प्रियंका गांधी जी,
9300 जन सेवा मित्र 3 साल से न्याय की राह देख रहे हैं।
हमारा रोजगार वापस दिलाइए, हमारी आवाज़ संसद तक पहुँचाइए।
#जनसेवा_मित्र#JusticeFor9300@PriyankaGandhi
#जनसेवा_मित्र_को_बहाल_करो
माननीय @ChouhanShivraj जीआप कहते थे“गारंटी” और “वादा”शब्दों की कीमत होती हैतो बताइए, जनसेवामित्रों के साथ किया गया वादा कसिर्फ भाषणों तक ही था❓हजारों युवाओं को सपने दिखाए,भविष्य का भरोसा दिया गयाऔर फिर एक झटके में सब खत्म कर दिया गया@VTankha@BJP4India
9300 जनसेवा मित्रों की आवाज़ को मजबूती देने के लिए राज्यसभा सदस्य,वरिष्ठ अधिवक्ता आदरणीय @VTankha जी का हृदय से आभार।
आपने बेरोजगार जनसेवा मित्रों की पीड़ा, संघर्ष और न्याय की मांग को गंभीरता से सुना, यह हम सभी युवाओं के लिए उम्मीद की किरण है
🙏🏻💐
#जनसेवा_मित्रो_को_बहाल_करो
जनसेवा मित्र आज भी जवाब का इंतजार कर रहे हैं…
सरकार बताये — उनका कसूर क्या है❓
काम लिया, उम्मीदें जगाईं, और फिर छोड़ दिया… यही है रोजगार नीति❓ कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष श्री जीतू पटवारी जी ने सही सवाल उठाया है।
मोहन सरकार अब पुराने जनसेवा मित्रों को हटाकर नए ‘CM यंग इंटर्न’ को नियुक्त करेगी।
मध्य प्रदेश में 9390 जनसेवा मित्रों को अचानक बाहर करना केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि हजारों युवाओं के भविष्य के साथ सीधा अन्याय है।
ये वही युवा हैं जो प्रशिक्षित हैं, ज़मीनी अनुभव रखते हैं और वर्षों से जनता की सेवा कर रहे थे। ऐसे में उन्हें हटाकर नई भर्ती की बात करना सरकार की नीयत और नीति दोनों पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
रोजगार के नाम पर ऐसे अस्थायी प्रयोग युवाओं के भरोसे को तोड़ते हैं। उन्हें स्थिरता, सम्मान और सुरक्षित भविष्य चाहिए, न कि बार-बार की अनिश्चितता।
मोहन सरकार को तुरंत इस फैसले पर पुनर्विचार कर जनसेवा मित्रों को बहाल करना चाहिए।
@DrMohanYadav51
जनसेवा मित्रों और अतिथि शिक्षकों के भविष्य पर आज भी सवाल खड़े हैं। जिन युवाओं को @ChouhanShivraj जी ने बड़े-बड़े वादों घोषणाओं के साथ जोड़ा था, युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने की बात कही गई थी। आज वो हजारों युवा बेरोजगार हैं। अब सवाल यह है कि क्या यह सब सिर्फ चुनावी भाषण था?
आज कहा जा रहा है—युवा देश की ताक़त हैं।
लेकिन वही ताक़त आज बेरोज़गार है,
हताश है और अपने भविष्य को लेकर असमंजस में है।
9300 जनसेवा मित्रों को बाहर निकाल देना
यह दिखाता है कि सरकार के लिए युवा सिर्फ़ ज़रूरत भर का साधन है।
ज़रूरत खत्म—तो रास्ता भी खत्म।
शिक्षक भर्ती की देरी ने हज़ारों योग्य युवाओं को
ओवर एज बना दिया है। क्या यह योग्यता की हार नहीं है? अतिथि शिक्षक बिना सुरक्षा के काम कर रहे हैं, MPPSC अभ्यर्थी बिना भरोसे के तैयारी कर रहे हैं।
हर युवा एक ही सवाल पूछ रहा है— क्या हमारे सपनों की कोई कीमत नहीं? यह हालात महापुरुषों के सपनों के विपरीत हैं। यह समय जश्न का नहीं, जवाबदेही का है।
#NationalYouthDay
#_MPTET_2020_OBC_पद_अनहोल्ड_करें #जनसेवा_मित्रो_को_बहाल_करो
#मध्यप्रदेश_सौ_फीसदी_वेतन_दो
@RavidasShyamlal@GUEST__TEACHER@NEYU4INDIA@nileshdangi10
मध्यप्रदेश में शिक्षा का हाल पूछिए तो जवाब मिलेगा — योग्य बैठे हैं बेरोज़गार, और पढ़ाने वाले हैं अस्थायी सरकार के भरोसे!
चयनित अभ्यर्थी जिन्होंने Eligibility Test और Selection Test पास किया, वे आज भी नियुक्ति की राह देख रहे हैं। 2023 की भर्ती में कई विषयों में शून्य पद घोषित कर दिए गए — यानी पढ़ाने वाले विषय तो हैं, पर शिक्षक नहीं! अब मांग है कि कम से कम 20,000 पद बढ़ाए जाएं और वेटिंग लिस्ट से दूसरी काउंसलिंग जल्द की जाए।
उधर 70,000 अतिथि शिक्षक सालों से अस्थायी कुर्सी पर टिके हैं। अदालत के आदेश (WP 18935/18) के बावजूद नियमितीकरण नहीं हुआ। RTE कानून को ठेंगा दिखाकर शिक्षा विभाग ‘जुगाड़ व्यवस्था’ चला रहा है। न नियुक्ति की निश्चितता, न वेतन की गरिमा — फिर कैसी CM Rise School?
29 अक्टूबर को अंबेडकर पार्क में शिक्षकों ने मुंडन कर विरोध जताया, तो किसी ने कटोरा थाम लिया। अब कह रहे हैं — अगर 15 दिन में मांगे नहीं मानी गईं तो सामूहिक मुंडन और आमरण अनशन होगा।
सरकार प्रचार में शिक्षा सुधार की बात करती है, पर जमीन पर हाल ये है कि शिक्षक पढ़ाने से पहले अपनी रोज़ी की लड़ाई लड़ रहे हैं!
लगता है मध्यप्रदेश में शिक्षा अब किताबों में नहीं, धरनों और घोषणाओं में पढ़ाई जा रही है!https://t.co/N8x2g3BxEi मप्र
1 नवंबर 2025 को जनसेवा मित्रों की व्यथा और संघर्ष को #जनपक्ष Podcast के माध्यम से सुने और जाने,
भाजपा सरकार ने अपनी योजनाओं की झूठी चमक दिखाने के लिए इन युवा साथियों का सिर्फ प्रचार के औज़ार की तरह उपयोग किया और फिर उन्हें बेरोजगारी के अंधेरे में धकेल दिया।