बाबा साहब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर कम्युनल अवार्ड के जरिए दलित, शोषित, वंचित समाज के लिए दो वोट का अधिकार लेकर आए थे. लेकिन पूना पैक्ट के जरिए एक वोट के अधिकार को छीन लिया गया. पूना पैक्ट बाबा साहब के साथ बहुत बड़ा धोखा था. इसलिए पूना पैक्ट खत्म होना चाहिए. ताकि दलित वर्ग एक साथ दो वोट डाल सके.
#पूना_पैक्ट_को_खत्म_करो
आज बसपा के राष्ट्रीय संयोजक @AnandAkash_BSP अपने गृह जनपद गौतम बुद्ध नगर की जेवर विधानसभा सीट पर विशाल कार्यकर्ता सम्मेलन को संबोधित करेंगे।
इस सम्मेलन के दौरान पूर्व लोकसभा प्रत्याशी सतवीर नागर को बहनजी के निर्देश पर प्रत्याशी घोषित किया जाएगा जिसका ऐलान ख़ुद आकाश आनंद करेंगे।
हाँ, राज्यों के उच्च न्यायालय में जजों की नियुक्तियों में रिफॉर्म्स और उसकी समीक्षा जरूरी है,जिसके तहत :
उच्च न्यायालयों में जजों की नियुक्तियों में 25% एससी आरक्षण लागू किया जाना चाहिए।
उच्च न्यायालयों में जजों की नियुक्तियों में 10% एसटी आरक्षण लागू किया जाना चाहिए
उच्च न्यायालयों में जजों की नियुक्तियों में 27% ओबीसी आरक्षण लागू किया जाना चाहिए।
जिस जाति के जजों की नियुक्ति आज़ादी के बाद उनकी आबादी से ज्यादा हुई है,उन्हें उच्च न्यायालयों में जज की नियुक्ति में कम से कम 20 वर्षों के लिए प्रतिबंधित किया जाए।
बहुजन समाज पार्टी के विधायक सतीश कुमार यादव ने आरक्षण के मुद्दे पर अपनी बात को डंके की चोट पर रखते हुए कहा कि “आरक्षण था,आरक्षण है, और आरक्षण रहेगा”
आरक्षण संवैधानिक अधिकार है,किसी के बाप की जागीर नहीं जो ख़त्म कर देगा।
बहुजन समाज पार्टी सदैव अपने राजनीतिक स्वार्थ को त्यागकर समाज के उत्थान में हमेशा आगे रही है और लगातार बसपा सुप्रीमो बहन कुमारी मायावती जी प्राइवेट सेक्टर में भी दलितों, शोषितों एवं वंचितों के हित के लिए आरक्षण की मांग कर रही हैं।
कई बार कहा जा चुका है कि संघ और बीजेपी के सामने असल चुनौती बसपा का समावेशी, सर्वसमाज के कल्याण हेतु तत्पर बहुजन आंदोलन ही है। बिना सामाजिक परिवर्तन के कुछ नहीं बदलेगा। यथास्थितिवादी पार्टियां सामाजिक न्याय के ढकोशले के लिए संविधान की झूठी प्रतियाँ लहराती रहेंगी।
बसपा के आंदोलन में आत्मसम्मान और स्वाभिमान से कोई समझौता नहीं। बहुजन के कल्याण से ही सर्वजन का कल्याण है, पूरे राष्ट्र की उन्नति ही इन्हीं मूलभूत सिद्धांतों पर टिकी है। नफरत ने केवल नफरत और जाहिलियत ही पैदा की है आज तक..
नफरत से भरे लोग बीजेपी के प्रयोग का सामान बनके रह चुके हैं जो बारी बारी हर चुनाव में इस्तेमाल हो रहे हैं। जय भीम
सन 1954 से सन 2024 तक कुल 53 लोगों को भारत रत्न मिला है।
सवर्णों में ब्राह्मणों, बनियों, कायस्थों, खत्री को भारत रत्न मिल चुका है।
आज तक क्षत्रिय जाति के किसी व्यक्ति को भारत रत्न नहीं मिला।
आख़िर भारत की ब्राह्मणवादी सरकारों को क्षत्रिय समाज से इतनी दिक्कत क्यों रही?
क्षत्रिय समाज के किसी महान व्यक्तित्व को आज तक भारत रत्न क्यों नहीं मिला?
क्षत्रिय समाज को इसपर गहन चिन्तन-मनन करना चाहिए।
जब बाबा साहब ने कांग्रेस एंड कंपनी के धागे खोले
*****************************
बात उन दिनों की है जब यूपी के मुख्यमंत्री पंडित गोविंद बल्लभ पंत थे और बाबा साहब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर भारत के कानून मंत्री थे. उन दिनों लखनऊ के अनुसूचित व पिछड़ी जाति के लोगों ने एक सम्मेलन में बाबा साहब को आमंत्रित किया था. उस सम्मेलन को संबोधित करते हुए बाबा साहब ने कहा कि "अनुसूचित जाति व पिछड़े वर्ग के लोगो सुनिए ! आज तुम सब पिछड़े लोगों का आपसी संगठन नहीं है. यदि तुम सब पिछड़े वर्ग तथा अनुसूचित जातियों के लोग परस्पर सम्मिलित व संगठित होकर संघर्ष करो तो गोविंद बल्लभ पंत सरीखा बामन तुम्हारे पैरों के जूतों के फीते खोलने पर गर्व महसूस करेगा. किंतु तुम्हारी आपसी अनेकता व अनुशासनहीनता ने इन ब्राह्मणों को तुम्हारे सिर पर बैठने का अवसर दिया है. देश भर में तथा विशेषकर उत्तर भारत में ये सवर्ण जाति वाले तुम्हारी संख्या के मुकाबले में बहुत थोड़े हैं, फिर भी ये लोग तुम पर मनचाहा शासन क्यों कर रहे हैं? केवल तुम्हारे अज्ञान और पिछड़े वर्ग या अनुसूचित जाति और जनजातियों की आपसी एकता न होने का दुष्परिणाम ही आज तुम्हें स्वाधीन भारत में भी इन मुट्ठी भर सवर्णों का दास बनाए हुए है."
बाबा साहब के ये शब्द सम्मेलन में उपस्थित पंडित गोविंद बल्लभ पंत के कलेजे में चुप रहे थे. क्यों कि उन्हें इस बात का खेद हो रहा था कि डॉ आंबेडकर मेरी ( एक ब्राह्मण ) की उपस्थिति का ध्यान न करते हुए गोदी में बैठकर दाढ़ी नोंच रहा है. पंडित पंत उन दिनों सरदार पटेल के खास कृपा पात्र थे, इसलिए उन्होंने सरदार पटेल को एक पत्र लिखकर शिकायत की कि भारत सरकार का कानून मंत्री सरकारी दौरे के बहाने अनुसूचित व पिछड़े वर्गों के सम्मेलन में ऐसा भड़कीला और हमारा अपमान करने वाला भाषण दे गया है कि यदि उत्तर प्रदेश में ऐसे और जहरीले भाषण होते रहे तो यहां पर पिछड़े वर्ग के लोग बगावत कर देंगे. सरदार पटेल ने उस खत को पढ़कर गांधी जी व जवाहरलाल नेहरू से बाबा साहब की शिकायत की कि डॉक्टर अंबेडकर अभी तक जहरीला सांप साबित हो रहा है. जहां कहीं भी उसे अवसर मिलता है वह जहर उगलने से नहीं चूकता. यह कहते हुए सरदार पटेल ने पंडित गोविंद बल्लभ पंत का पत्र जवाहरलाल नेहरू के सामने रख दिया. जवाहरलाल नेहरू ने जब बाबा साहब से पूछा तो बाबा साहब ने कहा कि मैं अपने लोगों को संबोधित करते हुए जो कुछ कहा है वह ठीक ही कहा है. मैं आपके मंत्रिमंडल का सदस्य बनकर अपने लोगों को गलत मार्ग पर नहीं डाल सकता. यदि आप लोगों ने यह समझा है कि अंबेडकर कानून मंत्री बन जाने पर तुम्हारे हाथों बिक चुका है और वह अब शताब्दियों से पिसी दबी अपनी पीड़ित जनता को तुम्हारे कांग्रेसी राज की प्रशंसा सुनायेगा, तो ऐसा कभी नहीं हो सकता. मैं अपनी उस अन्तर आत्मा के विरुद्ध कभी नहीं कहूंगा जो मुझे इन करोड़ों पिछड़े तथा अछूत लोगों के हित के लिए आज तक प्रेरणा देती आ रही है. इस प्रकार आप मेरा आत्महन करना चाहते हैं तो मेरा इस्तीफा यह पड़ा है.
दरअसल सरदार पटेल चाहते थे कि डॉक्टर अंबेडकर को कड़ी चेतावनी दी जाए ताकि भविष्य में कभी ऐसा न हो सके. साथ ही पंडित पंत से क्षमा याचना कर लें. किंतु जवाहर लाल नेहरू ने सरदार पटेल से कहा कि यदि डॉक्टर अंबेडकर को इस समय मजबूर किया गया तो वे कानून मंत्री पद से इस्तीफा दे देंगे. ऐसा होने पर संविधान की नैया मझधार में ही डूब जायेगी. वैसे भी हमारे पास कोई ऐसा मंत्री व संविधान मर्मज्ञ नहीं है जो इस इस कठिन कार्य को अपने हाथ में ले सके. श्री जयकर और सर तेज बहादुर ही दो ऐसे व्यक्ति थे जो संविधान संबंधी कानूनी जानकारी रखते थे. लेकिन वे दौनों ही इन्कार कर चुके थे. इसलिए इस कार्य को बाबा साहब के अलावा कोई अन्य व्यक्ति नहीं कर सकता. जवाहर लाल नेहरू द्वारा यह सब कहने के बावजूद सरदार पटेल अपनी जिद पर अड़े रहे. आखिरकार जवाहरलाल नेहरू ने बाबा साहब से कहा कि सरदार पटेल की जिद और दुराग्रह को दूर करने के लिए आप प्रैस में वक्तव्य देकर इसकी तसल्ली करवा दें कि लखनऊ के भाषण में उनका आशय किसी का अपमान करने का नहीं था. तदनुसार बाबा साहब ने वक्तव्य दे दिया कि मैंने किसी भी व्यक्ति की भावना को आहत करने के लिए लखनऊ के भाषण में कुछ भी नहीं कहा है. मैं किसी भी सवर्ण व्यक्ति से व्यक्तिगत बैरभाव नहीं रखता. मैंने उस भाषण में अपने लोगों के कल्याण के लिए जो कुछ कहा है, मुझे वहां ऐसा ही कहना चाहिए था. इन शब्दों को प्रेस में दे दिया गया जिससे सरदार पटेल चुप हो गए, क्यों कि उस कट्टर हिंदूवादी लौहपुरुष की मजबूरी थी. क्यों कि यदि उस समय उन्हें कोई दूसरा ऐसा संविधान निर्माता मिल जाता तो बाबा साहब को मंत्रिमंडल से अवश्य बाहर कर दिया गया होता.
@satishmisrabsp को आखिर मीडिया की जिम्मेदारी दी किस लिए गई है बहन @Mayawati जी @AnandAkash_BSP जी का जेवर में आज इतना बड़ा कार्यक्रम है सतीश जी द्वारा उसके लिए क्या किया गया है बहन जी ऐसी गलती मत कीजिए pls
सोशल मीडिया पर दिखना तो पड़ेगा बसपा को
क्योंकि ये दौर है सोशल मीडिया का
सेवा में,
माननीय अध्यक्ष महोदय,
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC),
@NCSC_GoI
भारत सरकार, नई दिल्ली।
विषय: आरक्षण सुधार आंदोलन की आड़ में दलित समुदाय, संवैधानिक प्रतीकों एवं वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों/अधिकारियों के विरुद्ध सोशल मीडिया एवं मुख्यधारा के मीडिया में प्रसारित हेट स्पीच पर रोक लगाने हेतु तत्काल दिशा-निर्देश जारी करने के संबंध में।
महोदय,
मैं आपका ध्यान एक अत्यंत संवेदनशील एवं गंभीर विषय की ओर आकर्षित करना चाहता हूँ। हाल ही में 'आरक्षण सुधार आंदोलन' (RHA) की आड़ में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों और मुख्यधारा (legacy) के मीडिया में अनुसूचित जाति (दलित) समुदाय के विरुद्ध लक्षित घृणास्पद वक्तव्यों (Hate Speech) एवं विद्वेषपूर्ण सामग्री में चिंताजनक वृद्धि देखी गई है।
इस संदर्भ में निम्नलिखित बिंदु आपके संज्ञान में लाना आवश्यक हैं:
समुदाय और संवैधानिक प्रतीकों का अपमान: वैचारिक विमर्श और सुधार के नाम पर संपूर्ण दलित समाज के लिए अपमानजनक व आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया जा रहा है। साथ ही, संविधान निर्माता बोधिसत्व डॉ. बी. आर. अम्बेडकर की प्रतिमा, विचारों और प्रतिष्ठा को सुनियोजित रूप से धूमिल करने का प्रयास हो रहा है।
वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों को निशाना बनाना: इस अभियान के अंतर्गत संवैधानिक पदों पर आसीन संसद सदस्यों (MPs) के साथ-साथ अनुसूचित जाति वर्ग से आने वाले वरिष्ठ IAS, IPS एवं अन्य उच्चाधिकारियों को सोशल मीडिया पर व्यक्तिगत हमलों व दुर्भावनापूर्ण ट्रोलिंग का सामना करना पड़ रहा है।
मीडिया द्वारा अनियंत्रित प्रसारण: पारंपरिक मीडिया तथा डिजिटल/सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इस प्रकार के विभाजनकारी एवं नफरत फैलाने वाले वक्तव्यों को बिना किसी जवाबदेही के व्यापक कवरेज दे रहे हैं, जिससे समाज में सौहार्द और अनुसूचित जाति समुदाय की गरिमा प्रभावित हो रही है।
अतः आयोग से विनम्र निवेदन:
मीडिया दिशा-निर्देश (Advisory): सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) तथा इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के साथ समन्वय स्थापित कर समस्त डिजिटल प्लेटफॉर्मों एवं मुख्यधारा के मीडिया संस्थानों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएँ, ताकि अनुसूचित जाति वर्ग के विरुद्ध प्रसारित किसी भी प्रकार की हेट स्पीच पर तुरंत रोक लगाई जा सके।
कानूनी कार्रवाई: अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 (संशोधित) तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत इस प्रकार के घृणास्पद अभियानों का संचालन करने वाले तत्वों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की निगरानी की जाए।
संवैधानिक संरक्षण: आयोग अपने संवैधानिक दायित्वों (अनुच्छेद 338) के तहत इस मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए संबंधित प्राधिकारियों से त्वरित कार्रवाई रिपोर्ट (ATR) तलब करे।
संवैधानिक मूल्यों, सामाजिक न्याय और मानवाधिकारों की रक्षा हेतु आपके त्वरित हस्तक्षेप की अपेक्षा है।
भवदीय,
अहिंदा डीईआई (Ahinda DEI)
साथियों मुझे बताते हुए अतयंत हर्ष हो रहा है की मेरी किताब का दक्षिण एशिया संस्करण प्रकाशित हो गया है। यह भारत, नेपाल, बंदलादेश, श्रीलंका एवं भूटान में सस्ते दाम पर मिलेगी। अभी अमेज़ॉन पर लन्दन/अमरीकी संस्करण रूपए 22000/-का बिक रही है. अब यह 1100/- में भारत में बिकेगी।
दलितों के साथ अनदेखी जातिवाद की देन
***********************
आज भी देश में अगर दलितों की स्थिति पर नजर डाली जाए तो उनकी स्थिति दयनीय बनी हुई है. मौजूदा वक्त में तो इसे और भी बदतर बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि दलित पराश्रित बना रहे. वैसे भी युग युगांतर से दलितों को हेय दृष्टि से ही देखा गया है. बाबा साहब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर ने संविधान में समानता का जो अधिकार दिया है, उसकी धज्जियां उड़ाते हुए दलितों के साथ अमानवीय व्यवहार व उत्पीड़न की घटनाएं आज भी जारी हैं. इसे लेकर समय-समय पर विमर्श और चिंतन भी हुआ है कि दलितों के साथ अनदेखी क्यों?
दलितों को मुख्य धारा में लाने के बजाय उनकी अनदेखी को लेकर सन 2000 में भी एक बहस छिड़ी थी. तब यूपी में भाजपा की सरकार के दौरान राज्यपाल सूरजभान ने दलितों के हितों की अनदेखी होने पर नाराजगी प्रकट की थी. भारतीय जनता पार्टी के मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के शासन काल में दलितों को समानता का अधिकार न मिलने पर सूरजभान ने 12 व 13 जुलाई सन 2000 को हुए राज्यपाल सम्मेलन में भाजपा सरकार द्वारा दलितों की कल्याणकारी योजनाओं की अनदेखी किए जाने का मामला उठाया था. उन्होंने कहा था कि उत्तर प्रदेश में दलितों का हाल बुरा है. भाजपा सरकार आते ही दलितों से जुड़ी योजनाओं व कानूनों में फेरबदल किया गया है. दलित होने के नाते राज्यपाल सूरजभान ने अपनी ही सरकार के दलित विरोधी कारनामों का कच्चा चिट्ठा खोल दिया था. राज्यपाल सूरजभान द्वारा उठाए गए इस गंभीर मुद्दे पर राष्ट्रपति के आर नारायणन ने भी खेत व्यक्त किया और इसे गंभीरता से लेते हुए महाराष्ट्र के राज्यपाल डॉक्टर पीसी अलेक्जेंडर की अध्यक्षता में एक समिति गठित की थी, जिसके सदस्य सूरजभान सहित हरियाणा, कर्नाटक, केरल, उड़ीसा, मिजोरम और मेघालय के राज्यपाल बने थे. सभी राज्यपालों ने 8 सितंबर 2000 को मुंबई में पहली बैठक की थी. इस समिति का गठन अनुसूचित जातियों, जनजातियों के लिए अभिप्रेत कल्याणकारी कार्यक्रमों पर उनके विचार व चिंतन को रिकॉर्ड करने के लिए किया गया था. क्यों कि आरक्षण की नीति के रहते भी दलितों की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ. तब मांग उठी थी कि अदालत में भी आरक्षण होना चाहिए. उसके लिए ऑल इंडिया ज्यूडिशल सर्विस के तहत ऐसे न्यायाधीश का गठन हो ताकि सेशन कोर्ट से लेकर हाई कोर्ट व सुप्रीम कोर्ट तक दलित न्यायाधीश बैठे, ताकि दलितों के साथ नाइंसाफी न हो.
उसके बाद दलित राज्यपाल सूरजभान की यह बात भाजपा को इतनी बुरी लगी कि उन्हें उत्तर प्रदेश से हटाकर हिमाचल प्रदेश जैसे छोटे राज्य का राज्यपाल बना दिया गया. इतना ही नहीं आगामी लोकसभा चुनाव में भाजपा ने उनके बेटे को भी टिकट नहीं दिया था. अगर उत्तर प्रदेश की ही बात करें तो बसपा की मायावती सरकार के अलावा दलितों की खैर खबर लेने वाला कोई नहीं है. बहन जी की सरकार में पुराने पुलिसकर्मी नए पुलिस कर्मियों को समझाते थे कि अगर थाने में किसी दलित की आंख से एक आंसू भी टपक गया तो पूरे थाने के लेने के देने पड़ जायेंगे . बीएसपी की चार बार की सत्ता में दलितों में उम्मीद से बढ़कर जागृति आई. उसके बाद दलितों ने बीएसपी के ही खिलाफ नए-नए संगठन और दल बनाकर विरोधियों की दरी बिछाना शुरू कर दिया. परिणाम स्वरुप बीएसपी कमजोर हुई और सत्ता में नहीं आ सकी. बीएसपी की सत्ता के बगैर दलितों की पिटाई कुटाई और लुटाई जारी है.
कृपया मुझे सब्सक्राइब करें.
आरक्षण था, आरक्षण है और आरक्षण रहेगा
आरक्षण संवैधानिक अधिकार है ,
किसी के बाप की जागीर नहीं जो खत्म कर देगा
- सतीश सिंह यादव,(पिंटू यादव)
BSP विधायक: रामगढ़ विधानसभा कैमूर
#reservation
बहुजन समाज के लोगों ध्यान दीजिए :
अजीत भारती द्वारा अनुसूचित जाति की बच्चियों, महिलाओं और बुजुर्ग माताओं पर की गई जातिगत, अभद्र, अपमानजनक और महिला विरोधी टिप्पणियों का जो लोग समर्थन कर रहे हैं,उन सभी की पोस्टों का स्क्रीनशॉट ले लीजिए।
बहुजनों,अजीत भारती द्वारा की गई टिप्पणी का समर्थन करने वाले उन सभी लोगों की पोस्टों का स्क्रीनशॉट लेकर रखिए।
इन सभी स्क्रीनशॉट को राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के समक्ष रखा जाएगा और इन जातिवादी तत्वों के विरुद्ध एससी-एसटी एक्ट 1989 में कानूनी कार्यवाही करवाई जाएगी।
ऐसे लोग समाज के लिए घातक हैं,जो अनुसूचित जाति के ऊपर जातिगत अन्याय,अत्याचार,भेदभाव और छुआछूत को बढ़ावा देने का कार्य कर रहे हैं।
जैसे मदिगा के आरक्षण को लेकर किए गए दावे का तथ्य-जांच किया गया है, वैसे ही यादव और जाटव के आरक्षण में कथित हिस्सेदारी को लेकर किए जा रहे दावों की भी तथ्य-जांच कीजिए। मैं दावे के साथ कहता हूँ कि ये सब फर्जी दावे हैं।
प्लीज जातिवादियों प्लीज.. 🙏🙏
इस बार तुम लोग मिलकर BJP को सबक सिखाओ। इसकी शुरुआत यूपी से करो। हम लोग तो पहले से ही लगे हुए हैं।
तुम बस एक बार मिलकर BJP को सबक सिखाओ। फिर
हम तुम्हें वो सबक सिखाएंगे कि तुम समाज में जातीय विद्वेष फैलाना और संविधान का अपमान करना भूल जाओगे।
भारत के माननीय सुप्रीम कोर्ट ने आदेश जारी किया है कि बंद कमरे में गाली देना अपराध नहीं इस बात को अधिकारी कर्मचारी नेतागण उनके सहयोगी सभी ने देखा है सुना है पढ़ा भी है इस
पर अगर जनता द्वारा अमल हो गया तो उसका जवाब नहीं मिल पाएगा।
जय भारत जय संविधान
पूर्व प्रधानमंत्री स्व0 श्री वीपी सिंह जी सवर्ण नहीं थे,वह एक महान व्यक्तित्व थे।
बाकी स्व0 श्री वीपी सिंह जी ने ओबीसी वर्ग को आरक्षण दिया था, न कि एससी-एसटी वर्गों को।
बहुजन समाज पार्टी ने सशर्त स्व0 श्री वीपी सिंह जी को समर्थन दिया था,जिसमें उनकी मुख्य तीन मांगे थीं -
1.बाबासाहेब डॉ0 भीमराव अम्बेडकर को भारत रत्न से सम्मानित।
2.मण्डल कमीशन की सिफारिशों को लागू करना।
3.संसद में बाबासाहेब की आमकद प्रतिमा लगाना।
अगर बहुजन समाज पार्टी ने स्व0 श्री वीपी सिंह जी को समर्थन न दिया होता,तो शायद वह प्रधानमंत्री कभी नहीं बन पाते।
मुझे अच्छा लगता है जब आप संविधान, आरक्षण और समानता पर लिखते हैं, लेकिन लिखने से पहले थोड़ा पढ़ भी लिया कीजिए। अब तथ्य देख लीजिए। ये आँकड़े आधिकारिक रिपोर्टों से लिए गए हैं और इनकी अवधि 2006 से 2024 तक की है।