कविता के माध्यम से सवर्ण समाज और सामान्य वर्ग से जु���़े अपने अनुभव, पीड़ा तथा आरक्षण व्यवस्था के प्रभाव को लेकर अपनी भावनाएँ व्यक्त करने लगे हैं;
सुनिए, दुर्भाग्य से सवर्ण हूँ!
दुबे-दुबे ��ाहर निकल👉 दिल्ली पुलिस
इनके तेवर तो देखिए,ये पुलिस कम गुंडे ज्यादा लग रहें है ?
इतना अत्याचार तो गांधी के आंदोलन में अंग्रेजो ने नही किया होगा, जितना आज मोदी की पुलिस सवर्णो पर कर रही है
लोकतंत्र मर गया है, मोदी ने तानाशाही राज स्थापित कर दिया है
सवर्ण समाज वोही समाज है, जिसको अंग्रेज व मुगल नही झुका सकें, तु क्या झुकाएंगा रे ?
झुकेगा नही साला सवर्ण
झूठी शिकायत , झूठी जांच और झूठी गवाही ----- देश में इन तीनों को गंभीर अपराध घोषित कर देना चाहिए ----और इसका दंड कठोरतम होना चाहिए --- इतना कठोर कि ऐसा करने वालों की रूह कांपे ---- क्या कहत��� हैं आप ??
#UGC_RollBack
Twitter Trend Alert | 1 फरवरी 2026 सुबह 11 बजे से।
📢 शिक्षा बचेगी, तभी भविष्य बचेगा!
UGC के नाम पर लाया गया यह काला कानून सुधार नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में असंतुलन और अन्याय को बढ़ावा देने वाला है। हम टकराव नहीं चाहते, हम संवाद, न्याय और समान अवसर चाहते हैं।
यह आंदोलन किस�� वर्ग के विरुद्ध नहीं,
बल्कि न्यायपूर्ण, पारदर्शी और समावेशी शिक्षा प्रणाली के पक्ष में है।
✊ आइए, लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज़ उठाएँ
✊ आइए, छात्रों के उज्ज्वल भविष्य के लिए एकजुट हों
✊ आइए, सरकार तक स्पष्ट और सकारात्मक संदेश पहुँचाएँ
आज नहीं बोले, तो कल बहुत देर हो जाएगी।
📌 1 फरवरी 2026 सुबह 11 बजे से
📌 X पर ट्रेंड करें और बदलाव का हिस्सा बनें
#UGC_RollBack
#SaveEducation
#EqualOpportunity
Dear general category male students,
Remember, this the fight for your life, fight for your future. We have passed out from our colleges, universities and have very limited stake other than that of our kids who are toddlers.
This UGC guideline is a whip that will not only take the flesh of your body, but the very soul of the nation: your collective shaming at a place where you should be building great things for India.
So, I did my part. I wrote and spoke for last 11 days, relentlessly keeping everything at stake. Friends mocked me, ideological adversaries laughed at and party kept mum. Now mainstream media has been forced to pick up.
It's your time now. Go to UGC, stand for what's your right of a free campus, without the fear of a law that is based on a data of 0.004% of affected students, tell them they can't take away your friendship, freedom, research and results away from you.
You need to fight this out on road as the government is busy making committees to calm you down. But double down this time. A bunch of political retards, aiming to cement their political legacy on the whimsical idea of unproven injustices on so-called dalits, shouldn't be allowed to play with your lives, and by an extention, the nation itself.
Protest to protect your future.
जनरल क्लास वाला हिन्दू इस समय विश्व का सबसे निरीह प्राणी है।
अपने देश में उसे बताया जाता है कि उसके जैसे सारे लोगों के पूर्वजों ने हजारों साल तक शेष लोगों पर ���ीषण, अमानवीय अत्याचार किए हैं। फिर चाहे इस बात का एक भी उदाहरण, प्रमाण या सन्दर्भ मौजूद न हो कि उसके स्वयं के पूर्वजों ने भी यही किया था, पर उसे बिना कुछ बोले चुप���ाप सिर झुकाकर इस आरोप को सच मानना है। उसके बच्चों को और उनके भी बच्चों को और उनके भी बच्चों को बचपन से पुस्तकों में यही पढ़ना है और उसी अपराध बोध में जीना है।
वह जनरल क्लास वाला हिन्दू चाहे खानदानी गरीब हो, उसका पिता चाहे मंदिर में झाड़ू लगाकर गुजारा करता हो, किसी एटीएम का गार्ड हो, मुम्बई में सब्जी बेचता हो या दिल्ली की सड़कों पर रिक्शा चलाकर परिवार पालता हो, पर वह किसी सरकारी मदद का हकदार नह��ं है।
जो सरकार उसके वोट से जीतकर आएगी, वह भी जीतने के बाद उसे बताएगी कि उसका हक छीनकर भी दूसरों को देना ही सामाजिक न्याय है और यही सरकार का अंतिम लक्ष्य है। दूसरों का पेट चाहे लबालब भरा हुआ हो, फिर भी उसे भूखे पेट रहकर भी सामाजिक न्याय की इस मशाल को थामे रहना है।
उसे बताया जाएगा कि उसी के कारण देश में सांप्रदायिकता का उन्माद बढ़ता है और अन्य मासूम लोग दहशत के साये में जीने को मजबूर होते हैं। इसलिए सबका विश्वास जीतने के लिए उसका हिसाब चुकता करना जरूरी है।
कहीं उसने थोड़ा बहुत कमा लिया और आर्थिक रूप से सक्षम हो गया, तो उसे बताया जाएगा कि उसे थोड़ा टैक्स और देना चाहिए ताकि सरकार अपनी लाड़ली बहनों को नकदी और भांजों को मुफ्त लैपटॉप बांट सके। आखिर देश के लिए उसका भी कोई फर्ज है कि नहीं?
यही जनरल क्लास वाला हिन्दू अगर कोई सवाल पूछेगा, तो उसे हिन्दुओं में फूट डालने का जिम्मेदार माना जाएगा। अगर उसके धर्म, संस्कृति, परंपराओं या देवी देवताओं को भी अपमानित या कलंकित किया जाए, तो उसे चुप रहने को कहा जाएगा ताकि सौहार्द्र और सद्भाव बना रहे। इसके बावजूद भविष्य में जब देश का अगला विभाजन होगा तो उस विभाजन का दोष भी उसी को सहना है।
यही जनरल क्लास वाला हिन्दू यदि भारत से बाहर चला जाए, तो उसे बताया जाएगा कि उस जैसों के कारण ही भारत आज तक इतनी समस्याओं से जूझ रहा है क्योंकि देश की सेवा करने की बजाय वह मौका पाते ही विदेश भाग गया था। इसलिए अब उसे भारत के बारे में मुंह खोलने का हक नहीं है, चाहे भारत में बैठे लोग पूरी दुनिया के बारे में बोलते रहें। उसके लिए इस समय सिर्फ यही विकल्प है कि या तो विदेश में स्थानीय लोगों और अवैध शरणार्थियों के बीच पिसे या भारत लौटकर सामाजिक न्य��य और 'सबका विश्वास' के बीच पिसे।
जनरल क्लास वाले उस हिन्दू के लिए न कोई संगठन है, न पार्टी है, न नेता है, न सरकार है, न समाज है, न देश है और न दुनिया है। वाकई जनरल क्लास वाला हिन्दू इस समय विश्व का सबसे निरीह प्राणी है!
पुतिन की जीजी जी