अगर सही में थोड़ी सी इच्छाशक्ति और अच्छी नियत होती तो दिल्ली वाले यूं घुट नही रहे होते ।
पॉल्यूशन का तो फिर भी इलाज है लेकिन इसके आड़ में जो हमारे त्योहार के साथ एजेंडा चलाया जाता उसका क्या इलाज है?
कुछ बोलो तो कोई न कोई तरफ वाले नाराज हो जाते हैं।
आज इसी पर चर्चा, शामिल होइए और दिल खोलकर कर अपनी राय दीजिए।
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