लोग कहते है भगवान से डरो सच कहूं मुझे कभी भगवान से डर नहीं
लगता प्रेम है जिससे उससे भला कौन डरता है
मुझे रंग बदलते लोगो से डर लगता है बिना कर्म करे झूठे ज्ञान की बातें करते है उनकी छोटी सोच है जबरदस्ती दुसरो पर थोपे गए विचारों की शर्म आती ही मुझे भगवान से लगाव, प्रेम है डर नहीं
तरसी हूं प्रेम के लिए, अभी एक उम्र बाकी है तरसने को.. शायद मैं योग्य नहीं थी ना हूं, पर प्रेम तो योग्यता नहीं देखता ना फिर मैं क्यों, कुछ सवाल मेरी मृत्यु तक मुझे अकेला, उदास रखेंगे और मैं ऐसे ही मर भी जाना चाहती हूं...!!!