एक इस्तीफे से क्या बदलेगा?
कुर्सी गई तो शोर मचा है, जीत का डंका बाजा है,
पर मन में इक सवाल बड़ा है, क्या बदला पूरा राजा है?
सिर्फ एक के जाने से क्या, शिक्षा का रंगत सुधरेगी?
या फिर वही पुरानी गाड़ी, पटरी से आगे निकलेगी?
मंत्री बदला, चेहरा बदला, क्या नीतियाँ भी बदलेंगी अब?
छात्रों के इन टूटे सपनों को, राहत कोई मिलेगी कब?
काकरोच जनता के आगे, झुकना पड़ा जो सरकार को,
तो क्या सच में समझा है तुमने, उस पीड़ा और उस भार को?
पेपर लीक की इस आग में, सिस्टम पूरा जलता है,
एक इस्तीफे से कहो भला, कैसे नया दौर चलता है?
जब तक जड़ से रोग न मिटे, तब तक कैसी यह जीत
"हर मुलाकात एक गहरा सबक दे गई,
हर इंसान एक गुरु बनकर जिंदगी का फलसफा सिखा गया... पर अफ़सोस,
पूरी दुनिया को समझने के बाद भी यह दिल खुद की ही तलाश में यूँ ही तन्हा भटकता रह गया।"
£__विकाश कुमार
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पवनपुत्र, संकटमोचन, प्रभु श्रीराम के परम भक्त भगवान हनुमान जी की कृपा आप सभी पर बनी रहे।
वे आपके जीवन से सभी संकटों को दूर कर आपको शक्ति, बुद्धि, साहस और सफलता प्रदान करें।
मनोजवं मारुततुल्यवेगं
जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्।
वातात्मजं वानरयूथमुख्यं
श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये॥
नव वर्ष, नव संकल्प, नव हर्ष! 🚩
किरणों ने केसर घोला है, अंबर ने पट खोला है,
प्रकृति की कोमल कलियों ने, नव वर्ष का मंत्र बोला है।
सूख गए जो पात पुराने, अब उनका मोह त्याग दो,
नई कोपलों के संग जग में, नूतन सुर-अनुराग दो।