छात्रों, वकीलों और पत्रकारों के ID कार्ड देखे जा रहे हैं, उन्हें डिटेन किया जा रहा है
लेकिन ये डंडों से भरी कार खुलेआम जंतर-मंतर के आसपास घूम रही है
जब पत्रकारों ने सवाल पूछा तो दिल्ली पुलिस ने कार को सुरक्षित भगाने में मदद कर दी
10 अक्टूबर को दिल्ली में हुए प्रदर्शन को कवर करने के लिए इंडियन एक्सप्रेस हिंदी की टीम ग्राउंड पर मौजूद थी. शाम को लगभग 6 बजे, कवरेज के दौरान विजय और स्वाति की टीम की बातचीत एक पुलिस अधिकारी से हुई. उनके कंधे पर तीन स्टार थे और उन्होंने क्रिकेट के खेल में इस्तेमाल होने वाला हेल्मेट पहना हुआ था.
विजय से बातचीत के दौरान उन्होंने ऐसा दर्शाया कि वो विजय को पहले से जानते थे. विजय ने मना कर दिया. पुलिस अधिकारी ने बातचीत जारी रखी.
इतने में हमारा ध्यान उनके चश्मे पर गया. मालूम पड़ा कि उन्होंने रेबैन के मेटा ग्लासेज़ पहने हुए थे. वो शायद रिकॉर्डिंग भी कर रहे थे. सवाल पूछने पर अधिकारी ने कहा कि वो रिकॉर्डिंग नहीं कर रहे थे.
हमने अपनी फ़ुटेज चेक की तो पाया कि उसी पुलिस अधिकारी की तस्वीरें हमारे कैमरे में कैद हुई थीं. हम वो तस्वीर यहां दिखा रहे हैं.
सवाल ये हैं:
क्या पुलिसकर्मियों को निगरानी रखने या किसी भी और इरादे से, ये स्मार्ट चश्मे दिए गए हैं?
यदि हां, तो क्यों?
यदि नहीं, तो क्या कोई पुलिसकर्मी, ड्यूटी के दौरान, ऐसे स्मार्ट चश्मे पहन सकता है? और लोगों की अनधिकृत रिकॉर्डिंग कर सकता है?
बिना अमित शाह और दिल्ली पुलिस के शह के प्रदर्शनकारियों के बीच गाड़ी में डंडे भरकर कैसे लाया जा सकता है?
क्या कोई दंगा फसाद कराने की साजिश रची जा रही है?
पत्रकार साथी @ImAvdheshkumar की रिपोर्टिंग देखिए, ये भयावह है!
दिल्ली के CP के इनर सर्किल में स्टारबक्स के सामने एक सफेद रंग की baleno जिसका नंबर UP14HA4945 है.
उसमें तमाम जर्नलिस्ट News Laundary के अवधेश, बसंत, दैनिक भास्कर के उदय और तमाम पत्रकार ने आरोप लगाया कि उसमें लाठी और डंडे रखे थे.
पुलिस ने धीरे-धीरे उस गाड़ी को बाहर निकाल दिया.
जब Molitics की रिपोर्टर गीतांजलि ने उस पुलिस कर्मी से सवाल किया जिसने गाड़ी को निकाला तब उसने धक्का देते हुए फोन पटक दिया.
गाड़ी को बिना चेक किए जाने दिया गया.
Report-@Geet_reports
Amid a ruckus created by right-wing groups near Connaught Place, reporters and photographers confronted Delhi Police personnel who were attempting to clear a crowd gathered around a car.
The journalists repeatedly urged the police to inspect the vehicle, particularly its boot, which allegedly contained several sticks. They also questioned why the occupants were carrying sticks in the car.
However, instead of inspecting the vehicle or questioning its occupants, the police allowed the car to speed away.
The incident unfolded amid the continuing police crackdown on protesters demonstrating against Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar in central Delhi.
आज न्यूज़लॉन्ड्री के रिपोर्टर अवधेश ने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े किए. आखिर बार-बार कहने के बावजूद भी कार की चेकिंग क्यों नहीं की गई? @MnshaP
Video credit-Uday Bhatnagar, Dainik Bhaskar
In the presence of at least 1,000 police personnel and paramilitary forces, right-wing goons are declaring that they will wipe out all anti-Modi forces and kill them.
Take note of the 'inaction' of our 'active' police force.
#ChaloDilli
ये वीडियो सोशल मीडिया से प्राप्त हुई है देखकर थोड़ा विचलित हो गया हूं क्या इतनी सस्ती हो गई है सरकारी वर्दी सवाल उठता है इतनी बड़ी संख्या में पुलिस और सुरक्षा बलों की यूनिफॉर्म किसके लिए जा रही है सवाल है कि प्रोटेस्ट के दौरान ये वर्दी क्यों लाई जा रही है क्या साज़िश है इसके पीछे