शाबाश गोदी मीडिया को लपेट लिया।
बिल्कुल सही बोला जी, सुन्दर शब्दों में सच्चाई बोली है !
पिछले कई सालों में मैंने जितने भी जवाब सुने हैं, उनमें से यह एक बेहतरीन जवाब था—बहुत बढ़िया!
As an Indian, do you know that Modi has an entire 24/7 grooming and image-management team hired from abroad, including stylists and beauticians from Italy and the West.? The monthly expense reportedly crosses ₹10 crore. Is such extravagant spending on optics justified?
आपका नाम चित्रा त्रिपाठी है।
कहने को आप ABP News की Vice President हैं।
लेकिन जलनखोर लोग आपको बीजेपी का सच्चा प्रवक्ता बोलते है।
आप शाम 5 बजे महादंगल करती हैं ,
रात 9 बजे Prime Time संभालती हैं।
लेकिन आपका हालिया petrol-diesel वाला economics ज्ञान सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गया।
आपने कहा कि ...
“ऊपर-ऊपर से देखा जाए, तो ₹7 पेट्रोल-डी���ल के दाम बढ़ने से कोई बहुत बड़ा फर्क नहीं पड़ता।”
मैडम , ऊपर-ऊपर से देखा जाए तो सच में फर्क नहीं पड़ता।
फर्क नीचे खड़े उस आदमी को पड़ता है जो रोज बाइक में पेट्रोल भराता है।
फर्क ऑटो वाले को पड़ता है।
फर्क डिलीवरी बॉय को पड़ता है।
फर्क किसान , मजदूर , middle class और छोटे दुकानदार को पड़ता है।
AC studio से ₹7 छोटा लग सकता है।
लेकिन करोड़ों लोगों के लिए यही ₹7 महीने का बजट बिगाड़ देता है।
महंगाई टीवी डिबेट का topic नहीं ,
आम आदमी की रोज की मार है।
ऊपर-ऊपर से सब ठीक है।
नीचे-नीचे जनता पिस रही है।
आपका नाम अशोक श्रीवास्तव है।
आप DD News के anchor हैं।
DD News कोई private WhatsApp group नहीं है।
यह public broadcaster है, जनता के पैसे से चलता है।
एक छात्र/छात्रा CBSE revaluation में गलत answer sheet मिलने का दावा करता है।
वह proof लगाकर सवाल पूछता है।
लेकिन सिस्टम से जवाब मांगने की जगह कुछ आप और आपको चाहने वाले उसे Pakistani, देशद्रोही और agenda-driven बताने लगते ���ैं।
बाद में जब किरकिरी होती है तो माफी मांगकर पल्ला झाड़ लेते है।
सवाल आपसे भी है कि ..
क्या अब CBSE से अपनी copy मांगना देशद्रोह है?
क्या answer sheet पर सवाल पूछना Pakistan का एजेंडा है?
क्या हर छात्र जो सिस्टम की गलती दिखाए, उसे anti-national घोषित कर दिया जाएगा?
Anchor का काम सरकार की नाकामी पर सवाल पूछना होता है,
छात्रों को troll narrative में धकेलना नहीं।
अब CBSE ने अपनी गलती मान ली है और result भी अपडेट कर दिया है।
लेकिन आप बताइए कि आपके मंसूबे क्या थे क्यों बच्चों के भविष्य की समस्या को Pakistan और देशद्रोह के पीछे छिपा रहे थे ?
छात्र copy मांग रहा है।
System जवाब नहीं दे रहा।
और कुछ लोग patriotism का certificate बांट रहे हैं।
यह पत्रकारिता नहीं, सत्ता की PR duty लगती है।
बड़े एंकर : मेलोडी इतनी चॉकलेटी क्यों है?
मातालकुडूम (कांकेर) के लोग पूछ रहे हैं कि जिंदगी इतनी कठिन क्यों है? तालाब का गंदा पानी पीने को मजबूर इन लोगों की कहानी नेशनल चैनल की हेडलाइन क्यों नहीं बनती? क्या यह पानी यह एंकर पीकर पूछ सकते हैं; यह पानी इतना गंदा क्यों है?