UGC का नया प्रावधान किसी सवर्ण के ख़िलाफ़ नहीं था, क्योंकि उसमें EWS भी शामिल था। इसके बावजूद षड्यंत्रकारियों ने यह भ्रम फैलाया कि ��ह सवर्णों के ख़िलाफ़ है, और सरकार चुपचाप यह सब देखती रही। यह साफ़ दिखाता है कि भारतीय जनता पार्टी दलित, पिछड़ा और आदिवासी विरोधी है।
#UGC_लागू_करो
@Prksh_Ambedkar इस देश में संविधान बचाओ का आंदोलन भी आप ही के मार्गदर्शन में फला फूला है..
संविधान बचाओ आंदोलन के नारे को सर पर लेकर घूमने वाली पार्टियां
देखते हैं इस साहसिक कदम को कितना अपनाती हैं?
क्योंकि जो देश को संविधान के साये में चलाना चाहते हैं वही इस आंदोलन का समर्थन कर सकते हैं।
सोमनाथ सूर्यवंशी यांच्या मृत्यू प्रकरणी ��ोर्टाच्या आदेशानंतर आता SIT ची स्थापना करण्यात आली आहे
सरकार, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस आणि पोलिस प्रशासन कितीही आरोपींना वाचवण्याचा प्रयत्न केला तरीही...
वंचित बहुजन आघाडीची न्यायासाठी लढत राहील
#JusticeForSomnathSuryawanshi
I am surprised that why other leaders and parties are silent on this very visible suppression of sanitation workers.
@VBAforIndia Tamil Nadu Unit, functioning as RPI, representative Anbu Venthan, along with activists, has been participating in the protest.
On August 7, Anbu Venthan gave memorandum and sought intervention from @NCSC_GoI.
भाजपा और कांग्रेस न केवल बौद्ध विरोधी है, बल्कि वे बाबासाहेब के खिलाफ है और राष्ट्र विरोधी हैं।
पढ़ें और समझें —
अशोक का सिंह-स्तम्भ मौर्य साम्राज्य के महान बौद्ध सम्राट अशोक द्वारा बनवाया गया था और आजादी के बाद अशोक का सिंह-स्तम्भ भारत के राष्ट्रीय प्रतीक के रूप में अपनाया गया।
बाबासाहेब ने अशोक का सिंह-स्तम्भ को राष्ट्रीय प्रतीक के रूप में और राष्ट्रीय ध्वज में अशोक चक्र को गहरे नीले रंग में अपनाने में बहुत बड़ी भूमिका निभाई थी। दोनों बुद्ध की शिक्षाओं और धम्म के प्रतीक हैं।
राष्ट्रीय ध्वज पर गठित तदर्थ समिति के सदस्य के रूप में डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने बाद में स्पष्ट किया, “यद्यपि भारत में बौद्ध धर्म लगभग विलुप्त हो चुका है, फिर भी इसने एक ऐसी संस्कृति को जन्म दिया है, जो ब्राह्मणवादी संस्कृति से कहीं अधिक श्रेष्ठ और समृद्ध है। जब संविधान सभा द्वारा राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रीय प्रतीक के प्रश्न पर विचार किया जा रहा था, तो हमें ब्राह्मणवादी संस्कृति से कोई उपयुक्त प्रतीक नहीं मिल पाया। अंततः बौद्ध संस्कृति हमारे बचाव में आई और हमने विधि चक्र (धम्म-चक्र) को राष्ट्रीय प्रतीक के रूप में स्वीकार कर लिया।”
भारतीय नोटों पर छापने के लिए स्व���ंत्र भारत के प्रतीकों का चयन किया जाना था। शुरू में यह महसूस किया गया कि राजा के चित्र की जगह महात्मा गांधी का चित्र लगाया जाना चाहिए। इस संबंध में डिजाइन तैयार किए गए। लेकिन भारतीय नोटों पर गांधी को चेहरा बनाने के लिए अस्वीकार कर दिया गया था, तथा इसके स्थान पर अशोक का सिंह-स्तम्भ को चुना गया था।
महात्मा गांधी का चित्र पहली बार 1969 में उनकी जन्म शताब्दी के अवसर पर मुद्रा नोट पर आया था। महात्मा गांधी का चित्र 1987 में नए मुद्रित ₹500 के नोट में फिर से दिखाई दिया, जब तत्कालीन राजीव गांधी सरकार ने इसे फिर से जारी किया। इसके बाद RBI ने अंततः 1996 में महात्मा गांधी श्रृंखला शुरू की, जिसके बाद से सभी भारतीय नोटों पर उनका चेहरा स्थायी रूप से अंकित हो गया।
आज 2025 में, भाजपा ने सरकारी विज्ञापनों से अशोक का सिंह-स्तम्भ हटाया, फिर महाराष्ट्र विधानमंडल से अशोक चक्र को हटाया, और अब औरंगाबाद और कोल्हापूर जिलाधिकारी कार्यालय में लगाए गए पोस्टर्स में अशोक का सिंह-स्तम् की जगह "सेंगोल" दर्शाया गया।
जब वंचित बहुजन आघाड़ी @VBAforIndia के पदाधिकारियों ने इसका कड़ा विरोध किया, तब जाकर "सेंगोल" वाले पोस्टर्स को हटाया गया।
आप समझिए! कांग्रेस ने काम शुरू किया और भाजपा उसे आगे बढ़ा रही है।
भाजपा और कांग्रेस ने न केवल बुद्ध की शिक्षाओं और धम्म के प्रतीकों को हटाया है, बल्कि बाबासाहेब द्वारा भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए चुने गए प्रतीकों को भी हटाया है।
और, इसीलिए हम कहते हैं कि भाजपा और कांग्रेस न केवल बौद्ध विरोधी है, बल्कि वे बाबासाहेब के खिलाफ है और राष्ट्र विरोधी हैं!
क्या बदला है आपने, @AmitShah?
आपने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की नकल की और उसकी जगह भारतीय न्याय संहिता (BNS) लागू कर दी।
यदि आपने न्याय को सचमुच सुलभ बना दिया है, तो हिरासत में मृत्यु के लिए दंड का कोई प्रावधान या कानून क्यों नहीं है!?
मैं सोमनाथ सूर्यवंशी - वाडार समुदाय से संबंधित एक भीम सै��िक - के लिए न्याय की लड़ाई लड़ रहा हूं, जिनकी परभणी में हिरासत में यातना और शारीरिक हमले के कारण मृत्यु हो गई थी।
अदालत में मैंने एक ऐसे कानून की अपील की जिसका उद्देश्य हिरासत में होने वाली मौतों और यातनाओं को रोकना, जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह बनाना और पीड़ितों को मुआवजा प्रदान करना हो।
अमित शाह, आप लोगो ने कुछ नहीं बदला है!
कल चन्द्रशेखर ने दिल्ली में गुप्त मीटिंग बुला कर सबके सामने Accept किया की रिश्ता था साथ रहे लेकिन लगा की राजनीतिक सामाजिक नुक़सान है तो छोड़ दिया !!
यही जवाब कोर्ट में दे के दिखाना अब !!
क्यों चंद्रशेखर ��ैं क्या कोई खिलौना हूँ जो use कर के फेक दिया ?
मैं किसी की बेटी बहन इज़्ज़त हूँ जो तुमने किया है उसकी माफ़ी नहीं सज़ा होगी याद रखना !!
अब कोर्ट में मिलते है !!
हाईकोर्ट व अन्य संबंधितों को पत्र लिखकर अम्बेडकर समाज की मांग को ध्यान में रखते हुए ग्वालियर हाईकोर्ट में प्रतिमा लगाने की मांग करेगी...
माननीय प्रदेश अध्यक्ष जितू पटवारी जी से चर्चा करते हुए भारतीय बौद्ध महासभा प्रदेश अध्यक्ष मुकुल लक्ष्मण वाघ व कांग्रेस नेता आनंद वाघ जी
हाईकोर्ट व अन्य संबंधितों को पत्र लिखकर अम्बेडकर समाज की मांग को ध्यान में रखते हुए ग्वालियर हाईकोर्ट में प्रतिमा लगाने की मांग करेगी
माननीय प्रदेश अध्यक्ष जितू पटवारी जी से चर्चा कर��े हुए भारतीय बौद्ध महासभा प्रदेश अध्यक्ष मुकुल लक्ष्मण वाघ व कांग्रेस नेता आनंद वाघ जी