बिहार में कोई नेता आपका मदद करें या ना करें लेकिन यदि आप खान सर से मदद मांगते हैं तो वह जरूर करेंगे।
इस महिला का मुफ्त में इलाज होगा खान के अस्पताल में। खान सर इनको घर में शौचालय और चापाकल भी बनवाएंगे।
आज एक भारतीय ने 200 लोगों को मरने से बचाया है🔥
आज Flydubai की दुबई से तेल अवीव जा रही Flight का एक Pilot भारतीय था। इस Pilot का नाम Smit Machchhar है।
जब इनके Co-Pilot ने Flight को Hijack करने के लिए फ्लाइट का कंट्रोल लेना चाहा तो वह Smit Machchhar ही थे जिन्होंने 200 लोगों को बचाने के लिए लड़ाई लड़ी।
आज यदि Smit Machchhar ने यह बहादुरी नहीं दिखाई होती तो आज 200 लोगों की जान चली जाती।
वाह शाबाश! Smit Machchhar 🔥
बार-बार दोहराने से Brain बदलता है।
बार-बार दोहराने से Brain बदलता है।
बार-बार दोहराने से Brain बदलता है।
बार-बार दोहराने से Brain बदलता है।
बार-बार दोहराने से Brain बदलता है।
बार-बार दोहराने से Brain बदलता है।
आज आप जो बार-बार करते हैं, वही आपका Brain कल सीखता है।
आपकी रोज़ की habits धीरे-धीरे आपके neural pathways (दिमाग के रास्ते) को shape करती हैं।
काश, जब मैं 18 साल का था, तब मुझे ये 10 बातें पता होतीं...
शायद जिंदगी की कुछ गलतियां नहीं करनी पड़तीं।
कुछ चीजों को समझने में सालों लग गए।
आज सोचता हूं, ये बातें पहले पता होतीं तो बहुत कुछ अलग होता।
10 बातें जो काश मुझे 18 की उम्र में पता होतीं 🧵👇:
एक पुरानी पोस्ट:-
कैंसर एक ऐसी बीमारी ने जिसने करोड़ो घर तबाह किए हैं ।
सिर्फ मरीज ही नहीं बल्कि मरीज के परिवारों को ।
दवाइयों का खर्च वहन करते करते लोग टूट जाते हैं ।
और कैसे नहीं टूटेंगे अगर 600 रुपये की दवाई पर सरकार ने छूट दे रखी है 12000 रुपये MRP रखने की ।
जी हाँ ।
दवाई है Paclitaxel ।
रिटेलर खरीदते हैं 600 में और MRP है 12000.
एक मरीज को कई बार 20-30 vial की ज़रूरत पड़ती है ।
और ये कोई एक दवाई की बात नहीं ।
कीमोथेरेपी की ज़्यादातर दवाइयों का यही हाल है ।
200% मार्जिन भी समझ में आता है लेकिन 1900% margin??
वो कैंसर जैसी बीमारी में , जिसका इलाज वैसे भी काफ़ी लंबा चलता है??
ग़रीब तो मर ही जाएगा ना?
ये तो ठीक नहीं हैं ना साहब ?
@PMOIndia
https://t.co/TNzzvf5gAl
@ChapraZila लोग बोले तभी ये निकले. आप भी जानते हैं जब तक बोलेंगे नहीं तब तक कोई सुनने वाला नहीं है.
वैसे खान सर अच्छा काम कर रहे हैं. उन्हें प्रोत्साहित करने का कम किया जाए तो अच्छा रहेगा ❤
मिलिए अभिषेक आनंद से। 🇮🇳❤️
वह बिहार के रोहतास से हैं और रोजगार की तलाश में बिहार से जापान पलायन करने वालों में से एक हैं। 🥲
जापान में नौकरी की तलाश में गए अभिषेक ने वहां क्लब क्रिकेट खेलना शुरू किया। अपने शानदार प्रदर्शन के दम पर उन्होंने जापान की राष्ट्रीय टीम में जगह बना ली। 🏏🇯🇵
बिहारी कहीं भी जाए, अपनी पहचान और हुनर के दम पर अपनी जगह बना ही लेता है। ❤️
आपको दुनिया के हर कोने में बिहारी मिल जाएगा।
राँची सदर अस्पताल में न्यूरोसर्जरी के साथ एक वर्ष…
लगभग एक वर्ष पहले सदर अस्पताल में न्यूरोसर्जरी ज्वाइन की। शुरुआत के दिनों में OPD कम थी, केस भी कम आते थे। वहीं से सदर अस्पताल में न्यूरोसर्जरी सेवाओं को आगे बढ़ाने का सफर शुरू हुआ।
राह आसान नहीं थी—सीमित संसाधन, कई व्यावहारिक चुनौतियाँ और शुरुआत में यह एहसास भी कि जितना समय और मेहनत यहाँ लग रही है, उतना ही समय निजी क्षेत्र में लगाया जाए तो आर्थिक लाभ शायद कहीं अधिक हो सकता है।
लेकिन धीरे-धीरे काम आगे बढ़ता गया।
इस दौरान ब्रेन ट्रॉमा, स्पाइन ट्रॉमा, ब्रेन ट्यूमर, सर्वाइकल एवं लम्बर स्पाइन, स्पाइनल ट्यूमर तथा अन्य जटिल न्यूरोसर्जिकल सर्जरी करने का अवसर मिला। पिछले एक वर्ष में हम लोगों ने 250+ ब्रेन एवं स्पाइन सर्जरी आयुष्मान योजना के तहत की हैं। OPD भी शुरुआती लगभग 20–25 मरीज प्रतिदिन से बढ़कर अब कई दिनों में 70+ मरीजों तक पहुँच जाती है।
हर केस अपने साथ एक नई चुनौती लेकर आया और हर चुनौती ने हमें कुछ नया सीखने, व्यवस्था को बेहतर करने और एक कदम आगे बढ़ने का अवसर दिया।
इस पूरे सफर में राँची के सिविल सर्जन डॉ. प्रभात कुमार सर एवं सदर अस्पताल के डिप्टी सुप्रीटेंडेंट डॉ. बिमलेश सिंह सर का सहयोग और प्रोत्साहन महत्वपूर्ण रहा। इसके लिए हृदय से आभार।
साथ ही, हमारे सहयोगी न्यूरोसर्जन डॉ. विवेक बॉस एवं डॉ. अशोक बॉस का निरंतर सहयोग भी इस सफर की सफलता में बेहद महत्वपूर्ण रहा।
यह सफर हम सबके सामूहिक प्रयास का परिणाम है।
इस दौरान अक्सर अपने वरिष्ठों की बातें याद आती हैं। डॉ. अनिल कुमार सर और डॉ. C. B. सहाय सर बताते हैं कि जब उन्होंने RIMS में न्यूरोसर्जरी को आगे बढ़ाना शुरू किया था, तब शुरुआत में हर तरह के केस वहाँ नहीं आते थे। धीरे-धीरे केस लेना शुरू किया, चुनौतियों को स्वीकार किया, एक-एक कदम आगे बढ़े और वर्षों की मेहनत से आज RIMS की न्यूरोसर्जरी जिस मुकाम पर है, वह हम सभी के लिए प्रेरणा है।
शायद किसी भी संस्थान का विकास इसी तरह होता है—एक दिन में नहीं, एक साल में नहीं, बल्कि हर चुनौती को स्वीकार करते हुए लगातार काम करने से।
उसी सोच के साथ मेरा भी प्रयास है कि राँची सदर अस्पताल में न्यूरोसर्जरी को धीरे-धीरे एक ऐसे स्तर तक विकसित किया जाए, जहाँ झारखंड के जरूरतमंद मरीजों को अधिक से अधिक जटिल ब्रेन एवं स्पाइन सर्जरी की सुविधा सरकारी संस्थान में ही मिल सके।
निजी क्षेत्र में काम करके अधिक कमाई करना निश्चित रूप से एक विकल्प है। लेकिन सरकारी संस्थान में सीमित संसाधनों के बीच किसी जरूरतमंद मरीज को वह सर्जरी उपलब्ध करा पाना, जिसकी उसे आवश्यकता है—उस संतोष की तुलना किसी आर्थिक लाभ से करना मुश्किल है।
यह अभी मंज़िल नहीं, एक शुरुआत है.....
अगर आज कैमरा ऑन नहीं होता तो एक टीटीई की जिंदगी बर्बाद हो गई होती।
मीडिया इनको जल्लाद बोल रहा होता।
पब्लिक टीटीई को पीट रही होती।
हमलोग रेलवे को ट्रॉल कर रहे होते।
ये बहन की किरोड़ीमल जिसका नाम राधिका तिवारी है टिकट मांगने पर अपना कपड़ा फाड़ने लगी। और टीटीई पर रैप का आरोप लगा दी। और पुलिस को बुला ली।
सोचिये इस फेमिनिस्ट से किसी की शादी हो जाये तो वो बंदा कितना तनाव में रहेगा। उसकी जिंदगी तो झंड हो जायेगी।
उपाय तो है ही, चाहिए बस दृढ़ इक्षा शक्ति।
बिहार बाढ़ मुक्त होसकता है।
१. नेपाल साइड ज्यादा से ज्यादा बांध
२. गाद की सफाई
३. नदियों का लिंकिंग
४. मजबूत और टिकाऊ तटबंध
५. हैवी नहर फॉर दक्षिण बिहार
ये सब तो एक आम आदमी के बाहर से है। जब वर्ल्डनका बेस्ट सिबिल इंजीनियर को ये प्रोजेक्ट दिया जाएगा तो वो वलर्ड क्लास सॉल्यूशन भी लाएंगे।
#BiharFlood
#FloodFreeBihar
#ShameOnYouNDABihar