Incredible. But true.
LEFT STUDENT UNION VS CONGRESS STUDENT UNION OVER "CEC GYANESH KUMAR"!
Another campus clash. This time in Thiruvananthapuram as Youth Congress workers marched in a ‘Resistance March’ demanding the resignation of CEC Gyanesh Kumar.
Stones and bottles were allegedly pelted from inside University College hostel premises by SFI workers as the march passed.
Youth Congress workers, meanwhile, were seen carrying fire-lit sticks like torches and allegedly throwing them into the college premises.
A protest over the Election Commission now spirals into a street-level campus clash between rival student-political outfits.
"Vanishhh Kumar chor hai. Resign nahi kiya toh protest mitti se aasman tak jayega…chand aur suraj tak jayega."😮
Some pls take Didi to good psychiatrist. Chand aur Suraj tak "protest" kaise jayega?
Has ISRO named any spacecraft "Protest"? 😂
And who's this "Vanishhh Kumar"?🤔
इंडियन एक्सप्रेस का शर्मनाक यू-टर्न!
एजेंडा चलाने वाले अखबार 'द इंडियन एक्सप्रेस' ने, जिसने 22 सितंबर के अपने संस्करण में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर विवाद खड़ा करके ज्ञानेश कुमार को बदनाम करने की कोशिश की थी, मात्र चार दिनों के भीतर एक शर्मनाक यू-टर्न ले लिया है।
आज—यानी 26 सितंबर, 2026—के संस्करण में एक्सप्रेस ने अपने 'एक्सप्लेन्ड' सेक्शन में एक लेख प्रकाशित किया है जिसमें संकेत दिया गया है कि पहले जो कुछ कहा गया था वह गलत था और एक त्रुटिपूर्ण निष्कर्ष की ओर ले गया।
यह लेख दामिनी नाथ ने लिखा है, जो नियमित रूप से चुनाव आयोग को कवर करने वाली रिपोर्टर हैं।
'एक्सप्रेस' का स्पष्टीकरण
इस लेख में, दामिनी नाथ ने कहा कि 'जब से दो अतिरिक्त आयुक्तों को शामिल किया गया है—यानी 1993 से—तीनों आयुक्तों के बीच लगातार मतभेद उत्पन्न होते रहे हैं। हालांकि, चर्चा के माध्यम से मामलों को सुलझाना और सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित करना हर बार अपनाई जाने वाली मानक प्रक्रिया रही है।' उन्होंने यह दिखाने के लिए शेषन, गोपालस्वामी, लवासा और अन्य लोगों जैसे उदाहरण भी दिए कि ये मतभेद कभी-कभी सार्वजनिक हो गए थे।
उनके अनुसार, एसआईआर से संबंधित सभी प्रस्तावों को तीनों आयुक्तों के हस्ताक्षर के साथ सर्वसम्मति से मंजूरी दी गई थी। इसलिए, इस मामले पर अब विवाद का कोई कारण नहीं है।
एक तरह से, यह राहुल गांधी जैसे सतही, अज्ञानी नेताओं के लिए एक करारा तमाचा है।
यहां यह भी ध्यान देने योग्य है कि 22-09-2026 को आयोग पर कीचड़ उछालने वाला लेख लिखने वाली रितिका चोपड़ा ने इससे पहले कभी भी आयोग की खबरें कवर नहीं की थीं।
इससे साफ पता चलता है कि द इंडियन एक्सप्रेस ने जानबूझकर पहले यह एजेंडा-प्रेरित लेख प्रकाशित किया और बाद में प्रतिक्रिया से खुद को बचाने के लिए आज का यह स्पष्टीकरण छापा।
क्या सीईसी को गाली देने वाले सभी लंपट तत्व अब माफी मांगेंगे?
इन राष्ट्रविरोधी तत्वों और इस दो कौड़ी के, उपद्रव-भर की कीमत वाले अखबार के खिलाफ कानूनी कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए?