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राम मंदिर पर सबसे विस्फोटक खुलासा।
पहली बार नृपेंद्र मिश्रा की अगुवाई वाली राम मंदिर Construction committee पर सवाल।
27 जुलाई को राम मंदिर के लेखा प्रभारी रहे महिपाल सिंह की SIT को दी गई 'विस्फोटक' गवाही।
पहली बार सामने आई।
"800 करोड़ का राम मंदिर, 2200 करोड़ में बना,
और वो भी 'दोषपूर्ण' बना!!
राम मंदिर के पैसे से, VHP का घर बना!!"
26 जुलाई को SIT ने महिपाल सिंह से ईमेल के माध्यम से मांगी थी जानकारी।
27 जुलाई को महिपाल सिंह ने SIT को दी जानकारी।
महिपाल ने SIT को बताया-
"जगन्नाथ मंदिर, लवकुश मंदिर और रंगमहल में राम मंदिर के लिए फ्री में मिल रहा था कार्यालय, फिर भी चंपत राय ने लाखों खर्च किए।
चंपत राय के आवास पर बिना रसीद दिए ही, राम मंदिर के लिए चंदा लिया जाता रहा। उस राशि की चोरी हुई, पर कोई एक्शन नहीं हुआ।
राम मंदिर ट्रस्ट के पैसों से विश्व हिंदू परिषद की कालोनी में निर्माण किए गए।
राम मंदिर ट्रस्ट के पैसों से विश्व हिंदू परिषद के कार्यक्रम किए गए।
विश्व हिंदू परिषद की कालोनी में रहने वाले लोगों को राम मंदिर के पैसों से मानदेय का भुगतान किया गया।
निशुल्क मिल रहे पत्थरों की जगह घटिया क्वालिटी के पत्थर बहुत अधिक कीमत पर लिए गए।
राम लला के झूले के लिए 150 किलो चांदी आई, मगर झूला सिर्फ 85 किलो में बनाया गया।
चंपत राय ने अनेक विवादास्पद संपत्तियां खरीदी, जिनका कब्जा ही नहीं मिला। ट्रस्ट को करोड़ों का नुकसान हुआ।
राम मंदिर निर्माण का एस्टीमेट 800 करोड़ का था, 2200 करोड़ से ज्यादा का खर्च हुआ।
राम मंदिर का निर्माण वास्तु के विपरीत हुआ।
राम मंदिर के लिए आया मुकुट गायब हुआ। मुकट गायब करने वालों को चंपत राय ने क्षमा किया। कोई पुलिस कार्यवाही नहीं की।"
महिपाल सिंह ने यह भी लिखा- "मेरी दी गई जानकारी पूरी तरह 100 परसेंट सत्य है।"
पूरी खबर @TOPSecret24x7
मैं पहले दिन से इस बात पर कायम हूं कि CJP को BJP ने ही बनाया है.
पहले दिन से प्लान था कि विपक्ष को डिस्क्रेडिट करके, अपने हिसाब का विपक्ष तैयार कर दिया जाए.
एयरपोर्ट पर परमिशन देना हो, या जंतर-मंतर पर धरना चलते देना हो. सब कुछ प्लान के हिसाब से था.
मैं ये गारंटी के साथ कह सकता हूं- 20 तारीख से पहले मोदी सरकार चाह देती तो 1 घंटे धरना ना चल पाता, लेकिन सरकार ने स्क्रिप्ट के हिसाब से चलने दिया.
वांगचुक जिन्हें खुद अमित शाह ने जेल से निकाला था, उनका भूख हड़ताल करना, और अचानक से एक सुबह उन्हें उठा लेना. सब कुछ स्क्रिप्ट के हिसाब से था.
बस 20 तारीख को जो हुआ, वो ना BJP को पता था, ना ही CJP को अंदाजा. बड़ी संख्या में लोग दिल्ली पहुंच गए.
यहां से सब कुछ स्क्रिप्ट के बाहर चला गया. इसलीए CJP की पूरी टीम ही मौके से गायब हो गई. किसी को एक लाठी नहीं पड़ी.
देश भर से आए बच्चों ने सब कुछ झेला, और उसके बाद ये मामला बहुत बड़ा हो गया. जो अब BJP और CJP के कंट्रोल से बाहर था.
स्क्रिप्ट का अंत करीब-करीब ऐसा ही था, जिसमें सरकार संवेदनशील लगे और विपक्ष के नाम पर कुछ लोग खड़े कर दिए जाएं, जो सरकार के हिसाब से हों.
क्योंकि विपक्ष पिछले 3 साल में बहुत ज्यादा मजबूत हो गया था. खासकर युवाओं के बीच में अपनी पहुंच मजबूत की थी. इसी बात को तोड़ने के लिए CJP का नाटक किया गया.
जब 20 तारीख के बाद मामला स्क्रिप्ट के बाहर गया तो पहले कुछ वक्त इंतजार हुआ. फिर वांगचुक को खुद सरकार ने सूप पिलाकर मामला खत्म किया.
और आखिर में धमेंद्र का इस्तीफा हो गया.
इस्तीफे के बाद जिस तरह से सरकार के मंत्री बता रहे हैं कि धरना तत्काल खत्म किया जाए, वो बताता है कि इसे कौन चला रहा था.
आप खुद सोचिए, ये जितने सेलिब्रेटी हैं, ये अचानक से कैसे बोलने लगे. एक जैसी टीशर्ट पहनकर, कॉओर्डिनेटेड तरीक से. जिनके लिए पैसा ही सब कुछ है, वो देश की चिंता क्यों करने लगे, वो भी अचानक.
अब लोगों के बीच ये भ्रम पैदा हो गया कि CJP की सरकार सुन रही है, विपक्ष वही है. सरकार यही भ्रम लोगों में बनाए रखना चाहती है. और स्क्रिप्ट के हिसाब से ये बात लोगों में चली गई.
सरकार को अपने हिसाब का विपक्ष मिल गया, जिसे वो अपने हिसाब से चला सकती है. जो भी इस भ्रम जाल में फंस रहा है, वो अपना और देश का नुकसान कर रहा है.
इस पूरे आंदोलन में लेफ्ट के जितने भी छात्र संगठन, कांग्रेस के छात्र और युवा संगठन और बाकी विपक्ष के छात्र संगठन शामिल हैं, उनकी मंशा साफ थी. वो असल में विपक्ष का काम कर रहे थे.
इस आंदोलन में जितने भी युवा थे, जो देश के अलग-अलग कोनों से जुड़े, सबकी मंशा साफ थी.
बस CJP का मामला अलग है, जिसपर बहुत संदेह है. इसे लेकर सावधान रहना ठीक.
सत्य और अहिंसा के माध्यम से कॉकरोच जनता पार्टी और राहुल गांधी जी ने देश के लोकतंत्र के लिए सड़कों पर उतरकर छात्रों की आवाज उठाई है !
हम कांग्रेस पार्टी और विशेषकर राहुल गांधी जी को इसके लिए आभार व्यक्त करते हैं और उम्मीद करतें हैं कि जननायक जनता की आवाज को और मजबूत करेंगे।
जय हिंद।
🚨 “Mother of all deals” की असली पोल-खोल!
संदीप चौधरी का खुलासा
बिना डरे, बिना झुके 🫡
3% से 18% टैरिफ
3 लाख करोड़ के फायदे से 9 लाख करोड़ सालाना घाटा
चीन से नुकसान था ही, अब अमेरिका से भी
ऊपर से ट्रंप की धमकी - रूस से तेल लिया तो और टैरिफ 😡
देश को गुमराह करना बंद करो।
पिछले 1 महीने में, Brent crude की कीमत 116 डॉलर/बैरल से गिरकर 92 डॉलर/बैरल हो गई
करीब 24 डॉलर/बैरल की गिरावट
लेकिन आपके पेट्रोल और डीजल के दाम तो कम नहीं हुए
मोदी जी के मंत्री तेल कंपनियों के नुकसान पर हुआँ हुआँ कर रहे थे, क्या अब वह लोगों के लिए दाम कम करने की माँग करेंगे?
Two of India’s sharpest politicians just proved something Rahul Gandhi has been saying for years. And neither of them meant to.
Raghav Chadha — ICA qualified, articulate, camera-ready.
Joined BJP after 15 years in AAP using a constitutional loophole.
Shashi Tharoor — PhD, Oxford, UN career, probably the most eloquent Indian in a room.
Praised Modi’s anti-terrorism policies. BJP’s media celebrated him. He called it “pro-India.”
Two men. Peak qualifications. Peak communication. Zero ideological spine.
And this is the part nobody says out loud;
Ideology isn’t a quality. It’s the only quality that matters.
Degrees tell you HOW to argue.
Personality tells you HOW to charm.
Communication tells you HOW to perform.
Ideology tells you WHY you’re in the room at all.
Without it, you’re just a talented man looking for the most comfortable side.
Raghav found his. Tharoor is still warming up to his.
Then there is Rahul Gandhi.
No constitutional loopholes. No praises for the authoritarian regime. No skipping strategy meetings because he felt disrespected.
Just Bharat Jodo on foot; 4,000 km. In the cold. In the heat. When nobody believed.
Just walking into Parliament; against a majority that mocks him, and saying “I will not yield” on minority rights. And not yielding.
Just forcing a caste census out of a government that never wanted it.
Raghav had the talent. Tharoor has the words. BJP has the power.
Rahul has something none of them have; a reason that hasn’t changed since day one.
That’s not charisma. That’s not education. That’s ideology. And in a country fighting for its Constitution, that is the only currency that actually holds value.
The fight against RSS-BJP’s tyranny doesn’t need the most brilliant speaker. It needs the one person who refuses to leave the battlefield.
That person is Rahul Gandhi. And that’s exactly why they’ve spent a decade trying to destroy him; because they know ideology without ego is the one thing their money and machinery cannot buy.
Rahul Gandhi Ji to BJP —
- You are not the people of India,
- You are not the armed forces.
- You are a political organization,
we are attacking you, not the people of India and the armed forces. 🔥
BJP is not stupid - they knew this bill couldn’t have passed
But they still brought it.
This was a panic reaction because the Prime Minister at any cost wanted to send out two messages
1) He wanted to change the electoral map of India
2) He needed to send this message again that he is pro-women. Why he is doing that I leave it to your imagination.
But the powers that be know exactly why he is doing it.
@RahulGandhi 🔥🔥🔥🔥🔥🔥
@neha___love @RaviSis48297494@AadeshRawal Neha love jiski bhi rahi ho maine nahi suna na dekha (is laayak bhi nahi ho btw) non biological ka umbilical cord ke detail vadnagar se magarmacch ke muh se nikal lao aap. #fekukifauj#mahajhuttha
Meet Gyanesh Kumar, Chief Election Commissioner of India.
Daughter : DM of Noida ( UP)
Son in Law : DM of Sharanpur (UP)
Daughter 2 : Deputy Director, IRS , Srinagar (J&K)
Other Son in Law 2 : DM of Sri Nagar (J&K)
There is less than 1% chance in Administrative services that both husband and wife get posted in the same state, but this happened twice with Gyanesh's daughters.
Coincidence? Absolutely not, he got this for selling his soul.
राहुल गांधी पीछले 2 साल से जाती जनगणना का मुद्दा उठे रहे थे लेकिन उनकी अपनी पार्टी में एक तबका ऐसा था जो इसका विरोध कर रहा था।अब सरकार ने जाती जनगणना कराने का फ़ैसला किया है।शायद कांग्रेस के भीतर के लोग अब माने कि राहुल गांधी का विषय सही था। क्योंकि यह तमाम लोग मोदी जी से बहुत प्रभावित रहते हैं।
वैसे The Lallantop का मैं घोर आलोचक हूँ मगर जब कोई अच्छा काम करे तो उसकी वैसे ही तारीफ़ करनी चाहिए जैसे उसकी खामियां गिनाते हो।
The Lallantop के रिपोर्टर अभिनय पाण्डेय ने इस महाकुंभ में बेहद ही साहसिक रिपोर्टिंग की है,
अभिनय पाण्डेय ने इस भगदड़ में गई मौतों की एक घटना जो छिपाई जा रही थी इन्होंने उसे दुनिया के सामने लाया और
देश और दुनिया को हक़ीक़त से रूबरू करवाया जो कि बेहद ही भयावह थी,
करोड़ों रुपए वाला मेंस्ट्रीम मीडिया ख़त्म हो चुका है, उसकी जगह ऐसे साहसिक रिपोर्टर्स ले रहे हैं।