@bsa_aligarh72 इस कार्य की तारीफ इस तरह से नहीं की जानी चाहिए। शिक्षिका ने अपने व्यक्तिगत हितों की श्रद्धांजलि दे दी होगी BLO का कार्य पूर्ण करने में। एक बच्चे के साथ ये सब कर पाना बहुत चुनौतीपूर्ण रहा होगा। अध्यापक से लिया गया इस तरह का कार्य प्रशंसनीय नहीं होना चाहिए।
आइए आरक्षण घोटाले से पर्दा उठाते है🔥
"यूपी पीसीएस 2023 – ये कैसा आरक्षण का खेल है??"
प्रीलिम्स में कटऑफ था:
Gen – 125 | OBC – 128 | EWS – 129
और अब मेंस में आया है:
Gen – 734 | OBC – 738 | EWS – 750
क्या अब आरक्षण का मतलब ये है कि OBC और EWS को सिर्फ उनकी 27% और 10% सीटों में ही सीमित कर दिया जाए?
जनरल मेरिट की सीटों पर उनका हक नहीं?
अब पूरा खेल इस उदाहरण से समझिए👇
मान लीजिए UPPCS में सीटों की संख्या 100 है तो इसमें आरक्षण के नियमानुसार 40 सीटें GN की,27 सीटें OBC की,10 सीटें EWS की,21 सीटें SC की,2 सीटें ST की हुई।
UPPCS प्री में 15 गुना अभ्यर्थी पास किए जाते है।अब चूंकि आयोग प्री में आरक्षण नहीं दे रहा है और आरक्षित वर्ग को अपने संबंधित कोटे में ही पास किया जा रहा है, यानी ओवरलैपिंग नहीं कराया जा रहा है इसी कारण प्री में आरक्षित वर्ग का कटऑफ GEN से ज्यादा जा रहा है।
इस हिसाब से मेंस परीक्षा में GN से 600 अभ्यर्थी,OBC वर्ग से 405 अभ्यर्थी,SC वर्ग से 315 अभ्यर्थी,ST वर्ग से 30 अभ्यर्थी क्वालीफाई हुए। यहां ध्यान रखिएगा ओवरलैपिंग नहीं हुई है।
अब बात करते है इंटरव्यू की, सीटों का तीन गुना इंटरव्यू के लिए क्वालीफाई कराया जाता है।
इस हिसाब से GEN के 600 अभ्यर्थियों में से 40 सीटों के सापेक्ष 120 अभ्यर्थी क्वालीफाई हुए,OBC के 405 अभ्यर्थियों में से 27 सीटों के सापेक्ष 81 अभ्यर्थी,SC के 315 अभ्यर्थियों में से 21 सीटों के सापेक्ष 63 अभ्यर्थी,EWS के 10 सीटों के सापेक्ष 30 अभ्यर्थी तथा ST के 2 सीटों के सापेक्ष 6 अभ्यर्थी इंटरव्यू के लिए क्वालीफाई हुए। ध्यान दीजियेगा यहां भी ओवरलैपिंग नहीं हुई है क्योंकि मेंस का कटऑफ भी आरक्षित वर्ग का GN से ज्यादा गया है।
अब दिमाग़ लगाकर सोचिए 100 सीटों के सापेक्ष कुल 300 अभ्यर्थियों को इंटरव्यू में जाना था उनमें से 150(120GEN+30EWS) सवर्ण अभ्यर्थी गए है और 150(81OBC+63SC+6ST) आरक्षित वर्ग से गए है। यानी सवर्ण अभ्यर्थियों को इंटरव्यू तक पहुंचाने में सीधे 50 प्रतिशत का आरक्षण दिया गया है।
प्री और मेन्स में आरक्षण ने देकर, ओवरलैपिंग न करवाकर बड़ी संख्या में OBC,SC,ST अभ्यर्थियों को इंटरव्यू में पहुंचने से पहले से रोक दिया गया।
अब जब फाइनल सिलेक्शन होना है तो GEN की 40 सीटों के लिए 120 सवर्ण,54 OBC,42 SC,20 EWS और 4 ST अभ्यर्थियों के बीच मुकाबला होगा यानी 40 GN सीटों के लिए 140 सवर्ण और 100 आरक्षित वर्ग (OBC,SC,ST)के अभ्यर्थियों के बीच मुकाबला होगा तो यहां कम से कम 28 सीटें सवर्ण अभ्यर्थियों को मिलेंगी और ज्यादा से ज्यादा 12 सीटें आरक्षित वर्ग(OBC,SC,ST) को मिलेंगी।
अब अगर देखें को 100 सीटों में से 38(28+10) सीटें सवर्णों को मिली जिनकी आबादी 10-15 प्रतिशत है वहीं 62 सीटें आरक्षित वर्ग(OBC,SC,ST) को मिली जिसकी संख्या 85-90 प्रतिशत है।
यूपी सरकार और लोक सेवा आयोग जवाब दें –
क्या यही है ‘समान अवसर’ का मतलब?
या फिर ‘सिस्टम’ अब काबिलियत से नहीं, कैटेगरी देखकर फैसला करता है?"
@yadavakhilesh@ManojSinghKAKA@LaljiVermaSP@rajkumarbhatisp
@KraantiKumar वो सिर्फ इसलिए क्रांति कुमार जी आप जैसे कुछ लोग टीचर को नचनिया कह के उसकी औकात याद दिलाने की कोशिश करते हैं। टीचर के लिए किसी के मन में सम्मान नहीं है।
@kurmi_community जिस स्तर की शिक्षा एक अध्यापक अपने बच्चों को देना चाहता है वो सरकारी विद्यालयों में नहीं है। वो बस सरकार द्वारा मजबूरी में उसी पाठ्यक्रम को पढ़ा रहा है। सरकार को विद्यालयों को अपग्रेड करना चाहिए। 2 अध्यापक 5 कक्षाओं में कैसे पढ़ा पाएगा? इसे कोई चर्चा नहीं करना चाहता है।
लोग कितने आराम से कह देते हैं कि अब सरकारी स्कूलों में कौन ही अपने बच्चों को पढ़ाता है!
जबकि हकीकत है कि आज भी डेढ़ करोड़ बच्चे प्राइमरी स्कूलों में ही पढ़ रहे हैं।
जो आलोचना कर रहे इनमें कई ऐसे हैं जो दुनिया के दूसरे देशों की सरकारी शिक्षा व्यवस्था की बड़ी तारीफ करते हैं। रील्स शेयर करते हैं कि देखो एक बच्चे की पढ़ाई के लिए ट्रेन चल रही। लेकिन अपने यहां स्कूल बंद करने के पक्षधर हो जाते हैं।
@Info_4Education उम्मीद है कि जिस विद्यालयों के शिक्षकों की ड्यूटी लगाई जाएगी उनको प्रतिकर अवकाश दिया जाएगा।सरकार जिम्मेदारी के साथ साथ शिक्षकों के हितों का भी ध्यान दे।
@Info_4Education समय है कि निजीगत विद्यालयों में अध्यापन कर रहे शिक्षकों की काउंसलिंग की जाए। विद्यालय प्रबंधन उनसे अमानवीय कार्य ले रहा है। नौकरी गवां देने के डर से अध्यापक उन अमानवीय कार्यों को बर्दाश्त करता जा रहा है और इस का गुस्सा कक्षा के मासूमों पर निकल रहा है।
@TheBahubali_IND बकवास बकवास ही होता है चाहे सनातन के नाम पे ही क्यों ना हो। ये प्री वेडिंग फोटोशूट ही सनातन धर्म के विरुद्ध है। आखिर ये कौन सी परंपरा का हिस्सा है?
“डोम के बच्चा को नहीं पढ़ायेंगे” - सरकारी स्कूल के शिक्षक
जाति देख कर शिक्षा से वंचित रखने की आदत सदियों पुरानी है, और इस तरह के भेदभाव पर मुँह में दही जमा लेने वाले लोग मेरिट का हवाला देते हैं।
ये बच्चे कैसे करें कम्पीट?
कहाँ से लाएंगे “मेरिट”?
इनके माता-पिता को दुत्कार कर भगा देने वाला जातिवादी समाज बच्चों के साथ क्या व्यवहार रखता होगा?
घटना मुजफ्फरपुर के सोनबरसा पंचायत की है।