ये है ‘नालंदा विश्वविद्यालय’ जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री करने जा रहे हैं। यह वास्तुकला का एक भयावह उदाहरण है जिसकी प्रेरणा बिहार के खेतों में सतत जलने नाली ईंट की भट्ठियों से ली गई है। लाल रंग, चौड़ा आधार, तिरछा होता ऊर्ध्वगामी छोर। बाकी धुआँ हम बिहारियों के हर जगह से इसे देख कर निकल ही रहा है।
दूसरे छायाचित्र में एक अर्धगोलाकार संरचना है, जिसका ऊपर से खतना कर दिया गया है। इसमें जो काली वर्गाकार खिड़कियाँ हैं, वह किसी चिड़ियाँ बेचने वाले की हवादार टोकरी से प्रेरित लगते हैं जो बिहार के गाँवों में आपको पहले दिख जाया करते थे।
तीसरे छायाचित्र में माचिस की खुली और बंद डिब्बियाँ हैं जिसमें हमारा बचपन बालू भर कर, धागे से खींच कर सड़कों पर दौड़ते हुए डिलिवर करने में बीता है। बिहार के रेत माफिया को दी गई यह श्रद्धांजलि नमन योग्य है।
चौथे छायाचित्र से बिहार के कच्ची शराब की भट्ठियों का स्मरण हो उठता है। वही मटमैला रंग और धुएँ निकालने वाली खिड़कियाँ। सीढ़ियाँ तो ऐसे बनाई गई हैं जैसे मिस्र का पिरामिड लाते समय तीव्र वायु वेग में ऊपर से ढह गया हो। बिहार में हवा से ढहते पुल की स्मृति हमारे हृदय में शेष है।
कुल मिला कर ऐसी वास्तुकला जो बिहार के गाँव-घर की स्मृति का स्थूल चिह्न प्रतीत होता है। ऐसी भयानकता बहुत कम देखने को मिलती है। प्रधानमंत्री मोदी जैसे सँवरने वाले लोग, वहाँ स्वयं को फैशनेबली आउट ऑफ प्लेस फील करेंगे।
अकादमिक बर्बादी तो अमर्त्य सेन फैला कर गया ही है, ये चक्षुओं को चुभने वाली शैली हमें दशकों तक रुलाती रहेगी। अभी भी पुराने नालंदा विश्वविद्यालय का खंडहर इतना सुंदर है कि वहाँ जाने के पश्चात आपको यह बिहार पर रोने को विवश कर देगा।
@arun_hindustani@mikhan700@epanchjanya भाई अगर चट बंधन इतने वोटो से जीती होती तो इन्हे कोई दिक्कत न होती
बीजेपी जीती है न तो अंदर का कीड़ा काट लिया होगा
बेंगलुरु में अवैध यतीमख़ाने का भंडाफोड़ !
20 मुस्लिम बच्चियां कैद, कुछ अनाथ।
न स्कूली शिक्षा, न खिड़कियाँ, चारों तरफ बंद कमरे में बच्चियों को रखा गया था।
खाड़ी देशों में तस्करी के लिए बच्चियों को मौलाना करता था ग्रूम।
NCPCR की टीम जाने पर मौलाना ने गुंडों को बुलाया।
अच्छा प्रदर्शन नहीं किया तो बहुत जल्दी मां बहन की गालियां भी पड़ती है😔
तो कहने का मतलब यही है कि ज्यादा हवा में ना उड़े
क्योंकि आप सेमीफाइनल में गोगर बिल्ला हेनरी क्लासेंन और डेविल मिलर के हत्थे चढ़ने वाले हैं 😊
✍️बरकत
मुझे 1999 का वर्ल्ड कप फाइनल थोड़ा-थोड़ा याद है शोएब अख्तर नया-नया आया था पूरे 99 के वर्ल्ड कप में वही छाया हुआ था
खैर
उसे दिन से लेकर आज तक बहुत से क्रिकेट मैच लगभग मैंने देखे ही है अगर नहीं देखे जो उसका स्कोर कार्ड अखबार में एक किताब भी आती थी क्रिकेट सम्राट करके वह किताब
क्योंकि जब तक आप हारेंगे नहीं जब तक आपको पता ही नहीं चलेगा आपके अंदर गलतियां क्या है
बहुत साल पहले मैंने युवराज सिंह का एक इंटरव्यू सुना था जिसमें वह बोलता है कि भारत की जनता आपसे हमेशा सिर्फ जीत की उम्मीद रखती है और अच्छे प्रदर्शन जिस एक दिन भी आप हार गए या
पाकिस्तानी मुल्लों को दिन में दस बार नमाज पढ़ना चाहिए वरना ये बांग्लादेश से भी हारेंगे। कभी इनका झाँट-झाँट पाकिस्तान नहीं बजता तब ये हार जाते हैं, कभी प्रोटीन की कमी से छक्के नहीं मार पाते तब हारते हैं, आज पता नहीं क्या नहीं हुआ कि हार गए!
छक्के मारने से यदि जीत मिले तो जुबैर को ले जाओ, आज-कल खाली ही घूम रहा है।
और शार्दूल सिराज से तो बेहतर हैं ही
शमी दाएँ हाथ से तेज गति की गेंदबाजी करते है तथा ये लगभग 145 किलोमीटर की गति से गेंदबाजी करते हैं। मोहम्मद शमी रिवर्स स्विंग के विशेषज्ञ माने जाते हैं।
भारतीय कंडीशन में शमी निश्चित तौर पर लाभदायक साबित होंगे केवल भरोसे की ज़रूरत है ।
#bcci
न तो मैं क्रिकेट का एक्सपर्ट हूँ , न ही बहुत बड़ा जानकार , लेकिन जिस तरह से बालर अपना शत प्रतिशत दे रहे हैं और लगभग हर मैच में विरोधी ख़ेमे को पूरा उखाड़ फेंक रहे हैं , उस स्क्वाड में शार्दूल की जगह को लेकर शंका है , पिच के हिसाब से शार्दूल की जगह मो शमी
और आर अश्विन की जगह बनती है , जितनी बल्लेवाजी शार्दूल कर लेते हैं उससे बढ़िया बैटिंग अश्विन करते हैं और कई ऐसे मैचों में अश्विन ने विपरीत परिस्थितियों में भारत को जिताया है । रही बात शमी की तो वो अभी भी बालिंग में भारत के सबसे बेहतरीन बॉलर है।