My piece:
‘गुजराती अस्मिता’ से ‘मोदी पावर’ तक: क्यों बदल गया कुछ गुजराती पर्यटकों का व्यवहार
मोदी के दौर में, गुजरात के हिंदू समाज का एक बड़ा हिस्सा उन चीज़ों पर गर्व करने लगा—जिनमें हिंसा भी शामिल थी—जिनसे कभी दुख या शर्म महसूस होती थी.
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कायरो
अपने तानाशाहों की चरण पादुकाएँ देखना बंद करो तानाशाहों के पक्ष में लिखीं चमकीली इबारतें
एक दिन अपनी चमक खो देंगी
तुम्हारे द्वारा की गई हत्याओं के पृष्ठ
तृण-पात की तरह उड़ेंगे तब लिखा जाएगा
कि तुमने इतिहास के एक कालखंड में
धूप के क़त्ल की वाचाल कोशिश की थी।
- वसंत त्रिपाठी
@mukeshbudharwi निस्बत-ए-'इल्म है बहुत हाकिम-ए-वक़्त को अज़ीज़
उस ने तो कार-ए-जहल भी बे-उलमा नहीं किया
- जौन एलिया
शासक, ज़ुल्म, बेवकूफी का काम करते हैं, वे अपने उन गलत कामों पर विद्वानों, बुद्धिजीवियों या दरबार से जुड़े 'उलमा' से मुहर लगवाते हैं। जिससे हर कदम ज्ञान, धर्म और न्याय के दायरे लगे