कुर्सी पर ठाकरे थे और हुकुम शरद पवार का चल रहा था सत्ता में शिवसैनिक थे लेकिन दिल कांग्रेस का मचल रहा था मुख्यमंत्री की कुर्सी पर उद्धव थे और मंत्रियों पर रौब आदित्य कर रहा था
उद्धव ने सत्ता की लालसा में खुद को पद का मोहरा बना लिया उन लोगों से हाथ मिला लिया जिनकी राजनीति की नीतिगत राह ही हिंदुत्व से परे थी दो विभिन्न विचारधाराओं का मिलना देव और दानव की दोस्ती की तरह लग रहा था परिदृश्य बदल चुका था
विरासत की हिफाजत कर नहीं पाते हैं और बाप -दादाओ को लजाते है,,, पता नहीं कितने सालों की मेहनत तपस्या और संघर्ष के बाद बालासाहेब ठाकरे ने शिवसेना को खड़ा किया
कभी किसी का कांधा बने कभी किसी को सहारा दिया कभी किसी के आंसू अपनी आंखों से रोए कभी मुस्कानों को संजोया