औरंगजेब की फौज से लड़ने वाले बिनोल ठाकुर साहब आनंद सिंह जी राठौड़ की बदहाल छतरी पर विरासत संरक्षण एवं जीर्णोद्धार समिति द्वारा श्रमदान किया गया
#SaveHeritage#vsjs2021
विरासत संरक्षण एवं जीर्णोद्धार समिति की टीम देलवाड़ा तथा राष्ट्रीय पदाधिकारियों द्वारा श्रमदान किया गया (महासत्या, एकलिंग महादेव)
Mission Save Heritage 💯 #SaveHeritage#vsjs2021
विरासत संरक्षण एवं जीर्णोद्धार समिति की टीम देलवाड़ा तथा राष्ट्रीय पदाधिकारियों द्वारा श्रमदान किया गया (महासत्या, एकलिंग महादेव)
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विरासत संरक्षण एवं जीर्णोद्धार समिति की टीम देलवाड़ा तथा राष्ट्रीय पदाधिकारियों द्वारा श्रमदान किया गया (महासत्या, एकलिंग महादेव)
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जैसलमेर के महारावल अमरसिंह जी भाटी ने अमरसागर झील बनवाई थी, जिसके निकट ही 1871 ई. में महारावल बैरिशाल जी भाटी के शासनकाल में हिम्मत राम जी बाफना ने इस जैन मंदिर का निर्माण करवाया, जो वर्तमान में अमरसागर जैन मंदिर के नाम से जाना जाता है ।
मुग़ल अकबर द्वारा 1567 ई. में चित्तौड़गढ़ पर आक्रमण करने के लिए बनवाया गया रेत का पहाड़- मोहर मगरी।
इस पहाड़ पर तोपें चढ़ाकर चित्तौड़गढ़ के किले पर आक्रमण किया गया था, जिनका वीर राजपूतों ने प्रबल सामना किया और मुगलों को पराजित होकर वापस जाना पड़ा।
इस तस्वीर को देखकर आप सोच रहे होंगे कि शायद यह किसी वीडियो गेम का ��ॉलपेपर है, परंतु यह हमारे पूर्वजों द्वारा बनाई गई गौरवपूर्ण धरोहर हैं।
हो सकता है आज का युवा केवल पब्जी और सोशल साइट्स पर व्यस्त रहता हो, परंतु सोशल साइट्स के माध्यम से ही कई ऐसे युवा भी हैं जिनमें मैंने अपने
ट्विटर पर उपस्थित सभी भक्तों को #जय_माता_दी
तारातारिणी शक्ति पीठ, गंजम, उड़ीसा, भारत (भारत)
रुश��कुल्या नदी के तट पर कुमारी पहाड़ियों पर स्थित 4 आदि शक्ति पीठों में से एक है। प्राचीन काल में ��लिंग सम्राटों ने मध्यकालीन युग में बासुप्रहराज द्वारा योगदान और नवीनीकरण किया था।
कन्हेरी गुफाएं
अधिकतम शहर का हरा मुकुट, आज के संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान (एसजीएनपी) आवास कृष्णगिरी या काले पर्वत को पहली शताब्दी ईसा पूर्व और 10 वीं शताब्दी सीई के बीच एक महत्वपूर्ण बौद्ध बस्ती माना जाता है। दुनिया को कन्हेरी रॉक कट गुफाओं के नाम से जाना जाता है, 100 से अधिक
📍स्थान : ~ महाबलीपुरम, तमिलनाडु
🍁 स्थान के बारे में : ~ मोनोलिथ... तमिलनाडु के महाबलीपुरम में पंच रथ परिसर में पांच रथों में से एक। नरसिम्हवर्मन प्रथम के शासन के दौरान 7 वीं शताब्दी सीई में निर्माण किया गया,वे पांच एका��्मक मंदिरों को बनाने के लिए ठोस चट्टानों से निकाले गए थे और
प्रथम दृष्टया देखने मे आपको ये भगवान नृसिंह की एक प्राचीन प्रतिमा भर दिखेगी, गहराई से देखने पर आपको दिखेगा- इसे बनाने में लगने वाला वर्षों का परिश्रम, #आर्किटेक्चर का अद्भुत ज्ञान, गजब का धैर्य, महानतम प्राचीन तकनीक का प्रयोग, और फिर आपका सर श्रद्धा से नतमस्तक हो जाएगा
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|| प्राचीन भारत में मंदिर बनाने का नक्शा ||
|| कुण्डलिनी जाग्रत करने के स्थान थे प्राचीन मंदि�� ||
प्राचीन भारत में मंदिर बनाने से पहले जगह और दिशा का विशेष महत्व होता था | मंदिरो का निर्माण अलग अलग शैलियों के हिसाब से हुआ करता था पर अधिकतर मंदिर ऐसी पद्धति से बनते थे जिसमे