Yesterday, @IndianExpress reported an unprecedented rupture inside the Election Commission: TWO of its three members objecting on record, 14 times in 10 months, to decisions taken without their knowledge.
Today, the second part of our investigation looks at the concern Election Commissioners Sukhbir Singh Sandhu and Vivek Joshi flagged most often: Who really controls our electoral rolls?
We followed that question to Goa, where we found something deeply concerning.
Stay with me....
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इंडियन एक्सप्रेस की चुनाव आयोग पर इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट के बाद विपक्ष के सवालों पर बीजेपी सांसद संबित पात्रा ने जवाब दिया.
उन्होंने कहा कि तीनों चुनाव आयुक्तों के बीच अलग-अलग राय पर आधिकारिक बातचीत होना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है.
#indianexpresshindi#sambitpatra#EC
संवैधानिक संस्थानों में काम करने वाले कर्मचारी से लेकर अधिकारी का आत्म सम्मान होता होगा। उनकी चाल-ढाल में उस संस्थान की स्वायत्ता झलकती है। आज इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर पढ़ने के बाद चुनाव आयोग के मुख्यालय निर्वाचन सदन और देश भर के कार्यालयों में जाने वाले कर्मचारियों और अधिकारियों के मन में क्या चल रहा होगा? EC की चर्चा MCD के करप्शन की तरह होने लगी है। चुनाव आयोग के कर्मचारियों का स्वाभिमान इस ख़बर के बाद लंबे समय के लिए ख़त्म हो जाता है। उम्मीद की जानी चाहिए कि एक दिन उनका आत्मबल जागेगा और वे सड़क पर आकर जनता को बता देंगे। लोकतंत्र की हत्या लोकतंत्र के आरोपों में एक नियमित आरोप है लेकिन हत्यारे कौन हो सकते हैं, अगर उस तरफ़ इशारा होने लगे तो उसकी ओर देख कर चुप हो जाने वाली आँखें अपने ही भाग्य को कोसेंगी। आज सभी ने चुनाव आयोग को लेकर बहुत कुछ कहा मगर भीतर मन में उदासी बैठ गई। चुनाव आयोग का भरोसा ख़त्म होना किसी के लिए भी अच्छा नहीं होना चाहिए। इतने संगीन आरोपों के बाद ज्ञानेश कुमार को ख़ुद इस्तीफ़ा दे देना चाहिए। अगर एस्कोर्ट के साथ चलने की आदत के कारण इस्तीफ़ा नहीं दे रहे हैं लोकतंत्र को बचाने के लिए, आयोग की साख को बचाने के लिए विपक्ष इसकी मांग करे कि ज्ञानेश कुमार को महाभियोग लगाकर हटाया जाए लेकिन आजीवन उनकी कार के आगे चलने के लिए दो जिप्सी और पीछे चलने के लिए दो जिप्सी दे दी जाए। और क्या बचा है इस पद में? इस तरह के आरोपों के बीच कौन बताना चाहेगा कि मैं भारत का मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार हूँ। मेरी तरफ़ से ज्ञानेश कुमार को एक हूटर भी दिया जाए ताकि सायरन बजते ही लोगों को पता चल जाए कि कौन जा रहा है।
ECI के चुनाव आयुक्तों को क्यों करने पड़े शिकायत भरे मेल?
चुनाव आयोग में हुई पूरी गड़बड़ी जानने के लिए देखिए हमारी इंवेस्टिगेशन रिपोर्ट. इंडियन एक्सप्रेस हिंदी के यूट्यूब चैनल पर.
Sudhir ji, this is nothing. You will be taken to cleaners soonest. You have intoxicated our beautiful nation with so much hate.
Your time is up. Mark my words. @sudhirchaudhary
👉🏻कैसे हुई गोवा SIR में गड़बड़ी?
👉🏻कैसे सॉफ्टवेयर ने 97 लोगों के नाम वोटर लिस्ट में नहीं जोड़ने दिए?
👉🏻चुनाव आयोग ने इसपर क्या किया?
चुनाव आयोग की पूरी गड़बड़ी जानने के लिए देखिए हमारी इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट. इंडियन एक्सप्रेस हिंदी के यूट्यूब चैनल पर.
चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की शिकायतों के अनुसार,
👉🏻चुनाव आयोग का IT विभाग ERO पर पाबंदी लगा रहा था
👉🏻नए पोर्टल ECINet के आने के बाद केंद्रीकरण बढ़ा
चुनाव आयोग ने और क्या-क्या किया? जानने के लिए देखिए हमारी इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट. इंडियन एक्सप्रेस हिंदी के यूट्यूब चैनल पर.
"इनके कॉरपोरेटर BLO के साथ बैठकर तय करते हैं कि किसका नाम कटे, किसे नोटिस जाए"
◆ राज्यसभा के सांसद कपिल सिब्बल ने कहा
@KapilSibal | #KapilSibal | Kapil Sibal | Gyanesh Kumar | #GyaneshKumar
Gyanesh Kumar is the enemy of India.
More than 12 crore names have reportedly been deleted from electoral rolls.
That is roughly 12.4% of the 97 crore registered electorate around the 2024 Lok Sabha election.
The gap between the BJP-led NDA and the opposition was just 2%.
Gyanesh Kumar isn’t conducting elections, he is scripting them.
इंडियन एक्सप्रेस की इलेक्शन कमीशन से जुड़ी रिपोर्ट के बाद आयोग के हाईलाइट हुए 3 लोग - ज्ञानेश कुमार, सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी, कौन हैं?
देखें इन अधिकारियों की एक ब्रीफ़ प्रोफ़ाइल.
अगर आपने हमारी इन्वेस्टिगेशन अभी तक नहीं देखी है, तो पहुंचे हमारे यूट्यूब चैनल पर.
हर नागरिक को एक मेगा फोन ख़रीदना चाहिए, चौराहे पर मेगा फोन लेकर खड़े हो जाना चाहिए, यह ख़बर गोदी मीडिया के चैनल और अख़बार कल रोक देंगे, जनता को बताया जाना चाहिए, चाय की दुकान पर जाकर. मेट्रो गेट के बाहर, एयरपोर्ट के बाहर, चलती ट्रेन में, स्टेशन के बाहर, कालेजों के बाहर, अस्पताल के बाहर।देश का लोकतंत्र लुट गया है। वोट चोरी का खेल खुल गया है। सबके हाथ में एक मेगा फोन होना चाहिए। गोदी चैनल सूत्रों के हवाले से खेल कर जाएंगे। जब तक नागरिकों की समिति आयोग के भीतर जाकर जाँच नहीं करती है, सूत्रों की सफाई का कोई मतलब नहीं है। किसी भी नागरिक को शर्म आनी चाहिए कि वह आज के भारत में एक निष्पक्ष न्याय व्यवस्था की उम्मीद नहीं कर सकता है।
सबको पता था कि यह हो रहा है। पिछले साल राहुल गांधी ने वोट चोरी को लेकर प्रेस कांफ्रेंस की। अख़बारों ने उनके ही बयानों को ठीक से नहीं छापा। बिहार और बंगाल के चुनाव के बाद चुनावी विश्लेषक भी लोकतंत्र की हत्या के अपराध में शामिल हो गए। उन्होंने वोटर का नाम काट कर हासिल की गई जीत को डेटा से सही साबित किया। उसमें विपक्ष के खिलाफ़ लहर दिखाई। ये लोग मनी लौंड्रिंग की तरह वोट लौड्रिंग करते हैं। मनी लौंड्रिंग में काला धन सफेद होता है, वोट लौंड्रिंग में वोट की डकैती को डेटा के ज़रिए सफ़ेद किया जाता है। मैं अपने बारे में बता सकता हूँ। किसी का चुनावी विश्लेषण नहीं देखता न पढ़ता हूं, मुझे पता है कि ये लोग वोट लौंड्रिंग कर रहे हैं। इन लोगों ने सुंदर सुंदर ग्राफिक्स बना कर यहां से 25 प्रतिशत घटा कर, वहां से 5 प्रतिशत जोड़ कर वोट चोरी से हासिल जीत को सही साबित किया है। वोट लौंडरर से भी जवाब मांगना चाहिए कि जब चुनाव का डेटा फेयर नहीं है तो आप चुनाव का एनालिसिस किस डेटा से कर रहे हैं?