We will ensure reservation not only in jobs, but also in promotions.
Don't be contented with just Class 1 jobs for your children.
Dream big!
You need compensation for the injustice meted out to you for decades.
You should not stop until your child attains the rank of either DGP or Chief Secretary.
- Shri @AmitShah
#JnKWelcomesAmitShah #TransformingJnK
Live misuse of SC-ST Act caught on camera. Watch a Dalit govt employee ask an advocate to falsely frame his senior under the false case of Atrocities Act.
चित्रकूट में 20 साल के देवा द्विवेदी ने फर्जी SC/ST केस के डर से जान दे दी। दो महीने से मानसिक दबाव में था और व्यवस्था चुपचाप देखती रही।
अब देखते हैं कितने नेता लोग सड़क पर आते हैं आमरणअनशन करते हैं। यह सरकार का सिस्टम है जो निर्दोष GC को तोड़ देता है।
कानून सुरक्षा के नाम पर दंड बन गया है।
Listen to this open hate speech against Brahmins and GCs. This is exactly why GCs need a GC Protection Act.
Will anything happen to him? No. Because he’s not GC.
आज मध्य प्रदेश के इंदौर में सवर्ण समाज सड़कों पर! UGC के काले नियमों के खिलाफ पूरे प्रदेश में प्रदर्शन।
राजस्थान के बाद अब MP के हर कोने से सवर्ण समाज का आंदोलन तेज हो रहा है, BJP के लिए मुश्किले लगातार बढ़ रही हैं!
ब्राह्मण ने किसी का शोषण नहीं किया, हमारी खामोशी को कायरता मत समझना। द्वंद्व कहाँ तक पाला जाए, युद्ध कहाँ तक टाला जाए, तू है परशुराम का वंशज, फेंक जहाँ तक भाला जाए।
नरोत्तम मिश्रा का धाकड़ बयान 🔥
@BhaiPreetSingh जी की अध्यक्षता में SC ST Act और UGC Rollback के खिलाफ महत्वपूर्ण बैठक हुई!
यकीन मानिए यह चिंगारी जलती रहनी चाहिए, सदियों में एक बार उठती है ऐसी क्रांति की ज्वाला।
जिसका डर था, वही हुआ। वाराणसी के शास्त्री घाट पर भूख हड़ताल पर बैठे लोगों को पुलिस ने रात में हटा दिया।
खुद सुनिए, रात में उनके साथ क्या हुआ। अविश्वसनीय
वाराणसी में UGC, SC-ST Act और आरक्षण को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे लोगो की तबीयत बिगड़ चुकी है।
न सरकार सुन रही, न कोई चर्चा। अगर कोई और समुदाय होता तो अब तक हंगामा मच चुका होता।
रामदास आठवले जी, पहले कांग्रेस-NCP, फिर NDA, सालों से एक ही सीट और सीमित जनाधार के बावजूद सत्ता में मंत्री पद मिलता रहा। इसे प्रतिनिधित्व कहें या मौकापरस्ती?
और अब आरक्षण की समीक्षा पर सवाल उठाने वालों को ही कटघरे में खड़ा किया जा रहा है। आरक्षण पर बहस से डर क्यों? समीक्षा की मांग दबाना लोकतंत्र नहीं, अपनी राजनीति बचाना है।
ज़मीनी हकीकत और हमारा अधिकार
यह एक बेहद कड़वी सच्चाई है कि इक्कीसवीं सदी के इस आधुनिक दौर में भी जातिवाद हमारे समाज की रगों में एक धीमे ज़हर की तरह दौड़ रहा है। ज़मीनी हकीकत यह है कि आज भी गाँवों की सीमाओं के बाहर हमारी अलग बस्तियां हैं, और शहरों में पूरे पैसे होने के बावजूद हमें कई कॉलोनियों में मकान या फ्लैट देने से अघोषित रूप से मना कर दिया जाता है। मंदिरों की पंगतियों से लेकर सोशल मीडिया तक, हर जगह जाति हमारी योग्यता और हमारे इंसान होने पर हावी कर दी जाती है। हम हर मुद्दे पर स्वस्थ संवाद और चर्चा के लिए हमेशा तैयार हैं, लेकिन सोशल मीडिया पर मीम्स की आड़ में भारतरत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर जी का अपमान और आरक्षित समाज के बच्चों के साथ हो रहा जातिगत भेदभाव किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। यह महज़ कोई पुरानी कुरीति नहीं, बल्कि एक सोची-समझी व्यवस्था है जो समाज के एक बड़े हिस्से को जानबूझकर मुख्यधारा और सम्मानजनक जीवन से आज भी दूर रखे हुए है।
इसी अदृश्य लेकिन मज़बूत दीवार को तोड़ने के लिए आरक्षण कोई खैरात नहीं, बल्कि हमारा संवैधानिक अधिकार और प्रतिनिधित्व का एकमात्र हथियार है। लोकतंत्र में आपको जो चाहिए वह ज़रूर मांगें; यहां तक कि हमने भी EWS (आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्ग) की आर्थिक सीमा बढ़ाने की मांग का समर्थन किया है। लेकिन किसी और को जो अधिकार मिल रहा है, उसे छीनने की मानसिकता ठीक नहीं है। जब तक समाज में यह जातिगत भेदभाव ज़िंदा है, तब तक न केवल सरकारी बल्कि प्राइवेट सेक्टर (निजी क्षेत्र) में भी आरक्षण लागू होना ही चाहिए। जो लोग वातानुकूलित (AC) कमरों में बैठकर आरक्षण खत्म करने की वकालत करते हैं, उन्हें ज़मीनी हकीकत समझकर ही चर्चा करनी चाहिए। हमारी स्पष्ट चुनौती है पहले आप ज़मीन पर उतरकर, गाँवों और शहरों से इस सड़ी-गली जाति व्यवस्था को जड़ से खत्म करने का काम करें। जिस दिन इस देश से जाति और उसके आधार पर होने वाला भेदभाव पूरी तरह मिट जाएगा, हम खुद आगे बढ़कर अपना आरक्षण छोड़ देंगे।
Call it policy, call it politics but these decisions must be questioned. Look at what the government has done in recent years. 👇
> 27% reservation in Sainik Schools.
> SC/ST reservation expanded in medical education.
> SC/ST Act amended — 2018.
> Odisha increased reservation in medical/technical education to 50%.
> SC/ST Act offences increased from 22 to 47.
> SC/ST relief amounts increased up to ₹8.25 lakh.
> SC/ST/OBC students provided hostel and welfare facilities.
> UGC Equity Regulations introduced — 2026.
> NCBC given constitutional status.
> States empowered to maintain their own OBC lists.
अगर सरकार सोच रही है कि एक व्यक्ति को फुसलाकर सवर्ण समाज की पूरी माँगों से बच जाएगी और UP चुनाव तक टालमटोल करती रहेगी, तो यह भ्रम जल्द टूटेगा।
RHA Reforms की माँगें स्पष्ट हैं। जब तक सभी माँगें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन किसी भी कीमत पर पीछे नहीं हटेगा।
21 अगस्त को जंतर मंतर पर हुए आंदोलन के उपरान्त पूर्व निर्धारित समय के अनुसार श्री हर्ष दुबे, श्री रण बहादुर सिंह चौहान व श्री मृत्युंजय पाठक, टीम के सदस्यों से सौहार्द पूर्ण वार्ता हुई। इस क्रम में हम शीघ्र ही फिर मिलेंगे।
Himachal Pradesh removes the caste column from school admission forms.
If caste doesn’t define a student, why should it define opportunity through reservation? 🤷
Kudos to @roypranesh and TIMES NOW for consistently bringing our issues to prime time and giving them the debate they deserve.
Merit deserves the spotlight! 👏
यह देश का पहला ऐसा आंदोलन है, जिसमें न पक्ष साथ है, न विपक्ष साथ है, सरकार का विरोध करने वाले भी इसके साथ नहीं हैं, और वे भी साथ नहीं हैं जो कल तक खुद को कॉकरोच कहकर अपनी पहचान बताते थे।
कोई बात नहीं, हम अपना हक लड़कर लेना जानते हैं।