हमारी टीम खुरपेंच ने जब राष्ट्रपति से सम्मानित और पुरस्कार के नाम पर करोड़ों रुपये पाने वाले अधिकारियों के कार्यों की जानकारी सरकारी पोर्टलों पर जांची, तो गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। कई जगह AI-जनरेटेड तस्वीरें, शादी के कार्ड, और एक ही फोटो को दर्जनों बार अलग-अलग कार्यों के नाम पर अपलोड किया गया पाया गया।
जैसे ही मामला सार्वजनिक हुआ और सवाल उठने लगे, रातों-रात पुराने फोटो हटाकर नए फोटो अपलोड किए जाने लगे। इसके साथ ही खबरों को भ्रामक बताने की कोशिश की गई और PAID ट्वीट्स व नैरेटिव मैनेजमेंट के जरिए छवि सुधारने का असफल प्रयास शुरू हुआ।
लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। खुरपेंच टीम पहले ही सभी सबूत सुरक्षित कर चुकी है—
• स्क्रीन रिकॉर्डिंग
• स्क्रीनशॉट
• पोर्टल के पुराने डेटा
• और स्थानीय लोगों की मदद से जमीनी सत्यापन
हमारा उद्देश्य किसी व्यक्ति या पद को निशाना बनाना नहीं, बल्कि सिस्टम की जवाबदेही तय करना है।
• करोड़ों रुपये के पुरस्कार किन आधारों पर दिए गए?
• गलत और फर्जी डेटा के बावजूद मूल्यांकन कैसे हुआ?
• फोटो बदलने और रिकॉर्ड एडिट करने की अनुमति किसने दी?
• जांच, ऑडिट और वेरिफिकेशन रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं हैं?
खुरपेंच का लक्ष्य स्पष्ट है:
भ्रष्टाचार को जड़ से उजागर करना, Accountability तय कराना, और यह सुनिश्चित करना कि टैक्सपेयर्स के पैसे से बने काम और दिए गए पुरस्कार दोनों सार्वजनिक जांच के दायरे में हों।
हम सबूतों के साथ खड़े हैं।
अब सवालों से बचने का नहीं, जवाब देने का समय है।
मोदी जी और भाजपा की आलोचना आपको देशद्रोही बनाती है ,
राहुल जी और कांग्रेस की आलोचना आपको भक्त और संघी बनाती है ।
दोनों को सच्चाई का आईना दिखाने वाला कोई नहीं है और चाटुकारों ने सभाओं में कब्जा कर रखा है ।
रेलवे का सबसे बड़ा घोटाला अब ऑनलाइन रिमोट लोकेशन बुकिंग।
लाखों लोगों की कन्फर्म/वेटिंग/पूल्ड-कोटा टिकटें रोज़ाना कैंसल हो जाती हैं, पर सुविधा शुल्क वापस नहीं मिलता। ये सफेद लूट बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
यह वक्त है सार्वजनिक हित की आवाज़ तेज़ उठाने का IRCTC एवं सम्बंधित अधिकारियों से माँगें :>
नो टिकट = नो सुविधा शुल्क — अगर टिकट जारी नहीं हुई तो शुल्क तुरंत लौटाना अनिवार्य हो।
रिमोट-लोकेशन और एजेंट कोटे की पारदर्शिता सार्वजनिक हो कौन-कितनी टिकटें किस कोटे में जा रही हैं, यह खुलकर दिखाया जाए।
रद्द/कैंसल टिकटों के लिए ऑटो-रिफंड सिस्टम लागू हो मनमानी देरी बंद हो।
टिकट देने का झूठा वादा करने वाले ऐप्स/एजेंट्स पर सख्त कार्रवाई और भारी जुर्माना।
यात्रियों के हक़ की रक्षा के लिए स्वतंत्र निगरानी और शिकायत निवारण तंत्र शीघ्र लागू किया जाए।
ये केवल पैसों का सवाल नहीं, यह ईमानदारी, न्याय और जनहित का सवाल है।
जब आप टिकट नहीं दे सकते, तो लूटने का कोई अधिकार नहीं। सरकार और रेलवे प्रबंधन को तुरंत कदम उठाने चाहिए। वरना यह व्यवस्था जनता के विश्वास का कत्ल कर रही है।
हम यात्रियों के साथ हैं , पारदर्शिता, रिफंड और जवाबदेही अब अनिवार्य हैं।
🚨 REPOST/SHARE रुकना नहीं चाहिए 🚨
हिंदुओ कब तक इस प्रकार अपने धर्म का अपमान वर्दाश्त करते रहो गे!😡
👉थोड़ी सी भी शर्म बचा है, तो इस पोस्ट को कम से कम "50" बार Quote करके #ShameOnBijnorPolice लिख दो!
Cc:@FanOfJhasiRani1 @SHREERAMSENASN@kajal_jaihind@AvkushSingh
अभी तक खुरपेंच @khurpenchh बीजेपी शासित राज्यों की पोल खोल रहा था |
#YeThikKarKeDikhao का हैशटैग मुख्य रूप से भाजपा शासित राज्यों में ही कार्य कर रहा था |
मंत्री राज्य वर्धन सिंह राठौर से सीधे इस मुद्दे पर भिड गया था |
तमाम आईएएस PCS अधिकारीयों के फर्जी EWS सर्टिफिकेट को सबके सामने ला रहा था |
कथावाचको पर प्रश्न उठा रहा था |
तब तो खुरपेंच बहुत अच्छा आदमी था | सब वाह वाही कर रहे थे | भाजपा वाले जरुर क्रोधित होते थे |
एक पोस्ट कांग्रेस के खिलाफ हुई | उसमे जो डेटा मिला, उसके आधार पर पोस्ट हुई | कोई खुद की उपज तो थी नही |
हा , समझ या ज्ञान की कमी मान सकते हैं | अगर वो गलत हो गया तो ठीक है | गलती हो गयी |
लेकिन सब के सब एक लाइन से संघी, भाजपाई और न जाने क्या क्या बोल रहे हैं | मजे की बात यह है कि ये सब विपक्ष वाले ही हैं | जो दिन रात भाजपा समर्थको पर इनटॉलेरेंस का आरोप लगाते हैं |
लेकिन खुद के अन्दर एक प्रतिशत की सहनशीलता है नही | एक पोस्ट बर्दाश्त नही कर पा रहे | चलो निंदा करनी है, पोस्ट के फैक्ट को रिजेक्ट करना है | तो यह सब करो, लेकिन संघी , भाजपाई बोल कर उसके आज तक किये गए कामो को भी रिजेक्ट कर रहे हो |
कभी कभी सोचते हैं कि ये विपक्ष वाले लोग एक परिवार की गुलामी कैसे कर लेते हैं | फिर ये उसका प्रमाण खुद देने लगते हैं |
मतलब हद्द है |
कल तक खुरपेंच सही था , आज संघी बन गया |
कल से कुछ टुच्चे टाइप के छोट भैया नेता एवं देश–विरोधी सोच वाले लोग सोशल मीडिया पर ऊटपटांग बाते लिख रहे हैं कि,
• अगला नंबर भारत का
• Today Nepal – Tomorrow India
• आज नेपाल जला कल भारत जलेगा
सुन लो जाहिलों –
कभी सपने में भी इसे ट्राई करने की भूल न करना। ये भारत तुम्हारे जैसे गद्दारों का ही नहीं "देश भक्तों" का भी देश है। देश के आन–बान–शान में सीने पर गोलियां खाने का इतिहास रहा है इस देश का। तुम्हारे जैसे चंद गद्दारों को छोड़कर बच्चे बच्चे के दिल में "राष्ट्र प्रथम" के भावना है इस देश में।
याद रखना कि,
जिस दिन तुम "नेपाल फॉर्मूला" ट्राई करने की कोशिश करोगे – तुम्हारा वो हश्र होगा कि तुम्हारी आने वाली सात पुश्तें भी याद रखेगी।
~ साभार: @NCIBHQ
रही सही कसर सरकारी ढांचे के काम न करने ने पूरी कर दी। किसी भी सरकारी संस्थान को देख लो भ्रष्टाचार ने उसकी जड़े खोद दी है। कोई भी नियामक संस्थान अपने ही नियमों को पालन नहीं करवा पता। लेकिन यहां तो सभी को धर्म के नाम पर लड़ाई झगड़ा करने और राजनीति करने में आनंद आता है।
एकदम कटु सत्य है लेकिन बाजारवाद के सिद्धांत ने पूरे भारतीय परिवेश को नष्ट कर दिया है। जब तक किस ने खाने के लिए चीज पैदा की तब तक सब चीज ठीक थी, लेकिन जब से किसान ने बचने के लिए चीज पैदा करनी शुरू की तब से ही स्थिति दुष्कर हो गई है।
देश में शायद ही कोई ऐसा इंसान बचा हो जिसके परिवार में या जानने वाले में किसी की कैंसर से मृत्यु न हुई हो या अभी हाल फिलहाल में पीड़ित न हो ,
कैंसर पेशेंट का पूरा परिवार मेंटली , फिजिकली और फाइनेंशियली सफर करता है ,
बाबा , मौलवी , पैस्टर, ढोंगी ,पाखंडी और झोलाछाप डॉक्टरों ने गंध मचा रखी है , पढ़े से पढ़ा लिखा परिवार भी हॉस्पिटल जाने से पहले एक बार उनके दरवाजे हो आता है , बीमारी को और खराब स्थिति में पहुंचा देता है,
यूट्यूब इंस्टाग्राम पर एक प्रजाति पैदा हो चुकी है जो पत्तियों से लेकर योग को ही कैंसर का इलाज बताने में व्यस्त हैं , देश में कैंसर की फर्जी दवाइयां तक बिक रही हैं, कई बार पकड़ी गईं,
देश में कैंसर एक त्रासदी है , उसके बावजूद भी लोगों को कभी इसके लिए आवाज उठाते हुए, एक होते हुए नहीं देखा, कोई इसपर बात करने को तैयार नहीं है, नेताओं का क्या है जब बीमार होते है तो अमेरिका उड़ जाते हैं, लेकिन आम आदमी के हिस्से वो सही इलाज नहीं है , जिससे वो खुद को बचा सके ।
देश में कैंसर रोगी बहुत तेजी से बढ़ रहे हैं, इसका एक कारण मिलावटी सामान, पैक्ड प्रोसेस्ड फूड्स में मिलाए जाने वाले गैर जरूरी केमिकल्स और और जो जरूरी है उनकी मात्रा अधिक होना ,
ऐसी चीजें को रोकने के लिए FSSAI जैसी संस्था का मजबूत होना बहुत जरूरी है , सरकारों के पास लाडली बहना , सयाने भईया , नाराज भौजी और ढिमका जीजा जैसी योजनाओं में करोड़ों खर्च करने के लिए हैं ,
लेकिन FSSAI जैसी संस्था को मजबूत करने का कोई प्लान और रोडमैप नहीं है।
इन नन्हें हाथों में सिर्फ किताबे होनी चाहिए... इनसे इनका बचपन छीनने का हक़ किसी को नहीं है!
बाल श्रम के विरुद्ध जागरूकता फैलायें और उनके उज्जवल भविष्य में भागीदार बने
#WorldDayAgainstChildLabour
Nothing can describe agony & pain we all are going through 😢
We are a country of over 1.4 bn people. Nothing can divide us. All those terrorists should be brought to Justice & this menace should be extirpated forever.
प्रभु श्रीराम सभी का कल्याण करें 🙏
#PahalgamTerroristAttack
1. This is the most shocking justification of genocidal attacks that minorities are facing in Bangladesh.
Western media always furthers their civilizational interests. It's high time to stop giving even an iota of attention to them.
#WesternPropaganda#BangladeshViolence