उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा समस्त भर्तियों में वेटिंग लिस्ट का प्रावधान लागू करना अनिवार्य है क्योंकि एक साथ UPSSSC में लगभग एक दर्जन से ज्यादा भर्तियां साथ चलती है जिसमें एक ही अभ्यर्थी समस्त भर्तियों में आवेदन करते और समस्त अभ्यर्थी मुख्य परीक्षा में चयनित होते है
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उत्तर प्रदेश अभ्यर्थियों की मांग - उत्तरप्रदेश की सभी भर्तियों में सरकार द्वारा वेटिंग लिस्ट का शासनादेश जारी करना खासकर UPSSSC में ।
#waiting_list_in_upexams#TheNewspinch
क्या सम्राट चौधरी भरत तिवारी की मां से मांगेंगे माफी? छोटे भाई बनकर एक शख्स अनशन पर बैठा है।"और मिलने पहुंचे गुंजन सिंह और खेसारी लाल यादव, सम्राट चौधरी से मांगी गई बड़ी जवाबदेही"
भरत भूषण तिवारी का मामला बिहार सरकार के गले का फाँस बन गया है !!
भरत भूषण तिवारी के भाई या चचेरे भाई ने सरकार को अल्टीमेटम दे दिया है
आशीष तिवारी का कहना है की नौकरी छोड़ दिया हूँ एक हफ़्ते के अंदर भरत भूषण तिवारी को इंसाफ़ मिलना चाहिए !!
किसी के अंतिम यात्रा के लिए ये भीड़ देखकर आप समझ सकते हैं कि वो अपने गाँव समाज के लिए कितना किया होगा और उसका उनके जीवन में कितना अहम योगदान रहा होगा।
कई नेता जीवन भर चप्पल घिस देंगे अपना तब भी ये भीड़ नहीं जुटा पाएंगे। ये भीड़ उस तथाकथित पागल भरत तिवारी के लिए है जो अपने हक अधिकार के लिए सिस्टम तक को झुका दिया।
भरत तिवारी निसंदेह एक देशभक्त, निर्भीक, क़ाबिल, दूरदर्शी और सम्मान योग्य थे हैं और रहेंगे।
शत शत नमन 🙏
हम लोग भी गरीब है
पंडित जी, यादव लोग भी गरीब है
उनको भी ज़मीन मिलना चाहिए ना?
भरत तिवारी सर्व समाज की लड़ाई लड़ते थें,
ऐसे युवा ही समाज को बेहतर दिशा दे सकते हैं
ये सच है कि भरत तिवारी ना तो भगत सिंह हैं ना ही देश में अंग्रेजों का शासन है, लेकिन प्रसंग सबको पढ़ना चाहिए:-
भगत सिंह ने जब 8 अप्रैल 1929 को असेंबली में बम फेका था तो वो बम कम क्षमता के थे और इस तरह फेके गए थे कि किसी की मौत ना हो। बम फेकने के दौरान भगत सिंह ने पर्चियां उड़ाई थीं उसमें लिखा था:-
“बहरे कानों को सुनाने के लिए धमाकों की ज़रूरत पड़ती है.”
बिहार के भरत तिवारी भगत सिंह और चंद्रशेखर आजाद को पढ़ते थे। भरत तिवारी जवईनिया गांव के बाढ़ पीड़ितों के लिए लगातार आवाज उठा रहे थे। लेकिन उनकी कोई सुनने वाला नहीं था। इसलिए उस व्यक्ति ने कानून को अपने हाथों में लेने का अपराध किया। जो गलत था। लेकिन इतना बड़ा अपराध कि गिरफ्तारी के बाद एनकाउंटर?
भरत तिवारी ने ऐसा कृत्य किया ताकि पीड़ितों की आवाज पूरे बिहार तक पहुँचे। उसके बाद उसने सरेंडर कर दिया। फिर पता नहीं कब, क्यों पुलिस ने एनकाउंटर में उसे 4 गोली मारी। जहाँ अस्पताल में उनकी मौत हो गई।
भगत सिंह के बम फेकने के बाद भी अंग्रेजी हुकूमत ने एनकाउंटर नही किया था। फांसी देने का महापाप तो किया लेकिन ढोंग ही सही प्रोसीजर को फ़ॉलो करते दिखाया। लेकिन आजाद देश में?
यहाँ ख़ुद कोर्ट, वकील, जज बनकर एनकाउंटर कर दिया गया। जबकि भरत तिवारी ना तो हिस्ट्रीशीटर थे ना अपराधी। सजा उतनी ही मिलनी चाहिए थी जितना अपराध हो
गोली मत चलाइए….गोली मत चलाइए…..
भरत तिवारी के लिए प्रदर्शन कर रहे लोगों में दहशत।
लोकतंत्र के लिए कितनी सुंदर तस्वीर है। धत्त तेरी ऐसे निर्दयी निर्मम सिस्टम की।
कौन कहता है कि बिहार में सबसे अधिक जातिवाद है…..?
भरत तिवारी के एनकाउंटर पर
- पासवान समाज के लोग रो रहे हैं
- भुइयां-मुसहर सहनी के घर में मातम है
- यादव समाज के लोग न्याय के लिए सड़कों पर हैं
- सामान्य वर्ग पूर्णतः इसे अत्याचार बता रहा है
ये चाचा पासवान समाज के हैं। देखिए कैसे कैमरे पर रोने लगे।