पर्वमयी नमस्कार🙏
पूरा देश पंचदिवसीय पर्व से आनंदित है👏
हर दिन का अपना महत्व है
आज नरक #चतुर्दशी यानी
#सत्यभामा ने #नरकासुर का वध किया
#श्रीकृष्ण ने उसकी पीड़ित
16000 रानियों को अपनाया🕉️
संदेश:
हम भी समाज मे किसी को
पीड़ित अपमानित और अनाथ
नहीं रहने दें
सबको अपनाएँ
#शुभकामनाएँ
🪔 #जय_माँ_लक्ष्मी
🪔 जय श्री राम
इस दिवाली, जलाएं अंधकार नहीं — जलाएं प्रोपेगैंडा! 🔥
सालों से हमारे त्योहारों, परंपराओं और आस्थाओं को “पर्यावरण”, “समानता” और “सेक्युलरिज़्म” के नाम पर बदनाम किया गया है।
अब वक्त है कि पटाखों से ज़्यादा ज़ोर से सच्चाई गूंजे
इस #Diwali जलाएं झूठ की दुकानें… और रोशन करें राष्ट्रभाव की ज्योति! 🚩
2014 तक दफ्तर में तिलक लगाना और कलावा बांधना "असहज" माना जाने लगा था।
देश की आत्मा को दबाने का माहौल बन चुका था।
ज़ाकिर नाइक, जो बातें आज पाकिस्तान में बोल रहा है,
वही बातें वह भारत में बोलता था — और तब हमारे मीडिया ने उसे "शांति दूत" बनाकर मंच दिया था।
आज वही पाकिस्तान में अपमानित है,
पर याद रखिए — वह भारत से मोदी जी के प्रधानमंत्री बनते ही भागा था।
कभी वह यहां के मंत्रियों और नेताओं क�� साथ चाय-नाश्ते पर बैठता था।
PFI का जाल हर गली में फैला था,
टीवी पर दिनभर जहर उगलने वाले लाइव कार्यक्रम चलते थे।
उमर खालिद का पिता सिमी का नेटवर्क चलाता था,
और आज वही विचारधारा “क्रांतिकारी” बनकर मंचों पर बैठी होती।
कश्मीर, दिल्ली, बेंगलुरु में चलती बसों में बम धमाके होते थे।
मुंबई ब्लास्ट के वक्त शरद पवार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में झूठ बोला —
फिर कुछ दिन बाद स्वीकार किया।
यह सब राजनीति थी,
पर ��ब वही भारत है जहां प्रधानमंत्री खुलकर कहते हैं —
“जो बांटने की सोच रखेगा, उसका चेहरा सबके सामने आ जाएगा।”
प्रधानमंत्री का यह वाक्य हर हिन्दू बेटे-बेटी के लिए संदेश है।
जो भगवा लेकर सड़कों पर उतरते हैं,
वे अपने लिए नहीं, दूसरों की रक्ष��� के लिए उतरते हैं।
उन्हें दुश्मन मत समझो —
वे कल किसी दिन तुम्हारे दरवाजे पर तुम्हें बचाने के लिए खड़े होंगे।
इन युवाओं का उत्साह बढ़ाइए,
उन्हें अपनाइए, उन्हें अवसर दीजिए।
क्योंकि जब पत्थरबाज सड़कों पर उतरते हैं,
तो इन्हीं के सामने खड़ा होना होता है।
यह लड़ाई चुनाव की नहीं,
अस्तित्व की है।
कोई भी जीते या हारे,
समस्या हर दरवाजे तक आएगी।
सामना करना सबको होगा।
इसलिए खुद को और अपने बच्चों क��� तैयार कीजिए।
🚩 जय श्री राम। 🚩
@AshwiniUpadhyay @KapilMishra_IND
कोर्टमयी नमस्कार🙏
आजकल #सुप्रीमकोर्ट के भी
कुछ निर्णय असहज कर देते हैं😕
पर हम सब द्वारा
#मंदिर को दी
#दान राशि के विषय मे
#हिमाचल#हाईकोर्ट का यह निर्णय
तथ्यों और तर्क पर आधारित है✅
आस्था और भावनाओं की जीत है👌
सुनकर मन आनंदित हुआ👏
आप भी जानें समझें और आगे चर्चा करें🙏
ऋषिमयी नमस्कार🙏
#अजमेर प्रवास पर
#महर्षि#दयानंद#सरस्वती
कर्मभूमि #ऋषिउद्यान देखने गया🙏
#दीपावली के अवसर पर वहाँ
#गुरुग्राम के कन्हैयालालआर्य जी की
देख-रेख मे चल रहा
#ऋषि मेला देखा
प्रसाद पाया🕉️
महर्षि का संभाल कर रखा
सामान पुस्तके पत्र आदि
देखने से ऊर्जा और जानकारी मिली🙏
🎇 “त्योहारों पर सेक्यूलरिज़्म का सिलेक्टिव चेहरा!” 🎇
दिवाली मनाओगे तो “पर्यावरण के हीटर” कहलाओगे,
लेकिन गैर-हिंदू त्योहार पर चुप रहो तो “सेक्यूलर” कहलाओगे!
भारत में सेक्यूलरिज़्म अब संवेदनशीलता नहीं, बल्कि सिलेक्टिव एक्श�� बन गया है।
त्योहार आते ही कुछ लोग पर्यावरण-प्रेमी योद्धा बन जाते हैं —
साँस, खाँसी, जानवरों और प्रदूषण के ग्राफ दिखाकर डराया जात��� है।
पर जब किसी विशेष समुदाय के त्योहार की बात आती है,
तो वही लोग अचानक “धार्मिक भावनाओं का सम्मान करो” कहकर सेक्यूलर देवता बन जाते हैं।
इन अवसरों पर बड़े पैमाने पर पशु-अवशेष खुले में पाए जाते हैं,
जिससे पानी में संक्रमण, दुर्गंध और हाइड्रोजन सल्फाइड व मीथेन जैसी गैसें निकलती हैं —
जो स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक हैं।
भारत में तो “कुर्बानी बैंक” तक चल रहे हैं।
1990 के बाद से ऊँटों की संख्या में लगभग 75% की गिरावट दर्ज की गई है।
बीकानेर की कच्छी नस्ल के ऊँट, जो पर्यटन और रेगिस्तानी सेवाओं के लिए जरूरी थे,
अब विलुप्ति की कगार पर हैं।
लेकिन इस पर कोई चर्चा नहीं!
वहीं दूसरी ओर, होली या दिवाली आते ही
पटाखों, रंगों और पूजा को निशाना बनाया जाता है।
ईरान जैसे देशों में भी धार्मिक अनुष्ठानों को सार्वजनिक ��्वास्थ्य कानूनों के तहत नियंत्रित किया जाता है,
पर भारत में अगर कोई कह दे “ऐसा मत करो”,
तो उसे “धर्म-विरोधी” या “अल्पसंख्यकों के खिलाफ” बता दिया जाता है।
उदाहरण देखिए —
कांग्रेस के एक नेता दिवाली के पटाखों को “साइलेंट किलर” कहते हैं,
पर जब वोट बैंक की बात आती है,
तो उनका सारा “पर्यावरण प्रेम” मिट्टी में मिल जाता है।
क्लाइमेट चेंज पर भाषण देने वाले वही लोग,
दूसरे त्योहारों में गायब रहते हैं।
अगर रंगों में केमिकल रोकने की अपील की जा सकती है,
तो जानवरों पर अत्याचार रोकना भी उतना ही जरूरी है।
नियम धर्म देखकर नहीं —
देश देखकर, समान रूप से लागू होने चाहिए।
👉 अगर आप “एक देश – एक नियम” के पक्ष में हैं,
तो इस संदेश को इतना साझा कीजिए कि
दोगले पर्यावरण प्रेमियों तक भी ये सच्चाई पहुँचे। 🚩
कांग्रेस ने हमेशा सनातन को कमजोर करने की कोशिश की, लेकिन सनातन हर बार और अधिक प्रबल होकर खड़ा हुआ। 🚩
कांग्रेस बदल गई, नीतियाँ बदल गईं, पर उसका सनातन विरोध कभी नहीं बदला। 🕉️
क्या आपने कभी कांग्रेस को आतंकवादियों के खिलाफ बोलते सुना है ⁉️
क्या आपने कांग्रेस को नक्सलवादियों के खिलाफ आवाज़ उठाते देखा है ⁉️
माओवादियों की हिंसा पर कांग्रेस ने कब विरोध जताया ⁉️
इतना ही नहीं, क्या कभी पाकिस्तान के खिलाफ कभी कांग्रेस गरजी है ⁉️
क्या कांग्रेस ने कभी कहा कि —
“भारत के संसाधन केवल भारतीयों क��� लिए ��ैं, घुसपैठियों को देश से बाहर निकालो” ❓
क्या कभी कांग्रेस नेता भारत माता की जय बोलते नज़र आए ⁉️
क्या आपने कांग्रेस को कभी सनातन धर्म की महिमा का गुणगान करते सुना ⁉️
👉 कांग्रेस ने हिंदू संतों, साधुओं और राष्ट्रनिष्ठ संगठनों पर आतंकवाद का ठप्पा लगाने की पूरी कोशिश की,
लेकिन सत्य के सामने उसकी हर चाल नाकाम रही।
उन्होंने झूठे केस बनवाए, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, विश्व हिंदू परिषद और हिंदू स���तों को बदनाम करने में
सरकारी तंत्र तक झोंक दिया —
फिर भी हिंदू आतंकवाद साबित नहीं कर पाए।
कांग्रेस की राजनीति का चरित्र हमेशा यही रहा —
👉 जो भारत के पक्ष में बोले,
👉 जो सनातन की बात करे,
उसे राष्ट्रविरोधी ठहराने की साज़िश रची जाए।
आज भी कांग्रेस नेतृत्व, राहुल गांधी एवं प्रियंका गांधी और उनके समर्थक RSS पर प्रतिबंध लगाने की बात करते हैं।
क्यों?
क्योंकि RSS हिंदुओं को जोड़ रहा है, सशक्त बना रहा है, ��र भारत को आत्मनिर्भर बनाने में जुटा है।
यह भी उजागर हो चुका है कि कांग्रेस ने कई मौकों पर
पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों को बचाने और
हिंदू संगठनों पर झूठे आरोप लगाने का षड्यंत्र रचा था।
यहां तक कि आतंकवादी हमलों की ज़िम्मेदारी भी
कई बार हिंदू संगठनों पर थोपने की कोशिश की गई —
लेकिन सत्य ने हर बार कांग्रेस की पोल खोल दी।
📹 कांग्रेस का काला अध्याय, जहां पाकिस्तान को बचाने के लिए भारत के हिंदू समाज और संतों को प्रताड़ित किया गया।
देश को सच्चाई का हर अध्याय जानना चाहिए ‼️
🇮🇳 जय हिंद!
🚩 भारत माता की जय!
🚩 जय जय श्रीराम
57 मुस्लिम देशों के होते हुए भी
तबलीगी जमात का मुख्यालय दिल्ली में...?
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से भी बड़ा संगठन #तबलीगी_जमात,
जो 1926 में आरंभ हुआ और जिस पर कई मुस्लिम देशों ने प्रतिबंध लगाया।
PFI, मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड, वक्फ बोर्ड, देवबंदी, बरेलवी —
ये सब तो इसकी शाखाएँ और टहनियाँ हैं!
Tableegi Jamat भारत में अपना इस्लामिक एजेंडा चला रहा है,
फिर भी भारत में RSS पर बैन लगता है, तबलीगी जमात पर नहीं?
कई इस्लामिक देशों में तबलीगी जमात पर प्रतिबंध लगाया गया है,
क्योंकि उनका कहना है — “ये संगठन बच्चों को रेडिकल बना देता है।”
तो भारत में इस जिहादी समूह पर प्रतिबंध कब लगेगा? 😡
#TableegiJamat
@HMOIndia@PMOIndia@AshwiniUpadhyay
The RSS deeply mourns the tragic and untimely death of Swayamsevak Sri Anandu Aji from Kottayam.
Baseless allegations linking the Sangh to this incident are completely false and unfounded.
RSS Kottayam has demanded an independent and impartial probe to uncover the real truth.
अब ज़रा सोचिए...
क्या सुप्रीम कोर्ट में कोई वकील जाकर ये कह सकता है —
“मुझे किसी ज़िम्मेदार व्यक्ति ने कागज़ दे दिया, मैंने बिना पढ़े ही अदालत में रख दिया”?
हलफ़नामे जैसे गंभीर दस्तावेज़ में इससे बड़ी मूर्खता और क्या हो सकती है?
ऐसे लोग अक्सर भारत और भारत सरकार — दोनों के खिलाफ नैरेटिव बनाते हैं।
इन्हीं में से एक नाम है प्रशांत भूषण का।
प्रशांत भूषण देश के जाने-माने वकील हैं।
उनके पिता शांति भूषण देश के कानून मंत्री रह चुके हैं।
शायद इसी वजह से कानून से खेलना इनकी आदत बन गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने एक बार तो उन्हें माफ़ कर दिया,
लेकिन वे कोर्ट की अवमानना के दोषी साबित हो चुके हैं।
कई मौकों पर उन्होंने पाकिस्तान की भाषा बोलते हुए
कश्मीर में जनमत संग्रह की वकालत की है।
प्रशांत भूषण कई बार घुसपैठियों को बचाने अदालत पहुँच चुके हैं।
उन्होंने यहाँ तक झूठा आरोप लगाया कि भारत सरकार
“घुसपैठियों को समुद्र में फेंक रही है” —
बिना किसी सबूत के ये बयान दिया।
उन्होंने नागरिकता संशोधन कानून (CAA/NRC) का भी
कट्टर विरोध किया — सड़कों पर आंदोलन से लेकर
अदालत तक लड़ाई लड़ी।
दिल्ली दंगों के आरोपियों से भी
उनका नाम कई बार जोड़ा जा चुका है।
इतना ही नहीं, उन्होंने राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा का भी विरोध किया था।
तो सवाल उठता है —
क्या ऐसे संविधान-विरोधी व्यक्ति पर
बड़ी कार��रवाई नहीं होनी चाहिए❓
#SIR
#BiharElection2025
क्या यह बांग्लादेश है? — नहीं।
पाकिस्तान है? — नहीं।
यह है डोबोका, असम! 🇮🇳
जनसांख्यिकीय परिवर्तन अब सच्चाई बन चुका है।
मोदी सरकार का Demographic Mission शुरू हो चुका है —
अब अगला कदम है NRC
Detect. Delete. Deport.
#CAARules के बाद जनसंख्या संतुलन के लिए
NRC और UCC का कठोरता से लागू होना अनिवार्य है।
असम के डोबोका के हालात चेतावनी हैं,
कल कहीं देर न हो जाए... ⚠️
@himantabiswa@HMOIndia@PMOIndia
सनातन धर्म और हिंदुओं के सर्वनाश की नींव कांग्रेस ने रखी!
कांग्रेस ने एक के बाद एक ऐसे कानून बनाए कि अपने ही देश में हिंदू हाशिये पर चला जाए — और आज भविष्य में सर्वनाश का भय हर जागरूक हिंदू को सताने लगा है।
🔸 1950 — Article 25 पारित किया गया, जिसमें धर्मांतरण की पूरी छूट ���े दी गई।
🔸 1950 — Article 28 के तहत हिंदुओं से अपनी आस्था अनुसार धार्मिक शिक्षा का अधिकार छीन लिया गया।
🔸 1952 — Article 30 में अल्पसंख्यकों को धार्मिक शिक्षा देने का अधिकार मिला, वहीं Article 30A के तहत हिंदुओं को अपने शिक्षण संस्थानों/गुरुकुलों में धार्मिक शिक्षा देने ��े रोका गया।
🔸 1951 — HRCE Act लाया गया, जिसके तहत देशभर के लगभग 4 लाख मंदिरों पर सरकारी नियंत्रण स्थापित कर दिया गया।
🔸 1956 — Hindu Code Bill लाकर हिंदू समाज को जातियों में बाँटने का कार्य किया गया और आरक्षण की व्यवस्था बनाई गई, जबकि Muslim Personal Law Board को अछूता रखा गया।
🔸 1976 — आपातकाल के दौरान Indira Gandhi ने संविधान में मनमाने ढंग से “Secular” शब्द जोड़ दिया, जिससे यह सुनिश्चित किया गया कि भारत कभी Hindu Rashtra न बन सके।
🔸 1991 — Places of Worship Act लागू कि���ा गया, जिसके कारण हिंदू अपने प्राचीन मंदिरों पर दावा नहीं कर सकते।
📍उदाहरण: ज्ञानवापी परिसर में साक्षात् शिवलिंग मिलने के बावजूद हिंदुओं को आज भी कानूनी लड़ाई में उलझाया गया है।
🔸 1995 और 2013 — Waqf Board Laws में संशोधन कर कांग्रेस ने वक्फ बोर्ड को अमर्यादित और असीमित शक्तियाँ प्रदान कीं, जिससे वह देशभर ��ें हजारों एकड़ जमीन पर कब्जा करने में सक्षम हो गया।
🚩 अब समय आ गया है —
#CongressMuktBharat
#कांग्रेस_मुक्त_भारत
#SanatanSuraksha
#HinduRashtra
कांग्रेस का एक और कारनामा‼️
तेलंगाना में कांग्रेस सरकार ने हैदराबाद के पॉश इलाके जुबली हिल्स में सेना की जमीन एक मुस्लिम संगठन को कब्रिस्तान बनाने के लिए दे दी है!
सेना के अधिकारी ने स्पष्ट कहा — “यह जमीन आर्मी की है, यहाँ कब्रिस्तान नहीं बन सकता।”
लेकिन रेवंथ रेड्डी की सरकार खामोशी से तमाशा देख रही है!
सबसे चौंकाने वाली बात —
इस जमीन के अलॉटमेंट का वक्त ऐसा चुना गया जब 6 अक्टूबर को बिहार विधानसभा चुनाव की घोषणा हुई थी, यानी मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट लागू था!
फिर भी सरकार ने मानो कोई "सरकारी फरमान" जारी कर दिया — और कब्रिस्तान का बोर्ड लगाने लोग पहुँच भी गए!
आर्मी अधिकारियों के मौके पर पहुंचने के बाद मामला रुका��
अगर यह जमीन वास्तव में आर्मी की थी और फिर भी राजनीतिक लाभ के लिए दी गई —
तो यह राष्ट्र सुरक्षा और संविधान दोनों का उल्लंघन है!
🇮🇳 आइए, कांग्रेस मुक्त भारत का संकल्प लें —
तभी हमारा भारत सुरक्षित और अखंड रह पाएगा!
भ्रष्टाचार खत्म किया जा सकता है।
यह कोई लाइलाज बीमारी नहीं है, न ही यह कोई विश्वव्यापी समस्या है।
दुर्भाग्य से, भगवान श्री राम, ��गवान श्री कृष्ण, भगवान महावीर और भगवान बुद्ध के देश में आज भ्रष्टाचार गहराई तक फैला हुआ है।
सिंगापुर में भ्रष्टाचार नहीं है — वहाँ आज भी मानो सतयुग चल रहा है।
जबकि भारत में कलियुग इसलिए है क्योंकि हमारी पुलिस व्यवस्था, प्रशासनिक व्यवस्था और न्याय व्यवस्था सड़ चुकी है।
सिंगापुर में भले ही राम मंदिर नहीं है,
लेकिन वहाँ राम नीति है, कृष्ण नीति है — “सठे साठ्यं समाचरेत्” की भावना है।
चीन में पिछले सप्ताह एक मंत्री को फाँसी दी गई।
इससे पहले भी एक और मंत्री तथा एक सरकारी कंपनी के महाप्रबंधक को रिश्वत लेने के अपराध में फाँसी हो चुकी है।
लेकिन भारत में...?
यहाँ 70,000 करोड़ का कॉमनवेल्थ घोटाला,
1,76,000 करोड़ का 2G घोटाला,
और 1,86,000 करोड़ का कोयला घोटाला हुआ —
जितना मुगलों ने 500 साल में लूटा,
अंग्रेज़ों ने 200 साल में लूटा,
उतना हमारे नेताओं ने के��ल 50 साल में लूट लिया।
भारत आज भी सोने की चिड़िया है... बस अब उसके दर्शन नहीं हो रहे हैं। 🪶
हम सब ऐसे अनेक लोगों को जानते हैं जो चुनाव से पहले साइकिल पर घूमते थे,
और जैसे ही पार्षद बने — बुलेट आई, बोलेरो आई, स्कॉर्पियो आई और फिर पजेरो भी आ गई।
गाँव में प्रधान बनने के एक साल के भीतर ही यह सब परिवर्तन दिख जाता है।
भारत की धरती आज भी समृद्ध है —
बस उसे ईमानदार हाथों की ज़रूरत है। ✍️
#भ्रष्टाचार_मुक्त_भारत 🚩
1947 में मजहब के आधार पर देश का विभाजन हुआ,
भारत का मस्तक काटकर पाकिस्तान बना ।
मुस्लिमों को उनके ख्वाबों का पाकिस्तान मिला,
हिन्दू, सिक्ख, बौद्ध और जैन को क्या मिला....❓
इन्हें कुछ नहीं मिला 🤷
फिर भी शान्ति से देश में रहकर, देश के विकास में अपना योगदान दे रहे हैं ।
जिन्हें पाकिस्तान मिला वह जाहिल, जिहादी, कट्टरपंथी आज भी 1400 साल पुरानी खानाबदोश जानवरों की तरह इसी देश में रहकर इस देश को खोखला कर रहे हैं ।
भारत तेरे टुकड़े होंगे,
गुस्ताख-ए-नबी की एक सजा 👉 " सर तन से जुदा"
हाथों में तमंचे, पैट्रोल बम, पत्थर,
दंगा, उपद्रव और आगजनी कर रहे हैं ।
बंटवारे के बाद भारत की जो सम्पत्ति हिन्दूओं को मिलनी चाहिए थी, वह Wafq Board को दे दी ।
आज Defence और Railway के बाद स���से बड़ी Largest Property का मालिक कौन.... ❓
👉 #WafqBoard
45 लाख हैक्टेयर जमीन Wafq Board रूपी अजगर डकारे बैठा है ।
@narendramodi Ji
@AmitShah Ji
#WafqBoard के पास जो भूमि है,
👉 यह भूमि मुगल अपने साथ लाये थे... ❓
👉 यदि मुस्लिमों के लिए #WafqBoard है तो हिन्दुओं के लिए "सनातन बोर्ड" क्यों नहीं.... ❓
🔥 मंदिरों को सरकारी गुलामी से मुक्त करो! 🔥
क्या आप जानते हैं❓
आज हिंदू मंदिर ही एकमात्र धार्मिक स्थल हैं जो सरकार के नियंत्रण में हैं!
ना मस्जिदें, ना चर्च — सिर्फ़ मंदिर सरकारी अफसरों के अधीन हैं।
📉 तमिलनाडु का ��ाल देखिए —
👉 अब तक 5 लाख किलो सोना सरकार ले चुकी है।
👉 12,000 मंदिर बंद पड़े हैं।
👉 40,000 मंदिरों में अब शाम की आरती नहीं होती।
👉 37,000 मंदिरों में पुजारी से लेकर चपरासी तक एक ही व्यक्ति काम कर रहा है।
📜 कारण क्या है?
ब्रिटिश राज के समय बनाए गए “Hindu Religious and Charitable Endowments (HR&CE) Act” के तहत,
राज्य सरकारों ने मंदिरों पर कब्ज़ा कर लिया, कहने को “प्रबंधन”, लेकिन असल में लूट और दमन का तंत्र बना दिया गया।
और यह सब उस देश में हो रहा है जहाँ मंदिरों ने हजारों सालों से
शिक्षा, सेवा और संस्कृति को जीवित रखा।
जिन्होंने मुग़ल लुटेरों को नहीं देखा,
वो आज I.N.D.I. गठबंधन की सरकारों में बैठे आधुनिक लुटेरों को देख लें!
✊ अब समय है कि हम कहें —
“मंदिर हमारी आस्था के हैं, सरकार की जागीर नहीं!”
🚩 #FreeHinduTemples
🕉️ #HinduTemplesUnderAttack
💪 #HinduUnity
सनातन धर्म पहले मुगलों और अंग्रेज़ों को खटकता था,
अब वही सनातन आज देसी अंग्रेज़ों – यानी कांग्रेस को खटक रहा है।
हिन्दुओं को कुचलने के लिए कांग्रेस ने एक के बाद एक हिन्दू-विरोधी कानून बनाए —
📜 Minority Act – 1992
📜 Place of Worship Act – 1991
📜 Waqf Act – 1995
📜 Muslim Personal Law Board
इतना ही नहीं, इससे भी आगे बढ़कर कांग्रेस ने “Saffron Terror” क��� झूठा प्रोपेगेंडा रचा।
अगर अजमल कसाब ज़िंदा न पकड़ा गया होता,
तो 26/11 के उस आतंकवादी हमले का ठीकरा भी “भगवा आतंकवाद” के नाम पर फोड़ा जाता।
आज भी राजनीतिक दल चाहते हैं कि हिन्दू जातिवाद में बँट जाएं,
क्योंकि जब तक मोदी जी हैं, उनका “सनातन विरोधी अभियान” चल नहीं सकता।
🚩 #सनातन_विरोधी_कांग्रेस
🚩 #CongressMuktBharat
🚩 #कांग्रेस_मुक्त_भारत
🌕💫 Karva Chauth #KarwaChauth2025
🌸 प्रेम, आस्था, समर्पण और अटूट विश्वास के पर्व —
#करवा_चौथ की आप सभी को हार्दिक शुभकामन��एँ।
यह पावन व्रत केवल सजने-सँवरने का नहीं,
बल्कि पति-पत्नी के बीच अनंत विश्वास, निष्ठा और आत्मीय प्रेम का प्रतीक है।
जिस चाँद की ओर निहारा जाता है,
वह सिर्फ सौंदर्य नहीं — संबंधों की शुद्धता और जीवनसाथी की दीर्घायु का प्रतीक है। 🌙
आपका जीवन चाँद-सा उज्ज्वल रहे,
प्रेम सागर-सा ��हरा और अटूट बना रहे। 💖
🇮🇳 देश के युवाओं पर काँग्रेस का खतरनाक प्रयोग!
कहते हैं — किसी देश को बर्बाद करना हो, तो उसके युवाओं को बर्बाद कर दो!
और आज यही प्रयोग कांग्रेस शासित कर्नाटक में किया जा रहा है।
राहुल गांधी के इशारे पर कर्नाटक सरकार 2025 में एक ऐसा कानून लाने जा रही है,
जिससे सिर्फ “आपकी बात” के आधार पर हिंदू छात्रों और शिक्षकों — खासकर सवर्णों को अपराधी घोषित करना आसान हो जाएगा।
याद कीजिए,
2016 में रोहित वेमुला केस को काँग्रेस ने कैसे जातीय रंग देकर देश को बाँटने की कोशिश की थी।
अब उसी “नफरत के फार्मूले” को कानून का रूप देने की तैयारी है।
🔹 इस प्रस्तावित कानून में
केवल आरोप पर गिरफ्तारी की छूट होगी
पहली शिकायत पर 1 वर्ष की जेल
बार-बार शिकायत पर 3 वर्ष की कैद व ₹1 लाख तक जुर्माना
🔹 एससी, एसटी, ओबीसी और अल्पसंख्यक वर्ग को “शिकायत का विशेष अधिकार” दिया जाएगा,
लेकिन सबसे ज्यादा निशाना होंगे सवर्ण विद्यार्थी और शिक्षक।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह वही मॉडल है
जिसकी झलक “हिंदू कम्युनल बिल” में सोनिया गांधी देना चाहती थीं —
जहाँ हर दंगे का दोष बहुसंख्यक पर मढ़ दिया जाता था।
राहुल गांधी की योजना है —
कर्नाटक के बाद कांग्रेस शासित तीनों राज्यों में यह कानून लागू करने की!
क्या यही है “न्याय यात्रा” का मकसद?
क्या युवाओं को जाति में बाँटकर देश के भविष्य को मिटाने का नया प्रयोग शुरू हो चुका है?
🇮🇳 देश को बाँटने वाली राजनीति नहीं,
संविधान और समानता चाहिए —
वरना इतिहास गवाह है,
“जहाँ नफरत के बीज बोए जाते हैं, वहाँ पीढ़ियाँ उजड़ जाती हैं।���