ये एआई मॉडल्स वायरस, बैक्टीरिया, पौधों और इंसानों के आनुवंशिक कोड पर प्रशिक्षित है ,
ये AI माडल और बेहतर बनाये गए ताकि ये एक ख़ास तरह का वायरस तैयार कर सकें, जिसे बैक्टीरियोफ़ेज़ (बैक्टीरियोफ़ेज़ केवल कुछ विशेष प्रकार के बैक्टीरिया को ही संक्रमित करते हैं) कहा जाता है।
“जेनरेटिव एआई से पहली बार बने नए वायरस(बैक्टीरियोफ़ेज़)”
जहाँ हम AI की बात कर रहे विकसित देश जेनरेटिव एआई का इस्तेमाल कर पूरा जीनोम डिज़ाइन कर लिए है. यह ऐसा जीनोम है जो अपनी कॉपी बना सकता है. साथ ही कोशिकाओं के भीतर दूसरे काम भी कर सकता है…
पूरी दुनिया के लिए यह बिल्कुल नया क्षेत्र है ,
ये मॉडल अगले हिस्से का सहज अनुमान लगाते हैं.
इस मामले में एआई मॉडल जीवन की भाषा की भविष्यवाणी करते हैं. इन मॉडल्स के नाम ईवीओ1 और ईवीओ2 हैं.
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.. ब्रह्मांड की संरचना एक तंत्रिका नेटवर्क या एक जैविक जीव की तरह दिखती और व्यवहार करती है,
सूक्ष्म स्तर पर, मानव मस्तिष्क के तंत्रिका नेटवर्क न्यूरॉन्स को एक्सॉन के माध्यम से जोड़ते हैं। स्थूल स्तर पर, ब्रह्मांडीय जाल आकाशगंगाओं को डार्क मैटर तंतुओं के माध्यम से जोड़ता है
जीवन की हर जटिल प्रक्रिया (जैसे सोचना, सांस लेना या बढ़ना) को अंततः भौतिकी के नियमों और परमाणुओं की अंतःक्रिया के माध्यम से समझा जा सकता है।
हमारा दृश्य ब्रह्मांड एक 3-आयामी (3D) ब्रेन (Brane) है, जो एक उच्च-आयामी स्थान (जिसे Bulk कहते हैं) में तैर रही है।
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🚨: Big Bang wasn't an explosion from a point. It was fiery collision between our universe and another parallel universe in a higher dimension, new study reveals.
ब्रह्मांड की तीन मूलभूत शक्तियाँ—विद्युतचुंबकत्व, प्रबल नाभिकीय बल और दुर्बल नाभिकीय बल—हमारी "परत" ( 3 Dimensions) पर स्थायी रूप से फंसी हुई हैं। क्योंकि “प्रकाश” एक विद्युतचुंबकीय तरंग है, यह हमारी परत को छोड़कर या उसके पार किसी अन्य परत (चौथे आयाम )तक नहीं जा सकता।
@BJP4India
Indirect costs reduce profit directly
EROEI for Ethanol 2-4( sugarcane) & 1.2-2( grain based )
Energy density of ethanol 21 MJ ( Petrol 32MJ)
Modest fuel economy loss 6-7%
Cost of 1 lit ethanol in terms of water is 2000-3500 lit ( to grow the sugarcane)
सवाल माइलेज का नहीं, वैल्यू का है! 🚗
मान लिया माइलेज में 5% का फर्क आया, लेकिन बदले में मिलता क्या है?
🔹 Better Acceleration और Better Pickup
🔹 Higher Octane Fuel & Better Anti-Knocking
🔹 Cleaner Combustion & Smoother Performance (Traffic में भी!)
🌱 Lifecycle Carbon Emissions में 40% तक की कमी
जो Fuel गाड़ी की Performance सुधारे, Engine की Life बढ़ाए और Environment का ध्यान रखे... वहां थोड़े से Mileage पर सोचना कहां का Logic है?
Drive Smart, Choose Better! 🛣️
@Kekius_Sage Edward Fredkin did not mathematically prove this hypothesis. Instead, he proposed digital physics (or digital philosophy), a speculative framework suggesting the universe operates like a cellular automaton where information is more fundamental than matter or energy
Computer scientist Edward Fredkin proved space and time are digital processing units of a cosmic computer.
This concept implies matter is just running data.
.. जिसमें हम हर कदम पर अपनी गलतियों को पहचानते हैं, उन्हें सुधारते हैं और सत्य के अधिक करीब पहुँचते जाते हैं।
विज्ञान के क्षेत्र में, हज़ारों लोगों की राय का उतना महत्व नहीं है, जितना किसी एक व्यक्ति की तर्क-बुद्धि की एक छोटी सी वैज्ञानिक वैचारिक चिंगारी का।
वैज्ञानिक सच तथ्य , तर्क और अवलोकन से मिलता है, न कि लोकप्रियता या पुरानी परंपराओं को आँख बंद करके मानने से।
विज्ञान और मानव ज्ञान विचारों का परीक्षण करने और पूर्ण सत्य का दावा करने से नहीं बल्कि गलतियों को खोजने से आगे बढ़ता है।
ज्ञान विज्ञान एक ऐसी यात्रा है..
@PNRai1 ग़लत तथ्य आप बता रहे ।
प्रकाश तो आइंस्टीन के “ स्पेस टाइम कर्वेचर “ के साथ ही मुड़ने का पता चल गया था ।
फर्जी तथ्य से कभी कोई महान नहीं बन सकता । अवॉयड करिए ग़लत को
देहरादून के एक शिक्षक ने अपनी क्लास को बताया कि प्रकाश केवल सीधी रेखाओं में चलता है।
उस कमरे में बैठे एक लड़के ने अगले चालीस साल प्रकाश को मोड़ने में बिताए, और आज इंटरनेट उसी चीज़ पर चलता है जो उसने बनाया।
उसका नाम था नरिंदर सिंह कपानी।
जन्म 1926 में मोगा, पंजाब में। देहरादून में पढ़ाई, आगरा यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट, भारतीय आयुध कारखानों में अधिकारी। 1952 में इंपीरियल कॉलेज लंदन चले गए।
वहाँ प्रोफेसर हेरोल्ड हॉपकिंस के साथ उन्होंने काँच के पतले रेशों को एक साथ बाँधा और उनके माध्यम से साफ इमेज भेजी — मोड़कर, कोनों से होकर। पहले कभी किसी ने ऐसा नहीं किया था।
यही है फाइबर ऑप्टिक्स। समुद्र के नीचे इंटरनेट केबल, एंडोस्कोपी, लेजर सर्जरी — सब इसी पर टिकी हैं। 1960 में Scientific American के एक लेख में उन्होंने इस क्षेत्र को इसका नाम दिया।
नेहरू उन्हें भारत वापस बुलाकर रक्षा मंत्रालय का वैज्ञानिक सलाहकार बनाना चाहते थे। वे अमेरिका चले गए। Optics Technology कंपनी स्थापित की, 1967 में उसे पब्लिक किया, सौ से ज्यादा पेटेंट लिए, और सिलिकॉन वैली में उस स्तर की कंपनी बनाने वाले पहले भारतीयों में से एक बने।
2009 में फिजिक्स का नोबेल पुरस्कार काँच के फाइबर से प्रकाश के ट्रांसमिशन के लिए दिया गया। वह चार्ल्स काओ को मिला, जिन्होंने काँच में अशुद्धियों की समस्या हल की थी, जो सिग्नल को निगल जाती थीं। नोबल पुरस्कार लॉबी ने
कपानी का नाम गायब कर दिया।
क्या उन्हें साझा करना चाहिए था?
— यह अब भी उन लोगों में विवादित है जो भौतिकी समझते हैं। जो विवादित नहीं है वह यह कि Fortune ने दस साल पहले ही उन्हें बीसवीं सदी के सात unsung heroes में शामिल कर लिया था।
वे 2020 में कैलिफोर्निया में निन्यानवे वर्ष की आयु में नहीं रहे। अगले साल मोदी सरकार ने उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया।
@EpicMasculine7 “No, modern research does not prove”sodium bicarbonate is only useful when paired directly with standard therapies. It acts as a helper to make chemotherapy or immunotherapy more effective, rather than destroying cancer on its own.
हम जिसे भी असल कहते हैं, वह ऐसी चीज़ों से बना है जिन्हें असल नहीं माना जा सकता।
क्वांटम मैकेनिक्स आपको आश्चर्यचकित कर देगा,
यदि आपने इसे समझने की कोशिश ही नहीं की तो समझिए आपने अपने बनाने वाले को समझने का मौक़ा ही गवाँ दिया
‘यह सब इस बात पर निर्भर करता है कि हम चीजों को कैसे देखते हैं न कि वे अपने आप में कैसे हैं’
“कारण”
‘बहुत कम लोग ही जानते हैं कि यह जानने के लिए कि आप कितना कम जानते हैं, आपको कितना कुछ जानना ज़रूरी है’
Can the supreme authority of any religion, sect, or faith be biased—
where a scientist says, "We still do not know even a thousandth of one percent of what nature has revealed to us,"
and
a so-called religious leader of any faith says,
"We have come to know everything and..
“वास्तविक शिक्षा, ज्ञान /विज्ञान और समझ (Cognition) विद्यार्थियों और शिक्षकों के बीच के संवाद और विचार-मंथन से पैदा होती है, न कि कंक्रीट से बनी आलीशान स्कूल या कॉलेज की दीवारों से”
“कल से सीखें, आज के लिए कल से सीखे ज्ञान को प्रयोग में लाए और उस ज्ञान को और परिष्कृत करे..