@BPSCOffice हे हाथी महाराज,क्या आप बता सकते है 1आपने पंचायत ऑडिटर PT में -ve मार्किंग का प्रयोग किया है/नहीं।नहीं तो क्यों?5वाँ ऑप्शन की अनिवार्यता क्यों लगाई गई।3 कोई अभ्यर्थी कोई प्रश्न attempt नहीं करता है नेगेटिव मार्किंग का क्या औचित्य है। 4, बिना बायोमीट्रिक के एग्जाम हुआ?हा तो क्यों?
बिहार में अफसर लंबे समय से बेलगाम रहे हैं। खासकर, 2020 से उनका गिद्धभोज चल रहा था। जबसे सम्राट चौधरी जी मुख्यमंत्री बने हैं, तो अफसरशाही रायता फैलाने में कोई कसर नहीं छोड़ रही, ताकि सम्राट जी को लेकर जनता में गलत छवि बन जाये। मधुबनी जिले के डीएम सांसद तक को नहीं गुदान रहे थे, तो सरकार को एक लेटर जारी करना पड़ गया। आज बीपीएससी के परीक्षा नियंत्रक, ��ाजेश कुमार सिंह ने प्रेस कंफ्रेंस के दौरान एक पुरानी कहावत कह कर छात्रों की तुलना कुत्ते से कर दी। एक अधिकारी से ऐसी टिप्पणी की उम्मीद की जा सकती है क्या? क्या वे चाहते हैं कि छात्र सरकार के खिलाफ निजी खुन्नस पाल लें? छात्रों को लेकर ऐसी टिप्पणी बेहद निंदनीय है। चीफ जस्टिस साहब ने बेरोजगार युवाओं को कॉकरोच कह दिया था, तो क्या हस्र हुआ, वह देश ने देखा। राजेश कुमार सिंह को छात्रों से तत्काल माफी मांगनी चाहिए। सरकार को भी ऐसे अधिकारियों को सख्त संदेश देना चाहिए।
#BPSC #Bihar #Student @samrat4bjp
BPSC के परीक्षा नियंत्रक कह रहे हैं, "हाथी चले बाजार,कुत्ता भौंके हजार"
राजेश सिंह और @BPSCOffice को थोड़ा और क्लियर करना होगा कि हाथी कौन है और कुत्ता कौन है?
अगर आयोग स्वयं को हाथी कह रहा है तो छात्र और सोशल मीडिया पर लिखने या रील बनाने वाले जिनको ये भ्रामक बता रहे हैं वो भौंकने वालेे कुत्तों जैसे हैं? एक महाशय ने #Cockroach कहा था... अब एक #Kutta कह रहे हैं.... शर्म तो नहीं आई होगी न?
#TRE4 #Bihar #BiharStudentsProtest #BPSC
बिना पारदर्शिता के ईमानदारी से सिलेक्शन मुमकिन नहीं। 70, 71, 72, 73वीं BPSC के सभी अभ्यर्थी साथ आएं और सिस्टम सुधार की इस लड़ाई को मजबूत करें।#BPSC#BPSCReforms#JusticeFor70thBPSC
70वीं BPSC में हिंदी माध्यम के छात्रों के साथ भेदभाव की शिकायतें गंभीर चिंता का विषय हैं। भाषा किसी विद्यार्थी की योग्यता तय नहीं करती। सभी अभ्यर्थियों को समान अवसर और निष्पक्ष मूल्यांकन मिलना चाहिए। #70thBPSC#justiceForAspirants@officecmbihar@BPSCOffice
@btetctet अगर hrms इंक्रीमेंट और hra नहीं बढ़ा सकता तो वैसे तकनीकी व्यवस्था की जरूरत क्या है। बंद कर देना चाहिए वैसे पोर्ट��� और तकनीक को जो मानव जीवन में सुधार नहीं ला सकता।
वेतन संरक्षण एक छलावा है और अगर वेतन संरक्षण देना ही था तो सबसे पहले नियोजित से विद्यालय अध्यापक बने शिक्षकों को देना था! विशिष्ट शिक्षकों को तो पहले से मिलना तय ही था। विद्यालय अध्यापकों को वेतन संरक्षण न देना भेदभाव पूर्ण है एवं कानूनी रूप से गलत भी है।
पूरे बिहार म��ं कोई ऐसा विभाग नहीं है जिस पर सरकार ने ध्यान नहीं दिया है
लेकिन शिक्षक को इग्नोर किया गया है
इसका बहुत बड़ा असर होगा।
#BiharTeachersMatter
केस तो मात्र बहाना है,
इच्छा पोस्टिंग लटकानी है।
इनका नाटक पुराना है,
देर सरकार की मनमानी है।
हमें तो राष्ट्र बनाना है,
सरकार करती ���ादानी है।
जिसका कार्य मनमाना है,
अब वह सरकार हटानी है।
#BPSC_HT_WANT_POSTING
#BPSC_HT_BE_POSTED
@SEVA_NBPDCL@mnreindia@EnergyBihar सरकार जोर शोर से स्मार्ट मीटर लगवा रही है।इसके अनगिनत फायदे बता रही है, जबकि यह ���पभोक्ताओं का शोषण करने का एक मात्र साधन है।Deferment deduction के नाम पर लूट मचा है। एक बार में मेरा 160 रुपया हवा हो गया।कोई पारदर्शिता नहीं, कोई जवाबदेही नहीं।
@SEVA_NBPDCL@mnreindia@EnergyBihar सरकार जोर शोर से स्मार्ट मीटर लगवा रही है।इसके अनगिनत फायदे बता रही है, जबकि यह उपभोक्ताओं का शोषण करने का एक मात्र साधन है।Deferment deduction के नाम पर लूट मचा है। एक बार में मेरा 160 रुपया हवा हो गया।कोई पारदर्शिता नहीं, कोई जवाबदेही नहीं।
बीपीएससी ने आरक्षण रोस्टर के अनुसार रिजल्ट घोषित किया। अतः वह निर्दोष है।
सरकार ने तदनुसार जिला आवंटित किया जिससे अधिकतम न्याय मिल सके। अतः सरकार भी निर्दोष है।
32688 अभ्यर्थी बिल्कुल निर्दोष हैं जो जिला आवंटन से संतुष्ट हैं और शिक्षा विभाग को आभार प्रकट कर रहे हैं।