सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए राजस्थान अधीनस्थ लेखा सेवा के लेखाकारों की जगह संविदा कर्मी कर रहे हैं काम जिससे विभाग में भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताएं होने की ज्यादा संभावना है @LCYADAV_RAA_@BhajanlalBjp@KumariDiya@DrKirodilalBJP
🅱️™️✍️बजट सुझाव 2026: कर्मचारी कल्याण और सेवा शर्तों में सुधार
1. प्रोबेशनर कार्मिकों के लिए पूरा वेतन और भत्ता
मुद्दा: प्रोबेशन अवधि के दौरान प्रोबेशनर कार्मिकों को केवल एक निश्चित पारिश्रमिक (Fixed Remuneration) दिया जाता है, जो उनके पद के वेतनमान से काफी कम होता है और उन्हें भत्तों (Allowances) से वंचित रखता है। यह एक ही कार्य के लिए असमान वेतन के सिद्धांत का उल्लंघन करता है और प्रोबेशनर कार्मिकों के लिए आर्थिक कठिनाई पैदा करता है।
सुझाव:
प्रोबेशन अवधि के दौरान: प्रोबेशनर कार्मिकों को उनके पद के निर्धारित वेतनमान का पूरा मूल वेतन (Full Basic Pay) तथा सभी संबंधित भत्ते (Allowances) जैसे महंगाई भत्ता (DA), मकान किराया भत्ता (HRA) आदि प्रदान किए जाएं।
उद्देश्य: कार्यबल में समानता और प्रेरणा सुनिश्चित करना, और नए कर्मचारियों को वित्तीय स्थिरता प्रदान करना।
2. 8, 16, 24, 32 वर्ष की सेवा पर MACP (Modified Assured Career Progression)
मुद्दा: वर्तमान में MACP योजना के तहत पदोन्नति के अवसर नहीं मिलने पर 9, 18 और 27 वर्ष की सेवा पूरी करने पर अगली उच्च ग्रेड पे/वेतन स्तर प्रदान किया जाता है। एक कर्मचारी को अपने करियर में चार पदोन्नति/वित्तीय उन्नयन के अवसर मिलने चाहिए।
सुझाव:
MACP योजना का संशोधन: MACP योजना के तहत वित्तीय उन्नयन के लिए सेवा की अवधि को 8 वर्ष, 16 वर्ष, 24 वर्ष और 32 वर्ष किया जाए।
लाभ: इससे कर्मचारियों को उनके सेवाकाल में चार वित्तीय उन्नयन प्राप्त होंगे, जिससे सेवा में लगने वाले ठहराव को कम किया जा सकेगा और उनकी कार्यक्षमता व समर्पण में वृद्धि होगी।
3. पीईईओ स्कूलों में LDC व UDC पद की घोषणा
मुद्दा: पंचायत प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी (PEEO) के अधीन आने वाले स्कूलों में प्रशासनिक और लिपिकीय कार्यों का बोझ काफी अधिक होता है। वर्तमान में इन कार्यों के लिए समर्पित कनिष्ठ लिपिक (LDC) या वरिष्ठ लिपिक (UDC) के पद सृजित नहीं हैं, जिसके कारण शैक्षणिक स्टाफ को प्रशासनिक कार्यों में अधिक समय देना पड़ता है।
सुझाव:
पद सृजन: प्रत्येक पीईईओ स्कूल में प्रशासनिक कार्यों के सुचारु संचालन के लिए न्यूनतम एक कनिष्ठ लिपिक (LDC) और आवश्यकतानुसार वरिष्ठ लिपिक (UDC) के पद सृजित और भरे जाएं।
उद्देश्य: शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों के बोझ से मुक्त करना ताकि वे शिक्षण की गुणवत्ता पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकें।
4. कर्मचारी के लिए एक साल में 12 मेडिकल अवकाश (Medical Leave)
मुद्दा: वर्तमान में लागू चिकित्सा अवकाश नियमों में कर्मचारियों को आकस्मिक स्वास्थ्य समस्याओं या मामूली बीमारी की स्थिति में पर्याप्त सवैतनिक चिकित्सा अवकाश नहीं मिल पाते हैं, जिससे उन्हें अपनी वार्षिक या आकस्मिक छुट्टियों (Casual Leave) का उपयोग करना पड़ता है।
सुझाव:
अवकाश प्रावधान: प्रत्येक कर्मचारी के लिए एक कैलेंडर वर्ष में 12 दिन का सवैतनिक मेडिकल अवकाश (Paid Medical Leave) स्वीकृत किया जाए, जिसे बिना किसी कठोर मेडिकल प्रमाण पत्र के उपयोग किया जा सके (एक निश्चित सीमा तक)।
विशेष प्रावधान: यह अवकाश आकस्मिक अवकाश और अर्जित अवकाश से अलग होना चाहिए।
5. प्रत्येक वर्ग का म्चुअल ट्रांसफर पॉलिसी (Mutual Transfer Policy)
मुद्दा: कई कर्मचारी अपने परिवार, स्वास्थ्य कारणों, या अन्य व्यक्तिगत कारणों से अपने कार्यस्थल से दूर होने के कारण कठिनाइयों का सामना करते हैं। वर्तमान स्थानांतरण नीतियाँ जटिल हो सकती हैं।
सुझाव:
म्चुअल ट्रांसफर की अनुमति: प्रत्येक वर्ग और कैडर के कर्मचारियों के लिए एक स्पष्ट और पारदर्शी म्चुअल ट्रांसफर पॉलिसी (आपसी स्थानांतरण नीति) लागू की जाए।
सरलीकरण: समान पद, वेतनमान और वर्ग के दो कर्मचारी, एक ही सेवा विभाग में, आपसी सहमति और कुछ बुनियादी शर्तों को पूरा करने पर, बिना किसी बाहरी हस्तक्षेप के आसानी से स्थानांतरण कर सकें।
उद्देश्य: कर्मचारियों को बेहतर कार्य-जीवन संतुलन (Work-Life Balance) प्रदान करना और उनके मनोबल को बढ़ाना।
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#budget2026
आपसे कोई थाने, तहसील में रिश्वत मांगे तो रिश्वत मत दिया करो, मोबाइल में कैप्चर कर लिया करो, फिर इलाज करने की गारंटी मेरी है = नरेश मीणा (सुप्रीमो BSS)
@NareshMeena__
“जो तूफ़ानों में पलते जा रहे हैं
वही दुनिया बदलते जा रहे हैं”
राजस्थान के अंता में होने पर विधानसभा उपचुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी श्री नरेश मीणा के नामांकन में शामिल होकर वहाँ की जनता से उन्हें विजयश्री दिलाने के लिये अपील की, वहाँ मौजूद जनसैलाब एक बड़े परिवर्तन का संकेत दे रहा है !
#जय_भीम
#जय_सविधान
@NareeshMeena
“अब हवाएँ ही करेंगी रौशनी का फ़ैसला
जिस दिए में जान होगी वो दिया रह जाएगा”
आज अंता विधानसभा उपचुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी श्री नरेश मीणा के समर्थन में उमड़ा जनसैलाब बता रहा है की ये युवा क्राँति का उद्घोष है !
Naresh Meena
बहुत बहुत धन्यवाद महामानव, पूर्व महाराजा, परम निष्कलंक मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर जी!
आपने आखिरकार “संवेदना” जारी कर ही दी - प्रदेशवासियों का सौभाग्य है कि SMS अस्पताल में मौत हो या कफ सिरप मामला आपकी संवेदनशीलता का प्रदेश क़ायल हो चुका है!
बाक़ी जाँच के आदेश, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा जी पहले ही कर चुके हैं, आप बस जयपुर पहुँचकर बयान की रस्म निभा दीजिए।
यकीन मानिए, गिनीज़ बुक में नाम तो आपका तय है “दुनिया के सबसे ज़्यादा जाँच करवाने और क्लीन चिट देने वाले माननीय मंत्री” के रूप में।
और हाँ, गलती आपके विभाग की कहाँ?
यह तो जनता की मूर्खता है कि वो सरकारी अस्पताल गई, SMS में भर्ती हुई, और सरकारी दवा पी गई।
अब भुगते, यही लोकतंत्र का असली स्वाद है।
एक बार फिर धन्यवाद,
आपका संवेदनशील मौन और जाँच-प्रेम ही इस प्रदेश की असली पहचान बन चुका है।🙏
#Rajasthan
पॉलिटिकल साइंस व्याख्याता भर्ती के अभ्यर्थियों की पीड़ा जैसी उन्होंने बताई है...
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RPSC इससे भी बड़े कारनामे कर रही है।
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राजस्थान लोक सेवा आयोग ने 23 सितम्बर को व्याख्याता भर्ती 2024 राजनीति विज्ञान का परिणाम जारी किया है। 225 पदों के लिए परीक्षा हुई , 46000 लोगों ने परीक्षा दी। उसमें से केवल 6 ही उत्तीर्ण हुए। आयोग के इतिहास का ऐसा रिजल्ट जिसमें कोई कट ऑफ ही नहीं है।
सर जो पेपर 2015, 2018, 2022 की भर्ती में 32 पृष्ठों में सिमट जाया करता था वो इस भर्ती में 64 पृष्ठों में आया। 03 घंटे में प्रश्न पत्र को सिर्फ पढ़ा जा सकता था , बच्चे हल कैसे करते ?
एग्जाम हॉल में हमें पेपर का अत्यधिक कठिन स्तर देख कर लग रहा था कि शायद हमने पढ़े नहीं, हमें लग रहा था कि 100—150 बच्चे तो पास हो जाएंगे, लेकिन 6 बच्चे पास हुए है आप अंदाजा लगा सकते है पेपर का स्तर क्या रहा होगा।
गैर—मनोवैज्ञानिक प्रश्न पत्र था। जब आयोग ने पाठ्यक्रम का विभाजन माध्यमिक , स्नातक , परास्नातक स्तर में वर्गीकृत कर रखा है लेकिन पेपर इस वर्गीकरण से बाहर था।
स्कूल व्याख्याता को 11 वीं , 12 वीं के बच्चों को डील करना होता है , वहां NCERT पुस्तके अनुसंशित है तो फिर उन पुस्तकों से प्रश्न क्यों नहीं पूछे गए ? जबकि पिछली भर्तियों में 150 में से 30 प्रश्न उनमें से आते ही थे।
पेपर सेटर ने कुंठित मानसिकता से पेपर का निर्माण किया है। जिससे हजारों अभ्यर्थी चयन की दौड़ से बाहर हो गए।
आपके निवेदन/आग्रह है आप हमारी आवाज उठाएं ताकि मामला उच्च स्तर तक पहुंचे , ताकि ऐसे घटनाक्रम की पुनरावृत्ति न हो।
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@RPSC1
राजस्थान SI भर्ती घोटाले में हुई गिरफ़्तारी एक और कड़वा सच उजागर करती है कैसे लाखों युवाओं की मेहनत को हर बार धांधलेबाज़ी और भ्रष्ट सिस्टम रौंदता है।ये कोई पहली बार नहीं है, न ही आख़िरी। हर राज्य में पेपर लीक, सॉल्वर गैंग और अधिकारियों की मिलीभगत से परीक्षाएं मज़ाक बन गई हैं।
गिरफ़्तारी तो होती है, पर न चार्जशीट वक्त पर, न सुनवाई, न सज़ा।जमानत मिल जाती है आरोपियों को, और छात्र सालों तक न्याय की राह देखते रहते हैं।
क्या यही है हमारा न्याय तंत्र? धांधलेबाज़ बच जाते हैं, और नौजवान ओवरएज होकर सिस्टम से बाहर हो जाता है।
ये सड़ा हुआ परीक्षा तंत्र देश के भविष्य को लील रहा है।
सवाल ये है क्या कभी इस सिस्टम में वाकई सुधार होगा, या हर छात्र यूं ही लूटा जाता रहेगा?
#ExaminationSystem
SSC परीक्षाओं में अनियमितताओं, निजी एजेंसियों की लापरवाही और महिला अभ्यर्थियों की सुरक्षा में भारी चूक को लेकर कर्मचारी चयन आयोग के अध्यक्ष को विस्तृत पत्र लिखकर तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई की मांग की गई।
सरकार हो या विपक्ष हो हर जगह ग़लत को ग़लत कहने वाले होने ही चाहिए ! और अनुशासन तभी आता है जब ग़लत होने का डर हो परिणाम की चिंता हो ,
नितिन गडकरी जी ने जो कहा उसकी आवश्यकता हर जगह है और सत्ता पक्ष हो या विपक्ष !