अत्यंत दु:खद !
लोकप्रिय एवं सुप्रसिद्ध गायिका, पद्म विभूषण श्रीमती आशा भोसले जी का निधन अपूरणीय क्षति है।
ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें, शोकाकुल परिजनों को यह दुःख सहने का सम्बल प्राप्त हो।
भावभीनी श्रद्धांजलि !
VIP निकल रहे हैँ,
इसलिए आम जनता को रुकना पड़ेगा,
भले ही ऑफिस, स्कूल के लिए देर हो जाए,
और मजे की बात ये है कि,
इस जनता को अब इस चीज की आदत हो गई है,
साधो ये मुर्दो का देस,
झाँसी के मेडिकल कालेज मे नवजात का शव कुत्ते खा गये !
भयावह तकलीफ देय है पर सरकार के स्वास्थ्य मंत्री अभी RSS के शाखा का ड्रेस पहनकर लाठी मार्च करने में व्यस्त है !
@UPTakOfficial@samajwadiparty
इस साइकिल में न हैंडल है और न ही गद्दी है फिर भी जैद इस साइकिल को चलाकर स्कूल आता है
प्राइमरी में पढ़ने वाले बच्चों की पारिवारिक स्थिति ऐसे ही होती है, सोचो जिसने प्राइमरी स्कूल बंद किया होगा उसने कितना बड़ा पाप किया होगा
@yadavakhilesh
माननीय मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी ये अधिकारी ना सिर्फ़ आपके साथ बल्कि प्रदेश की जनता के जिंदगी के साथ खिलवाड़ कर रहे है ।
आप हर जिले में मेडिकल कॉलेज खोलने के नाम पर प्रचार कर रहे है । क्या आपको पता है कि एक मेडिकल कॉलेज में कितने Faculty होने चाहिए? और कितने उपलब्ध है?
जितने चाहिए उसके आधी सीटें भी PG के पढ़ाई के लिए नही हैं फिर इन मेडिकल कॉलेजों में पढ़ाएगा कौन?
मैं चुनौती देता हूँ कि आपके अधिकारी अगर साबित कर दे कि सभी फ़ैकल्टी उपलब्ध है तो मैं राजनीति छोड़ दूँगा । नहीं तो ये झूठ और लोगों की जिंदगी से खेलने का दुकान बंद होने चाहिए ।@yadavakhilesh@brajeshpathakup
वोट चोर गद्दी छोड़ किसके लिए कहा जा रहा है…लोग किसे वोट चोर समझ रहे हैं…बिहार से अलग दूसरे राज्यों में जनता के बीच क्या मैसेज है..देखिए सरल संपूर्ण सच्चा सर्वे Cutting चाय..लिंक पर क्लिक कीजिए..
https://t.co/YHLaJtTVsK
यूपी में सरकारी स्कूलों को मर्ज करने का फैसला कतई मूर्खतापूर्ण है...मैंने कई स्कूलों में ग्राउंड रिपोर्ट की है..टीचरों से..बच्चों से..पेरेंट्स से बात की..सबने एक ही बात कही..सरकार सत्यानाश पर उतारू है...कोई बनी बनाई व्यस्था कैसे चौपट करता है..उसे देखना है तो मेरी ये रिपोर्ट देखिए..लिंक पर क्लिक कीजिए..
https://t.co/cfPN0q4WOY
"लाल टोपी वाले लड़के को, जन्मदिन मुबारक।"
प्रिय अखिलेश भैया, @yadavakhilesh
जुलाई की इस सुबह ने जब आंखें खोलीं, तो अख़बार नहीं, दिल ने याद दिलाया - आज तुम्हारा जन्मदिन है। और मैं सोचने लगा, क्या एक नेता को भी मुहब्बत की तरह लिखा जा सकता है?
उत्तर मिला - हाँ, अगर वो आदमी भीड़ से नहीं, आदमी से प्रेम करता हो।
मैं आपको ‘श्री अखिलेश यादव’ नहीं कहूंगा। आप मेरे लिए भैया हैं - उस पीढ़ी के भैया, जो लाल टोपी पहनते वक़्त भी शर्मिंदा नहीं होते।
जिसे राजनीति विरासत में मिली, लेकिन जिसने विकास और इंसानियत की राजनीति को विरासत बनाना चाहा।
भैया, तुम्हें देखकर कभी-कभी लगता है जैसे सियासत के रेगिस्तान में कोई पलाश उग आया हो। जो न तो पूरी तरह ग़ुलाब है, न ही काँटा -
बल्कि कुछ ऐसा, जो अपनी शर्तों पर खिलता है। आपके भीतर एक इंजीनियर है, जो पुल भी बनाता है और दिलों के बीच की दूरी भी मापता है।
आपके भीतर एक पिता है, जो अपनी बेटी के लिए भी उतना ही परेशान होता है,जितना किसी खेत के मज़दूर की छत उड़ जाने पर।
मैंने आपको मंचों पर बोलते देखा है - ना ज़्यादा ऊँचा, ना ज़्यादा धीमा,
जैसे कोई किसान अपने बेटे को समझा रहा हो कि बेटा, धूप से लड़ना है, छांव तो बाद में मिलेगी।
आपके आलोचक कहते हैं कि आप 'मुलायम' नहीं रहे, मैं कहता हूं - मुलायम की विरासत को गरिमा देने के लिए थोड़ी सख्ती भी ज़रूरी होती है।
आपने "लैपटॉप बाँटने" का मज़ाक नहीं बनाया, बाँटा। "एक्सप्रेसवे" का सपना नहीं दिखाया, बनाया। और जब दिल्ली की हवाओं में ज़हर घुला, तब भी आपकी हवा में हौसला था, और आपकी नज़र में उत्तर प्रदेश।
राजनीति में जो भाषा अब घृणा और गाली की हो चुकी है, आपने वहाँ भी एक शब्द छोड़ा - संवेदनशीलता।
मैं जानता हूं भैया, कई बार आपकी चुप्पी को लोगों ने कमजोरी समझा,
पर मैं जानता हूं, ये वही चुप्पी है जो पिता अपने बेटे की हार के बाद ओढ़ता है - जैसे भीतर बहुत कुछ टूटा हो, पर बाहर कुछ नहीं दिखाना।
इस चिट्ठी को कोई भाषण मत समझिएगा। ये बस एक नौजवान की उंगलियों से निकली वो गर्माहट है, जो अब भी किसी राजनेता को रोल मॉडल मानने का साहस रखता है।
मैं चाहता हूं आप लड़ते रहें - गौतम बुद्ध के करुणा से, राम मनोहर लोहिया की जिद से, और अपने पिता की सादगी से। उत्तर प्रदेश अब भी इंतज़ार कर रहा है उस मुस्कान का, जिसने कभी साइकिल की रफ़्तार से सपनों को उड़ान दी थी।
जन्मदिन मुबारक हो भैया।
आप ज़िंदाबाद रहें, लाल टोपी की तरह - साफ, सीधी और गर्व से ऊँची।
एक मामूली लड़का।
चाय इश्क़ और राजनीति।
कल्पत बा उत्तर प्रदेश , बचावा हे भैया अखिलेश ….
महंगाई से मचल बा तबाही ,यूपी में चलत ना तानाशाही
जियब,मरब भाई बरोबर भइल, जनता कहे कलेश
बचावा हे भैया अखिलेश
सारी जनता पुकारे , आ जाओ अखिलेश हमारे !
उत्तरप्रदेश के बलिया जनपद के सोनबरसा स्वास्थ्य केंद्र पर एक महिला को डिलीवरी के लिए लेकर गए, लेकिन वहाँ न बेड मिलता है न ही कोई डाक्टर। महिला उसी अस्पताल के फर्श पर बिना किसी व्यवस्था के बच्चे को जन्म देती है।
विश्व की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देश और 1 ट्रिलियन का दावा करने वाले प्रदेश में ये तस्वीर दिल को झझकोर देने वाली है। एक महिला से प्रसव की पीड़ा झेल रही है और उसे किसी प्रकार की सहायता नहीं मिल रही।।
प्रदेश की सरकार गूंगी, बहरी और अंधी भी हो चुकी है।