ये है 'झुकी हुई भाजपा' जो तिलचट्टों से मिलने के लिए पॉण्डिचेरी तक जा रही है, उसके FIRs हटवा रही है और आपको चूरन चटा रही है की हम BRICS के समय इन्हें अनुमति नहीं देना चाहते। ये परमिशन देंगे क्योंकि इनको लगता है कि आरक्षण पर जो बात ���ो रही है, वो CJP डाइवर्ट कर ले जाएगी, जैसे राम मंदिर हो गया था।
क्या @DelhiPolice पर केवल पूर्व अपराधियों ने ही पत्थरबाजी की? क्या उनके सर केवल अपराधियों के ही डंडों से फूटे?
जब देश का सर्वोच्च न्यायालय एक पार्टी की राजनीति चलाने के लिए संविधान की धाराओं का अनुचित प्रयोग करने लगे, समझ जाओ वह राष्ट्र डूब रहा है।
जब पार्टी का नेता, पुलिस की पुलिसिंग अ���नी राजनीति को आगे करने के लिए स्वयं अपने हाथों में ले ले, तो आप यह समझ लीजिए कि कल को वह किसी नरसंहार को भी उचित ठहरा लेगा।
दिल्ली दंगे इसका साक्ष्य हैं कि जो दंगे दिल्ली पुलिस ने तीन दिन में, बिना किसी हत्या के, समेट दिए थे, इस सरकार ने उन्हें आने वाले चुनावों के आलोक में CAA प्रोटेस्ट के नाम पर जमने दिया। बाद में 16 हिन्दू और 37 मुस्लिम मरे।
किसानों के हित में जो तीन कानून आए, इस सरकार ने दंगाइयों के आगे झुक कर, उन्हें वापस किया क्योंकि इनकी दृष्टि चुनावों पर थी।
भाजपा सरकार अब एक घटिया, ��माजद्रोही सरकार बनती जा रही है जहाँ दंगाई और अराजकतावादी आगे बढ़ेंगे। आप यदि तार्किक बातें करेंगे, प्रश्न करेंगे कि यह तो तुम्हारे मैनिफ़ेस्टो में नहीं था, तो आपको एक संदर्भहीन आँकड़ा थमाया जाएगा कि देश आगे बढ़ रहा है।
जौहर एक तरह की शहादत थी. उसके लिये जिगर�� चाहिए. उन महिलाओं ने हमें सिखाया कि दुश्मन की गुलाम या दासी बनकर हर रोज मरने से बेहतर है खुद से मौत चुने. गर्व को अपने आप में भरकर.
वो हमारे लिये हमेशा अमर रहेंगी…
उनके साहस, समर्पण और बलिदान को हमेशा याद किया जाएगा 🙏🏻🙏🏻
#जौहर
लगातार आप सब के विचारों के सुनने के उपरांत, हमने एक सरलीकृत माँग पत्र बनाया है। एक बार आम सहमति बन जाए, फिर डिजिटल से धरातल की योजना बनाई जाएगी। तब तक, नीति निर्धारकों के लिए यह पत्र हम सार्वजनिक कर रहे हैं ताकि उन्हें AI से हिन्दी लिखवा कर, उसमें प्राइवेट में आरक्षण जैसी बकलोली न करनी पड़े।
@JPNadda जी, कॉपी ही करना है, तो ठीक से करो। वैसे, आपको दोबारा झुका देख कर दुख हुआ।
मैं @ReallySwara को जौहर पर डिबेट की चुनौती देती हूँ।
भयावह क्षणों को एक सस्ती punchline में बदलना आसान है। दरिंदों से घिरी औरतों के सामने मौजूद उस ख़ौफ़ को A.C. Hall में बैठकर कायराना कह देना आसान है।
एक होता है रहमोकरम पर जीना— एक होता आन बान शान से जीना..
रानी पद्मावती और हज़ारों औरतों ने अपनी देह, अस्मिता सम्मान पर आख़िरी फैसला किसी हवसी आक्रांता पर नहीं छोड़ा…
चिराग पासवान जैसे नेताओं को शर्म आनी चाहिए जो 50 लाख का अंगुठी पहन कर चलते हैं, अरबों की संपत्ति है फिर भी इनको आरक्षण चाहिए ! जिस दिन आरक्षण आर्थिक होगा उसी दिन सच मे आरक्षण सही ���ोगों तक पहुंचेगा! @iChiragPaswan
#ReservationReformआंदोलन
श्री चिराग पासवान जी, आपने कहा आरक्षण पर समीक्षा तो छोड़िए, चर्चा भी नहीं होगी। यदि ऐसा हुआ को इतने लोग सड़कों पर आ जाएँगे कि सँभालना कठिन हो जाएगा।
मुझ�� नहीं लगता कि आपको ‘चर्चा’ और ‘समीक्षा’ का अर्थ भी पता है। नौ बार के सांसद और विधायक पिता के पुत्र, आज भी आरक्षित सीट से राजनीति कर रहे हैं। और दुर्भाग्य कि आज भी अपने समर्थकों को आप आगजनी-दंगा करने वाले गुंडों की तरह ही देखते हैं कि इन्हें सँभालना मुश्किल हो जाएगा।
आप ऑप्रेस्ड हैं, दलित हैं, पीड़ित हैं और आप सड़कों पर आने की धमकी भी दे देते हैं, ये विरोधाभास कैसे बाँच लेते हैं आप?
और हाँ, आपके ���ाहने, न चाहने से कुछ नहीं होता। घर में टीवी है तो एकाध बार डिबेट देखिए कि ‘चर्चा’ किस विषय पर हो रही है। और @JPNadda जी आरक्षण पर सोच रहे हैं या नहीं, यह भी आपको पता चल जाएगा।
वैसे यह भी ठीक है कि जब आपको ही ‘चर्चा’ और ‘समीक्षा’ का नहीं पता, तो जिन्हें आप सड़कों पर लाना चाह रहे हैं, वो कितना ही समझ पाएँगे। आपकी जाति SC का सबसे बड़ा हिस्सा ले जाती है। पासवान, चमार, धोबी और पासी 95% आरक्षण ले रहे हैं।
तो देखिए, युवा बिहारी @iChiragPaswan जी, चर्चा तो आरंभ हो चुकी है और @BJP4India ने एक कदम आधिकारिक रूप में बढ़ाया है, एक कदम अनाधिकारिक रूप से अन्य लोगों से रीच आउट कर के।
आप ‘बिहारी फर्स्ट’ की बात करते थे, ये अचानक से माफिया की भाषा क्यों बोल रहे हैं। आप तो मोदी जी के हनुमान हैं, मोदी जी पर विश्वास रखिए। वो चर्चा करवा रहे हैं, वरना आपको लगता है कि अनिल बेलूनी जी की कृपादृष्टि के बिना कोई ��ी टॉपिक चर्चा में आ सकता है?
गेम समझिए। परिस्थिति बदल रही है। महबूबा ने भी धमकी दी थी। वीपी सिंह को भी लगा था कि वो अनंत काल पीएम रहेगा। जनता से उसी पार्टी को चुना जिसके नेता ने संसद में खड़े हो कर ओबीसी आरक्षण का विरोध किया था।
नेहरू ने OBC को 1955 में ही कोटा देने का विरोध किया था। 1961 में मुख्यमंत्रियों को लिखे पत्र में नेहरू ने आरक्षण का विरोध किया था। पर वो लगातार चुनाव जीतते रहे। तो ऐसा तो है नहीं कि यदि @narendramodi आज इस पर समीक्षा करें, और वह चुनाव हार जाएँगे!
संभव है कि सवर्ण और अनरिप्रेजेंटेड ओबीसी, एससी एकमुश्त वोट दे दे! इसीलिए, चर्चा और समीक्षा दोनों हो रही है, और हम रिफॉर्म भी करवा लेंगे।
He is the son of a nine-time MP and a three-time MP himself. How much more empowerment does he need?
He has wealth, power, and political clout, so why does he continue to contest from reserved seats? Why not fight from an open seat? By monopolizing a reserved constituency, isn't he actively preventing a less privileged Dalit brother or sister from his party from entering Parliament?
And he isn't alone. There are many like him in every field. This argument is not a conspiracy by the GCs; they gain nothing either way. It is a question of internal accountability. Your own influential elites are holding the broader community back by refusing to step aside. So Dalits should start asking questions about where the real issue lies, instead of blaming GCs for their lack of opportunities.
अजीत भारती की भाषा से आप असहमत हो सकते हैं:-
लेकिन इसमें ऐसी कौन सी शब्दावली है जिसके आधार पर SC/ST एक्ट लगाया जाए?चंद्रशेखर के लिए कोई जातिसूचक ट��प्पणी तक नहीं
अब ये वीडियो पूरा देश देखेगा। SC/ST के दुरुपयोग की चर्चा पूरे देश में
The SC/ST Act used against Ajeet Bharti is draconian
RT if you support him and if you want amendments in the SC/ST Law
This case should be made an example of how the SC/ST Act is misused