RTE ACT लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षक राज्य निर्धारित अर्हताओं के अनुसार चयनित हुए और दशकों से सेवा दे रहे हैं। बाद की योग्यताओं को पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर थोपना अन्याय है। भारत सरकार संसद से कानून बनाकर लाखों शिक्षकों को न्याय दे।
#JusticeForTeachers@dpradhanbjp
#JusticeForTeachers
बरसों से बच्चों का भविष्य सँवारने वाले शिक्षक आज स्वयं असुरक्षा में खड़े हैं। टीईटी की बाध्यता ने अनुभव, सेवा और समर्पण पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। सम्मान की जगह संशय, स्थिरता की जगह भय ने ले ली है—यह दर्द नौकरी का नहीं, आत्मसम्मान के आहत होने का है।
सरकार संगठन से वार्ता और निस्तारण के बारे में विचार करे।
@DrDCSHARMAUPPSS
#JusticeForTeachers
आरटीई लागू होने के बाद शिक्षक पद पर नियुक्ति हेतु निर्धारित अर्हता उसके पूर्व में नियुक्त शिक्षकों पर थोपना सरासर अन्याय है ।हम अनुरोध करते हैं कि संसद द्वारा कानून पारित कराकर इस अन्याय पर रोक लगाकर देश के लाखों शिक्षकों और उनके परिजनों को न्याय दिलाया जाये ।
#JusticeForTeachers
शिक्षकों के साथ वार्ता में एक बात, संसद में ठीक उसके विपरीत बयान—यह कैसा दोहरापन है?
यदि राज्यों से आँकड़े और सूचनाएँ मँगाई गई थीं, तो उत्तर में उनका उल्लेख क्यों नहीं?
20–25 वर्षों से सेवा दे रहे, 50–55 वर्ष के शिक्षकों को फिर से परीक्षा में बैठने को मजबूर करना घोर अन्याय है।
क्या आज कोई न्यायाधीश CLAT देगा? क्या 20 साल पुराना सैनिक 10 किमी दौड़ेगा?
20 लाख शिक्षकों की पीड़ा पर शिक्षा मंत्रालय मौन क्यों?
20 लाख शिक्षकों के साथ यह मज़ाक बंद हो।