लखनऊ की श्रद्धा दुबे मामले में अबतक पुलिस के हाथ हैँ खाली, बड़ा सवाल कौन कर रहा है इस high profile model की नेपाल में मदद, exclusice रिपोर्ट @indiatvnews पे देखिये @lkopolice@sanjayjourno@LkoCp@Uppolice
अमित शाह की अगली कुछ मुलाकात पर नज़र रखिएगा। एक बड़ी खबर आने वाली है । संसद के अगले सत्र से पहले अमित शाह बहुत चौंकाएंगे । जैसा लोग सोचते हैं उससे एकदम अलग यूपी के मुख्यमंत्री की बड़ी भूमिका है । महाराष्ट्र के एक बड़े नेता दिल्ली के लिए रवाना हो चुके हैं। NDA का आंकड़ा रातोंरात बढ़ने वाला है । UBT, TMC के बाद अगला नंबर किसका ? आज रात तय होने वाला है । उत्तर और पश्चिम में हवा बदलने लगी है ।
कौन @narendramodi के Teleprompter के वीडियो बनाता रहता है ? कौन विदेश दौरे पर सीढ़ियों पर नज़र रखता है ? मोदी के स्वागत के लिए जो लोग आते हैं उनके वीडियो कौन बनाता है? उनके बैकग्राउंड कौन चेक करता रहता है ? कौन विदेशी पत्रकारों तक से सेटिंग कर लेता है ? अगले कुछ चैप्टर इसी पर थोड़ी देर में
नरेंद्र मोदी के नए ‘दुश्मन’ : चैप्टर 1- नरेंद्र मोदी कितने घंटे सोते हैं? प्रधानमंत्री प्रेस कांफ्रेंस क्यों नहीं करते ? मोदी के लिए सीढ़ियाँ क्यों avoid की जाती है ? ये सवाल कौन बनाता है? इसका जवाब भी कौन लिखता है ? मोदी के भाषण के दौरान कुछ लोगों को सिर्फ़ teleprompters के वीडियो बनाने के लिए क्यों भेजा जाता है? इस चैप्टर की शुरुआत- जगह नॉर्वे - नॉर्वे की एक पत्रकार Helle Lyng अचानक मोदी के सामने चीखना शुरू कर देती हैं। कुछ खास लोग मोदी की तरफ कैमरा नहीं रखते , उनके कैमरे इस पत्रकार पर ही फोकस रहते हैं ताकि क्लियर ऑडियो वीडियो रिकॉर्ड हो जाए । ये एक सिलसिले की शुरुआत थी । नॉर्वे से ऑस्ट्रेलिया और फिर न्यूज़ीलैंड तक यही करने की कोशिश होती रही। नॉर्वे की पत्रकार celebrate करती रही। इस विदेशी पत्रकार के इंस्टाग्राम पेज को भारत की सिर्फ़ एक पॉलिटिकल पार्टी फ़ॉलो करती है - Guess करने के लिए कोई ईनाम नहीं । वो पार्टी है कांग्रेस । राहुल गांधी उसका पोस्ट शेयर भी करते हैं ।इरादा भी एक : 43 साल बाद भारत के प्रधानमंत्री वहां गए, बहुत बड़ी डील साइन हुई वो ढक जाए और हल्ला-गुल्ला वाली बात छप जाए। अगले चैप्टर में अगले लोकेशन की बात..
UP के एक रिटायर्ड Rto अधिकारी से अकूत सम्पति मिली है विजिलेंस विभाग को, 13 किलो सोना, 9 किलो चाँदी, अंदाजा लगाइये 35 करोड़ की सम्पति बनाने में कितना भ्रष्टाचार किया होगा, Cm yogi का हंटर यहाँ भी चला
@indiatvnews@PiyushPadmakar@Uppolice@AmitabhYash@dgpup
केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के स्टाफ़ क्यों हटाए गए। ज़बरदस्त पतंगबाज़ी चल रही है । राजस्थान से लेकर PMO तक को जोड़ दिया गया। सबको अटकलें लगाने की आज़ादी मिल गई है। जबकि असलियत एकदम अलग है। जो हुआ उसी दफ्तर के अंदर हुआ है । बाहर की दुनिया से इसका कोई वास्ता नहीं । भूपेन्द्र यादव को जो बेहद करीब से जानते हैं उनको पांच दिन पहले ही जानकारी मिल गई थी। सलाह के बाद ही ये फैसला लिया गया ताकि बाकी मंत्रालय के स्टाफ़ भी सचेत हो जाएं ।
नितिन नवीन चैप्टर 4- पहली बार जब दोस्तों ने नितिन को नेताजी कहकर बुलाया: नितिन की बहन की शादी थी। पटना में भारी भीड़ जमा। अपने इलाके में नवीनजी बहुत लोकप्रिय विधायक थे। पक्ष-विपक्ष हर तरफ के लोग शामिल हुए। उस वक्त नवीनजी विपक्ष में थे लेकिन हर पार्टी के नेता और कार्यकर्ता मौजूद दिखे। शादी पटना में थी लेकिन कोई कंपनी या इवेंट मैनेजर हायर नहीं किया गया था। नितिन के ऊपर पूरी जिम्मेदारी थी। नवीनजी विधायक भले थे, लेकिन पूरी फैमिली मिडिल क्लास की तरह ही रहती थी। दुल्हन का भाई नितिन शादी का मैनेजर भी था। इवेंट प्लानर भी। तब तक मैं टीवी पर दिखने लगा था। स्टार न्यूज़ में काम करता था। माइक पर लगातार बोलने की आदत हो चुकी थी। तो नितिन ने कहा-"पीयूष भीड़ संभल नहीं रही है, माइक संभालो। आधे घंटे तक लोगों को थोड़ा गाइड करो।" मैंने अपने अनुभव के हिसाब से माइक और मंच संभाला, लेकिन कुछ खास फर्क नहीं पड़ा। रात नौ बजे के बाद भीड़ और बढ़ गई तब नितिन ने माइक लिया। ये पहला मौका था जब मैंने नितिन को माइक पर बोलते और मंच संभालते देखा। उस रात जब हम मिले तब मैंने कहा- नितिन नेताजी । दो दिन बाद हम सब लौट गए। पता नहीं था, नवीनजी से ये मेरी आखिरी मुलाकात थी। अगली बार जब नितिन मिला तो अस्पताल के सामने खड़ा था। दिल्ली की एक काली सुबह थी। विश्वजीत का कॉल आया था और मैं भागते हुए राम मनोहर लोहिया अस्पताल पहुंचा। तब तक नवीनजी दुनिया छोड़ चुके थे। नितिन को उस सुबह मैंने रोते भी देखा, मजबूत होते भी। संभलते भी देखा और संभालते भी।
नितिन नवीन चैप्टर 3- दिल्ली में दोस्तों के बीच नितिन नवीन का जन्मदिन। तीन दोस्तों ने तय किया कुछ सरप्राइज होना चाहिए। रोज़ सुबह शाम रोटी बनाते, पढ़ाई करते, झाड़ू-पोछा करते-करते सब बोर हो गए थे। तय हुआ आज घर में कुछ अच्छा खाना बनना चाहिए। नितिन को खबर लगी तो उसने कहा मेरे नहीं सभी दोस्तों के बर्थडे के लिए एक ही बजट तय होगा। बजट सर्वसम्मति से तय हुआ दो सौ रुपए। बस छूट इतनी कि जिसका जन्मदिन होगा वो उस दिन खाना नहीं बनाएगा, झाड़ू नहीं लगाएगा। खाना उसके पंसद का होगा। बर्थडे में चार दोस्त और दो सौ रुपए का खाना..यही काफी था नितिन के लिए। करीब आठ नौ महीने बाद नितिन पढ़ने के लिए रांची चला गया। विश्वजीत भोपाल। मैं दिल्ली। दोस्त अलग-अलग शहर में रहने लगे। मेरी और नितिन की अगली मुलाकात शत्रुघ्न सिन्हा जी के घर पर हुई। नवीनजी और मेरे पापा जा रहे थे। नितिन संकोची भी था। लेकिन मैं थोड़ा मुंहफट। मैंने नवीनजी से कहा, मैं और नितिन भी चलते हैं। नितिन थोड़ा सकुचाया लेकिन फिर हम साथ चले। लंच के दौरान वो ज्यादातर चुप ही रहा तो मैंने बाद में पूछा- मैं तो इतना बोल रहा था तुम एकदम चुप क्यों थे। तब उसने एक बात कही जो आजतक याद है। नितिन बोला , "पीयूष बातें सुननी चाहिए। ज़्यादा बोलने में नहीं सुनने में फायदा है। सीखने को मिलता है।" नितिन की ये सीख आजतक मैं अपने ऊपर लागू करने की कोशिश कर रहा हूं। धीरज धरना और सहज रहना मैने उसे देखकर सीखा।
नितिन नवीन चैप्टर 2: जून के बाद अगले कुछ महीने हम साथ ही एक ही कॉलेज में पढ़ने लगे। दिल्ली के IP Extension इलाक़े में मल्टी स्टोरी buildings बनी हैं। रहने का मन तो वहां था। लेकिन मैं, नितिन, विश्वजीत और सीताराम , चार दोस्त मिलकर भी दिल्ली-92 पटपड़गंज के अपार्टमेंट्स में फ़्लैट नहीं ले पाए। मुझे आज भी याद है वाघवा Property डीलर की दुकान थी। बेंच पर मैं और नितिन बैठे थे। सस्ता मकान दिलाने की बात कह रहे थे। उसने पूछा पिताजी क्या करते हैं। मैंने ही नितिन का भी परिचय करवाया । जैसे ही दिल्ली के प्रॉपर्टी डीलर को पता चला किरायेदार के पिता बिहार की राजधानी पटना के विधायक हैं उसने महंगे फ़्लैट दिखाने शुरू कर दिए । बाद में नितिन ने ही कहा, हमारा बजट महीने का दो हज़ार है। पापा इससे ज़्यादा नहीं देंगे। रहना, खाना, कॉलेज जाना, सब दो हज़ार रुपए में करना होगा। इसके बाद अपार्टमेंट में रहना भूलना पड़ा । पश्चिम विनोद नगर के मंडावली इलाक़े में अंदर की गली में आज का बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन अपने तीन दोस्तों के साथ रहने लगा। नौकर या मेड रखने के पैसे थे नहीं। दो दोस्त सुबह सुबह ब्रेकफास्ट बनाते तो बाकी दो दोस्त बर्तन धोते। झाड़ू पोछा लगाते । शुरू शुरू में मैं और नितिन एक साथ ड्यूटी पर लगे। दोनों मिलकर झूठे बर्तन भी धो लेते थे। झाड़ू भी लगा लेते थे। पोछा भी । फिर फटाफट तैयार होकर दो बस बदलकर कॉलेज पहुंच जाते थे । नितिन उस ज़माने में भी चारों दोस्तों में सबसे ज़्यादा अनुशासित और मिलनसार था । झगड़े हमारे होते तो सुलझाता नितिन था ।
नितिन नवीन चैप्टर 1: - नितिन नवीन कौन ? नितिन कैसे यहां तक पहुंचे ? क्या नितिन की तरह कोई और भी 45 साल में बीजेपी अध्यक्ष बन सकता है? नितिन ने आज लखनऊ में अपनी पॉलिटिकल जर्नी के बारे में कुछ बातें बीजेपी नेताओं को बताई। नितिन ने जो बातें नहीं बताई वो बताता हूँ । ये कहानी साल 1998 से शुरू होती है। मैं और नितिन दोनों दिल्ली में ही पढ़ते थे। दोनों ने बारहवीं की पढ़ाई पूरी की। वो CSKM में पढ़ता था और मैं केंद्रीय विद्यालय में। नितिन के पिताजी विधायक थे लेकिन मुझे बहुत मानते थे। मेरे पिताजी और नवीन जी बरसों पुराने दोस्त थे। 1998 के मई और जून के महीने में मैं और नितिन साथ एक ही कमरे में रहते थे। 12वीं पास होने के बाद हम दिल्ली के अलग अलग कॉलेज में दाख़िले की दौड़ में शामिल हुए थे। नितिन विधायक का बेटा था लेकिन घमंड एक पैसे का नहीं। लंच में बीस रुपए की थाली हम शेयर करते थे ताकि दस रुपए बच सके। डीटीसी बस में चलते थे, ताकि ऑटो का किराया बच सके। टैक्सी ले लें, इतनी बात नितिन के मुँह से कभी निकली भी नहीं । उस ज़माने में टैक्सी का मतलब पचास रुपये से ऊपर का खर्च था। हमारे छह सात दोस्त अगर आ जाते तो हम दोनों सोचते थे आज थाली कैसे ऑर्डर की जाए ताकि कम खर्च हो। उस वक्त भी नितिन ने कभी किसी को दिखाने या जताने के लिए भी नहीं कहा - वो MLA का बेटा है । जून महीने से आगे की बात अगले चैप्टर में …
अयोध्या कांड: चंपत चैप्टर 17- चंपत राय को घमंड ही ले डूबा । चंपत सच में खुद को चंपत महाराज समझने लगे। चंपत को दो तीन बार समझाने बुझाने वाले संत कहते हैं ‘चंपतजी ना मोहनजी की सुनते थे ना दत्ताजी की । लखनऊ से तो उनकी पुरानी अदावत थी । दिल्ली में उनके तीन संपर्क सूत्र थे , दो केशव कुंज में और एक नई दिल्ली में । एक बार ऐसा हुआ नागपुर में आधी रात बाद बैठक बुलाई गई। लखनऊ को नहीं बुलाया गया। पुणे ने चिंता जताई। नागपुर के नंबर वन ने चंपत को सख्ती से कहा . दिल्ली ने समाधान सुझाया । पुणे के संत सबूत और पर्ची लेकर आए थे। चंपत नागपुर में मान गए और अयोध्या आकर पलट गए । दिल्ली वाले मिश्रा जी से चंपत की कभी बनी ही नहीं । अगर उनसे बना लेते तो प्रशासन सही चला लेते। अब चंपत प्रायश्चित करना चाहते हैं । 80 की उम्र में एक मौक़ा और चाहते हैं । संघ मौका देगा नहीं। उनके आवास की वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है । अब पछताए क्या होत जब चोर ‘चंपत’ कर गए तिजोरी ।
एक बार फिर लखनऊ का नामी गुंडा भू माफिया वकील के भेष में शातिर अपराधी शरद यादव और उसके गुर्गों का लखनऊ में तांडव जमीन कब्जेदारी के लिए जमीन मालिक पर किया कातिलाना हमला ! बदमाश शरद यादव पर पहले से लखनऊ के सुशांत गोल्फ सिटी,आशियाना,कृष्णानगर,हजरतगंज,
वजीरगंज समेत कई थानों में पहले से दर्ज है लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की अभी तक @LkoCp@Rajeevkrishna69@Uppolice
“दो भाई दोनों तबाही”
बालसखा,रूम पार्टनर,मुश्किल घड़ी में सदैव पास रहने वाले मेरे प्रिय मित्र राजा साहेब @vishalpsing (Editor-@IndiaTVHindi ) जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ मेरे भाई ,बगलामुखी माता सदैव तुम पर कृपा बनाये रखें ,तुम्हें स्वास्थ और दीर्घायु रखें।