इस देश की राजनीति और मोदी जी की चुप्पी पर इससे बेहतर शायद ही कुछ कहा जा सकता है।
गोदी मीडिया को भी आईना दिखाया गया है।
धन्यवाद @shubhankrmishra जी। आपने लाखों लोगों की भावना को शब्द दिए। पत्रकारिता का धर्म यही है।
समर्थक हों या आलोचक सभी से अनुरोध है कि यह वीडियो ज़रूर देखें🙏
आज इस आवाज में दर्द है...
राजवीर सिंह चलकोई को हम सुनते रहे हैं। उनकी बोली में हमेशा एक खनक रहती है अल्हड़पन झलकता है। मैंने इस पूरे वीडियो में देखा कि वो बात कहीं भी नहीं है। क्यों?
क्योंकि हमारे आत्मसम्मान पर चोट ही हुई है
राज्यपाल महोदय ने एक आदेश जारी कर राजस्थान के सभी विश्वविद्यालयों में मराठी के केंद्र खोलने के लिए कह दिया है। दूसरी तरफ वर्षों से राजस्थानी भाषा की मान्यता के लिए संघर्ष कर रहे लोग अभी तक राजस्थान के विश्वविद्यालयों में राजस्थानी के केंद्र नहीं खुलवा पाए हैं। स्कूलों में राजस्थानी की पढ़ाई शुरू नहीं करवा पाए हैं। राजस्थान की राजभाषा नहीं बनवा पाए हैं। पीड़ा तो है। सच्ची है। झलकेगी ही। छलकेगी ही।
राजस्थान वालों के चेहरे पर ऐसा जोरदार झापड़ मारा गया है, जिसका अहसास तो हुआ है लेकिन आत्म गौरव खो चुके लोग यह तय नहीं कर पा रहे कि रिएक्ट क्या करना है और कैसे करना है। इस पीड़ा को सभी सुनें और और सोचें कि हम अभागे लोग कहां खड़े हैं?
वीडियो साभार @republic
माननीय प्रशासन से निवेदन हैकि दौसा राहुवास मे दो नाबालिग बहिनो के साथ असामाजिक तत्वो द्वारा स्कूल जाते समय क्रूरता द्रव्यवार करना,वीडियो बनाकर वायरल करके दो लडकीयो का ही नही लाखो लडकियो के भविष्य मे बाधा डाल रहेहै आरोपी को फांसी की सजा,सभी केघरो पर बुलडोजर चलना.
@PoliceRajasthan
RGHS योजना : OPD को लेकर बड़े बदलाव..!
ओपीडी के अंतर्गत रुपए 2000 के अधिक की जांच करवाने के लिए पूर्व अनुमति लेने से संबंधित
1. 2,000/- तक की कुल लागत वाली नियमित जांच पूर्व-अनुमति प्राप्त किए बिना निर्धारित और संपन्न की जा सकती हैं।
2. जिन मामलों में निर्धारित नियमित जांचों की कुल लागत ₹2,000/- से अधिक हो जाती है, ऐसी जांच करने से पहले आरजीएचएस पोर्टल के माध्यम से पूर्व-अनुमति अनिवार्य होगी।
3. आपातकालीन मामलों में, पूर्व-अनुमति की आवश्यकता नहीं होगी। उपचार करने वाला अस्पताल/चिकित्सक आवश्यक जांच तुरंत शुरू कर सकता है, बशर्ते उचित नैदानिक दस्तावेज और औचित्य आरजीएचएस पोर्टल पर अपलोड किए गए हों।
4. पूर्व-अनुमति के लिए अनुरोध प्रस्तुत करते समय, उपचार करने वाले डॉक्टर/अस्पताल को आरजीएचएस पोर्टल पर निम्नलिखित दस्तावेज अपलोड करने होंगे:
ओपीडी प्रिस्क्रिप्शन/परामर्श पर्ची:
प्रासंगिक चिकित्सीय इतिहास और नैदानिक निष्कर्ष: जहां भी लागू हो, पूर्व जांच रिपोर्टें; और प्रस्तावित जांचों की आवश्यकता को स्पष्ट रूप से दर्शाने वाला नैदानिक औचित्य।
5. तृतीय पक्ष प्रशासक (टीपीए) ऑनलाइन प्रणाली के माध्यम से पूर्व-प्राधिकरण के अनुरोध की जांच और प्रक्रिया करेगा। तत्काल जांच के अनुरोध का निपटारा अनुरोध जमा करने के समय से एक (01) घंटे के भीतर और गैर-तत्काल जांच के अनुरोध का निपटारा तीन (03) घंटों के भीतर किया जाएगा। यदि निर्धारित समय के भीतर कोई निर्णय सूचित नहीं किया जाता है, तो अनुरोध स्वतः स्वीकृत माना जाएगा।
6. सभी निजी सूचीबद्ध अस्पताल, सूचीबद्ध निदान केंद्र, तृतीय पक्ष प्रशासक (टीपीए) और सभी संबंधित हितधारक इन निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करेंगे।
7. यह आदेश 13.07.2026 से प्रभावी होगा और 13.07.2026 को या उसके बाद प्रस्तुत किए गए सभी ओपीडी रूटीन इन्वेस्टिगेशन अनुरोधों पर लागू होगा।
@Kapil_Jyani_ I agree with you Kapil bhai ..
Meri bachi ka 2 din pahle harniya ka opration hua..
Very clean
Fully AC
Coperative behaviour
Minimum expenditure...
@kapiljyani
जब भगवान के नाम पर कथा/प्रवचन करने वाले लोग चार्टर्ड विमान से घूमेंगे,आलीशान बंगलों में रहेंगे,ब्रांडेड कपड़े पहनेंगे और पूरी बेशर्मी से अपनी इस luxury lifestyle का दिखावा भी करेंगे तो धर्म के नाम पर लालच तो बढ़ेगा ही!आज धर्म के नाम पर हर तरफ व्यापार चल रहा है..और ये कथावाचक/प्रवचन करने वाले श्रोताओं को सादा जीवन जीने के उपदेश देते हैं😀 कहां से ये आपको साधु,संत,सिद्ध,महान दिखाई देते हैं? ये सब बस बिज़नेसमैन हैं और इन्हें वैसे ही देखा जाए..पैसे,पद,प्रसिद्धि के लालच में धर्म को बेच रहे व्यापारी🙏
In 2020, at the age of 39, I started my fitness journey (Post Covid) with a simple goal—to become healthier and fitter.
Like many people, I began with enthusiasm, but consistency was difficult. Professional commitments, family responsibilities, and life's uncertainties often interrupted my routine. Eventually, I underwent surgery (2024), which forced me to stop training for a significant period.
June 2025 marked the beginning of a completely new chapter. This time, I wasn't chasing quick weight loss or temporary motivation. I committed myself to consistency, patience, and discipline. My philosophy became simple: Train smart. Eat smart. Sleep well. Repeat every single day.
I followed a structured plan rather than random workouts or crash diets.
Training:
• Strength training 5–6 days per week.
• Progressive overload to preserve and build muscle.
• Cardio as a supplement—not as punishment.
• Daily walking and maintaining an active lifestyle.
• Focus on recovery and mobility.
Nutrition:
• High-protein diet. Homemade food.
• Calorie tracking.
• Lean protein sources.
• Complex carbohydrates.
• Healthy fats.
• Plenty of vegetables and fruits.
• Proper hydration.
Lifestyle:
• 6-7 hours of quality sleep.
• Minimal processed food.
• Limited sugar intake.
• Regular monitoring of body weight.
• Regular blood investigations.
On 1 January 2026, I set myself a meaningful target. I wanted to achieve my best physique before my daughter Vedika’s birthday (27th June). My wife Rudrani made sure that I could achieve my goal. Having a clear deadline made every decision easier. Every workout mattered. Every meal mattered. Every morning weigh-in mattered. Instead of searching for shortcuts, I focused on executing the basics consistently.
The Physical Transformation:
• Weight reduced significantly.
• Body fat dropped to single digits. From >30% to ‘single digit’
• Muscle definition improved.
• Strength was maintained.
• Energy levels increased
However, the biggest transformation was still to come; The Blood Report: Between September 2025 and May 2026, my lipid profile changed dramatically.
Sep 2025. May 2026
Total Cholesterol 278. 158 ✅
LDL. 205.2. 83 ✅
HDL 51. 62.8 ✅
Triglycerides. 109. 61.9 ✅
Health Improvements:
Total Cholesterol ↓ 43%
LDL ↓ 60%
HDL ↑ 23%
Triglycerides ↓ 43%
TC/HDL Ratio: 5.45 → 2.52
LDL/HDL Ratio: 4.02 → 1.32
These results indicate a substantially lower cardiovascular risk. Better metabolic health. Improved cholesterol balance. Better long-term health prospects. Evidence that lifestyle changes can produce measurable improvements.
Some important lessons from my journey are:
• Start, even if you cannot be perfect.
• Focus on habits rather than motivation.
• Train for health first and appearance second.
• Measure progress using blood reports, not just body weight.
• Recovery is as important as training.
• Sustainable nutrition always beats crash diets.
• Small daily improvements create extraordinary long-term results.
If I had to advise someone beginning, I would recommend:
• Get a complete health check-up before starting.
• Set a realistic and meaningful goal.
• Prioritize strength training.
• Eat enough protein every day.
• Walk daily and stay physically active.
• Sleep at least 6-8 hours.
• Track your progress with body weight, waist measurements, photos, and blood reports.
• Be patient—lasting results take months, not weeks.
Looking back, I don't consider losing weight my biggest achievement. The greatest achievement is becoming healthier at 45 than I was at 39. This journey taught me that discipline is more powerful than motivation, consistency is more valuable than perfection, and health is the greatest investment we can make.
स्क्रीन का इश्क Vs बेड का रिस्क
नमिता जोशी
कहते हैं प्यार अंधा होता है, लेकिन आजकल का प्यार अंधा होने के साथ-साथ थोड़ा अंगूठा-प्रधान भी हो गया है। वह दौर गया जब दिल और जिस्म की बात जुबान पर आते-आते रुक जाती थी।आज चाहे भावनाओं का इजहार हो या शारीरिक इच्छाओं का, सब कुछ जुबान तक आने से पहले सीधे अंगूठे से होते हुए वॉट्सऐप की स्क्रीन पर टाइप हो जाता है। चौंकिए मत, यह कोई फिल्मी जुमला नहीं, बल्कि इंटरनेट पर मौजूद दर्जनों मनोवैज्ञानिक रिसर्च और समाजशास्त्रीय अध्ययनों का कड़वा या कहें कि मीठा सच है।
अक्सर माना जाता है कि कपल्स जब एक-दूसरे के सबसे करीब होते हैं यानी जब वे बेड पर साथ होते हैं, तब उनके बीच प्यार और शारीरिक आकर्षण का इजहार पूरे परवान पर होगा। लेकिन हकीकत इसके उलट है। आज के दौर के कपल्स बिस्तर पर एक-दूसरे के बगल में लेटे हुए जितने इमोशनली और फिजिकल ब्लॉक महसूस करते हैं, फोन की स्क्रीन पर वे उतने ही बड़े शायर और बोल्ड रोमियो बन जाते हैं। जो बातें या जो फैंटेसीज वे एक-दूसरे की आंखों में आंखें डालकर बेड पर नहीं कह पाते, उन्हें वे इमोजी, सेक्स्टिंग और हॉट मैसेजेस के सहारे बड़े धड़ल्ले से लिख भेजते हैं। दरअसल जब आप आमने-सामने होते हैं, तो जो मुंह से निकल गया, सो निकल गया। उसे आप डिलीट या एडिट नहीं कर सकते। बेड पर रोमांटिक या हॉट होने के चक्कर में कई बार मुंह से कोई ऐसी अजीब बात निकल जाती है कि पूरे मूड का ही बंटाधार हो जाता है। इसके उलट, जब आप टेक्स्ट पर अपनी फीलिंग्स या डिजायर्स का इजहार कर रहे होते हैं, तो आपके पास पूरा कंट्रोल होता है। आप एक लाइन लिखते हैं, फिर सोचते हैं, नहीं, यह थोड़ी कम अट्रैक्टिव है। आप उसे मिटाते हैं, एक फ़ायर या विंक वाला इमोजी जोड़ते हैं, थोड़ा और हॉट शब्द ढूंढते हैं और फिर सेंड करते हैं। यानी आप अपनी कामुकता और प्यार का बेस्ट, सबसे पॉलिश्ड वर्जन सामने वाले को परोसते हैं। यह एडिटिंग की सुविधा बिस्तर पर उपलब्ध नहीं होती। वहां तो जो है, सो ऑन-एयर लाइव है!
तो आखिर ऐसा क्यों है कि बेडरूम की असली गर्माहट पर स्मार्टफोन की डिजिटल स्क्रीन भारी पड़ रही है? आइए, विज्ञान और रोजमर्रा के जीवन के चश्मे से इस डिजिटल लव-लाइफ का पूरा पोस्टमार्टम करते हैं। मनोविज्ञान में एक बेहद मशहूर टर्म है Online Disinhibition Effect आसान भाषा में कहें तो, जब हमारे और सामने वाले के बीच एक कांच की स्क्रीन आ जाती है, तो हमारे अंदर की झिझक, डर, शर्म और लोक-लाज अचानक गायब हो जाती है। डिजिटल स्क्रीन इंसानों के लिए एक सुरक्षा कवच (Shield of Vulnerability) का काम करती है। बिस्तर पर जब दो लोग साथ होते हैं, तो वहां आई कॉन्टैक्ट और शारीरिक मौजूदगी होती है। सामने वाले के चेहरे के हाव-भाव, उसकी सांसें एक तरह का अदृश्य दबाव बनाती हैं। हमें डर होता है कि अगर हमने अपने दिल की कोई गहरी बात कही या अपनी कोई शारीरिक इच्छा जताई, तो पार्टनर का तुरंत रिएक्शन क्या होगा? कहीं वह हमें जज न करने लगे? कहीं वह रिजेक्ट न कर दे? लेकिन फोन पर आपके पास एक अदृश्य ढाल होती है। इस विषय पर जर्नल ऑफ कंप्यूटर-मीडिएटेड में छपी एक रिसर्च साफ बताती है कि टेक्स्टिंग या सेक्सिटंग कपल्स को अपनी असुरक्षा (Vulnerabilities) को छिपाने में मदद करती है। जो बातें वे बेड पर आमने-सामने बैठकर झिझकने के कारण नहीं बोल पाते, उन्हें वे स्क्रीन के पीछे छिपकर आसानी से लिख देते हैं।
जब हम प्यार के इजहार की बात करते हैं, तो उसमें सिर्फ आई लव यू शामिल नहीं होता, बल्कि शारीरिक स्तर पर एक-दूसरे को चाहना (Physical Expression) भी शामिल है। आज के कपल्स फिजिकल लव के एक्सप्रेशन में यानी सेक्स्टिंग में बेड से कहीं ज्यादा माहिर हैं। अमेरिकन साइकोलॉजिकल एसोसिएशन (APA) की एक प्रसिद्ध स्टडी के अनुसार, लगभग 82% एडल्ट्स मानते हैं कि वे अपने पार्टनर के साथ नियमित रूप से सेक्स्टिंग करते हैं। रिसर्च के मुताबिक, सेक्स्टिंग कपल्स के लिए एक डिजिटल फोरप्ले की तरह काम करती है। कई लोग स्वभाव से शर्मीले होते हैं। वे अपनी वाइल्ड फैंटेसीज, अपनी पसंद या नापसंद को खुलकर नहीं बता पाते। उन्हें लगता है कि सीधे मुंह ऐसी बातें बोलना उनके पार्टनर को अजीब लग सकता है। लेकिन टेक्स्ट मैसेज पर वे अचानक बोल्ड हो जाते हैं। फोन पर वे अपनी हर दबी हुई शारीरिक इच्छा को बिना किसी हिचक के शब्दों में पिरो देते हैं। यह जो टेक्स्ट पर फिजिकल लव का खुलकर इजहार है, वह बेडरूम की पारंपरिक झिझक को तोड़ देता है। लोग स्क्रीन पर जितने सेक्शुअली एक्सप्रेसिव हैं, बेड पर लाइट ऑफ होते ही उतने ही पारंपरिक या शांत हो जाते हैं।
- सिजेरियन डिलीवरी को लेकर हाहाकार क्यों मचा हुआ है?
- ऑपरेशन थियेटर में क्या चल रहा है?
- कोटा, बीकानेर के बाद जोधपुर में क्यों कराह रही प्रसूताएं?
- पेशे से डॉक्टर, हजारों सर्जरी का अनुभव रखने वाली डॉ. शिखा मील बराला ने सारा खेल समझा दिया.
देखिए ये खास बातचीत, कुछ देर में The Litmus के यूट्यूब चैनल पर.
@thelitmusnews@drshikhameel #Jaipur #Rajasthan
सदा न संग सहेलियाँ, सदा न राजा देश।
सदा न जुग में जीवणा, सदा न काला केश।
सदा न फूलै केतकी, सदा न सावन होय।
सदा न विपदा रह सके, सदा न सुख भी होय।
सदा न मौज बसन्त री, सदा न ग्रीष्म भाण।
सदा न जोवन थिर रहे, सदा न संपत माण।
सदा न काहू की रही, गल प्रीतम की बांह।
ढ़लते ढ़लते ढ़ल गई, तरवर की सी छाँह।
Nothing lasts forever....neither happiness nor pain.
सुंदर पिचाई का वह भाषण, जिसकी दुनिया भर में चर्चा है
Google और Alphabet के CEO सुंदर पिचाई ने 14 जून 2026 को अमेरिका की प्रतिष्ठित Stanford University के 135वें Commencement Ceremony में जो भाषण दिया, वह दुनिया भर में चर्चा का विषय है।
सुंदर पिचाई के लिए यह केवल किसी विश्वविद्यालय में दिया गया औपचारिक भाषण नहीं था; यह उस संस्थान में वापसी भी थी, जहाँ वे कभी चेन्नई से आए एक युवा International Student के रूप में पढ़े थे और जहाँ से उन्होंने 1995 में Materials Science and Engineering में Master’s Degree प्राप्त की थी।
+++
दुनिया इस भाषण को दो अलग-अलग कारणों से सुन और पढ़ रही है।
पहला कारण स्वयं भाषण है।
Artificial Intelligence की वैश्विक क्रान्ति के केन्द्र में बैठे व्यक्ति से अपेक्षा थी कि वह AI, भविष्य की Technology और बदलते Job Market पर कोई बड़ा व्याख्यान देगा। लेकिन पिचाई ने जान-बूझकर Technology की भविष्यवाणियों के बजाय मनुष्य के जीवन की बात की।
+++
सुंदर ने युवाओं को तीन सरल और सुंदर नसीहतें दीं—
एक, Optimism चुनिए,
कठिन कामों की ओर बढ़िए
और वह काम कीजिए, जो आपको भीतर से उत्साहित करता है।
उन्होंने यह भी कहा कि जीवन के प्रत्येक निर्णय को बिल्कुल सही कर लेना आवश्यक नहीं; असली बात गिरने, भटकने और अनिश्चित होने के बावजूद आगे बढ़ते रहना है।
दूसरा कारण वह विरोध है, जो भाषण के दौरान सामने आया।
Google के Israeli Government के साथ विवादित Project Nimbus को लेकर कई विद्यार्थियों ने Palestinian Flags के साथ प्रदर्शन किया और समारोह से Walkout किया। इस कारण यह अवसर केवल एक Graduation Speech नहीं रहा; वह Technology की शक्ति, Corporate Responsibility, युद्ध, नैतिकता और युवा प्रतिरोध के टकराव का मंच भी बन गया।
इसीलिए इस भाषण को पढ़ना आवश्यक है। यहाँ एक ओर दुनिया की सबसे शक्तिशाली Technology Companies में से एक का प्रमुख जीवन में आशा और साहस चुनने की बात कर रहा है; दूसरी ओर युवा पीढ़ी उसी शक्ति से नैतिक जवाबदेही माँग रही है। इन दोनों के बीच यह भाषण हमारे समय का एक महत्त्वपूर्ण दस्तावेज़ बन जाता है।
+++
यह भाषण बहुत ही काम का है और इसे यहाँ अविकल दिया जा रहा है। वर्बेटिम :
क्लास ऑफ़ 2026 के लिए दीक्षांत भाषण
President Levin, Provost Martinez, Trustees और Senior Class Presidents—आज मुझे आप सबको संबोधित करने के लिए आमंत्रित करने पर आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।
और प्रतिष्ठित Class of 2026 को मेरी हार्दिक बधाई!
मुझे आप सभी को पहले ही सावधान कर देना चाहिए—यह मेरे जीवन का केवल दूसरा Commencement Speech है।
पहला भाषण मैंने सचमुच अपने घर के पिछवाड़े में दिया था।
वह 2020 की वसंत ऋतु थी। COVID और Lockdown अपने चरम पर थे। हम उन Graduates के लिए एक YouTube Commencement Ceremony रिकॉर्ड कर रहे थे, जिन्हें आप लोगों की तरह अपने परिवार और मित्रों के साथ Graduation का उत्सव मनाने का अवसर नहीं मिल पाया था।
+++
जब मैं उस समय को पीछे मुड़कर देखता हूँ तो मुझे बहुत गहरी बेचैनी का एक दौर दिखाई देता है।
मुझे वह खाली जगह दिखाई देती है, जहाँ दर्शक होने चाहिए थे।
और मुझे वह Haircut भी दिखाई देता है, जो मैंने रिकॉर्डिंग से ठीक पहले खुद अपने हाथों से किया था।
सच कहूँ तो मैं चाहता हूँ कि काश वह दृश्य मेरी याददाश्त से हमेशा के लिए मिट सकता!
लेकिन आज मेरे सामने जो दृश्य है, Graduation वास्तव में ऐसा ही होना चाहिए।
Graduates एक-दूसरे के साथ उत्सव मना रहे हैं। वे उन लोगों के साथ हैं, जिन्हें वे प्रेम करते हैं और जिन्होंने उनकी इस यात्रा में उनका साथ दिया है—आपके माता-पिता, रिश्तेदार, मित्र, Professors और वे सभी लोग, जिन्होंने आपको इस महत्वपूर्ण पड़ाव तक पहुँचने में सहायता की।
आइए, हम उनके सम्मान में एक बार फिर ज़ोरदार तालियाँ बजाएँ।
वे सचमुच इसके अधिकारी हैं!
मैं जानता हूँ कि जिन लोगों की आप परवाह करते हैं, उनमें से हर व्यक्ति आज यहाँ उपस्थित नहीं हो पाया होगा।
आपमें से बहुत से लोग देश और दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से यहाँ आए हैं—ठीक उसी तरह, जैसे कभी मैं आया था।
परिवारों के लिए इतनी दूर यात्रा कर पाना हमेशा सम्भव नहीं होता।
वास्तव में यह पहली बार है जब मेरे माता-पिता किसी ऐसी Graduation Ceremony में उपस्थित हुए हैं, जिसका मैं स्वयं हिस्सा हूँ।
इसलिए मैं विशेष रूप से उनका और आज यहाँ मेरे साथ मौजूद अपने पूरे परिवार का धन्यवाद करना चाहता हूँ।
मैं जानता हूँ कि आज का दिन वह दिन है, जब मुझे आप सभी को सलाह देनी है।
लेकिन पिछले कुछ समय से बहुत से लोग मुझे भी सलाह दे रहे थे कि मुझे यहाँ क्या कहना चाहिए।
असल में उनकी सलाह लगभग एक जैसी थी।
और वह सलाह इस बारे में थी कि मुझे क्या नहीं कहना चाहिए।
लोगों को लगा कि मेरे लिए उस विषय से बचना बहुत कठिन होगा—आखिर वह मेरे surname के आखिरी दो letters, AI, ही तो हैं!
लेकिन पूरी ईमानदारी से कहूँ तो मैं आज जो बातें आपके साथ साझा करना चाहता हूँ, उनके लिए वह विषय बहुत अधिक महत्वपूर्ण नहीं है।
मैंने यह सीखा है कि सबसे उपयोगी और सबसे स्थायी सलाह हमेशा technology-agnostic होती है।
वह किसी एक Technology पर निर्भर नहीं होती।
वह आपके बारे में होती है।
उस जीवन के बारे में होती है, जिसे आप अपने लिए बनाना चाहते हैं।
और उन Choices के बारे में होती है, जो आपको उस जीवन की ओर बढ़ने में सहायता करती हैं।
आपमें से कुछ लोगों को पहले से पता है कि वे अपने जीवन में क्या करना चाहते हैं।
आपको बधाई!
फिलहाल The Rose and Crown को बंद होने तक वहाँ बैठकर आनन्द ले लीजिए—क्योंकि एक बार day job शुरू हो गई, तो ऐसा करना अधिक कठिन हो जाएगा।
और आपमें से बहुत से लोगों को शायद बिल्कुल भी पता नहीं होगा कि वे आगे क्या करने वाले हैं।
यह भी बिल्कुल ठीक है।
+++
मुझे याद है कि अपने Graduation Day पर मैं भी अनिश्चितता से भरा हुआ था।
मुझे ऐसा लगता था कि जीवन बहुत बड़े-बड़े निर्णायक क्षणों की एक कड़ी है।
और मुझे हर क्षण में बिल्कुल सही निर्णय लेने का दबाव महसूस होता था। यह दबाव विशेष रूप से उन high achievers पर अधिक होता है, जिन्होंने हर Grade, हर Paper और हर Exam के लिए पसीना बहाया है।
जिन्होंने Activities, Athletics, Internships और अब अपनी पहली Job तक—हर चीज़ का बिल्कुल सही combination बनाने की कोशिश की है।
लेकिन मैं आपको एक छोटा-सा रहस्य बताना चाहता हूँ।
उस समय ये सारी बातें बहुत महत्वपूर्ण लगती हैं, लेकिन वास्तव में इनके परिणाम उतने निर्णायक नहीं होते, जितना आप समझते हैं।
आप Biology के उस Test में Fail हो सकते थे।
आप कोई Class छोड़ सकते थे।
आप कभी Tuba बजाना नहीं सीखते।
फिर भी बहुत सम्भव है कि आज आप यहीं बैठे होते।
+++
मैं आपको एक कहानी सुनाता हूँ कि मैंने अपने जीवन में यह बात कैसे सीखनी शुरू की।
जब मैं यहाँ Student था, तब मेरा एक Classmate था—उसका नाम Pat था।
वह Long Beach से आया था।
उसने एक कान में बाली पहन रखी थी, जो उस समय मुझे बहुत rebellious और edgy लगती थी।
उसके पास सफेद रंग की two-door Honda Prelude Convertible थी।
जनवरी की एक बुधवार की सुबह थी।
वह Stanford में मेरी पहली Winter Quarter थी।
हम दोनों Class के लिए जा रहे थे।
तभी उसने अचानक मुझसे पूछा—
“Class जाने के बजाय Vegas चलना चाहोगे?”
मैंने अपने जीवन में कभी कोई Class नहीं छोड़ी थी।
और निश्चित रूप से मैंने कभी कोई Road Trip भी नहीं की थी।
वास्तव में मेरे माता-पिता भी यह कहानी आज पहली बार सुन रहे हैं!
लेकिन फिर भी मैंने कहा—
“हाँ, चलो।”
हम वापस अपने Dorm Rooms में गए, कुछ सामान उठाया और यात्रा पर निकल पड़े।
Vegas पहुँचने के लिए पहाड़ों के बीच से होकर जाना पड़ता था।
जब हम पहाड़ों से गुजर रहे थे, तो अचानक बर्फ गिरने लगी।
मैंने इससे पहले अपने जीवन में कभी बर्फ नहीं देखी थी।
मैंने बर्फ को पकड़ने के लिए अपना हाथ कार की खिड़की से बाहर निकाला।
बर्फ के छोटे-छोटे फाहों की कोमलता पर मुझे विश्वास ही नहीं हो रहा था।
Pat ने कार रोक दी, ताकि मैं बाहर निकल सकूँ।
वह दृश्य अत्यन्त सुंदर था।
वह एक ऐसा क्षण है, जिसे मैं जीवनभर नहीं भूलूँगा।
हमारे निकलने के लगभग नौ घंटे बाद हमें दूर क्षितिज पर Vegas की रात की रोशनियाँ दिखाई दीं।
मुझे समझ नहीं आ रहा था कि उस दृश्य के बारे में क्या सोचूँ।
Pat ने मुझे Blackjack खेलना सिखाया।
मैंने पाँच Dollar से शुरुआत की और किसी तरह लगभग पन्द्रह Dollar और जीत गया।
इसके बाद मैंने तुरन्त कहा—
“बस, अब मैं बाहर!”
हमारे पास इतने पैसे नहीं थे कि हम वहाँ अधिक समय तक रुक सकें।
इसलिए अगले दिन हमने वापसी की यात्रा शुरू कर दी।
दिलचस्प बात यह थी कि किसी ने यह तक Notice नहीं किया कि हम Class में नहीं आए थे।
पहली बार मुझे समझ आया कि यदि मैं थोड़ा Relax कर लूँ, तो दुनिया समाप्त नहीं हो जाएगी।
+++
जीवन में आपको अनेक महत्वपूर्ण क्षणों का सामना करना पड़ेगा।
उनमें से केवल कुछ ही क्षण वास्तव में इतने महत्वपूर्ण होंगे कि आपको उनमें सही निर्णय लेना आवश्यक होगा।
जैसे—
जीवनसाथी चुनना।
परिवार शुरू करना है या नहीं, इसका निर्णय लेना।
या Career में कोई बड़ा बदलाव करना।
ऐसे निर्णयों के लिए समय, विचार और स्पष्ट intention की आवश्यकता होती है।
लेकिन जीवन में आपको ऐसे बहुत अधिक क्षण मिलेंगे, जो उस समय बहुत बड़े दिखाई देंगे।
वास्तव में ऐसे हज़ारों क्षण होंगे।
लेकिन उनमें से बहुत कम सचमुच make-or-break होंगे।
College के बाद आपकी पहली Job कौन-सी है?
आप अगली बार किस City में रहने जाते हैं?
आप वह Road Trip करते हैं या नहीं?
ये क्षण आपकी जीवन-यात्रा को रंग, अनुभव और texture अवश्य देते हैं, लेकिन वे बहुत कम अवसरों पर आपके पूरे जीवन की दिशा तय करते हैं।
+++
लेकिन यदि आप शोर के बीच से सही signal पहचानना सीख लें, तो आप इन छोटे-छोटे क्षणों में भी अपने जीवन को धीरे-धीरे उस प्रभाव की दिशा में मोड़ सकते हैं, जो आप संसार पर डालना चाहते हैं। इसलिए आज मैं आपके साथ तीन ऐसे सरल filters साझा करना चाहता हूँ, जिन्हें मैंने अपने जीवन में अपनाया है।
इन तीन filters ने मुझे गलत निर्णयों की तुलना में अधिक सही निर्णय लेने में सहायता की है।
और उन्होंने मेरे ऊपर से हर निर्णय को बिल्कुल perfect बनाने का दबाव भी कम किया है।
तीन फ़िल्टर👇👇👇
👉1. पहला Filter—
Optimism को चुनिए
हो सकता है कि इस समय यह बात आपको बहुत स्वाभाविक न लगे।
दुनिया इस समय अनेक कठिन परिस्थितियों से गुजर रही है—
Global conflicts,
Economic anxiety,
Technology की पूरी संरचना में तेज़ बदलाव,
Information overload,
और यह सब कुछ अत्यन्त तेज़ गति से हो रहा है।
आज की News देखकर यह सोचना बहुत आसान है कि हम इतिहास के सबसे कठिन और सबसे चुनौतीपूर्ण समय में जी रहे हैं।
लेकिन मेरे लिए यह याद रखना उपयोगी होता है कि प्रत्येक Generation ने अपने तरीके से कठिनाइयों का सामना किया है।
हमें यह चुनने का अवसर नहीं मिलता कि हम किस प्रकार की दुनिया में Graduate होंगे।
लेकिन हमें यह चुनने का अवसर अवश्य मिलता है कि हम अपनी परिस्थितियों को किस दृष्टि से देखते हैं।
यह बात मेरे माता-पिता ने बचपन से ही मेरे भीतर विकसित की थी।
मैं भारत के जीवंत शहर Chennai में बड़ा हुआ।
अधिकांश समय हमारा जीवन सुविधाजनक और सन्तोषजनक था।
लेकिन उन शुरुआती वर्षों में हमें कुछ कठिनाइयों का भी सामना करना पड़ा।
हमें भयंकर सूखे की चिन्ता रहती थी।
हम सोचते थे कि पानी का Tanker समय पर आएगा या नहीं।
और हमारे जीवन में Technology बहुत धीरे-धीरे पहुँची।
हमें एक Telephone, एक Television और एक Refrigerator पाने के लिए वर्षों प्रतीक्षा करनी पड़ी।
लेकिन इन सभी चीज़ों ने हमारे जीवन को अपने-अपने ढंग से महत्वपूर्ण रूप से बदल दिया।
मेरे माता-पिता ने कभी हमारी सीमित परिस्थितियों को मेरी कल्पना की सीमा नहीं बनने दिया। यही कारण था कि मैं यह सपना देखने का साहस कर सका कि शायद एक दिन मैं Silicon Valley नाम की किसी दूरस्थ जगह पर काम करूँगा।
जब Stanford से Admission का फोन आया, तो मेरे पिता ने मेरे Plane Ticket के लिए लगभग अपनी एक वर्ष की पूरी Salary के बराबर राशि खर्च कर दी।
वह मेरे जीवन की पहली Plane यात्रा थी।
जब मैं California पहुँचा तो वह जगह बिल्कुल वैसी नहीं थी, जैसी मैंने कल्पना की थी।
मुझे Airport से अपनी Host Family के साथ Highway 280 पर की गई वह पहली Drive आज भी याद है।
जो लोग यहाँ के नहीं हैं, उन्हें बता दूँ कि California को आमतौर पर बहुत हरा-भरा और lush क्षेत्र बताकर प्रस्तुत किया जाता है। लेकिन जब मैंने कार की खिड़की से बाहर देखा, तो दृश्य कुछ अधिक ही…भूरा था।
शायद मैंने यह बात ज़ोर से कह दी थी।
मुझे नहीं मालूम कि मैंने ऐसा क्यों किया।
मेरी Host, Mrs. Jane Earl ने बहुत विनम्रता से मुझे सुधारा।
उन्होंने कहा—
“हम इसे भूरा नहीं कहते। हम इसे Golden कहना पसन्द करते हैं।”
और Optimism को चुनने से मेरा अर्थ बिल्कुल यही है।
इसका अर्थ है किसी परिस्थिति को अधिक सकारात्मक दृष्टि से दोबारा देखना।
जहाँ मुझे भूरा रंग दिखाई दिया, वहाँ उन्हें Golden दिखाई दिया।
दृष्टिकोण में इस छोटे-से बदलाव ने मेरे आसपास की दुनिया को देखने के तरीके पर बहुत बड़ा प्रभाव डाला।
सच कहूँ तो केवल हरे-भरे जंगलों का ही गलत Advertisement नहीं किया गया था।
Brochure में समुद्र भी बहुत गर्म और आमंत्रित करने वाला दिखाई देता था।
यहाँ तक कि Stanford के एक Professor ने मेरे Admission स्वीकार करने से पहले मुझे Email किया और यहाँ के सुंदर Beaches को Stanford आने का एक बड़ा कारण बताया।
इसलिए जब मैं पहली बार Santa Cruz के Beach पर गया, तो बिना कुछ सोचे सीधे पानी में दौड़ गया।
पानी बिल्कुल भी गर्म नहीं था!
बाद में मुझे पता चला कि Atlantic Ocean का पानी कुछ स्थानों पर अधिक गर्म हो सकता है।
और वैसे भी Stanford के ACC—Atlantic Coast Conference—में शामिल होने का यही एकमात्र कारण है, जो मुझे कुछ समझ में आता है!
भूरी पहाड़ियों और ठंडे समुद्र के बावजूद, यहाँ मिलने वाले लगभग प्रत्येक व्यक्ति का जीवन के प्रति सामान्य दृष्टिकोण सकारात्मक था।
शायद इसका कारण यह है कि यहाँ लोग पूरे वर्ष Shorts पहन सकते हैं।
मैं निश्चित रूप से नहीं जानता!
धीरे-धीरे मैंने भी California का यह Optimism अपनाना शुरू कर दिया।
और इसी Optimism ने Stanford में मेरे समय के दौरान मेरे जीवन के एक बड़े Career Pivot से निपटने में मेरी सहायता की।
जब मैं यहाँ आया था, तब मेरा पूरा इरादा PhD करने और Academics में जाने का था।
लेकिन जीवन की योजना कुछ और थी।
मुझे अपेक्षा से पहले नौकरी की आवश्यकता पड़ गई।
इसलिए मैंने अपना Doctorate Programme छोड़ दिया।
Stanford ने उदारता दिखाते हुए मुझे Master’s Degree की आवश्यकताएँ पूरी करने का अवसर दिया।
मैं इसे अपने सपने का अन्त मान सकता था।
लेकिन Mrs. Earl से मिली उस सीख के कारण मैं इस विशेष भूरी पहाड़ी को भी Golden के रूप में देख सका।
+++
👉2. दूसरा Filter—
कठिन समस्याओं पर काम करने की ओर बढ़िए
मैं आपको यह बताना चाहता हूं कि क्या Stanford छोड़ते ही मुझे तुरन्त बड़ी सफलता मिल गई? लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
लगभग एक दशक बाद भी मुझे महसूस होता था कि शायद मैं सही रास्ते पर नहीं हूँ।
अपने कदम जमाने और सही दिशा खोजने में मुझे काफी समय लगा।
फिर मैंने Google में Apply किया। 2004 में मेरा वहाँ Final Interview था। वह April Fool’s Day था और उसी दिन Gmail Launch हुआ था। जब Interviewers ने मुझसे Gmail के बारे में पूछा तो मुझे समझ नहीं आया कि यह कोई Joke है या सचमुच कोई नया Product।
उस समय प्रत्येक व्यक्ति को एक Gigabyte का Free Storage देना अत्यन्त ambitious और लगभग असम्भव-सा विचार लगता था। Google में काम शुरू करने के कुछ वर्ष बाद मुझे भी एक ऐसी समस्या पर काम करने का अवसर मिला, जो देखने में लगभग असम्भव लगती थी।
वह समय था जब Internet एक नए चरण में प्रवेश कर रहा था।
Web साधारण Web Pages से आगे बढ़कर rich applications की दिशा में विकसित हो रहा था।
हममें से कुछ लोगों को लगा कि हम Browser की पूरी अवधारणा को फिर से सोच सकते हैं।
हम एक ऐसा Browser बना सकते हैं, जो पहले से कहीं बेहतर और तेज़ हो। हमारे पास एक शुरुआती Prototype था और हमें लगता था कि वह काफी अच्छा है। लेकिन कम्पनी के भीतर सामान्य सहमति यह थी कि Browser बनाना अत्यन्त कठिन होगा।
इसके लिए सैकड़ों Engineers की आवश्यकता होगी। और हमारी Team में केवल लगभग दस लोग थे।
वह सामान्य सहमति सही थी।
यह काम सचमुच बहुत कठिन होने वाला था।
कुछ अर्थों में हम भोले थे।
लेकिन नई चीज़ों पर काम शुरू करते समय थोड़ा irrational होना भी अच्छा होता है।
2008 में हमने वह Browser Launch किया, जिसे हम एक शानदार Browser मानते थे।
पहले चौबीस घंटों में उसके आठ Million Users हो गए।
Reviews भी अत्यन्त सकारात्मक थे।
लेकिन उसके बाद Users की वृद्धि अचानक रुक गई।
एक वर्ष बाद हमारी Market Share लगभग दो प्रतिशत थी।
मुझे याद है कि Microsoft के CEO Steve Ballmer ने एक Interview में Chrome का मज़ाक उड़ाया था।
उन्होंने उसे एक मामूली rounding error कहा था—अर्थात इतनी छोटी संख्या, जिसका कोई विशेष महत्व नहीं हो।
यह बात हमारी Team का मनोबल तोड़ सकती थी।
लेकिन California Optimism के साथ मैंने अपनी Team से कहा—“यदि वह हमें खारिज करने और हमारा मज़ाक उड़ाने के लिए इतना प्रयास कर रहे हैं, तो इसका अर्थ है कि हम अवश्य कुछ सही कर रहे हैं।”
हमने काम जारी रखा।
Team को लगातार आगे बढ़ाते रहने के लिए हमने अत्यन्त aggressive stretch goals तय किए।
हम तेज़ी से नए बदलाव और सुधार करते रहे।
हम प्रत्येक छह सप्ताह में Browser का नया Version Ship कर रहे थे।
जबकि दूसरे लोग शायद छह महीने या एक वर्ष में एक नया Version जारी करते थे।
धीरे-धीरे सफलता हमारे साथ आने लगी।
कठिन समस्याओं पर काम करने से मैंने बहुत कुछ सीखा है।
कठिन काम आमतौर पर दूसरे प्रतिभाशाली और Optimistic लोगों को भी आकर्षित करते हैं।
और यदि आप अपने तय किए गए बहुत ऊँचे लक्ष्यों को पूरी तरह प्राप्त न भी कर पाएँ, तब भी आप कोई महत्वपूर्ण और शानदार उपलब्धि हासिल कर सकते हैं।
इसलिए जब भी आपके सामने किसी कठिन काम को चुनने का अवसर आए—हाँ कहिए।
+++
👉3. तीसरा Filter—
जब बाकी सारी बातें बराबर हों, तो वह काम कीजिए जो आपको Excite करता है
मेरे लिए वह चीज़ हमेशा Technology तक लोगों की पहुँच रही है।
मेरे परिवार को Technology की जितनी अधिक Access मिली, हमारा जीवन उतना ही बेहतर होता गया।
Stanford आने से पहले मुझे Computer इस्तेमाल करने के बहुत कम अवसर मिले थे।
इसलिए आप मेरे आश्चर्य की कल्पना कर सकते हैं, जब मैं पहली बार Sweet Hall में गया और वहाँ Computers की लम्बी-लम्बी कतारें देखीं।
मैं उन Computers का जब चाहूँ, तब उपयोग कर सकता था।
वह 1993 का वर्ष था।
और Internet सचमुच मेरे चारों ओर बनाया जा रहा था।
मैंने Internet को मानव प्रगति के एक बुनियादी साधन के रूप में देखा।
यह विचार ही मुझे रोमांचित कर देता था कि मैं Internet को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने में कोई भूमिका निभा सकता हूँ। यही कारण था कि मैंने Google का Offer स्वीकार किया।
और यही कारण था कि बाद में मुझे Chromebooks और Android जैसी Projects पर काम करने का अवसर मिला तो मैंने बिना हिचक उसे स्वीकार कर लिया।
+++
कई वर्ष पहले मैं ग्रामीण भारत में महिलाओं के एक समूह से मिला था।
वे पहली बार Android Smartphones का उपयोग कर रही थीं।
वे उनके माध्यम से नए काम और Skills सीख रही थीं।
और दूर रहने वाले अपने प्रियजनों से बात कर पा रही थीं।
मुझे Pittsburgh की एक Classroom की अपनी यात्रा भी याद है।
वहाँ अलग-अलग backgrounds से आने वाले Students उन Products की सहायता से सीख रहे थे, जिन्हें बनाने में मैंने भी योगदान दिया था।
Computing को दूसरे लोगों का जीवन बदलते हुए देखना—ठीक उसी तरह, जैसे उसने मेरा जीवन बदला था—मेरे लिए संसार की सबसे रोमांचक बात थी।
+++
इसलिए जब आप अपने जीवन की राह चुनें, तो अपना ध्यान केवल इन बातों पर मत लगाइए—
आपके माता-पिता चाहते हैं कि आप क्या करें।
आपके सभी मित्र क्या कर रहे हैं।
या Society आपसे क्या करने की अपेक्षा करती है।
इसके बजाय उन बातों के बारे में सोचिए, जिन पर चर्चा करते हुए आप अपने Roommates के साथ देर रात तक उत्साह से जागते रहते हैं।
और फिर उन्हीं कामों को करने निकल पड़िए।
Class of 2026, मुझे सचमुच विश्वास है कि आप इतिहास की अब तक की सबसे अधिक capable Class हैं।
कम-से-कम अगले वर्ष की Class आने तक!
क्योंकि Progress इसी तरह काम करती है।
आपके जीवन में अभी हज़ारों क्षण आने वाले हैं।
महत्वपूर्ण यह नहीं है कि आप उनमें से प्रत्येक क्षण में बिल्कुल सही निर्णय लें। महत्वपूर्ण यह है कि आप आगे बढ़ते रहने का कोई रास्ता खोजते रहें।
कभी-कभी हम किसी अत्यन्त सुंदर स्थान पर पहुँच जाते हैं—जैसे बर्फ से ढका हुआ कोई शानदार पहाड़।
और कभी-कभी हम पहुँच जाते हैं…Vegas!
लेकिन दोनों ही अनुभव एक Gift हैं।
आपके भीतर जीवन की भूरी पहाड़ियों को Golden देखने वाला California Optimism पहले से मौजूद है।
और आपके पास Stanford की Degree भी है, जो यह सिद्ध करती है कि आप कठिन काम कर सकते हैं।
अब बाहर जाइए—
और अपने हृदय को उत्साह की आग से भर दीजिए!
आप सभी को बहुत-बहुत बधाई!
@sundarpichai@Stanford
सुंदर पिचई…!!
बेहतर जीवन जीने के तीन गुर बता रहे है…
•• उम्मीद कभी मत छोड़िए…
•• मुश्किल कामों को पहले ख़त्म किजीए…
•• उत्साहित करने वाले काम को करते रहिए…!!!