@dmgbnagar
पंचशील हाईनिश में AOA द्वारा नए बिजली मीटर के लिए 3800/- की माँग की गई है, 30 Sept तक ना देने पर बिजली कट जाएगी।
सोसाइटी में NPCL मल्टीपॉइंट का सर्वे हुआ था। निवेदन: multipoint की स्थिति स्पष्ट होने तक किसी भी निवासी की बिजली आपूर्ति न काटी जाए और उचित समय दिया जाए।
@DCPCentralNoida@noidapolice@Uppolice
AOA (Panchsheel Hynish) has instructed maintenance staff to stop electricity recharge for residents of Tower 7 & 10 if they haven’t paid the tower paint charges.
How can electricity be stopped over a separate payment..?
Pls Help
स्मृति ईरानी ने कहा था कि
कमल का बटन दबाओ,
चीनी 13 रूपये किलो मिलेगी,
जबकि आज कमल का बटन दबाने वालों को चीनी
60 से 75 रूपये प्रति किलो मिल रही है,
नेताओं को अपने कथनी करनी पर कोई शर्म नहीं आती है,
@DCPCentralNoida@2_noida@noidapolice@Uppolice@dgpup
On behalf of AOA (Panchsheel Hynish) 2 persons are threatening residents to contribute for paint work otherwise electricity recharge will be stopped
Is this legal to stop electricity if not contributing
Sir, pls intervene
दिल्ली के जंतर-मंतर पर सिविल ड्रेस में डंडे लेकर घूम रहे ये लोग कौन थे?
जब छात्रों ने उनकी पहचान पूछी, तो उन्होंने जवाब क्यों नहीं दिया?
क्या वे पुलिसकर्मी थे, किसी अन्य एजेंसी से थे, या किसी और के भेजे हुए लोग?
इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और सच्चाई सामने आनी चाहिए।
#WATCH | A large number of farmers reach Shambhu Border (Punjab-Haryana border) ahead of their scheduled march to Delhi today. Visuals from Patiala (Punjab) side.
यह जंतर-मंतर का वीडियो है। आज दिल्ली की उमस भरी गर्मी जान ले रही है। उस हाल में वहाँ लोग ठसा-ठस भरे हैं। हाथ का पंखा लेकर नौजवान एक दूसरे को हवा का मरहम लगा रहे हैं। घर में पंखे के नीचे राहत नहीं है, वहाँ तो क्या ही हालत होगी। इस गर्मी में वहां मौजूद लोगों की हालत भी ख़राब हो रही होगी। सोनम वांगचुक को जबरन हटाने के बाद भी धरना कमज़ोर नही हुआ है। लोगों ने आगे आकर इस धरने को थाम लिया है। कौन नेता है, कैसा नेता है, यह सब सवाल पीछे चला गया है। आज पूरे दिन जंतर-मंतर पर भारी भीड़ रही। धरना स्थल तक जाने के लिए लोग कतार में बिना शिकायत खड़े हैं। वहाँ से लौटने वाले लोगों की लाइन राजीव चौक मेट्रो में भी बढ़ती जा रही है। सोमवार को सरकार का इम्तहान है। कल वह मार्च में बाधा डालेगी या मार्च होने देगी।
आप नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम, ग़ाज़ियाबाद इन महानगरों, महाज़िलों में रहने वाले जेन ज़ी, जेन बी जेन एक्स, जेन जो भी, किसी से पूछ लीजिए। क्या यहाँ एक भी सरकारी शैक्षणिक संस्थान है, जिसकी दुनिया छोड़िए, भारत में पहचान हो। जिसकी गुणवत्ता की तारीफ होती हो। जिसमें पढ़ने का सपना देखा जाता हो। एक भी नहीं है। सोचिए लाखों करोड़ों की आबादी के बीच एक ढंग का कॉलेज नहीं है। जहाँ भारत का एस्पिरेशनल क्लास रहता है। वह 12 साल से व्हाट्स एप यूनिवर्सिटी में डूबा रह गया। बच्चों के लिए अमेरिका का वीज़ा बनवाता रहा लेकिन मुड़ कर नहीं देखा कि उसके शहर में एक भी कॉलेज काम का क्यों नहीं है। इसके कारण मिडिल क्लास के साथ साथ नियो मिडिल क्लास के बच्चे भी घिस रहे हैं, पिस रहे हैं, मिट रहे हैं। जो मेहनत मज़दूरी करने वाला तबका है, जिसे लग रहा है कि पढ़ाई से उसके परिवार का भविष्य बदल सकता है, वह कड़ी मेहनत कर अपने बच्चों को किसी तरह स्कूल और कालेज भेज रहा है। उसे पता ही नहीं है कि वह अपने बच्चों को जिन सपनों के लिए तैयार कर रहा है, वह कब का रौंदा जा चुका है। नोएडा, ग्रेटर नोएडा, ग़ाज़ियाबाद और गुरुग्राम के घरों में काम करने वाली महिलाओं से पूछ लीजिए। हाड़ तोड़ मेहनत कर रही हैं और अपने बेटी की पढ़ाई के लिए फीस भर रही हैं। उनके बच्चे भी ख़ूब मेहनत करते हैं लेकिन सामाजिक पूंजी नहीं होने के कारण उन्हें गाइड नहीं मिल पाता। हर दिन लाखों सपनों की हत्या हो रही है। समाज के इस तबके को अभी शिक्षा से जुड़े मुद्दे की समझ नहीं है, कभी तो उन्हें भी पता चलेगा कि सारा सिस्टम इसी तरह डिज़ाइन किया गया है कि उनके बाद उनकी बेटियाँ भी घरों में काम करती रहेंगी । शिक्षा को बर्बाद किया गया ताकि लाखों लोगों का भविष्य बर्बाद हो सके और वे कम से कम पैसे में काम करने के लिए हमेशा मजबूर रहें।
भारत के भविष्य के साथ लंबे समय तक यह धोखा हुआ है। हो सकता है भारत का युवा धर्म की राजनीति में फिर से सनक जाएगा, वह गौरव और पहचान राजनीति में धर्म से पाने लगेगा, यह सब हो सकता है, हो ही रहा है, लेकिन अगले तीस साल में भी वह अपने सपनों को पूरा करने के लिए बड़े स्तर के शैक्षणिक संस्थानों को नहीं पा सकता है। यह लड़ाई आज की नहीं है, अगले पचास साल की है।
क्या हम ग्रेटर नोएडा वेस्ट के निवासी दूसरे शहरों के निवासियों से कम अधिकार रखते हैं?
देश के कई शहरों में मेट्रो परियोजनाएँ वर्षों तक आर्थिक घाटे में चलने के बावजूद लगातार विस्तार पा रही हैं। क्योंकि सरकारें जानती हैं कि मेट्रो कोई व्यापारिक सौदा नहीं, बल्कि जनता को राहत देने, ट्रैफिक कम करने, प्रदूषण घटाने और शहरों के भविष्य को बेहतर बनाने का माध्यम है।
लेकिन जब बात ग्रेटर नोएडा वेस्ट की आती है, तो हर बार नए बहाने सामने आ जाते हैं, कभी तकनीकी खामियाँ, कभी DPR की आपत्तियाँ, तो कभी वित्तीय व्यवहार्यता का प्रश्न।
करीब 20 लाख की आबादी वाला यह शहर पिछले लगभग 10 वर्षों से ज्यादा समय से मेट्रो की मांग कर रहा है। यह क्षेत्र #NCR के सबसे तेजी से विकसित हो रहे आवासीय क्षेत्रों में से एक है, जहाँ लाखों परिवार रोज़ घंटों ट्रैफिक जाम, प्रदूषण और परिवहन की कमी से जूझते हैं।
जब Patna, Jaipur, Bhopal, Nagpur और Kochi, Agra जैसे शहरों में घाटे के बावजूद मेट्रो को विकास का इंजन माना जा सकता है, तो फिर ग्रेटर नोएडा वेस्ट के लिए यही सोच क्यों नहीं अपनाई जा रही?
क्या 20 लाख लोगों की रोज़मर्रा की परेशानी किसी फाइल में अटकी तकनीकी टिप्पणियों से कम महत्वपूर्ण है?
कब तक इस क्षेत्र को केवल आश्वासन मिलता रहेगा और मूलभूत परिवहन सुविधाएँ टलती रहेंगी?
#Greater_Noida_West के 20 लाख निवासियों को भी सम्मानजनक, सुरक्षित और आधुनिक सार्वजनिक परिवहन का अधिकार है।
मेट्रो कोई विशेष सुविधा नहीं, यह हमारा अधिकार है। @ShyamNBT@Dkumarchandel@MeenakshiSTOI@AmarUjalaNews@siddharth2596@Pravendra_Sikar@Ankurtripathie
#MetroForGreaterNoidaWest #20LakhVoices #JusticeForGNW #NoMoreExcuses #MetroIsOurRight #NCRDevelopment
एक समय ऐसा आता है जब खामोशी धैर्य नहीं, मजबूरी बन जाती है। ग्रेटर नोएडा वेस्ट आज उसी मोड़ पर खड़ा है।
@narendramodi@PMOIndia@mlkhattar@MoHUA_India
सालों से यहां के निवासी मेट्रो के वादों, और टालमटोल के बीच जी रहे हैं। रोज़ाना घंटों का ट्रैफिक जाम, पब्लिक ट्रांसपोर्ट का अभाव, और इससे होने वाला मानसिक व आर्थिक क्षति अब आम जिंदगी का हिस्सा बन चुका है। यह केवल असुविधा नहीं, बल्कि एक बुनियादी अधिकार का सवाल है।
मेट्रो रेल की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर प्रस्तावित यह प्रदर्शन सिर्फ एक जुटान नहीं, बल्कि उन लाखों लोगों की आवाज़ है जो हर दिन इस परेशानी को झेल रहे हैं। यह आवाज़ उन कामकाजी लोगों की है जो सुबह से पहले घर छोड़ते हैं, उन माता-पिता की है जो अपने बच्चों के सुरक्षित सफर को लेकर चिंतित हैं, उन बुजुर्गों की है जो खुद को असहाय महसूस करते हैं, उन महिलाओं की है जो सुबह शाम शेयरिंग ऑटो रिक्शा में बैठकर जाम से जूझती हैं और खुद को असुरक्षित महसूस करती हैं।
यह एक भावनात्मक अपील है सत्ता को चला रहे अफसरों से तथा नीति निर्माताओं से, क्योंकि मेट्रो की मांग ग्रेटर नोएडा वेस्ट के लिए विलासिता नहीं बल्कि जरूरत है। ग्रेटर नोएडा वेस्ट के हर निवासी की इस मांग में भागीदारी जरूरी है। यह सिर्फ समर्थन नहीं, बल्कि हमारी जिम्मेदारी है।
इतिहास गवाह है परिवर्तन खुद नहीं आता, उसे शांतिपूर्ण तरीके से मांगना पड़ता है।
अगर अब नहीं, तो कब? अगर हम नहीं, तो कौन?
#Metro4GreaterNoidaWest
You’ve seen the historic win, now know the story behind the hero: @JemiRodrigues.
At just 25, she led India to a record-breaking win against Australia. But from being targeted by right-wing trolls for being a Christian to battling anxiety - here’s what she endured to get here.