कहां नेहरू कहां मोदी कोई तुलना हो भी सकती है क्या?
नेहरू के टक्कर का कोई IIT, एम्स, भेल, गेल, इंडियन आयल, LIC, इसरो, HAL और डिफेंस फैक्ट्री जैसा कोई एक संस्थान बनाया हो तो तुलना करना भी ठीक है।
बांकी दिया जलाना हो, थाली पीटना हो, मन की बात करना हो, मेलानी को मेलोडी देना हो, ईडी, सीबीआई के दम पे सत्ता जैसे मामले में नेहरू बेशक मोदी जी से मुकाबला नहीं कर पाएंगे।
तस्वीर में दिख रही नेहरू जी की मूर्ति रूस के मास्को शहर में स्थापित है ऐसे ही लन्दन, सिंगापुर जाए अनगिनत देशों में मूर्तियां लगी हुई है।
बाबू इज्जत कमाई जाती है जिसे आप हर जगह खरीद नहीं सकते।
• जवाहरलाल नेहरू: 15 अगस्त 1947 को प्रधानमंत्री बने और 27 मई 1964 तक प्रधानमंत्री पद पर रहे।
कुल मिलाकर 16 साल 9 महीने 12 दिन का कार्यकाल रहा।
• नरेंद्र मोदी: 26 मई 2014 को प्रधानमंत्री बने और 10 जून 2026 को प्रधानमंत्री पद पर हैं.
कुल मिलाकर 12 साल 15 दिन हुए
नोट - यही फैक्ट है, बाकी सब तमाशा 🎈
ग़ज़ब का विवाद चल रहा है। मोदी का कार्यकाल बड़ा या नेहरू का? नेहरू के कार्यकाल को बड़ा बताने वाले मुझे ज़्यादा भावुक और मूर्ख लग रहे हैं।
कारण - ये एक फूहड़ तुलना है। इसमें शामिल होकर आप इस तुलना को लेजिटिमेसी दे रहे हैं। कार्यकाल एक पल का हो या एक युग का। उसकी लंबाई नहीं बल्कि उसका आउटकम मायने रखता है।
1947-52 नेहरू के जिस कार्यकाल को नहीं मानने की बात की जा रही है, उस काल में भारत की नींव का निर्माण हुआ। रियासतों को मिलाया गया। आज का भारत बना। दुनिया ने देखा कि एक ग़रीब और समस्याओं में घिरा देश भी अपनी संप्रभुता के लिए सीना तान कर खड़ा हो सकता है।
सार्वजनिक संस्थाओं का निर्माण हुआ। लोकतांत्रिक और वैज्ञानिक चेतना के विस्तार की कोशिशें हुई।
अब जिन लोगों को लोकतांत्रिक चेतना से, संवैधानिक मूल्यों से, वैज्ञानिकता से, भारत से दिक्कत होगी वो नेहरू के उस कालखंड को याद नहीं करना चाहेंगे।
उनके सामने नेहरू के कालखंड की तारीखों की दलील देना मूर्खता है। सीधा कह सकते हैं एक ने बनाया, कमाया एक ने लुटाया, बेचा।
फर्क साफ है ....
जवाहरलाल नेहरू जी देश की आजादी की लड़ाई लड़ते हुए 9 बार जेल गए, कुल लगभग 3259 दिन यानी करीब 8 वर्ष 11 महीने।
उन्होंने एक किताब लिखी जिसका नाम था ,
भारत की खोज !
मोडी जी ने सबसे ज्यादा विदेशी दौरे किए,
किताब लिखी जानी चाहिए ,
मोडी की मौज !
नफरत की कुल्हाड़ी चाहे जितनी भी तेज कर लो मोदी जी,
नेहरू जी के विचारों और हमारे संविधान की जड़ें इतनी कमजोर नहीं कि तुम काट पाओ! ✋
"ये जड़ें कटती क्यों नहीं हैं...यार.." 🤝🇮🇳
Pandit Nehru in his 12 years of elected tenure:
AIIMS, ISRO (INCOSPAR), BARC, IITs, IIMs, several universities, strong democratic institutions, and numerous press conferences.
Narendra Modi in his 12 years, including a 3rd term in coalition:
NEET paper leak, CBSE OSM discrepancies, economy collapsing, youth facing unemployment, the rupee touching 100, inflation, democratic institutions weakened, and zero press conferences.
You can never match Nehru Ji, @narendramodi.
उस समय देश में 545 रजवाड़े थे। वे सभी मोतीलाल नेहरू से अमीर थे। उनके लड़के देश के नेता और प्रधानमंत्री क्यों नहीं बन गए? क्योंकि वे सत्ता के साथ प्रसन्न थे।
नेहरू सम्पन्न घर से थे, लेकिन किसी राजसी खानदान से नहीं थे। 9 बरस जेल काटने और पूरी जिंदगी झोंक देने के बाद उन्होंने सभी 545 रियासतों को एक झंडे के नीचे लाकर एक स्वतंत्र, संप्रभु भारत बनाया।
संघ के लोग 52 बरस तक उस महान झंडे को नकारते रहे, आज नेहरू को नकार रहे हैं।
चाटुकारिता से बाहर निकलिए महोदय!
भारत के वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सबसे लंबे कार्यकाल के लिए पंडित जवाहरलाल नेहरू को पीछे छोड़ दिया है
भाजपा आईटी सेल व मीडिया द्वारा जमकर प्रचार-प्रसार करके बताया जा रहा है कि मोदी जी ने इतना बड़ा रिकॉर्ड तोड़ दिया
पर इस रिकॉर्ड से भारत की जनता का क्या फायदा है? क्या मीडिया दोनों नेताओं के कार्यों की तुलना करने की हिम्मत कर सकती है...??
पंडित नेहरु का रिकॉर्ड साल महीने और दिन गिनकर नहीं तोड़ा जा सकता।
जवाहर लाल नेहरु ने अपने कालखंड में जो किया और देश को जो दिया,उससे इन 12 सालों की तुलना ही नहीं की जा सकती।समाज में नफ़रत और ज़हर का घोल नेहरु ने नहीं घोला था।
नेहरु ने बड़े -बड़े संस्थान तब बनाए थे , जब देश गुलामी से आज़ाद हुआ था . हज़ार तरह की चुनौतियां थी. आर्थिक तौर भारत बहुत कमज़ोर था।अंग्रेज गरीबी और तंगी हमारे हिस्से में छोड़ गए थे।वैश्विक पटल भी भारत एक आज़ाद मुल्क के तौर पर अपनी जगह बनाने के लिए संघर्ष कर रहा था।
तब भी नेहरु ने ऐसे राष्ट्र की कल्पना को साकार करने की कोशिश की थी,जिसमें भाईचारा और मोहब्बत हो धर्म आधारित राजनीति न हो , सांप्रदायिकता न हो।
नेहरु ने तरक्की की ऐसी बुनियाद रखी थी जिसमें नफ़रत और साम्प्रदायिकता की कोई जगह नहीं थी।
और आज ?
मीडिया को गुलाम बनाकर अपनी चाटुकारिता करवा लेने से कोई नेहरु नहीं बन सकता।
जवाहरलाल नेहरू: 15 अगस्त 1947 को प्रधानमंत्री बने और 27 मई 1964 तक प्रधानमंत्री पद पर रहे.
कुल: 16 साल 9 महीने 12 दिन
• नरेंद्र मोदी: 26 मई 2014 को प्रधानमंत्री बने और 10 जून 2026 को प्रधानमंत्री पद पर हैं.
कुल: 12 साल 15 दिन
(यही फैक्ट है, बाकी सब तमाशा)
नेहरू जैसा ज्ञान कहाँ से लाओगे?
नेहरू जैसा संघर्ष कहाँ से लाओगे?
नेहरू जैसी विश्व-प्रतिष्ठा कहाँ से लाओगे?
और सबसे बढ़कर
वो क़द कहाँ से लाओगे?
#LongestServingElectedPMModi | सयानी घोष | सुष्मिता देव | राघव चड्ढा |
क्या मोदी जी ने देश के लिए कुछ नहीं किया?
सब नेहरू जी की तारीफ कर रहे हैं किसी ने मोदी जी के कार्यकाल का हिसाब खाया?
मोदी जी के 4399 दिन का पूरा हिसाब है ये -
. 1460 दिन चुनावी रैलियां की
. 370 दिन विदेशी दौरों पर रहे।
. 67 घंटों के हिसाब से 3 दिन मन की बात।
. 68 दिन का लॉकडाउन।
. 260 नेशनल हॉलिडे।
. 15 घंटे काम किया रोज और 3 घंटे नहाने और खाने के 1781 दिन।
. 42 दिन निकल गए संसद के।
. नेहरू जी के जिक्र का भी हिसाब लगाए और प्रेस कॉन्फ्रेंस को जोड़े तो शायद पूरे 4399 हो जाएंगे
आप लोगों को क्या लगता है किसका कार्यकाल अच्छा था नेहरू जी का या फिर मोदी जी का और कारण क्या था?
वे दिन गिन रहे हैं। अपनी असफलताओं के दिन या फिर अपनी विदाई के दिन...
काम क्यों नहीं गिन रहे हैं? क्योंकि पंडित नेहरू ने जितना काम अकेले किया, उतना बाकी सभी प्रधानमंत्रियों से भी ज्यादा है। सैकड़ों हजारों प्रोजेक्ट जो भारत की बुनियाद हैं, सब नेहरू ने बनाए।
कोई अपनी सनक और कुंठा से महान नहीं बनता। आपकी महानता आपके योगदान से तय होती है।
नेहरू को आप केवल वर्षों में नहीं माप सकते।
कुछ लोग सत्ता प्राप्त करते हैं।
कुछ लोग इतिहास बनाते हैं।
नेहरू ने इतिहास की दिशा बदल दी।
जब भारत ने स्वतंत्रता की पहली सुबह देखी, तब उसके हाथ में केवल आज़ादी थी।
नेहरू ने उसे भविष्य दिया।
उन्होंने एक ऐसे भारत का सपना देखा जो विज्ञान में आगे हो, शिक्षा में आगे हो, लोकतंत्र में आगे हो और दुनिया के सामने सिर उठाकर खड़ा हो।
उनकी दृष्टि उनके समय से बड़ी थी।
उनकी सोच उनके युग से बड़ी थी।
उनके सपने उनकी पीढ़ी से बड़े थे।
नेहरू का मूल्य इस बात में नहीं है कि वे कितने दिन प्रधानमंत्री रहे।
नेहरू का मूल्य इस बात में है कि उनके जाने के बाद भी भारत उनकी बनाई हुई राहों पर चलता रहा।
नेहरू को किसी पद में नहीं बाँधा जा सकता।
नेहरू को किसी कार्यकाल में नहीं समेटा जा सकता।
नेहरू को किसी एक पीढ़ी तक सीमित नहीं किया जा सकता।
वे भारत के निर्माण की उस पहली ईंट का नाम हैं जिस पर आधुनिक भारत खड़ा हुआ।
नेहरू एक व्यक्ति नहीं थे।
नेहरू एक विचार थे।
नेहरू एक दृष्टि थे।
नेहरू एक युग थे।
और युग समाप्त नहीं होते।
वे आने वाली पीढ़ियों का मार्ग बन जाते हैं।
जब तक भारत रहेगा,
जब तक लोकतंत्र रहेगा,
जब तक आधुनिक भारत का अस्तित्व रहेगा,
तब तक नेहरू का नाम रहेगा।
नेहरू अद्वितीय हैं।
नेहरू अजय हैं।
नेहरू भारत की आत्मा के स्थायी अध्याय हैं।
अनंतकाल के लिए।