीक पहले।'
द्विवेदी ने उस वक्त की परिस्थियों को बताते हुए आगे कहा, 'हमलावरों को प्रशिक्षित किया गया, सेना के हथियारों के साथ ट्रकों पर भेजा गया। पाकिस्तान की सेना भारत से अभी-अभी अलग हुई थी। और सबसे बड़ा, सबसे स्पष्ट उदाहरण है, कौन लड़ रहा था? आज पीओके क्या है? पीओके का दो-तिहाई हिस्सा गिलगित-बााल्टिस्तान है। और वहां किसने युद्ध लड़ा? हमलावरों ने नहीं। यह मेजर ब्राउन था। वहां का एजेंट कौन था? उन्हें कनिंघम ने ठीक उसी जुलाई में दोबारा पोस्ट किया था। उन्होंने महाराजा (हरि सिंह) के सभी फोर्सेज को मार डाला। अंसार अहमद वहां तैनात थे और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था। और उन्होंने चार दिनों में पाकिस्तान का झंडा लहराया और उन्होंने इसे कनिंघम को ��ौंप दिया। उन्होंने पाकिस्तान की सेना आलम के पास भेजी और उन्होंने गिलगित-बल्तिस्तान पर कब्जा कर लिया। पाकिस्तान के साथ युद्ध कहाँ है? यह ब्रिटिश है। लेकिन अगर हम इन सब से आंखें मूंद लेते हैं।'
वो कहते हैं, 'भला ये हमलावरों का युद्ध है? हमलावर अपने आप श्रीनगर तक नहीं आ सकते थे। युद्ध लगभग कारादु और कारगिल से लेकर लेह के करीब तक पहुंच गया था। तो यह एक अलग तरह का युद्ध था, लेकिन कोई नहीं कह सकता था क���योंकि माउंटबेटन वहां गवर्नर जनरल के रूप में थे। पता नहीं हमारे नेताओं ने ऐसा क्यों किया? जिन्ना ने तो साफ कहा, मैं किसी भी ब्रिटिश गवर्नर-जनरल को स्वीकार नहीं करूंगा। लेकिन हमारे यहां कहा गया, नहीं, हमें गवर्नर जनरल स्वीकार हैं। तो यह युद्ध क्या है? यही नहीं, जब युद्ध शुरू हुआ, तो उन्होंने (नेहरू सरकार ने) एक डिफेंस कमिटी का गठन किया और माउंटबेटन को इसका अध्यक्ष बनाया दिया। तो यह एक गजब की स्थिति है, लेकिन माउंटबेटन डिफेंस कमिटी के अध्यक्ष हैं।'
वरिष्ठ वकील आगे कहते हैं, '��चिनलेक सशस्त्र बलों के सर्वोच्च कमांडर हैं। सभी जनरल ब्रिटिश हैं और एक ब्रिटिशर विद्रोह कर रहा है और जब वह इंग्लैंड लौटता है तो उसे ब्रिटिश साम्राज्य का पदक दिया जाता है। तो यह युद्ध की स्थिति नहीं है। इसलिए जब आप संविधान और 370 को पढ़ते हैं, तो कृपया इन बातों को ध्यान में रखें कि हमारे नेता किन परिस्थितियों में आगे बढ़ रहे थे। हमारी हमलावरों को पीछे धकेलने और अपनी जमीन वापस पाने की चाहत ही नहीं थी। उन्होंने एक समय पर जानबूझकर युद्ध को रोक दिया और संयुक्त राष्ट्र चले गए क्योंकि अगर हम मीरपुर तक और पीछे चले गए होते तो वह गिलगित-बल्तिस्तान से कनेक्शन टूट जाता।'
राकेश द्विवेदी ने अपनी बहस जारी रखते हुए कहा, 'ये सभी सच्चे तथ्य हैं। कोई भी इसे नकार नहीं सकता। और संयुक्त राष्ट्र क्या था? वही शक्ति जो जियो पॉलिटिक्स की वजह से भारत का विभाजन करना चाहती थी, अमेरिका और ब्रिटेन, उन्हें मध्यस्�� बनाया गया था। सौभाग्य से, पाकिस्तान ने पीओके खाली करने से इनकार कर दिया। इसलिए वह प्र��्ताव खत्म हो गया है। संयुक्त राष्ट्र के बारे में बात करने की कोई जरूरत नहीं है, लेकिन उस समय 370 के निर्माण में स्थिति की गंभीरता को देखें।'
मैं तुम्हारे भीतर की उस लड़की को
प्यार करना चाहता हूँ...
जिसे दुनिया ने कभी नहीं देखा।🍂🌸
उसकी अधूरी इच्छाएँ,
उसके डर,
उसकी मासूमियत,
उसकी बेचैनियाँ—
सबको अपनी बाँहों में
जगह देना चाहता हूँ।
क्योंकि मेरे लिए
प्रेम का सबसे गहरा रूप
किसी स्त्री के शरीर को पाना नहीं,
बल्कि उसके इतने क़रीब पहुँच जाना है
कि वह अप��े सारे कवच उतारकर
मेरे सामने
बिल्कुल वैसी रह सके
जैसी वह अकेले में होती है।
और शायद
यही वह क्षण ��ोगा
जब हमारी देह से आगे
हमारी आत्माएँ
एक-दूसरे को छू रही होंगी।
उस रात
मैं तुम्हें पाना नहीं चाहूँगा...
मैं चाहता हूँ
तुम्हारे भीतर
इतना उतर जाऊँ
कि सुबह होने पर
तुम्हें लगे—
तुम सोई नहीं थीं,
तुमने बस
अपने भीतर किसी को
पहली बार
घर दिया था।
— मर्जी
#प्रेम #दिल_की_बात
जिसे तुमसे प्रेम होगा, वह तुम्हारे लिए अनगिनत कोशिशें करेगा- बार-बार, हर संभव तरीके से, हर बार सिर्फ़ तुम्हें चुनेगा, और जिसे तुमसे प्रेम ही नहीं, उसके लिए तुम्हारी सबसे गहरी कोशिश भी उस पर आए किसी बोझ का एक उदाहरण कहेगा...