सभी पूछ रहे हैं ये कौन हैं?
ये मोहम्मद इरफ़ान हैं। साफ़गोई के साथ अपनी बात रख रहे हैं। संविधान की प्रस्तावना ऐसे सुना रहे हैं जैसे किसी गीत की तरह याद कर रखा हो। लोकतंत्र में व्यक्ति ही गरिमा की अहमियत बता रहे हैं। सोनम वांगचुक के साथ बदसलूकी पर ख़फ़ा ��ैं
ये देश की हालत है LOP एक जूते में खड़ा है . मोदी जी राहुल गांधी सह गया जब ये पॉवर में आयेगा तो आप सह लो गे या आप के चेले सह लेंगे ?
देश के PM के बराबर होता है LOP और देखिए पुलिस ने क्या हाल किया है .
🚨 बिहार: सोशल मीडिया पर इस्लाम की सबसे पवित्र जगह का कथित अपमान
📍 अख्तियारपुर मंझौली, पटना (बिहार)
आरोप है कि अख्तियारपुर मंझौली निवासी रोहित कुमार इंस्टाग्राम पर AI-जनरेटेड वीडियो बनाकर काबा शरीफ़ जहाँ दुनिया भर से करोड़ों मुसलमान हज और उमरा के लिए जाते हैं को लेकर कथित तौर पर बेहद आपत्तिजनक और भड़काऊ सामग्री फैला रहा है।
वीडियो में धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाले दावे किए जा रहे हैं, जिससे सांप्रदायिक माहौल बिगड़ने की आशंका है @bihar_police@PatnaPolice24x7 से मांग है कि मामले का तत्काल संज्ञान लेकर निष्पक्ष जांच की जाए। यदि ��रोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाए।
अभिव्यक्ति की आज़ादी के नाम पर किसी भी धर्म की सबसे पवित्र आस्था का अपमान और नफ़रत फैलाने की कोशिश स्वीकार नहीं की जानी चाहिए।
कुछ दिनों पहले की बात है एक खबर आप लोगों ने सुनी थी कि एक मस्जिद के इमाम साहब ने सु@साइ*ड कर लिया।
इमाम साहब ने एक सुसाइड नोट भी लिखा था इस सु#साइ*ड नोट में इमाम साहब ने लिखा था..... ,
मैं जानता हूं सुसाइड करना हराम है लेकिन मेरे पास और कोई दूसरा रास्ता नहीं है कुछ समझ में नहीं आ रहा है आगे क्या किया जाए।
दरअसल मस्जिद के इमाम साहब आर्थिक तंगी से जूझ रहे थे। उनके भी बीवी और बच्चे हैं,समय हमेशा एक जैसा नहीं रहता है कभी कभी अचानक बड़ी रकम की जरूरत पड़ जाती है
मगर उस मुश्किल हालात के समय इमाम साहब से किसी ने पूछा तक नहीं और न इमाम साहब ने किसी को बताया बस अकेले इमाम साहब तंगी में घुटते रहे ।
आखिर में उन्होंने जो कदम उठाया सभी को आश्चर्यचकि�� कर दिया। हालांकि मैं इमाम साहब के इस कदम से सहमत नहीं हूं । लेकिन सोचने वाली बात है कि मस्जिद के इमाम के लिए जरूरत पड़ने पर लोग 100 - 200 नहीं निकाल पाते।
लेकिन वही लोग गवैया और नचनिया के लिए एक रात का लाखों रुपए का प्रोग्राम कर देते है और पोस्टर होर्डिंग से प्रचार करके फख्र भी करते हैं।
इसके अलावा धार्मिक कार्यक्रमों में भी खूब चंदा और भण्डारा भी करते है लेकिन मेरी सोच है कि इन सब कार्यक्रमों से कोई फायदा नहीं जब तक इंसान की दिल की गहराइयों से मदद ना की जाए तब तक ऐसे पुण्य से कोई फायदा होने वाला नहीं है l
ईश्वर और अल्लाह दोनों एक ही है इंसानियत का धर्म ही सबसे बड़ा धर्म है यही सच्ची पूजा पाठ इबादत है ll
नज़रबंदी, ख़ौफ़ और बेबसी... क्या सोशल मीडिया पर बैठकर फतवे देने वाले आयुष मलिक का दर्द समझ पाएंगे? 💔
वही हुआ जिसकी उम्मीद थी! दूर बैठकर सिक्के का एक पहलू देखना और अपनी राय का रायता फैलाना बहुत आसान होता है, लेकिन उन कड़वे हालातों को जीना बेहद मुश्किल।
कल तक जो लोग आयुष मलिक के ईमान पर 'माशा अल्लाह' और 'सुब्हान अल्ल���ह' की सदाएं बुलंद कर रहे थे, आज वही लोग उन पर उंगलियां उठा रहे हैं, उन्हें बुरा-भला कह रहे हैं। आख़िर किस हक़ से?
तमाशा देखने वालों, ज़रा ये भी सोचो:
जब आयुष मलिक मुश्किलात के भंवर में फंसे थे, तब क्या कोई एक भी अल्लाह का बंदा उनके हक में खड़ा हुआ था?
वह कल भी तन्हा थे और आज भी भारी मुश्किल में हैं। 8 जून के बाद से उनका कोई अता-पता या सार्वजनिक बयान नहीं आया है।
जब बीबीसी की टीम पहुंची, तो वह पुलिस के साए में अपने ही घर में नज़रबंद थे। वीडियो साफ गवाह है कि खौफ के मारे उनकी ज़ुबान उनका साथ नहीं दे रही।
धर्म बदलने के बाद से वह अपनी बहन के घर हैं, मीडिया के सामने आने की हालत में ही नहीं हैं। मां-बाप के साथ आई उनकी तस्वीर चीख-चीख कर उनके हालात की बेबसी बयां कर रही है।
मसला बेहद संगीन और गहरा है। बस उस परवरदिगार से यही दुआ है कि वह उनके लिए आसानी का मामला फरमाए।
मैं आज भी पूरे दा��े के साथ कहता हूँ कि आयुष मलिक का ईमान उन तमाशबीन लोगों से कहीं बड़ा है जो सोशल मीडिया पर बैठकर सिर्फ बकवास करना जानते हैं।
बाकी इंसान सिर्फ चेहरे देखता है, दिलों के हाल अल्लाह जानता है । इतना काफी है।
ना बाप बेटे को देख सका, और ना ही बेटा बाप को ।
दिल्ली उत्तम नगर में 25 साल के उज़ैब को महज 8 हजार रुपयों के लिए संदीप, ललित और मोहित ने मार डाला। दरअसल परिवार ने बताया, उज़ैब ने संदीप से 50 हजार रुपए ब्याज पर लिए थे, जिनमें से 42 हजार रूपये वो लौटा चुका था, सिर्फ 8 हजार रूपये बाकी थे, उज़ैब रात को OLA चलाता था, घर का वो इकलौता कमाने वाला था वाइफ़ प्रेग्नेंट थी, हॉस्पिटल वाले डिलीवरी की डेट दे चुके थे, जिसके लिए उज़ैब पैसे जोड़ रहा था।
तीनो ने उज़ैब की गाड़ी के पीछे गाड़ी लगाई और उसे उठाकर ले गए, उसको रात भर लगभग 7–8 घंटे बेहरमी से पीटा, और सुबह घर के बाहर छोड़कर चले गए , उज़ैब को किसी नुकीले हत्यार से मारा गया था जिससे उसकी किडनी फट गई , उसके शरीर की हड्डियों को भी तोड़ गया, उज़ैब के आखिरी शब्द थे अम्मी मैं बचूंगा नहीं मुझे बहुत मारा इन लोगों ने , हॉस्पिटल पहुंचते ही उसने दम तोड़ दिया।
इधर जैसे ही उज़ैब का दफीना हुआ, उधर हॉस्पिटल में उसकी वाइफ़ ने बेटे को जन्म दिया..!
गाज़ियाबाद के सूर्या को मारने वाले असद का एनकाउंटर हो चुका है, अब खबर आ रही है कि असद का घर बुलडोजर से भी गिराया जाएगा ठीक है चलिए ये इनका इंसाफ है
अब एक और ख़बर गाजियाबाद में ही जहां चिराग त्यागी की हत्या हुई और हत्या करने वाला उसी का दोस्त यश है लेकिन यश को वो सज़ा नहीं मिली जो सूर्या के कातिल को मिली
अ�� एक और खबर यूपी के फिरोजाबाद से जहां डेढ़ साल के मासूम को उसके ही चाचा जितेंद्र पाठक ने पटक पटक कर बेरहमी से मार डाला बावजूद इसके उसको भी वो सज़ा क्यों नहीं मिली जो सूर्या के हत्यारे को मिली ?
अगर इंसाफ है तो बराबर क्यों नहीं है? शोर सिर्फ एक ही घटना का क्यों है जबकि पिछले दिनों हुबहू घटना हुई है जहां मरने वाले हिंदू हैं लेकिन उनके हत्यारों के लिए कोई सड़कों पर इंसाफ मांगने के लिए क्यों नहीं है ? मारने वाला हिंदू है या मुसलमान ��्या ये देखकर इंसाफ मांगा जा रहा है ?
किसी शख़्स को इस बात की सज़ा नहीं मिलनी चाहिए क��� उसने इंसानियत की ख़ातिर एक मुस्लिम बुजुर्ग की मदद की।
दीपक का जिम आज बंद होने के कगार पर है।
दीपक की सहायता कीजिए मैंने ��पनी सैलरी से उन्हें 50 हज़ार की सहायता की है।
आप भी मदद का हाथ बढ़ाइये अच्छे लोगों का हौसला बुलंद रहना चाहिए।
बेहतरीन अमल
पंजाब के एक गांव ने जनाज़े की रस्म को बदल कर एक नया इतिहास रचा हैं ! जहां एक ग़रीब शख़्स का जनाजा कब्रिस्तान में पहुंचा और सफें दुरूस्त हुई तो ईमाम साहब ने शामिल हुए लोगों सें मुखातिब होकर एक दिल सोज ऐलान किया !
ये मैय्यत जिसका जनाज़ा हम पढ़ने लगे हैं अपने घर का एकलौता (वाहिद) कफील और स���ारा था ! सोगवारान (शौकाकुल) परिवार में सिर्फ एक बेवा और तीन छोटे बच्चें हैं !
इद्दत के अय्याम में उनके पास आमदानी का कोई जरिया नहीं है ! लिहाज़ा कब्रिस्तान के मैन गेट पर एक चादर बिछा दी गई हैं ! जो भी साहबे तौफीक बग़ैर किसी दिखलावे के अल्लाह की रज़ा के लिए एक रूपये सें लेकर अपनी हैसियत के मुताबिक जितनी रकम दे सकता हो वो वहां डाल दे !
तद्फीन के बाद जब चादर सें रकम जमा की गई तो वो एक लाख रुपए सें ज़्यादा थी !
किसी के दस रुपए थे तो किसी के सौ लेकिन इस मुस्तरका हमदर्दी ने यतीम बच्चों के लिए कई महीनों का मआस (ख़र्चा पानी) शुकून फराहम कर दिया, ताजियत सिर्फ हाथ उठाकर दुआ करने का नाम नहीं, बल्कि दु:ख की घड़ी में अमली सहारा बनने का नाम है !
हमारे नबी करीम सल्लललाहो अलैहि वस्सल्लम का फरमान हैं कि अगर कोई पौधा लगाएं और उससे कि��ी इंसान, परीन्दे या जानवर को कोई फायदा पंहुचे तो लगाने वाले को उसका भी सवाब मिलता रहता हैं, जन्नत का आसान रास्ता खल्के ख़ुदा की खिदमत में छुपा हुआ हैं !
आइये इस रिवायत को हर गांव व शहर में जिंदा करे ! जब भी किसी ऐसे का जनाजा हो जो घर का वाहिद कफील (अकेला कमाने वाला) था, तो वहां के उल्मा ए इकराम पाँच मिनट की इधर उधर की बात करने की बजाय ये ऐलान करें के "मरहूम के बच्चों के लिए अपना हिस्सा डालें" ताकि मरहूम के परिवार को म'आसी अखराजात और परेशानियां सें बचाया जा सकें और ये अमल सदका ए जरिया बन जाए - जज़ाक अल्लाह खैर !
हिजाब या घूंघट पहनना या न पहनना यह महिला का व्यक्तिगत अधिकार है।
किसी भी पद पर बैठे व्यक्ति को इसमें दख़ल देने का कोई अधिकार नहीं।
महिलाओं की चॉइस पर सवाल उठाने से पहले, पुरुषों के आचरण पर सवाल उठाना ज़्यादा ज़रूरी है।
उमर ख़ालिद ने कैसे प्लानिंग बनाई, वीडियो में प्लानिंग बनाता हुआ पहली बार नज़र आया...😠
जो लोग पूछ रहे थे कि उमर ख़ालिद के ख़िलाफ़ सबूत कहाँ है, वीडियो कहाँ है, उन सबकी बोलती बंद हो जाएगी इस वीडियो को देखकर 😐
और भी कोई सबूत चाहिए सबूत गैंग को 😠
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मौलाना तौकीर रज़ा ख़ान कोई एरू-गैरू इंसान नहीं बल्कि मौलाना अहमद रज़ा ख़ान (आला-हजरत) के पर-पोते है।उनके परदादा दुनिया की जानी मानी इस्लामी हस्तियों में शुमार होते है, उनका ख़ानदान दुनिया में इज़्ज़त की नज़र से देखा जाता है।मीडिया की उनके ऊपर हो रही निचले स्तर की ��िपोर्टिंग देख यह साफ़ पता लगता है की वो जब इतनी बड़ी इस्लामी हस्तियों के लिए बदतरीन लहजा इस्��ेमाल हो रहा है तो आम मुसलमान की क्या हैसियत होगी? चलिए मान लिया की मौलाना साहब को क़ानूनी तौर पर कुछ ग़लत कर दिया (जैसा की प्रशासन कह रहा है) लेकिन उन्हें आतंकी कह देने का हक़ मीडिया को किसने दिया? #MaulanaTauqeerRaza