इस वीडियो में तथाकथित दलित, पीड़ित, शोषित और वंचित समाज के लोगों द्वारा दिए गए कुछ बयानों को भी हम दिखाएंगे, ताकि यह सामने आ सके कि किस तरह की विकृत मानसिकता के साथ कुछ लोग सवर्ण समाज की बहू-बेटियों को देखते हैं और उन पर अधिकार जताने की बात करते हैं।
सारे बयानों को हमें दोबारा देखने और समझने की जरूरत है।
Filing SC Act Cases While Salivating Over Savarn Girls, Ajeet Bharti Exposes Hypocrisy
देखिए कैसे ये एक्ट पैसे कमाने का जरिया बन चुका है!
लोग फ़र्ज़ी केस कर के लखपति बन रहे हैं औऱ सरकार इस एक्ट के दुरूपयोग पर लगाम लगाने की बजाए, उल्टा मुआवजा 40% और बढ़ा रही है!
#StopMisuseOfSCSTAct
भीम आर्मी का गुंडा, पुलिस के सामने कह रहा है-
"पहले मेरी शादी ब्राहमण, ठाकुर या गुर्जर समाज की बेटी से कराओ, तब ख़ुद को हिंदू मानूंगा"!
और इसके समर्थक वाह, वाह कर ताली बजा रहे हैं!
और आज ये लोग रो रहे हैं कि हमारी महिलाओं का अपमान हुआ?
क्यों भाई,
दूसरों की बहन बेटियों का अपमान करते समय ये सब याद नहीं आता??
भाई "अजीत भारती जी" मात्र एक पत्रकार ही नहीं बल्कि हम लाखों "राजनैतिक अछूतों" की बुलंद आवाज है☝️
भाई अजीत भारती की स्वर्गीय माँ पर अभद्र टिप्पणियाँ करने वालों की खाल खींच ली जायेगी
और महिला सम्मान पर राजनीति करने वाले दलालों...
अपनी गिरेहबान में झांक कर देखो -
तुम तो खुले मंच से - ब्राम्हणों की बेटियों को खीचने और संबंध बनाने जैसी वहशियाना हरकतें करने पर उतारू थे
माँ - बहिन और बेटी का सम्मान एक बराबर ही होता है - फिर चाहे वो दलित के घर की हो, ब्राम्हण के घर की हो या ठाकुर के घर की हो... लेकिन तुम नहीं समझोगे
अरे थू है तुझ जैसों की राजनीति पर...
तर्क: हमारे साथ 5000 वर्षों से डिस्क्रिमिनेशन हुआ। अतः आरक्षण सकारात्मक डिस्क्रिमिनेशन है और उचित है।
उत्तर: हिन्दुओं का नरसंहार मुगलों के समय में हुआ, बलात्कार हुआ, गाँव जलाए गए। यह 4-500 वर्ष पहले की ही बात है। तो क्या वर्तमान मुसलमानों का, उपरिलिखित तर्क से, नरसंहार उचित हो जाएगा?
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इस पर तुरंत भीम वाले पगला जाएँगे कि ऐसे कैसे तुम आरक्षण के डिबेट में लॉजिकल बातें ले आते हो। आज तक ये 5,000 वर्ष का कोई भी प्राइमरी सोर्स ले कर आए नहीं। और उस समय किसने किया, क्या किया, मैं उसका लोड क्यों लेता फिरूँ?
जिन जातियों को आरक्षण से हटाने के लिए 1960 के ही दशक में सिफारिश हुई, वो आज तक टिकी हुई हैं लिस्ट में, सबसे अधिक आरक्षण खा रही है। जिन जातियों को मुगलों के समय में जमींदारी दी गई, वो आज ओबीसी लिस्ट में हैं।
यदि सरकार को लगता है कि ये सारे डॉक्यूमेंट प्रधानमंत्रियों के तकिए की खोली में रखे होते हैं, तो वो भूल जाएँ। ये सब सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आँकड़े और तथ्य हैं।
‘व्हाइट पेपर’ तो लाना ही होगा। नहीं लाओगे तो हम निकलवा लेंगे या ऐसे आँकड़े रख देंगे जो तुम्हें और भी असहज करेगा।
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एक बात संघ के लिए भी है: मूर्ख बनाना बंद करो ये सब लीक करवा कर कि ‘UGC पर तो हमें न उगलते बन रहा, न निगलते’। यह ऐसा स्तरहीन तर्क है कि सामने मिले ऐसा आदमी तो पूछूँ कि तुम्हारी बुद्धि घास चरने चली गई?
इसमें ‘उगलना-निगलना’ क्या है? सीधा वक्तव्य यह दो: “आज के संदर्भ में, जब विश्वविद्यालयों की दीवारों पर सवर्णों के नरसंहार की बातें लिखी जाती हैं, हर सप्ताह कब्र खुदने के नारे लगते हैं, तो यह मानना अनुचित है कि उनको लेकर जातिगत घृणा नहीं है। अतः उन्हें भी इस लिस्ट का हिस्सा होना चाहिए।”
तत्पश्चात्, इसमें एक और बिन्दु जोड़ा जाए: यदि कोई भी शिकायत झूठी निकली, उस पर दोगुना जुर्माना और जेल का दंड होगा।
ऐसा कोई रॉकेट साइंस नहीं है।
IAS संतोष वर्मा के इस आपत्तिजनक बयान का समर्थन सांसद चंद्रशेखर आज़ाद ने खुलकर किया था।
अगर अजीत भारती के कमेंट पर कानूनी कार्रवाई की जा रही है तो फ़िर इस बयान पर कार्रवाई कब होगी?
"हम नगरपालिका में सफाई कर्मचारी का काम करते हैं, अभी टॉयलेट साफ करके आ रहे हैं, नाम में सरनेम भी नहीं लगाते! हम गरीब के बच्चों का कौन सोचेगा?
क्या हम वंचित नहीं, हमको किस बात की सज़ा मिल रही है?"
-ये कहना है एक राजपूत जाति के युवक का
ये हाल हो गया है आज GC का, आखिर उनके इस दुख से किसी को क्या खुशी मिलती है?
ये कैसा सामाजिक न्याय है??
आपको सवर्णों का ठेकेदार किसने बनाया??
इतने सालों में आपने सवर्णों के हितों के लिए एक भी आवाज़ उठाई?
अगर नहीं,, तो आपको कोई हक नहीं ये बोलने का कि सवर्ण किसके लिए आवाज़ उठाएं और किसके लिए नहीं!
क्योंकि आप सवर्ण नहीं, सिर्फ एक नेता हैं!🙏
आजकल जेन जी में कमाल का कॉन्फिडेंस आ गया है। उन्हें पता चल गया है कि वो जेन जी हैं और वो कहीं भी घुस सकते हैं, कहीं पर भी खड़े होकर घोषणा कर सकते हैं। पार्लियामेंट तक हमारी बात पहुंचेगी।
इधर अभिजीत दीपके स्कूलों को ठीक करने की मुहिम चला रहा है, जबकि खुरपेंच दो साल पहले से कर रहा था। खाली बैठा था, देश में असंतोष दिखा तो दूसरों की सुलगाई आग में फूँक मारना आरंभ किया।
विकसित भारत का स्वप्न कौन नहीं देखना चाहता? लेकिन कभी यह भी तो बताइए कि विकसित भारत बनेगा कैसे?
“अगर विकसित भारत का स्वप्न देखने वाली सरकारें 60–70% से अधिक आरक्षण की नीतियों का समर्थन कर रही हों, तो भाई किस हिसाब से 2047 तक विकसित भारत की बात कर रहे हो?”
मोदी जी पहले आए, “पाँच साल दे दो मित्रों।” फिर आए, “पाँच साल दे दो मित्रों।” अब, “2047 दे दो मित्रों।”
हम 2047 भी दे देते हैं, लेकिन कोई यह नहीं बता रहा कि वहाँ तक पहुँचेंगे कैसे।
और मैं आपको बता रहा हूँ कि certainly क्यों नहीं पहुँचेंगे, आरक्षण के कारण।आरक्षण की मात्रा बढ़ने से विकसित भारत नहीं बन सकता!
जिस देश की संस्थाएँ, IITs, IISc, IIMs और अन्य उच्च शिक्षा एवं शोध संस्थान, गुणवत्ता और रिसर्च को लगातार मजबूत करने की जरूरत महसूस कर रहे हैं;
81.35 करोड़ लोगों को PMGKAY के तहत मुफ्त खाद्यान्न दिया जा रहा है। सवाल मुफ्त राशन देने का नहीं है, सवाल यह है कि इन्हें पंगु क्यों बनाया जा रहा है?
आज भी बड़ी संख्या में बच्चे higher secondary level तक नहीं पहुँच पाते। 2023-24 में higher secondary का Gross Enrolment Ratio 56.2% था, जो 2025-26 में बढ़कर 61.7% हुआ है। यानी सुधार हुआ है, लेकिन अभी भी बहुत लंबी दूरी तय करनी है।
आप 2047 का विकसित भारत का सपना दिखा रहे हैं, तो हमें यह भी बताइए कि वहाँ तक पहुँचेंगे कैसे?
सिर्फ timeline बताने से देश विकसित नहीं होता।
ये रहा आईने अकबरी👇
मुग़ल काल में जिन जातियों को ज़मींदारी मिली उनमें हैं
-अहीर
-जाट
-गुर्जर
-कुर्मी
और आज ये सब जमींदार "पिछड़े" बनकर आरक्षण ले रहे हैं!
है ना कमाल??
SC/ST Act के दुरुपयोग पर बहस क्यों जरूरी है? अजीत भारती प्रकरण इस सवाल को फिर सामने लाता है।
मामला समझिए।
रिपोर्टों के अनुसार, अजीत भारती को लेकर एक टिप्पणी की गई थी, जिसमें उनकी बहन की शादी सांसद चंद्रशेखर आज़ाद से कराने की बात कही गई। जवाब में भारती ने आपत्तिजनक और तीखी भाषा का इस्तेमाल किया। इसके बाद उनके खिलाफ SC/ST Act समेत अन्य धाराओं में FIR दर्ज हुई।
अब सवाल यह नहीं है कि अजीत भारती की भाषा उचित थी या अनुचित—सवाल यह है कि क्या हर आपत्तिजनक टिप्पणी को जाति आधारित अपराध की धाराओं तक ले जाना कानून के उद्देश्य के अनुरूप है?
SC/ST Act का उद्देश्य ऐतिहासिक रूप से उत्पीड़न और भेदभाव का सामना करने वाले समुदायों को कानूनी सुरक्षा देना है। इसलिए इस कानून की जरूरत और उसकी गंभीरता पर कोई सवाल नहीं होना चाहिए।
लेकिन लोकतंत्र में एक दूसरा सवाल भी उतना ही महत्वपूर्ण है—क्या किसी कड़े कानून का इस्तेमाल अभिव्यक्ति, व्यक्तिगत विवाद या राजनीतिक विरोध के मामलों में इस तरह किया जा सकता है कि आरोपी को मुकदमे और गिरफ्तारी की प्रक्रिया ही सजा जैसी लगने लगे?
अजीत भारती का मामला अभी न्यायिक निष्कर्ष का विषय है।
लेकिन यह मामला एक बड़ी बहस जरूर खड़ी करता है—
कानून कमजोरों की ढाल बने, किसी को डराने का हथियार नहीं।
और अगर किसी कानून के दुरुपयोग की आशंका है, तो उस पर सवाल उठाना कानून का विरोध नहीं, बल्कि कानून को और निष्पक्ष बनाने की मांग है।
आज सवाल अजीत भारती का है, कल आपका भी हो सकता है।
इसीलिए इस बहस को व्यक्ति से ऊपर उठाकर कानून और उसके इस्तेमाल के स्तर पर देखिए।
#StopMisuseOfSCSTAct
@HimanshuValmi13 अजीत भाई का झां$ का बाल नहीं उखाड़ पाओगे बे...
माननीय रावण, अगर दूसरे समाज के बारें में जहर उगलेंगे तो तत्काल
आदरणीय और पूजनीय से - तुरंत मादरणीय और जूतनीय बना दिये जायेगे ☝️
अगर सरकार SC/ST एक्ट से फ्री मुआवजा हटा दे, तो अपने आप फ़र्ज़ी SC/ST केस कम हो जाएगा।
लेकिन सरकार की हिम्मत देखिए।
मुआवजा ऐसे बांट रहे है, जैसे पैसा पेड़ पर उग रहा हो।
अगर किसी के साथ कुछ ग़लत भी हुआ है, तो दोषियों पर कार्यवाही करो।
उसको पकड़ो और जेल में डालो।
पैसा क्यो बांट रहे हो भाई 🤷🏻♂️
क्या बाक़ी सभी केस में भी पैसा बांटा जाता है ?
शायद भारत में ज़्यादा पैसा आने लगा है, क्योंकि दुनिया के किसी भी देश में ऐसे फ्री पैसा नहीं बांटा जाता।
#StopMisuseOfSCSTAct
भाई "अजीत भारती जी" मात्र एक पत्रकार ही नहीं बल्कि हम लाखों "राजनैतिक अछूतों" की बुलंद आवाज है☝️
भाई अजीत भारती की स्वर्गीय माँ पर अभद्र टिप्पणियाँ करने वालों की खाल खींच ली जायेगी
और महिला सम्मान पर राजनीति करने वाले दलालों...
अपनी गिरेहबान में झांक कर देखो -
तुम तो खुले मंच से - ब्राम्हणों की बेटियों को खीचने और संबंध बनाने जैसी वहशियाना हरकतें करने पर उतारू थे
माँ - बहिन और बेटी का सम्मान एक बराबर ही होता है - फिर चाहे वो दलित के घर की हो, ब्राम्हण के घर की हो या ठाकुर के घर की हो... लेकिन तुम नहीं समझोगे
अरे थू है तुझ जैसों की राजनीति पर...
भाई चंद्रशेखर आजाद जी हमारे पार्टी के मुखिया ही नहीं, बल्कि करोड़ों शोषित-वंचित लोगों की मजबूत आवाज़ हैं, उनपर और परिवार के खिलाफ अभद्र, जातिसूचक एवं अपमानजनक टिप्पणी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
FIR के बाद अब दिल्ली पुलिस जल्द अजीत भारती अरेस्ट करें कानून भाषा में समझाए नहीं तो भीम आर्मी इसे अपनी भाषा में तो जरूर समझाएगी।
हमारे नेता @BhimArmyChief के सम्मान से कोई समझौता नहीं होगा।
@SunilAstay ये जो धमकी तू दे रहा है वो संवैधानिक है..??
और अभी कोई तुझे जुतिया देगा तो दलित उत्पीड़न है - SCST_ACT है
बस इसी बात की लडाई है☝️
तुझ जैसे तमाम चवन्नी छाप नेता मिलकर भी अजीत भारती का कुछ उखाड़ ना पायेंगे😜
कायर और बुजदिल और मुर्दा सवर्ण समाज के नेताओं से बेहतर तो बाबा रामदेव जी निकले हैं, एक बयान में रामदेव जी ने कहा है यदि SC/ST का अपमान संविधान का अपमान है तो ब्राह्मण का भी अपमान संविधान का अपमान है, ब्राह्मण को जो मुंह उठाकर कुछ भी बोल देते हैं गाली देते हैं? या फिर उनकी बहन बेटियों और मांओं के बारे में आपत्तिजनक बातें करते हैं यह भी तो संविधान का अपमान है।
सच बता रहा हूं मेरे मन में इतनी ही बात से बाबा रामदेव जी के प्रति इज्जत बढ़ गई है, बो कहते हैं न कि ब्राह्मण सिर्फ सम्मान का भूखा होता है उसे पद और पैसा नही चाहिए होता है।
जिस बात को बोलने में सवर्ण समाज के सांसदों और विधायकों के पिछवाड़े से धुआं निकलने लगते है वह बात एक यादव समाज का व्यक्ति बोल रहा है, अब समाज के नेताओं का बहिष्कार ही मात्र एक उपाय है।
सोशल मीडिया पर सिर्फ जागरूकता ही फैलाई जा सकती है!
लेकिन जमीन पर लोगों को जोड़ने और साथ लाने का काम सबसे मुश्किल होता है!
जिन लोगों ने इस आरक्षण सुधार और UGC विरोध का आंदोलन ज़मीन पर खड़ा किया और हर तरीके से आंदोलन और आंदोलनकारियों को संभाला है, वो ये लोग हैं👇
ये सारे लोग इस सफलता के लिए बधाई के पात्र हैं, इनका बहुत बहुत धन्यवाद🙏
@AbhinayWithYou@thakurshivam97@kalisenachief@BhaiPreetSingh@SawarnArmychief@ChiefRspDhavrai@sumitsharmagzb
इस आंदोलन को ज़मीन पर खड़ा करने वाले यही लोग हैं और इस आंदोलन को आगे ले जाने की रूपरेखा भी जल्दी ही तय की जाएगी!
फिलहाल किसी को भी इस आंदोलन से जुड़ी जानकारी चाहिए या इसमें शामिल होना है या किसी को मदद चाहिए, तो कृपया इस नंबर पर संपर्क करें:
8882002222
कौन-सा संघर्ष रहा रामविलास पासवान जी का? यही न कि कैसे UPA में भी मंत्री बनें और कैसे NDA का भी हिस्सा बन जाएँ?
पासवान और चमार, बिहार का सबसे अधिक SC आरक्षण पाते रहे हैं। आप स्वयं अपना विकास आरक्षित सीट से कर रहे हैं। आपने मुसहर, डोम, चंडाल, भुइयाँ के कितने नेताओं को आगे बढ़ाया है?
मैं भी बिहार से हूँ। हाँफ-हाँफ कर मोदी जी का नाम लेने से कुछ नहीं होता।
बकवास बंद कीजिए और महादलितों का हक दीजिए। अब बहुत हो गया। पर आपका सही है, सत्ता बदलेगी फिर भी आप मंत्री बन ही जाओगे! आपको कुछ भी कहना बेकार ही है।