पृथ्वी पे रहकर हमें चाँद सुन्दर लगता है, पर चाँद की चाहत में अगर हम पृथ्वी छोड़कर चाँद पे जाकर वहां से पृथ्वी को देखें तब हमे एहसास होगा की क्या छोड़कर चले आए ?
#mohmaya
26 के उम्र के बाद पढ़ाई लिखाई में रुचि नहीं रह जाती। किताबें बोझ लगती है और ये जीवन नर्क महसूस होता है। इस उम्र तक जो नौकरी पा लिया या अच्छा कॉलेज पा लिया वो ठीक है, इसके बाद समाज और परिवार का दवाब आये या न आए, लेकिन अंदर अंतरात्मा से आवाजें आना अवश्य शुरू हो जाती है कि कब तक ये अनिश्चितताओं के खेल जैसी नौकरी या इसकी तैयारी के पीछे पड़े रहोगे। कब तक खुद को छलोगे। अकेले रह कर परीक्षाओं के लिए क्या मिला? जीवन में आज एक व्यक्ति नहीं है जिस से एक रुपये की मदद ले सकूं, एक खास मित्र नहीं जिस से कुछ सच में खुल कर साझा कर सकूं। जीवन कितना अजीब हो गया है। अब तो कुछ लिखने में भी अजीब लगता है, सोचता हूं जो पढ़ेगा वो गाली ही देगा और मन ही मन चुटिया बोलकर हँस देगा।
देखता हूं क्या कर सकता हूं। जीवन में सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक हर मुद्दों पर अंधेरा ही छाया है। कभी कभी लगता है काश पैसों का जखीरा होता तो पढ़ना नहीं पड़ता, इतना बेवजह अवसाद नहीं आता, किसी को कुछ प्रूफ करने का दवाब नहीं रहता। पर सच तो यही है कि जो अकेला है, वो जीवन भर अकेला ही रहेगा जब तक उसे मनपसंद की चीजें न मिल जाए।
On the streets of Mumbai, Minister Girish Mahajan was speaking about women's reservation... A woman, frustrated by the traffic jam Confronted him infront of Everyone