@UkAnjul दिल्ली NCR के संपन्न लोगों का भारी संख्या में देहरादून पलायन, क्या इसे डेमोग्राफी चेंज माना जाएगा?
या इसे अनदेखा कर इसके महत्व को प्रभावी माना जाएगा, क्योंकि इसमें बाहर के प्रभुत्वशाली लोग आपके राज्य में श्रण ले रहे हैं, इकोनॉमी में योगदान दे रहे हैं।
काफी समय बाद आज फिर ट्विटर पर एक बेहद रोचक घटना के बारे में बताने जा रहा हूं। पहाडियत ने फिर एक बार अपनी मिसाल कायम की है।
बल पौड़ी में सुरंग बनाने का मामला सामने आया, आसपास की जनता इसका पुरजोर विरोध कर रही है। अधिकारी कह रहे हैं कि बल ये जनता ही इसकी मांग कर रही थी।
तो फिर ऐसे नेक काम में सरकार देरी कैसे करे? आम जनता में कुछ लोग ये दलील दे रहे हैं, जिसे बताते हुए बड़ी हंसी भी आ रही और दुःख भी हो रहा है।
ये लोग कह रहे हैं कि सुरंग लानी ही थी तो दुग्डडा से सतपुली ले लाते, गुमखाल से सतपुली का मार्ग चौड़ीकरण ना करना पड़ता। 🤦
@UkAnjul bheji ladka ladki keh k hum iss mudde ko ignore nhi kar skte. Hme toh abhi bhot kuch bachana h nature, sanskriti, bhasha, culture or apna state 🥲. Y sb toh tbhi possible h na jb apne log rhenge, aise rix-mix ho jayenge toh kaise chlega. Blaming all chwara and chukri.
The lady says, She is staying in Japan for the past 8 years and it's not safe to stay in Japan and they are managing just because of the 'connections' of PM Modi.
If Japan isn't safe, which other country is? 🤔
@shivbhatt पहाड़ में आ भी जाएंगे और ये चल भी जाएंगे, पहाड़ी लोग भौत सपोर्टिव जो होते हैं। छोटा मोटा पद दे दो, कार्यभार दे दो, चार ताली बजवा दो, गले में पट्टा डाल दो, इतना भौत है। अपने लोगों में भी फैंटेसी है बल जाण़-पछयांण, कनेक्शन, पौंच अर रौब बणौण की।
@UkAnjul ऐसे पराजितों से ही सत्य परेशान है। अब पराजितों और पराजित करने वालों से ये पहाड़ का सत्य मुक्ति चाहता है।
जरूरी नहीं बांदर भगाने के लिए गुणी और गुणी भगाने के लिए बांदर का प्रयोग किया जाए। अनुरोध रहेगा जनता से कि पहाड़ी तेंदुए को सेवा का मौका दें, ताकि इस बंदरबांट पे रोक लगे।