भाई #चंदन_गुप्ता के अधूरे बने चौक तक मार्च निकाल दीपक प्रज्वलित, पुष्प अर्पित किए तथा उनके बलिदान को नमन करते हुए स्मरण किया गया। और जल्द #चौक का जल्द अनावरण करने की मांग रखी अनावरण नहीं होने पर धरना-प्रदर्शन करेंगे बाद मे कासगंज से लेकर लखनऊ तक धरना किया जाएगा 🙏🏻
#चंदन_चौक
चंदन भाई अमर रहें.
समस्त देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर माँ भारती की आजादी के लिए अपना सर्वस्व अर्पित करने वाले सभी वीर सेनानियों को कोटि-कोटि नमन करता हूँ।
#चंदन_गुप्ता#चंदन_चौक#तिरंगा_यात्रा#kasganj
तिरंगे के सम्मान में जान देने वाले हुतात्मा चंदन गुप्ता के बलिदान का यह कैसा सिला दे रहा है सिस्टम?
अकेले दम पर मैंने लंबी कानूनी लड़ाई लड़कर 28 दोषियों को आजीवन कारावास की सजा दिलवाई। अब सभी हाई कोर्ट से ज़मानत पर बाहर आ गए हैं @HMOIndia@AmitShah@myogiadityanath@CMOfficeUP
इस्लामी संगठनों और वामपंथी दलों ने धार्मिक स्वतंत्रता का हवाला देते हुए राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026 प्रस्ताव का विरोध किया। विरोध करने के पीछे ऐसी सोच काम करती है, जिसमें उम्माह को राष्ट्र-राज्य से ऊपर माना जाता है।
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कौन हैं ये NGO जो आतंकी को
बचाने के लिए अडालतों में खड़े होते हैं ?
चंदन गुप्ता हत्या केस को लेकर NIA कोर्ट के स्पेशल जज विवेकानंद शरण त्रिपाठी का फैसला
🫵🏻
3 जनवरी, 2025 को, NIA कोर्ट के स्पेशल जज विवेकानंद शरण त्रिपाठी (वी.एस. त्रिपाठी) ने 26 जनवरी, 2018 को कासगंज के अभिषेक उर्फ चंदन गुप्ता की क्रूर हत्या में मुस्लिम समुदाय के 28 आरोपियों को दोषी ठहराया और उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
यह भयावह हत्या चंदन की तिरंगा यात्रा के दौरान मुस्लिम समुदाय के लोगों ने की थी।
आजीवन कारावास की सजा के अलावा, जज त्रिपाठी ने अपने फैसले में एक और महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया है और वह है पैसे के लिए किसी का भी प्रतिनिधित्व करने के लिए महंगे वकीलों की तैयारी!
आज तक सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट के किसी भी जज द्वारा इस मुद्दे पर कभी टिप्पणी नहीं की गई है।
सजा सुनाते हुए, जज त्रिपाठी ने अपराधियों को बचाने में शामिल राष्ट्रीय और विदेशी NGO की भूमिका पर सवाल उठाए और उन्हें रोकने के लिए अपने आदेश की एक कॉपी केंद्रीय गृह मंत्रालय और बार काउंसिल ऑफ इंडिया को भेजी है।
जज त्रिपाठी ने अपने आदेश में कहा था कि, “इन एनजीओ को कहां और कौन फंडिंग कर रहा है, उनका अंतिम उद्देश्य क्या है, इसकी पूरी जांच करने की जरूरत है।
ऐसा आरोप है कि जब भी कोई आतंकवादी पकड़ा जाता है, तो ऐसे एनजीओ तुरंत उसका बचाव करने के लिए बहुत महंगे वकील उपलब्ध कराते हैं।
यह राष्ट्रीय सुरक्षा चिंता का विषय है।”
कोर्ट ने अपने आदेश में निम्नलिखित 7 एनजीओ/संगठनों के नाम दिए हैं।
1. सिटीजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस, मुंबई
2. पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज, दिल्ली
3. रिहाई मंच
4. अलायंस फॉर जस्टिस एंड अकाउंटेबिलिटी, न्यू यॉर्क
5. इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल, वॉशिंगटन डीसी
6. साउथ एशिया सॉलिडेरिटी ग्रुप, लंदन
7. जमीयत उलेमा हिंद
जस्टिस त्रिपाठी का यह आदेश वास्तव में ऐतिहासिक है और उन्होंने सरकार से समान मांग की है। हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले वकीलों की फीस सार्वजनिक रूप से उपलब्ध होनी चाहिए और उनकी संपत्ति की घोषणा भी सार्वजनिक जानकारी के लिए प्रकाशित करनी चाहिए।
उन्होंने हर साल कितना आयकर चुकाया है, यह भी सार्वजनिक करना चाहिए; वकीलों की फीस केवल चेक/बैंकिंग चैनलों के माध्यम से ही वसूली जानी चाहिए; सुप्रीम कोर्ट के शीर्ष वकीलों से वकील फीस की प्राप्ति के बारे में शपथपत्र मांगने चाहिए कि उनकी फीस किसने चुकाई थी, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि किसी आतंकवादी संगठन को फंडिंग की गई थी या नहीं।
जज त्रिपाठी के इस ऐतिहासिक आदेश का सभी देशभक्त भारतीयों द्वारा स्वागत और समर्थन किया जाना चाहिए!
रोहिंग्या बांग्लादेशी घुसपैठियों को देश से निकालने की मांग करने वाली एडवोकेट अश्विनी उपाध्याय की याचिका 2017 से लंबित है।
दो रोहिंग्या, मोहम्मद सलीमुल्लाह और मोहम्मद शाकिर, जो भिखारी जैसे दिखते थे और खराब हालत में रहते थे, उनके लिए छह उच्च स्तर के वकील सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए।
ये वकील थे - डॉ. राजीव धवन, प्रशांत भूषण, डॉ. अश्विनी कुमार, कॉलिन गोंसाल्विस, फली एस. नरीमन और कपिल सिब्बल।
जबरन धर्मांतरण रोकने के लिए एडवोकेट अश्विनी उपाध्याय की याचिका का 10 महंगे शीर्ष वकील विरोध कर रहे हैं।
पूजा स्थल कानून को चुनौती देने वाली उपाध्याय की याचिका का 22 शीर्ष वकील विरोध करते हुए देखे गए हैं। इनमें सांसद, विधायक और पूर्व कानून मंत्री, गृह मंत्री, विदेश मंत्री और शिक्षा मंत्री भी शामिल हैं...
ऐसे शीर्ष वकीलों के कारण यह याचिका लंबे समय से लंबित है।
सिर्फ अक्टूबर 2024 में, एक अन्य NGO - सोशल ज्यूरिस्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की और केंद्र से "रोहिंग्या शरणार्थियों के बच्चों को" सरकारी स्कूलों में प्रवेश देने की अनुमति मांगी।
जब हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी कि रोहिंग्या विदेशी हैं और उनके पास देश में प्रवेश की कानूनी अनुमति नहीं है और वे देश की सुरक्षा के लिए खतरा हैं, तब यह NGO सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और SC ने कहा कि रोहिंग्याओं के बच्चों को शिक्षा दी जाएगी...
ऐसे कई वकील और NGO हैं, उन सभी के फंड की जांच होनी चाहिए...
ताकि हमारी निरंकुश और असंवेदनशील न्यायपालिका भी जवाबदेह बन सके...
चंदन गुप्ता याद हैं? जिन्हें ‘भारत माता की जय’ बोलने पर मुस्लिमों की भीड़ ने उतारा मौत के घाट
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@LekhakAnurag से समझें वंदे मातरम बिल की जरूरत
क्यों इस्लामी कट्टरपंथियों को राष्ट्रीय प्रतीकों से है नफरत
कासगंज के चंदन गुप्ता को पहचानते होंगे! सीएम योगी के कट्टर समर्थक थे। कट्टर इतने की उनके सीएम बनने पर भंडारा किया था। 26 जनवरी 2018 को विहिप ने तिरंगा यात्रा के लिए प्रशासन से इजाजत मांगी। प्रशासन ने मना कर दिया। क्योंकि हालात बेहतर नहीं थे। इसके बाद भी करीब 100 की संख्या में बाइक से तिरंगा यात्रा निकाली गई। मुस्लिम गलियों में जमकर नारेबाजी हुई। इस दौरान झड़प हो गई। गोलियां चली। एक गोली चंदन को आकर लगी और मौके पर ही मौत हो गई।
इसके बाद जमकर हंगामा हुआ। मुस्लिमों की दुकानें जलाई गई। प्रशासन को तीन दिन तक इंटरनेट बंद करना पड़ा। कई दिग्गज नेता चंदन की अंतिम यात्रा में पहुंचे। परिवार को आर्थिक मदद, बहन को नौकरी, चौक पर मूर्ति लगवाने का वादा किया। बहन को नौकरी मिली लेकिन 6 महीने बाद ही निकाल दिया। चौक पर मूर्ति लगी लेकिन आज भी ढकी हुई है। किसी नेता को फुर्सत नहीं कि उसका उद्धाटन कर सके। परिवार कोर्ट-कचेहरी के चक्कर में फंसा हुआ है। जो उस वक्त चंदन गुप्ता अमर रहे कर रहे थे अब वह भूल गए।
यह सब बातें इसलिए बता रहा हूं क्योंकि हर 6 महीने में दंगो की भेंट ऐसे ही मामूली परिवारों के लोग चढ़ते हैं। इनकी लाशों पर सियासत होती है। खूब वादे होते हैं लेकिन हकीकत में कुछ नहीं बदलता। सलाह सिर्फ इतनी है कि जब आप नहीं थे तब भी धर्म था, जब आप नहीं रहेंगे तब भी धर्म रहेगा। आपके बचाने से बचेगा नहीं, किसी के चाहने से खत्म नहीं होगा। आप बस अपना ख्याल रखिए। उग्रता और कट्टरता से दूर रहिए। सोशल मीडिया पर जो आपको तथाकथित नेता भड़का रहे हैं इनके पास अच्छी नौकरी और पद है। इनके बच्चे सेट हैं।
आपको अपना और अपने परिवार का देखना है।
की 5 किलो राशन पर इन सबकी उम्र कट जायेगी की नही
@AwasthiAwanishK@myogiadityanath@UPGovt@CMOfficeUP Kasganj #चंदन_गुप्ता को न्याय कब मिलेगा ना चंदन चौक ना केस सही से सब दोषी ज़मानत पर बाहर आ गए नौकरी छोड ही दो... किसी भी अधिकारी, मंत्री, संगठन के पास जाओ वह बोल देता है कि ये सब मुख्यमंत्री जी के यहां से होगा.
आदरणीय भाई साहब, आपको जन्मदिन की हार्दिक बधाई एवं बहुत बहुत शुभकामनाएं हम आपके लंबी आयु और उत्तम स्वास्थ्य की भगवान से प्रार्थना करता हूँ @shivprakashbjp जी
@narendramodi परम आदरणीय प्रधानमंत्री जी, प्रणाम चरण स्पर्श आपने उनको माफ़ कर दिया लेकिन देश उनको सायद ही माफ़ कर पाए, धरना-प्रदर्शन करना था तो करते लेकिन आपको अपशब्द कहा गया ये ठीक नहीं किया. एक जिम्मेदार नागरिक होते हुए मैं आपसे माफी मांगता हूँ 🙏🏻
@upadhyayabhii Kasganj #चंदन_गुप्ता को न्याय कब मिलेगा ना चंदन चौक ना केस सही से सब दोषी ज़मानत पर बाहर आ गए नौकरी छोड ही दो... किसी भी अधिकारी, मंत्री, संगठन के पास जाओ वह बोल देता है कि ये सब मुख्यमंत्री जी के यहां से होगा.
आज अभी चंदन गुप्ता केस मे इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सभी आरोपियों को ज़मानत दे दिया...
वो लोग चंदा करके केस लङ रहे हैं.
यहां हम पहले भी लाखों रुपये खर्चा कर चुके हैं. अब उत्तरप्रदेश सरकार bail cancelation डालने चाहिए @HMOIndia@AmitShah@AmitShahOffice@myogiadityanath
#कासगंज: कासगंज: शहर में प्रस्तावित चंदन गुप्ता की प्रतिमा के अनावरण से पहले गुरुवार-शुक्रवार की रात प्रतिमा के आवरण में आग लगाए जाने की घटना सामने आई। सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे तथा क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई।
@kasganjpolice ने मामले में एक आरोपी को हिरासत में ले लिया है। प्रारंभिक जांच में आरोपी के मानसिक रूप से अस्वस्थ होने की आशंका जताई जा रही है। घटना के बाद एहतियात के तौर पर इलाके में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है और मामले की जांच जारी है।