भरी दोपहरी दोस्तों संग खेलना ।
और घंटों पेड़ो पर बैठे रहना ।
जुगनुओं से जगमगाती वो खूबसूरत शाम ।
और बहुत सारी बातें हो सरेआम ।
सावन में पेड़ो पे झूलों का पड़ना ।
और कटी पतंगों के लिए सबसे लड़ना ।
बारिश में काग़ज़ कि कस्ती कि आज़माइश ।
उस ��चपन को फिर से जीने कि है दिली ख़्वाहिश ।
@Rekhta फुर्सत के लम्हों में कुछ अजीब हुआ,
कोई था दरवाज़��� पे खोला तो दिन से मुलाकात हुई,
मोहब्बत का आलम ये था कि कुछ ही पल हुए थे कि रात ने भी दस्तक दि,
मुंसिफ़ सा बैठा देख रहा था मैं जैसे दोनो मुज़रिम करार हो,
फ़ुर्क़त के इस लम्हे को ता उम्र दोनो ने शाम में कैद किया।
~शाही
#shaam
@Rekhta संतों और बालिदानो कि धरा अद्भुत, समृद्ध लुभावनी दृश्यावली करे मन्त्रमुग्ध।
राप्ती,रोहिणी नदियाँ बहती सर सर,
लोकगीत,लोकनृत्य की परम्परा घर घर।
बिस्मिल के जीवन का यहाँ हुआ अंत, गोरखपुर कि संस्कृति है ज्वलन्त।
~शाही
सुंदर और सुहाने ऋतु का आरंभ कार्तिक मास (अक्टूबर) से होता है,
कुछ पेड़ बस इसी महीने में खिलते है जैसे हरसिंगार,
भोर में ओस कि बूँदे जब हरसिंगार के फूल पे पड़ती है तो उसे उत्कृष्ट बना देती है।
~शाही
@EODB_IN@PMOIndia@ravishndtv@RahulGandhi The World Bank announced on 27 August 2020 that it would pause the Doing Business publication while reviewing data changes for the last five reports and an internal audit of data integrity. Then how can India get 65 ranked in EoDB?
@ravikishann दुनिया का सबसे बड़ा जनसंख्या वाला देश बनने जा रहा है भारत।55.3% युवा आज बेरोज़गार हैं।मंगाई,गरीबी ���र बेरोज़गारी आज अपने चरम पे है। इन मुद्दों पर कौन बात करेगा ? You guys r good for nothing. 😡
मोदी है तो मुमकिन है।
#ModiHaiToMumkinHai
@kavishala मैं गुरूर था,प्यार थी वो।
मैं वीणा था,साज़ थी वो।
मैं नदी था,पतवार थी वो।
मैं हिसाब था,नोटो का अम्बार थी वो।
मैं जज़्बा था,हूंकार थी वो।
मैं शब्द था,कहानीकार थी वो।
मैं मकान था,किराएदार थी वो।
मैं क्षत्रिया था,राणा की तलवार थी वो।
मैं राम था,चौदह बरस का वनवास थी वो।