यह गोवा का वीडियो है
दोनों मियां बीवी का बुढ़ापा चरम पर है और पैर भी कब्र में है
इसके बावजूद भी महिला अपने बुजुर्ग ससुर और बेटा अपने बुजुर्ग पिता को बेहरमी से पीट रहा है
अपनी पत्नी को पाप करने से रोकने के बजाय उसका साथ दे रहा है
बस दो-चार साल बाद ही इसके भी बहू बेटे इसे भी ऐसे ही कुत्ते की तरह पीटेंगे
एक आदमी अपना नया घर बनवा रहा था छत और छज्जे का काम लगभग पूरा हो चुका था।
तभी साइट पर आए Civil Engineer ने उससे पूछा,
"छज्जे के नीचे Drip Groove बनवाया है या नहीं?"
आदमी बोला,
"नहीं, मिस्त्री ने कहा इसकी जरूरत नहीं है। इससे क्या फर्क पड़ता है?"
Civil Engineer मुस्कुराकर बोला,
"फर्क अभी नहीं दिखेगा, लेकिन यही छोटा-सा Groove आगे चलकर आपके ₹50,000 से ₹2 लाख तक बचा सकता है।"
आदमी हैरान होकर बोला,
"इतना कैसे?"
Engineer ने समझाया,
"Drip Groove बनाने में मुश्किल से ₹500-₹2,000 का Extra खर्च आता है, या कई बार यह सामान्य Construction में ही कर दिया जाता है।"
"लेकिन अगर यह नहीं होगा, तो बारिश का पानी छज्जे से होकर दीवार से चिपककर नीचे बहेगा।"
"धीरे-धीरे दीवार में Seepage शुरू होगी, Paint उखड़ने लगेगा और Damp Walls बन जाएंगी।"
आदमी ने पूछा,
"फिर कितना खर्च आ सकता है?"
Engineer बोला,
"मान लो 3-4 साल बाद सिर्फ Exterior Waterproofing पर ही ₹20,000-₹40,000 खर्च हो सकते हैं।"
"फिर Paint दोबारा कराना पड़े, तो ₹30,000-₹80,000 और लग सकते हैं।"
"अगर Seepage अंदर तक पहुंच गई, तो Plaster तोड़ना, Waterproofing और दोबारा Finishing मिलाकर खर्च ₹1 लाख से ₹2 लाख तक भी पहुंच सकता है।"
आदमी ने तुरंत मिस्त्री से कहा,
"छज्जे के नीचे Drip Groove जरूर बनाना, इतनी छोटी चीज़ छोड़कर बाद में इतना बड़ा नुकसान नहीं चाहिए।"
उस दिन उसे समझ आया कि घर बनाते समय सबसे जरूरी चीज़ हमेशा महंगी नहीं होती।
कई बार ₹500-₹2,000 की सही Detailing भविष्य में ₹2 लाख तक के Repair Bill से बचा सकती है।
अगर सिर्फ ₹1,000 खर्च करके भविष्य के ₹1-2 लाख के नुकसान से बचा जा सकता हो, तो क्या आप Drip Groove बनवाएंगे?
@PoojaYa53979624@imrajak_ हां बहुत सस्ते मिल जाएंगे पर बिना जाए और बिना सिलेक्शन के नहीं ले सकते, शोरूम वाले थोड़े बहुत अंतर से सभी जगह मिल जाएंगे,, वहां machine (powerloom) से बना समान मिलेगा,,2/4 पीस आप अपने शहर से ही मोल भाव कर ले सकती हैं
एक माला का जाप 108 बार होता है
एकाग्र हो कर जाप करने में कम से कम 5 मिनट का समय लगता है ।
1 घंटा जाप करेंगे तो 1200 नाम जप होंगे ।
(*108 को 100 ही गिना जाता है ।)
8 करोड़ जाप करने में जो समय लगेगा ...
लगभग 66667 घंटे
2778 दिन
7 से 8 वर्ष ...
और उल्लू के घड़ों को भगवान आँखे बंद करते ही चाहिए ...
वाह ..!
#राममंदिर से सम्बंधित विषयों में सबसे बड़ा खलनायक यदि कोई है तो वह #चुपलीमकोर्ट है
मन्दिर की भूमि के
2 तिहाई हिस्से पर स्वामित्व निर्मोही अखाड़े के था
1 तिहाई हिस्से पर स्वामित्व हिन्दू महासभा का था
निर्मोही अखाड़े की और से केस लड़ा गया रामालय ट्रस्ट द्वारा
जिनके समय समय पर प्रतिनिधि और अधिवक्ता अपना अपना पक्ष रखते रहे
इसी प्रकार
हिन्दू महासभा की और से केस लड़ा गया #श्रीरामलला_विराजमान द्वारा
इनके भी समय समय पर प्रतिनिधि और अधिवक्ता अपना अपना पक्ष रखते रहे
दशकों के संघर्षों के उपरांत जब मियांलोर्ड ने निर्णय सुनाया
तो 2 अन्याय हुए
पहला तो जबरन घुसपैठिये को 5 एकड़ दी गई...
दूसरा हिन्दू पक्षकारों को राम मंदिर के स्वामित्व से वंचित कर दिया गया
न्याय यह होना चाहिए था कि चुपलीम कोर्ट द्वारा यह भूमि का स्वामित्व रामालय ट्रस्ट और हिन्दू महासभा को देना चाहिये था
मंदिर बनाने का अधिकार रामालय ट्रस्ट और हिन्दू महासभा द्वारा मिलकर किया जाता जिसमे सन्यासियों के ही लोग ट्रस्ट में होते और इस प्रकार आज धर्म के नाम पर शर्मसार न होना पड़ता।
बाकी मियांलोर्ड बिके हुए थे,
या सरकार ने धमकाया,
मियांलोर्ड को नौकरानी द्वारा ब्लैकमेल करवाया गया आदि यह सब कारण हो सकते हैं
मुख्य विषय वह है जो ऊपर बताया गया है...
निर्णय के उपरान्त सनातनियो को ही इस निर्णय के क्रियान्वयन के दूसरे भाग का विरोध करना चाहिए था
निर्णय 2 भागों में था
पहला भाग
भूमि का दावा हिंदुओं के पक्ष में स्वीकार हुआ
दूसरा भाग
केंद्र सरकार इसके स्वामित्व का अधिकार दिया गया, एवं निर्माण तथा देखरेख हेतु एक ट्रस्ट बनाने का निर्देश दिया गया और सभी नियम बनाने का अधिकार दिया गया,
सनातनियो को दूसरे भाग का विरोध करना चाहिए था
परन्तु
मूर्ख सनातनियो ने मंदिर की इच्छा में
अन्याय को आंखें मूंदकर पागलों की भांति स्वीकार किया
ततपश्चात मैंने पहले भी कई बार लिखा कि हिन्दुओ को बस मंदिर चाहिए
लेकिन लोगों को क्या, कैसे, कब, कौन कुछ नही...
उन्हें तो बस मन्दिर चिये
परन्तु...
अब मन्दिर का शिखर कैसा हो?
ध्वज कैसा हो?
चारों दिशा द्वार कैसे हों?
सिंहद्वार कैसा हो?
प्रतिमा कैसी हो?
प्रतिमा का वास्तु क्या हो?
मन्दिर का वास्तु क्या हो?
गर्भगृह के वास्तु क्या हो?
यह सब विषय भी गौण थे...
उन्हें तो बस मंदिर चाहिए...
इन मामलों से तो सनातनी समाज पूर्णतया अनभिज्ञ है
तो वह इन विषयों पर विचार ही क्यों करेगा भला?
उन्हें तो बस मन्दिर चिये?
कुल मिलाकर मैंने जो जाना ...
उन्हें राम मंदिर चाहिए
भले अयोध्या के सारे मन्दिर तोड़ दो,
सीता रसोई तोड़ दो,
भगवान राम के कुलदेवता रंगनाथ जी का मंदिर तोड़ दो जहां पूरे रघुकुल ने पूजा की हो...
वह सब तोड़ दो ... बस राम मंदिर चिये...
उन्हें काशी विश्वनाथ मंदिर चाहिए
भले काशी के सभी मन्दिर तोड़ दो...
उन्हें मथुरा का मंदिर चाहिये भले
मथुरा वृंदावन पूरा उजाड़ दो...
ऐसे खोखले #हीन्दुत्व का क्या लाभ?
काशी के बाद अब अयोध्या और मथुरा में तोड़फोड़ चल रही है... विकास के नाम पर तीर्थस्थलों को पर्यटन स्थलों,
मौज मस्ती के साधनों से परिवर्तित करने वाले कुंठित विकास ने सब नष्ट कर दिया है।
यह सर्वनाश का सूचक है...
अंत मे एक बड़ी बात
हिन्दू समाज ने अन्याय किया है अपने उन संतों के साथ
जो निष्ठावान और स्वच्छ छवि के थे...
जिन्होंने अपना अधिक से अधिक समय, तन, मन, धन, सर्वस्व लगाकर पूर्ण निष्ठा के साथ मन्दिर की लड़ाई लड़ी...
चुपलिम कोर्ट ने जब यह निर्णय सुनाया
और जिस प्रकार निर्मोही अखाड़ा, श्रीरामलला विराजमान दोनों स्वामित्व पार्टी सहित रामालय ट्रस्ट एवं समस्त सनातनी संतों जिन्हें राम मंदिर के स्वामित्व के अधिकार से दूर फेंक दिया गया... छीन लिया गया...
उस पर हिन्दू समाज ने कभी गौर नही किया...
तो हिन्दू समाज को संतों के साथ इस अन्याय, अपमान का पाप भी किसी न किसी रूप में अवश्य लगेगा
Collective failure
Courtesy lavi bhardwaj fb post
"प्रतिभा हर जगह मौजूद है। मेरिट सिर्फ एक बहाना है जिसका इस्तेमाल विशेषाधिकार प्राप्त लोग हाशिए पर पड़े लोगों को अवसरों से वंचित करने के लिए करते हैं"
-पवन वर्मा
बिल्कुल सही। मेरिट तो बस एक बहाना है।
आखिर परीक्षा में मेहनत करना, कौशल विकसित करना, योग्यता साबित करना और जिम्मेदारी निभाना जैसी चीजें तो सिर्फ विशेषाधिकार वालों की चालें हैं।
अगर मेरिट सिर्फ बहाना है, तो फिर डॉक्टर, इंजीनियर, शिक्षक, जज, वैज्ञानिक और पायलट भी लॉटरी से चुन लेते हैं। क्या फर्क पड़ता है, प्रतिभा तो हर जगह मौजूद है ही।
कड़वा सच तो यह है कि अपनी नाकामी छुपाने और दिन रात मेहनत करने वालों को नीचा दिखाने के लिए 'मेरिट' को गाली देना आजकल का सबसे फैंसी ट्रेंड बन गया है।
इससे समाज में कोई न्याय या समानता तो नहीं आती, लेकिन तालियां बटोरने के लिए एक शानदार राजनीतिक नारा जरूर तैयार हो जाता है।
जो लोग मेरिट को सिर्फ एक ढोंग और बहाना मानते हैं, उन्हें अपना अगला केस लड़ने या अस्पताल में अपना इलाज करवाने के लिए कोई 'बिना मेरिट' वाला ही क्रांतिकारी खोजना चाहिए।
सारा वैचारिक भ्रम एक झटके में टूट जाएगा!
@navneetmishra99 2024 में, 18/20 सीटें गडकरीजी के काम के कारण आ गई, दूसरा बनारस में प्रियंका को खड़े नहीं होने दिया, नहीं तो महामानव के प्याज लहसुन लग जाते,
पीएम बनने का योग गडकरी की भी कुंडली मे है, 2024 के पहले भी कुछ न कुछ बयानी करते थे पर 240 सीट आ गईं, इस बार फिर रायता फैला रहें हैं,
@VermarajuRaju ये एक्जिमा/सोरायसीस जैसा हैं क्या, घाव पानी इत्यादि निकलता है क्या,कृपया dm करें, NO दें, मैं आपकाे बिल्कुल घरेलू मलहम दूंगा, ये ठीक हो जाएगी
अभी कोई क्रीम लगा रहे हैं, उससे कैसे आराम लगता है,बताएं,इंजेक्शन और खाने की दवाई बहुत सोच समझ कर दें, संपर्क करें
1951 मे नेहरू जी की सरकार 38 हजार मंदिरों की संपत्तियों को निजी मठाधीशों और स्थानीय चोरों से बचाने के लिए 'मद्रास हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती (HRCE) अधिनियम, 1951' को पूरी कड़ाई से लागू किया था....................
इस ऐतिहासिक कानून के तहत अकेले तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के 38,00,000 (38 लाख) से अधिक मूल्य की संपत्तियों वाले 38,000 से अधिक मंदिरों को कड़े सरकारी ऑडिट के दायरे में लाकर सुरक्षित किया गया था.................
इसके बाद 1979 में इंदिरा गांधी के कार्यकाल में तिरुपति देवस्थानम (TTD) के लिए विशेष कानून बनाकर यह सुनिश्चित किया गया कि चढ़ावे का एक-एक पैसा सीधे सरकारी खजाने के नियमों के तहत ऑडिट हो..............
कांग्रेस के इसी कड़े और ईमानदार संस्थागत ढांचे के कारण 70 सालों तक किसी भी बड़े नेता या कालनेमी की हिम्मत नहीं हुई कि वे जन-भावनाओं के पैसे और मंदिरों के दान-पात्रों पर डाका डाल सके.................
2014 मे "ये नया भारत है"का नारा देने वाली अनपढ़ मदारी सरकार के दावों की हकीकत को गणितीय आंकड़ों के तराजू पर तौलकर देखिए तो इनका छलावा देखकर खून खौल उठेगा................................
जो सरकार देश के आम नागरिकों से ₹10 के डिजिटल लेन-देन का हिसाब मांगती है, उसने राम मंदिर जैसे महा-अभियान में देश की गरीब जनता से आए ₹3,200 करोड़ से अधिक के भारी-भरकम चंदे का कैग (CAG) या किसी स्वतंत्र सरकारी एजेंसी से आज तक ऑडिट क्यों नहीं कराया?????????????????????
राममंदिर संचालन के लिए बनी ट्रस्ट ने चढ़ावा मे मिले दान के रूप चांदी, सोने की ईंट, आभूषण, नकदी को लेकर कभी सार्वजनिक बयान नहीं दिया, ऑडिट की तो बात ही क्या किया जाए???????
आज सरकार धर्म के नाम पर मन्दिरो का पैसा खा रही है सरकार का मुखिया कहने लगा है कि पैसा हिन्दुओ का है
पैसा खाना हमारा अधिकार है क्या आपने पैसा भगवान को दिया या इन नीन्च निर्लज्ज को दिया जो भगवान का पैसा अपनी अय्यासी के लिये सरकार बनाने के लिये चुनाव लड़ने के लिये प्रयोग कर रहा है
ऐसी नीन्च मानसिकता वाले अय्यास सरकार के उच्च पद से उतार फ़ेको देश अब इन बेइमानो को बरदास्त करने के पक्ष मै नही है
@TriShool_Achuk मेरे जिले में अंग्रेजों द्वारा 100/125 साल पहले डाली 350 km लंबी नैरोगेज ट्रेन लाइन थी, 50 सालों से लोग ब्राडगेज
हेतु mla/MP को
बोलते रहे कुछ नहीं हुआ, सरकार
बदली, देश नैरो से ब्रॉडगेज में
बदल गया, 3 साल में पंजाब तक
ट्रेन जाने लगी आज 4/5
एक्सप्रेस ट्रेन चल रही हैं
अंडे में प्रोटीन होता है जो बच्चों की ग्रोथ के लिए जरूरी होता है कहने वालों एक बात तो बताओ मुझे कि हाथी या जिराफ़ का बच्चा बिना अंडा खाए कैसे विकसित हो जाता है ? कैसे इतना विशाल हो जाता है ? कैसे उसकी ग्रोथ हो जाती है ????
जानवरों की फिजियोलॉजी करीब करीब एक सी ही होती है ।
मनुष्य भी बायोलॉजी के हिसाब से जानवर ही है ।
शुद्ध शाकाहारी भोजन हर लहजे से पोषण से भरपूर होता है ।
आपको शाकाहारी मनुष्यों की ग्रोथ में कोई कमी दिखती है क्या ???
अंडा खाने से मना नहीं कर रहा हूँ लेकिन अंडे का फंडा बना कर राजनीति करने वालों को बेनकाब करना भी जरूरी है ।
आज कल अंडे प्राप्त करने के लिए मुर्गियों को हार्मोंस के इंजेक्शन दिये जाते हैं, ऐसा चारा खिलाया जाता है जिनसे मुर्गियों में फीमेल हार्मोंस का स्तर बढ़ जाए ।
ऐसी मुर्गी के अंडे भी दूषित हो जाते हैं जो अंडे को कार्सिनोजैनिक बना देते हैं । अंडा खाने से शरीर पर दुष्प्रभाव पड़ सकता है । कैंसर से ले कर अन्य शारीरिक रोग व गड़बड़ी होने की प्रबल संभावना होती हैं ।
वैसे फलों का भी यही हाल है । कीटनाशक व अन्य कैमिकल ने अब फलों को भी दूषित कर दिया है ।
इसलिए अंडे को बच्चों को नहीं खिलाना चाहिए।
अंडे के बजाय दूध दही दिया जा सकता है ।
प्रोटीन के लिए सोया और मूंग दाल बढ़िया है ।
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@akhileshsharma1 बहुत सारे खाए जाने वाले सीजनेबल फल, सब्जी इत्यादि की हम चर्चा नहीं करते, ये आहार विशेषज्ञ जानते हैं कि अगर हम इनको suggest करेंगे और लोग इनका सेवन करेंगे तो स्वस्थ ही रहेंगे, जैसे आंवला, एक आंवला ही बहुत ताकत देता है,,मुरब्बा, अचार खाओ,, ठंड में चुकंदर खाओ, ये बहुत एनर्जी देता है
@RamaKRoy ये कभी आपको सीजन में आताआवंला और उससे बना मुरब्बा,,कैंडी, अचार और ठंड में चुकंदर के सेवन हेतु नहीं बोलेंगे
जो instant और long life
फायदेमंद होते है,
ये वाहियात बात मैं टीवी बहसों में कई बार सुन चुका हूँ, और सोशल मीडिया पर तो ऐसी सैकड़ों पोस्ट मिल जाएँगी—
"मुग़ल काल में विश्व GDP का 40% भारत का हिस्सा था"
या
"वैश्विक व्यापार में भारत की हिस्सेदारी 40% थी।"
भाई, यह दोनों बातें एक नहीं हैं, और अक्सर इन्हें जानबूझकर मिलाकर प्रस्तुत किया जाता है।
सबसे पहली बात, विश्व व्यापार में हिस्सेदारी और विश्व GDP में हिस्सेदारी का अंतर समझिए।
- व्यापार में हिस्सेदारी का अर्थ है वैश्विक आयात-निर्यात में हमारा योगदान।
- GDP में हिस्सेदारी का अर्थ है विश्व के कुल उत्पादन और सेवाओं में हमारी हिस्सेदारी।
वर्तमान में वैश्विक व्यापार में भारत की हिस्सेदारी लगभग 3% है, जबकि नाममात्र (Nominal) वैश्विक GDP में हमारी हिस्सेदारी लगभग 3.5–4% है। यदि क्रय-शक्ति समता (PPP) के आधार पर देखें, तो यह लगभग 8% के आसपास पहुँचती है।
अब आते हैं इतिहास पर।
भारत में इस्लामी आक्रमणकारियों के आने से पहले हमारी वैश्विक व्यापारिक हिस्सेदारी लगभग 30% बताई जाती है। हर्षवर्धन काल में विश्व GDP में भारत की हिस्सेदारी लगभग 33% मानी जाती है। बाद में भारत अनेक छोटे-छोटे राज्यों में बँट गया, फिर भी यह हिस्सेदारी लगभग 29% के आसपास बनी रही।
इसके बाद तुर्क और अफ़ग़ान आक्रमणकारी आए। मेरी समझ के अनुसार भारत की हिस्सेदारी घटकर लगभग 24% रह गई। इसी काल में एक नया "उत्पाद" भी जुड़ा—गुलामों का व्यापार।
फिर मुग़ल आए और यह हिस्सेदारी और घटकर लगभग 22% तक पहुँच गई।
ब्रिटिश शासन के दौरान यह गिरावट और तेज़ हुई। अंग्रेज़ी शासन के आरम्भ में भारत की वैश्विक GDP में हिस्सेदारी लगभग 16% थी, जबकि उनके जाने तक यह घटकर लगभग 4.5% रह गई।
अंग्रेज़ों के जाने के बाद जो सत्ता भारत में आई, उसके दौर में भी यह गिरावट लंबे समय तक जारी रही। 1947 से 2000 तक भारत की वैश्विक GDP में हिस्सेदारी लगातार घटती रही और वर्ष 2000 तक हम लगभग 1.5% पर पहुँच गए।
इसके बाद अगले दशक में कुछ सुधार हुआ और 2014 तक यह लगभग 2.5% तक पहुँच गई।
वर्तमान सरकार के दौरान आर्थिक बदलावों का क्रम जारी रहा और आज हम फिर लगभग 4% के आसपास पहुँच गए हैं, जहाँ हम 1947 के आसपास हुआ करते थे।
पिछले लगभग 1000 वर्षों के इतिहास में यह पहली बार हुआ है कि बीते दो दशकों में भारत अपनी वैश्विक GDP हिस्सेदारी बढ़ाने में सफल रहा है। अन्यथा हमारा ग्राफ़ लगभग हमेशा नीचे ही जाता रहा था।
मेरे द्वारा दिए गए प्रत्येक आँकड़े को आप अपनी पसंद की किसी भी कसौटी पर परख सकते हैं।
क्योंकि सच तो बस इतना ही है।
बाकी किस्से हैं, सुनते रहिए!
श्री राम मंदिर के दान में भ्रष्टाचार -
१. जहाँ धन होगा वहाँ चोर भी आएंगे ।
कॉमर्स ऑनलाइन हुई तो लूटने वाले भी ऑनलाइन हो गए। इस दुनिया में बिना कमाये खाने की इच्छा रखने वाले सदैव रहेंगे।
इसलिए यदि भ्रष्टाचार से डरेंगे तो पूरी सरकार को ही बंद करना पड़ेगा क्यूँकि ऐसा कोई विभाग नहीं है जिसमें भ्रष्टाचार ना होता हो।
२. भ्रष्टाचार है या चोरी होती है तो इसका यह अर्थ नहीं कि डकैतों को छुट्टा छोड़ दें या उन्हीं को सत्ता दे दे।
जेब कट जाती है तो ना हम घर से निकलना बंद कर देते है, ना जेब में पैसे रखना बंद कर देते है, और ना ही जेबकतरो को जेब काटने की स्वतंत्रता दे देते हैं।
३. घर में भी चोरी हो जाती है तो हम कमाना या धन रखना बंद नहीं कर देते।
ना ही घर के दरवाजे खुले छोड़ देते है कि और भी चोरी हो, ना ही घर को ढहा देते है।
बल्कि हम सावधान हो जाते हैं।
सुरक्षा की व्यवस्था करते हैं।
पुलिस को सूचित करते हैं, चोर पकड़े जाते है उन्हें दंड मिलता है।
४. श्री राम मंदिर के पवित्र दान पात्र से चोरी का एक ही अर्थ है: सावधानी कम थी।
ये होता है अधिक प्रसन्नता में।
सावधानी हट जाती है। इसीलिए दुर्घटना हुई।
अब श्री राम मंदिर में ही नहीं, हर मंदिर के धन की सुरक्षा व्यवस्था सशक्त की जाए ।
गिद्धों व कौवों से धर्म को बचाना हमारा दायित्व है।
चोरी और भ्रष्टाचार तो होगा । पर क्या हम एक समाज के रूप में उस से लड़ सकते हैं ?
यही प्रश्न बहुत कुछ निर्धारित करेगा ।
जय जय श्री राम
@ramakantfbx@RailMinIndia@IRCTCofficial It is totally allowed to record videos in Trains and Station till u dont interfare with safety or train operation. Railway board has clarified this in circular number 2018/pr/10/24 .
So, TTE is neither running train nor any safety issue. So, u have very right to record.