@VKumar_Aakhiri ऐसे स्वतंत्र पत्रकार जिन्होंने इस बात की घटना के तुरंत बाद पुष्टि की थी
हालाँकि पूरे देश की मीडिया इन सभी युवकों को तुरंत लगे हाथ फांसी दिलवाने का पूरा मूड बना चुका था
आलीशान स्टूडियो में बैठे बैठे trp के लिये खबर दिखाने वाले आलसी पत्रकार भरोसे के लायक बचे हैं?
@KotakCares https://t.co/FgizasrE4Z हवा में नाम नहीं हमारे प्रतिष्ठान का अब आपको दिखाऊंगा विरार विजिट के 5 विडिओ, नालासोपारा, भदोही, बेला प्रतापगढ़, ग्रीन पार्क, छतरपुर विजिट का विडिओ वही आज तक के @KotakBankLtd के अकेले ईमानदार कर्मी की ईमानदारी को भी दिखाऊंगा जो ग्राहक को भगवान मानता है।
@priyarajputlive प्रश्न ये होना चाहिए की आखिर ये झुग्गी झोपड़ियों बनी कैसे।
रही बात कवर करने की तो ये जरूरत तो है ही। सभी झुग्गियां कब्जा करके बनाई जाती है, अब इनको हटाओ तो कानून और वोट बैंक जाने का डर, इसलिए हटा नही सकते, तो छुपाना पड़ता है। इन झुग्गियों का redevelopment भी नहीं हो सकता।
@Uppolice@kpmaurya1@myogiadityanath@rashtrapatibhvn@PMOIndia यह वही कलम है जिसने 17वें चार यानी 1 अक्टूबर 2020 को हाथरस के बूलगढ़ी केस के सच को फलाना दिखाना के प्लेटफार्म से सार्वजनिक किया था जिसका सच आज सार्वजनिक है। तो महोदय आप सभी से अनुरोध है कि उक्त मुकदमें की जांच तत्काल सीबीआई को सौपने की कृपा करें।
@Uppolice@kpmaurya1@myogiadityanath फास होगा, इस 307 के मुकदमें के मुख्य अभियुक्त सामनें आ जाएंगे। जबकि #आखिरी_सच की कलम कहती है कि सियाराम पासवान प्रधान की प्रधानी लेने के लिए मोहनलाल जिनका पुत्र ज्ञानचंद्र कौशलेन्द्र उर्फ़ शिवशंकर ओझा के संरक्षण में चुनाव लड़ा था, उक्त ज्ञानचंद्र व कौशलेन्द्र के दिमाग़ कि देन है।
@Uppolice@kpmaurya1@myogiadityanath एक बात यह कलम और कहती है कि इस केस के मुख्य नियोजक कौशलेन्द्र उर्फ़ शिवशंकर ओझा के साथ ही मुकदमा संख्या 336/24.08.2023/धारा 307 के लिखाने वाले की सोंची समझी साजिश का परिणाम है, यदि इन दो व्यक्तियों को उठाया जाता है तो जितेंद्र बालू माफिया के बालू के ढेर से मिली कुल्हाड़ी का राज..
भी अभियुक्त बनाया गया था 376 व अन्य में लेकिन उन केसो में उन्हें निर्दोष साबित किया गया, इस केस में आज नौवें दिन चार लोगों का चालान किया गया जबकि आइपीसी य सीआईपीसी की किस धारा के तहत उन्हें नौ दिन थाने में रखा गया?
@Uppolice@kpmaurya1@myogiadityanath कृपया सीबीआई जांच करवाएं।
@kaushambipolice सराय आकील थाने की कहानी 24 तरीख से थाने में बैठा कर रखे गये 4 लोगों जिन्हें थानें व गाँव बेर के पूर्व प्रधान कौशलेन्द्र उर्फ़ शिवशंकर ओझा के नियोजित षड्यंत्र से 307 का अभियुक्त बनाया गया, को आज जेल भेज दिया गया, जबकि सियाराम प्रधान को पूर्व में भी कई केसों में..
आप कभी समझें नही समझे तो याद रखें कि कुछ लोगों को सिर्फ अपना नाम लिखने से ही IIT में दाखिला मिल गया।
तो जिसने सिर्फ अपना नाम शीट पर लिखा था, वह आईआईटी के लिए उपयुक्त था, लेकिन सामान्य वर्ग कैंडिडेट जिसने 100 अंक हासिल किए थे, वह नहीं था।
यह है आरक्षण प्रणाली।
महिला को निर्वस्त्र कर पहले की गयी मारपीट फिर गांव घुमाया, प्रतापगढ़ पुलिस हुई हाई अलर्ट, मुख्यमंत्री नें न्याय दिलाने की बात कही। https://t.co/1D7htsJ8nG
@aajtak देखा जाय तो बहुत से चुनाव की जरूरत नहीं है एक देश एक प्रधानमंत्री बिल लाइए विधानसभा राज्यसभा विधानपरिषद ब्लॉकप्रमुक मेयर जिला पंचायत जैसे तमाम चुनाव खत्म करें
चुनाव अलग अलग हों या साथ साथ खर्च मे कमी नहीं आएगी
वैसे चुनाव उत्सव भी आते जाते रहते हैं अच्छा लगता मिलना तो घंटा ही है