स्नातक/शिक्षक एमएलसी चुनावों में समाजवादी पार्टी की प्रत्याशी श्रीमती कान्ति सिंह (लखनऊ खण्ड स्नातक) को संपूर्ण समर्थन व अपना बहुमूल्य वोट देकर विजयी बनाएं और शिक्षक, शिक्षार्थी, शिक्षा और शिक्षित का मान बढ़ाएं।
श्रीमती कान्ति सिंह जी की जीत में हमारी जीत है।
आपका
अखिलेश
एक राजनीतिक पार्टी के ऑफिशियल हैंडल से ऐसी तस्वीर दिखाना क्या संदेश देता है?
छात्राओं को लैपटॉप देने जैसी शिक्षा की बात में भी हिंदू-मुस्लिम घुसाना ज़रूरी है?
सवाल करो कि कितने बच्चों को लैपटॉप मिले, कितनों को नहीं मिले, योजना में क्या कमी थी। लेकिन यहाँ भी कपड़ों से धर्म पहचानकर जनता को बाँटना है! फिर मंच पर जाकर बोलोगे- सबका साथ, सबका विकास!
बेटियों की पढ़ाई में भी तुम्हें हिंदू-मुस्लिम करना है?- इतनी घटिया राजनीति!
"अगर उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार बनी तो गन्ना किसानों का भुगतान 24 घंट में होगा। सबसे ज्यादा सफलता पश्चिमी उत्तर प्रदेश समाजवादी पार्टी को दिलाने जा रहा है।"
- श्री हरेन्द्र मलिक जी, सांसद, मुजफ्फरनगर
अमेठी : बीजेपी नेता गोविंद सिंह चौहान का बयान
"सपा से निष्कासन के बाद अब तक क्यों रुके थे’राकेश के आने से पार्टी में देखी जाएगी नाराजगी,‘पुराने BJP के लोगों को कार्यक्रम में नहीं बुलाया गया’पार्टी का साथ देने वाले कार्यकर्ताओं की अनदेखी"
#Amethi#GovindSinghChauhan #RakeshPratapSingh
न्याय की इस लड़ाई में INDIA गठबंधन एकजुट है।
लोकतंत्र की हत्या करने वाले 'वोट चोरों' के खिलाफ हम सभी आखिरी दम तक लड़ाई लड़ेंगे और जीतेंगे।
: सपा सांसद @HarendraMalikMP जी
📍 दिल्ली
अगर सड़कें खामोश हो जाएंगी तो संसद आवारा हो जाएगी ~ राम मनोहर लोहिया जी।
लोकतंत्र, संविधान और अधिकार की बचाव की लड़ाई में जनता ने आज साबित कर दिया कि अगर कोई तानाशाही करना चाहेगा तो उसे मुंह की खानी पड़ेगी।
नेताजी की पुण्यतिथि पर कोटि-कोटि नमन !
समाजवादी सिद्धांतों के लिए समर्पित नेता जी का जीवन हम सबकी सबसे बहुमूल्य धरोहर है।
नेताजी का ये मानना हमारे लिए सबसे बड़ी सीख है कि 'मदद' ही मानवता की पहली सीढ़ी है।
श्रद्धेय नेता मुलायम सिंह जी सदैव अमर रहे 🙏।
पवन का झोंका आएगा
अंहकार सब उड़ जाएगा
अयोध्या में ‘चढ़ावा-चंदा-दान’ चोरों को हराने के लिए हमारा एक युवा ‘पीडीए प्रहरी’ ही काफ़ी है। चोरों को क्लीन चिट देनेवाले दरअसल हिस्सेदार होते हैं। दूध का दूध, पानी का पानी तो हुआ नहीं, इस बार जनता घमंड का सारा पानी उतार देगी।
पावन स्थलों पर वनस्पतिजीवियों का कोई काम नहीं।
"जो पूर्व में संकल्प लिया था मैंने केदारेश्वर धाम के पूर्ण होने के बाद मैं अपनी पार्टी के पवन पांडेय जी से कहूंगा एक तारीख निकलवाइए हम सब राम मंदिर के दर्शन पर पहुंचेंगे।"
– माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अखिलेश यादव जी, अयोध्या
मानवता की रक्षा है सामूहिक ज़िम्मेदारी
जब भेदभाव के शूल का चुभना रहे जारी
अपमानों का बने निशाना दुखी माँ-नारी
युवाओं के सपनों पर तलवार चले दुधारी
जब सत्ता करे अत्याचार वंचितों पर भारी
तब तू उठा त्रिशूल और बन सुदर्शनधारी!
आज अयोध्या की पावन धरती पर कलियुग के ताप को हरकर इहलोक को संवारने वाली और परलोक को सुधारने वाली ‘भागवतकथा’ का अमृतपान करने के सौभाग्यशाली क्षण।
बचपन में किसी ने बताया था कि ‘जो भव के बंधन से मुक्त कराए वही भागवत।’ और ‘जो व्यथा हरे, वही कथा’। आज का समय क्योंकि बंधनों और व्यथाओं से भरा है - अहंकार के बंधन, सत्ता के बंधन, जाति के बंधन, भेदभाव के बंधन, वैमनस्य के बंधन, ऊँच-नीच के बंधन, छुआछूत के बंधन, शुद्धि-अशुद्धि के बंधन और भी अनेक प्रकार के सामाजिक और मानसिक बंधन, इसीलिए भागवतकथा का महत्व और प्रासंगिकता आज और भी बढ़ गई है।
कथा सिर्फ कहानी नहीं होती जो मनोरंजन करती है, कथा तो ‘मनोवर्द्धन’ करती है। कहानी मन को बहलाती है, कथा मन और मनोबल को बड़ा बनाती है। कहानी के अंत होने पर आनंद का क्षणिक अनुभव होता है, जबकि कथा खत्म होने पर उत्तरदायित्व की अमिट गहरी अनुभूति होती है। कथा के मूल संदेश को जीवन में उतारने से ही कथा सुनने का पुण्य प्राप्त होता है।
भागवतकथा इसीलिए कथा है, कहानी नहीं। वो सिर्फ कृष्ण जी के बारे में नहीं बताती, वो हमें कृष्ण जी जैसा बनने के लिए हमें प्रेरित करती है।
भागवतकथा वाचन-श्रवण से बढ़कर, व्यक्तिगत प्रेम और सामाजिक समानता का संविधान है।
भागवतकथा सिखाती है - प्रेम ही सबसे बड़ा परमार्थ है।
भागवतकथा दया और करुणा का पाठ पढ़ाती है।
भागवतकथा भेदभाव मिटाकर समानता सिखाती है।
भागवत कथा की अनंत सीखों में से एक विशेष सीख ये भी मिलती है कि ‘प्रेम, दया, अपनापन’ ही सबसे बड़ा मानव-धर्म है।
मेरे लिए व्यक्तिगत रूप से, भागवतकथा का सबसे बड़ा सबक यही है कि ‘भेदभाव मिटाओ, समानता लाओ’।
कृष्ण जी ने सिखाया कि सत्ता आती-जाती
आज के समय में, प्रेम और समानता के महाकाव्य को हम ‘संविधान’ कहते हैं। इसीलिए हमें संविधान की रक्षा करनी है।
मुझे लगता है भागवतकथा ‘शोषित, पीड़ित, वंचित के उद्धार’ का सबसे बड़ा स्रोत है। इसमें 'राज' का मतलब शासन नहीं, सबको साथ लेकर चलना है।
मेरे लिए भागवतकथा ‘सामाजिक न्याय के राज’ के उदाहरणों का एक संकलन है, जिसमें विदुर जी भी हैं, सुदामा जी भी हैं और कुब्जा भी। इन चरित्रों के माध्यम से मैंने तो यही सीखा कि किसी भी उपेक्षित, विपन्न व उपेक्षित को उसके तिरस्कृत होने या वंचित होने के भाव से मुक्त करना ही सामाजिक न्याय है।
साथ ही जिस ‘बंधु-राष्ट्र’ बनाने का संकल्प हम लेकर चले हैं, भागवतकथा उसका प्रकाश स्तंभ बनकर हमें राह दिखाती है।
भागवत कथा सदियों से चलती चली आ रही है और सदियों तक चलेगी क्योंकि नफ़रत और भेदभाव हर युग में होंगे, तो कृष्ण जी की चेतना भी प्रेम, दया और अपनापन से उनका अंत करने के लिए विविध रूप में सक्रिय होती रहेगी व मानवता को चिरायु होने का वरदान देती रहेगी।
‘भागवतकथा’ का यही है सार
’प्रेम’ ही है सबसे बड़ा संस्कार
’दया’ से ही पूर्ण होता ये संसार
’अपनापन’ जीवन का आधार
‘भागवतकथा’ का यही है सार
’सामाजिक-न्याय’ हो आधार!
’मिटें भेद सब, हो सबका उद्धार
निर्मूल हो ‘पीड़ा, दुख, अपमान’
’शोषित-वंचितों’ का हो उत्थान
बनके ‘बंधु-राष्ट्र’ करें कल्याण
‘भागवतकथा’ का यही है सार
अमर नहीं होता किसी का राज
अंत में मारा ही जाता ‘अहंकार’
और होता है पापियों का संहार
‘भागवतकथा’ का यही है सार