🚨 FACT CHECK: RAHUL GANDHI’S CLAIM IS FALSE ❌
At a rally in Pune on August 22, 2026, Rahul Gandhi claimed:
“Boys can take examinations multiple times after the age limit, but the marriage age is 23 for women”.
Reality: FALSE ❌
There is no legal marriage age of 23 for women in India.
Under the law in force before the Modi government, the minimum legal marriageable age was 18 for women and 21 for men. This distinction was retained under the Prohibition of Child Marriage Act, 2006, enacted during the UPA era.
So, the Congress-led UPA government’s legal framework itself maintained the 18-for-women vs 21-for-men distinction.
The Modi government later moved to remove this disparity.
The Prohibition of Child Marriage (Amendment) Bill, 2021 proposed increasing the minimum marriage age for women from 18 to 21, bringing it at par with men.
So Rahul Gandhi’s claim is misleading on two counts:
❌ 23 is NOT the legal marriage age for women.
❌ The UPA-era framework retained the 18 vs 21 gender distinction.
Meanwhile, the Modi government proposed making the minimum legal marriage age 21 for both men and women.
Facts matter. Jhooth Ki Goonj will fact-check them.
यह बच्चा लेफ्ट लिबरल्स के लिए सचमुच सिरदर्द बन चुका है 🔥
गहरी रिसर्च के साथ CJP प्रोटेस्ट को हर तरफ से एक्सपोज़ कर रहा है 🔥
लिबरल्स ने कॉपीराइट स्ट्राइक से उसे चुप कराने की कोशिश की,
लेकिन अब वो उन्हें 10x स्पीड पर पेल रहा है।
उसे और ताकत मिले 🙌🔥
कथित ‘छात्र आंदोलन’ के नाम पर CJP का असली एजेंडा बेनकाब…!
एक तरफ यूपी सरकार को खुली धमकियां, दूसरी तरफ पंजाब के पेपर लीक पर पूरी चुप्पी।
साफ है — इन्हें छात्रों के भविष्य से नहीं, बल्कि छात्रों के नाम पर राजनीति चमकाने से मतलब है।
वीडियो देखिए, पूरा खेल समझ आ जाएगा… ⬇️
बिल्कुल सही सुधीर जी.. मैंने भी ये मुद्दा उठाया था, कल कई चैनल के एडिटर्स को मेसेज भेज के भी रिक्वेस्ट की थी कि छात्रों के साथ खड़े रहते हुए अपने साथियों के साथ खड़े होना भी ज़रूरी है।
ग्राउंड पर रिपोर्टर्स की लिंचिंग का प्रयास एक सुनियोजित तरीके से करवाया जा रहा है और फिर जानबूझकर उसे वायरल भी कराया जा रहा है।
लेकिन अफ़सोस की मीडिया के बड़े बड़े नाम हर बार की तरह इस बार भी फेल हो गए।
जो तुम्हारी कथा दोहराए वो स्वतंत्र…जो ज़मीन का सच दिखाए, वो “गोदी”
आंदोलन तब तक ही जनांदोलन रहता है, जब तक वह असहमति और स्वतंत्र पत्रकारिता…दोनों का सम्मान करता है। जिस दिन कैमरे से डर लगने लगे, उस दिन आत्ममंथन आंदोलन को करना चाहिए, पत्रकार को नहीं….
आज मेरी सहयोगी के साथ जो हुआ, वह केवल एक पत्रकार के साथ अभद्रता नहीं है वह उस लोकतांत्रिक संस्कृति पर हमला है जिसमें पत्रकार का काम घटनास्थल से सच दिखाना होता है न कि किसी पहले से निर्धारित पटकथा का हिस्सा बनना।
कल दिल्ली में जो हुआ वो दुखद और शर्मनाक है। कल रात तक 50 प्रदर्शकारियों और 50 पुलिसकर्मियों के घायल होने की खबर थी।
आज खबर है कि 60 प्रदर्शनकारी और 118 पुलिस वाले घायल हुए हैं।
#DoTook
कल संसद घेराव की आड़ में उस पर हमला करने की
कोशिश की गई।
आज NDA मीटिंग के बाद अमित शाह जी के नेतृत्व में बड़े नेताओं ने संसद में पैदल मार्च करके संदेश दे दिया है कि-
सरकार चट्टान के जितनी मजबूत है, ये विदेशी एजेंडों और फंडो पर चलने वाले अराजक तत्व देश और सरकार को नहीं झुका पायेंगे।
CJP ने जानबूझकर इस मार्च की परमिशन के लिए अप्लाई तक नहीं किया था क्यूँकि उसके पीछे जो भी दिमाग़ है उन्हें पता था कि जब हज़ारों छात्र सड़क पर संसद की तरफ़ बढ़ेंगे तो उनमें कई उपद्रव के मोड में भी होंगे। पुलिस ऐसे लोगों को रोकने के लिए लाठी चलाएगी या आँसू गैस छोड़ेगी तो उन्हें वो नैरेटिव मिल जाएगा जिसका उन्हें इंतज़ार है कि “सरकार छात्रों को पिटवा रही है”
पेपर लीक सिस्टम से परेशान लाखों छात्रों के इमोशन और सेंटीमेंट को यूज़ कर लिया गया। जो वाक़ई शांति से इस दर्द को रखना चाहते थे उनको भी हंगामा करने वाली भीड़ की पहचान दिला दी गई।
एक पक्ष फुल नैरेटिव बना रहा कि सरकार अत्याचारी है, दूसरा पक्ष साबित करने में लगा है कि ये तो छात्र हइये नहीं है। असली छात्र और उनका मुद्दा सन्नाटे में है।
छात्रों को शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफ़ा मांगने पर वाटर कैनन से भगाया जा रहा है।
ये अत्याचारी सरकार की निशानी है या नहीं?
जवाब देने के पहले बस ये जान लीजिए कि ये दिल्ली नहीं केरल का तिरुअनंतपुरम है और वहाँ कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार है।
जवाब अवश्य दीजिए
क्या होना चाहिए देश विरोधी नारे लगाने वालों के साथ ?
उनको मंच देने वालों के साथ ?
पुलिस पर हमला करने वालों के साथ ?
संसद के दरवाज़े बंद करवाने वालों के साथ ?
नेपाल बनाने की धमकी देने वालों के साथ ?
प्रधानमंत्री जी को पीटने की बात करने वालो के साथ ?
@narendramodi मोदी जी ये सब रुकवाइए, अंधा विकास केवल धनवानों के पर्यटन और मजे लेने के साधन है, अभी भी समय है, हम प्रकृति को सहेज सकते है और तरीके से विकास हो सकता है @AmitShah@pushkardhami