आदरणीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी को ग्रीस के प्रतिष्ठित सम्मान "Grand Cross of the Order of Honour" से सम्मानित किया जाना हम सभी देशवासियों के ��िए गौरव का अवसर है।यह सम्मान वैश्विक पटल पर देश के मान को बढ़ाता है।
इसके लिए प्रधानमंत्री जी का अभिनंदन।
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महानायक, "आजाद हिन्द फ़ौज" के संस्थापक व युवाओं में स्वाधीनता के लिए जोश भरने वाले "नेताजी" सुभाष चन्द्र बोस जी की पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि।
बड़े भाई व पार्टी के संसदीय बोर्ड बिहार प्रदेश के अध्यक्ष श्री @hulaspandeyljp जी के बड़े सुपुत्र का असामयिक निधन बेहद पीड़ादायक है।
मैं बिहार से अपने निजी कारणों से बाहर हू,इसलिए खबरों के माध्यम से जानकारी मिली।इस ��ृदयविदारक घटना को सुनकर नींद गायब हो गयी है।
एक हँसते खेलते व सुंदर परिवार को किसकी नज़र लग गयी,दुःख की इस घड़ी में हम सब हुलास जी के साथ खड़े है,भगवान मृत आत्मा को शांति दे।
ईश्वर इस दुख की घड़ी में शोक संतप्त परिजनों सहन शक्ति के साथ धैर्य प्रदान करें ।
आज पटना के श्री कृष्ण मेमोरियल हॉल में "पिछड़ा - अतिपिछड़ा" सम्मेलन में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए लोक जनशक्ति पार्टी (रा.) के राष्ट्रीय अध्यक्ष आदरणीय श्री @iChiragPaswan जी।
पूछता है बिहार, जवाब दें नीतीश कुमार !
देश के प्रधानमंत्र��� जी से सवाल करने से पहले मुख्यमंत्री जी आप बताएं की आप कब जा रहे है कटिहार , बेगुसराय और दरभंगा ?
@NitishKumar
इतिहास में छुपाया गया एक सच : वीर सावरकर जी।
45 साल के महात्मा गाँधी 1915 में भारत आते हैं, 2 दशक से भी ज्यादा दक्षिण अफ्रीका में बिता कर। इससे 4 साल पहले 28 वर्ष का एक युवक अंडमान में एक कालकोठरी में बन्द होता है। अंग्रेज उससे दिन भर कोल्हू में बैल की जगह हाँकते हुए तेल पेरवाते हैं, रस्सी बटवाते हैं और छिलके कूटवाते हैं। वो तमाम कैदियों को शिक्षित कर रहा होता है, उनमें राष्ट्रभक्ति की भावनाएँ प्रगाढ़ कर रहा होता है और साथ ही दीवालों कर कील, काँटों और नाखून से साहित्य की रचना कर रहा होता है। उसका नाम था- विनायक दामोदर सावरकर।
उन्हें कई बार आत्महत्या के ख्याल आते। उस खिड़की की ओर एकटक देखते रहते थे, जहाँ से अन्य कैदियों ने पहले आत्महत्या की थी। पीड़ा असह्य हो रही थी। यातन���ओं की सीमा पार हो रही थी। अंधेरा उन कोठरियों में ही नहीं, दिलोदिमाग पर भी छाया हुआ था। दिन भर बैल की जगह कोल्हू घुमाते रहो, रात को करवट बदलते रहो। 11 साल ऐसे ही बीते। कैदी उनकी इतनी इज्जत करते थे कि मना करने पर भी उनके बर्तन, कपड़े वगैरह धो देते थे, उनके काम में मदद करते थे। सावरकर से अँग्रेज बाकी कैदियों को दूर रखने की कोशिश करते थे। अंत में बुद्धि को विजय हुई तो उन्होंने अन्य कैदियों को भी आत्महत्या से विमुख किया।
लेकिन नहीं, महा गँवारों का कहना है कि सावरकर ने मर्सी पेटिशन लिखा, सॉरी कहा, माफ़ी माँगी।
अरे मूर्खों, काकोरी कांड में फँसे क्रांतिकारी रामप्रसाद बिस्मिल ने भी माफ़ी माँगी थी, तो? उन्हें भी 'डरपोक' करार दोगे? बताओ। उन्होंने भी माफ़ी माँगी थी अंग्रेजों से। क्या अब इस कसौटी पर क्रांतिकारि��ों को तौला जाएगा? शेर जब बड़ी छलाँग लगाता है तो कुछ कदम पीछे लेता ही है। उस समय उनके मन में क्या था, आगे की क्या रणनीति थी- ये आज कुछ लोग अपने घरों में बैठे-बैठे जान जाते हैं।
कौन ऐसा स्वतंत्रता सेनानी है जिसे 11 साल कालापानी की सज़ा मिली हो। नेहरू? गाँधी? .....कौन?
नानासाहब पेशवा, महारानी लक्ष्मीबाई और वीर कुँवर सिंह जैसे कितने ही वीर इतिहास में दबे हुए थे। 1857 को सिपाही विद्रोह बताया गया था। तब इसके पर्दाफाश के लिए 20-22 साल का एक युवक लंदन की एक लाइब्रेरी का किसी तरह एक्सेस लेकर और दिन-रात लग कर अँग्रेजों के एक के बाद एक दस्तावेज पढ़ कर सच्चाई की तह तक जा रहा था, जो भारतवासियों से छिपाया गया था। उसने साबित कर दिया कि वो सैनिक विद्रोह नहीं, प्रथम स्वतंत्रता संग्राम था। उसके सभी अमर बलिदानियों की गाथा उसने जन-जन ���क पहुँचाई। भगत सिंह सरीखे क्रांतिकारियों ने मिल कर उसे पढ़ा, अनुवाद किया।
दुनिया में कौन सी ऐसी किताब है जिसे प्रकाशन से पहले ही प्रतिबंधित कर दिया गया था? अँग्रेज कितने डरे हुए थे उससे कि हर वो इंतजाम किया गया, जिससे वो पुस्तक भारत न पहुँचे। जब किसी तरह पहुँची तो क्रांति की ज्वाला में घी की आहुति पड़ गई। कलम और दिमाग, दोनों से अँग्रेजों से लड़ने वाले सावरकर थे। दलितों के उत्थान के लिए काम करने वाले सावरकर थे। 11 साल कालकोठरी में बंद रहने वाले सावरकर थे। हिंदुत्व को पुनर्जीवित कर के राष्ट्रवाद की अलख जगाने वाले सावरकर थे। साहित्य की विधा में पारंगत योद्धा सावरकर थे।
आज़ादी के बाद क्या मिला उन्हें? अपमान नेहरू व मौलाना अबुल कलाम जैसों ने तो मलाई चाटी सत्ता की, सावरकर को गाँधी हत्या केस में फँसा दिया। गिरफ़्तार किया। पेंशन तक नहीं दिया। प्रताड़ित किया। 60 के दशक में उन्हें फिर गिरफ्तार किया, प्रतिबंध लगा दिया। उन्हें सार्वजनिक सभाओं में जाने से मना कर दिया गया। ये सब उसी भारत में हुआ, जिसकी स्वतंत्रता के लिए उन्होंने अपना जीवन खपा दिया। आज़ादी के मतवाले से उसकी आज़ादी उसी देश में छीन ली गई, जिसे उसने आज़ाद करवाने में योगदान दिया था। शास्त्री जी PM बने तो उन्होंने पेंशन का जुगाड़ किया।
वो कालापानी में कैदियों को समझाते थे कि धीर��� रखो, एक दिन आएगा जब ये जगह तीर्थस्थल बन जाएगी। आज भले ही हमारा पूरे विश्व में मजाक बन रहा हो, एक समय ऐसा होगा जब लोग कहेंगे कि देखो, इन्हीं कालकोठरियों में हिंदुस्तानी कैदी बन्द थे। सावरकर कहते थे कि तब उन्हीं कैदियों की यहाँ प्रतिमाएँ होंगी। आज आप अंडमान जाते हैं तो सीधा 'वीर सावरकर इंटरनेशनल एयरपोर्ट' पर उतरते हैं। सेल्युलर जेल में उनकी प्रतिमा लगी है। उस कमरे में प्रधानमंत्री भी जाकर ध्यान धरते हैं, जिसमें वीर सावरकर को रखा गया था।
नमन वीर साव��कर जी 🙏
मणिपुर की घटना के आरोपियों को खुलेआम सजा देने की जरूरत है,इस प्रकार की दरिंदगी समाज मे शर्मसार करता है।
मानवता के नाम पर मणिपुर की भीड़ ने जो नंगा नाच किया है उनको खुलेआम गोली मार देनी च��हिए।
@myogiadityanath मांगे सभी राज्य
लोक जनशक्ति पार्टी रामविलास के हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष आदरणीय चिराग़ पासवान जी का NDA गठबंधन में शामिल होने के निर्णय का हम सभी स्वागत करते है..@LJP4India@iChiragPaswan
सत्ताधारी दल के विधायक के पति अंनत सिंह जी को जेल में हत्या करने की साजिश
कौन करवा सकता है ।
बिहार के कुछ भी हो सकता है आज
जनता दल यूनाइटेड के राष्ट्रीय अध्यक्ष के तरफ शक की सुई
आज बिहार प्रदेश कार्यालय श्री कृष्णापुरी में राष्ट्रीय अध्यक्ष आदरणीय श्री @iChiragPaswan जी ने पार्टी के राष्ट्रीय पदाधिकारी एवं बिहार प्रदेश के पदाधिकारियों के साथ बैठक कर गठबंधन के स्वरूप को लेकर विस्तृत चर्चा की ।
अपनो के साथ @iChiragPaswan
बिहार की अवाम अब चिराग के साथ है,अब परिवारवाद का आरोप लगाने साथियो से अपील है कि आप सब आये स्वागत है ।
न परिवारवाद,न भ्रष्टाचार का आरोप,पूरी तरह बेदाग़ है चिराग